Saudi Arabia

Donald Trump discusses Iran tensions as Gulf leaders push for diplomatic talks over military action.
खाड़ी देशों की अपील पर ट्रंप ने टाला ईरान पर संभावित हमला, बातचीत से समाधान की उम्मीद

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं की अपील और ईरान के साथ जारी गंभीर बातचीत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। ट्रंप के मुताबिक, Tamim bin Hamad Al Thani, Mohammed bin Salman और Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने उनसे सीधे संपर्क कर सैन्य कार्रवाई को कुछ दिनों के लिए टालने का अनुरोध किया था। “समझौते की संभावना बढ़ी” ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर जारी बयान में कहा कि खाड़ी देशों की ईरान के साथ “गंभीर बातचीत” चल रही है और कूटनीतिक समाधान की संभावना पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इन देशों का मानना है कि यदि अमेरिका कुछ समय इंतजार करे तो बातचीत के जरिए ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। “उम्मीद है हमला हमेशा के लिए टल जाए” ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सैन्य कार्रवाई को “कुछ समय के लिए” रोका है और उम्मीद जताई कि शायद इसकी जरूरत कभी न पड़े। उन्होंने कहा, “अगर बिना बमबारी के मामला सुलझ जाए तो मुझे बहुत खुशी होगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार रहेगा। अमेरिकी सेना को अलर्ट रहने के निर्देश ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth, ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन Daniel Caine और अमेरिकी सेना को किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता पिछले कुछ महीनों में कतर, सऊदी अरब और यूएई पर ईरान समर्थित हमलों का दबाव बढ़ा है। ईरान ने 28 फरवरी के बाद हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सहयोगी देशों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। ऐसे में खाड़ी देशों का एकजुट होकर अमेरिका से सैन्य कार्रवाई टालने का अनुरोध करना क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान फिर मध्यस्थ की भूमिका में रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बताया गया है कि ईरान का संशोधित शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया। हालांकि अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नए प्रस्ताव में पहले की तुलना में केवल सीमित बदलाव किए गए हैं। परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका का दावा है कि ईरान के पास बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम मौजूद है और वह परमाणु हथियार क्षमता की दिशा में बढ़ सकता है। वहीं ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। तेहरान प्रतिबंधों में राहत, जब्त संपत्तियों की वापसी और भविष्य में सैन्य कार्रवाई न होने की गारंटी की मांग कर रहा है। CENTCOM ने जारी रखी नाकेबंदी इस बीच United States Central Command (CENTCOM) ने कहा है कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों पर लागू प्रतिबंधों को सख्ती से लागू कर रही है। CENTCOM के अनुसार, अब तक 85 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का पालन सुनिश्चित किया जा सके। कूटनीति और सैन्य दबाव दोनों जारी अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब भी बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन साथ ही सैन्य विकल्पों को भी खुला रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम एशिया की स्थिति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।  

surbhi मई 19, 2026 0
Donald Trump criticizing NATO during a public speech after Strait of Hormuz crisis
ट्रंप का NATO पर बड़ा हमला: ‘जब जरूरत थी तब गायब थे, अब मदद नहीं चाहिए’

  हॉर्मुज संकट के बाद ट्रंप का तीखा बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर था, तब NATO ने कोई प्रभावी मदद नहीं की, लेकिन स्थिति सामान्य होने के बाद सहायता की पेशकश की गई। “अब आपकी मदद की जरूरत नहीं” – ट्रंप एरिजोना में आयोजित Turning Point USA कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि NATO ने अमेरिका से तब संपर्क किया जब हालात लगभग स्थिर हो चुके थे। उन्होंने कहा कि अगर मदद चाहिए थी, तो “दो महीने पहले चाहिए थी, अब नहीं।” ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “वे उस समय पूरी तरह बेकार साबित हुए जब हमें उनकी जरूरत थी। लेकिन सच यह है कि हमें उनकी जरूरत कभी नहीं थी, उन्हें हमारी जरूरत थी।” हॉर्मुज संकट और वैश्विक तनाव यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक सुर्खियों में रहा। यह वही समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है। हालांकि अब स्थिति कुछ हद तक स्थिर बताई जा रही है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नाटो को बताया ‘पेपर टाइगर’ ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में NATO को “पेपर टाइगर” तक कह दिया। उन्होंने लिखा कि संकट के दौरान संगठन कमजोर और निष्क्रिय रहा, लेकिन अब जब स्थिति सुधर रही है, तो मदद की बात कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर NATO को सहयोग करना ही है, तो वे “तेल ले जाने के लिए जहाज भर सकते हैं।” क्षेत्रीय देशों की तारीफ अपने बयान में ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों की तारीफ भी की। उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों ने संकट के दौरान स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। ईरान और हॉर्मुज को लेकर स्थिति ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि युद्धविराम अवधि में सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा। हालांकि अमेरिका ने इस क्षेत्र में कड़ा रुख बनाए रखा है और नौसैनिक दबाव जारी है। ट्रंप का यह बयान एक बार फिर अमेरिका और NATO के बीच मतभेद को उजागर करता है। साथ ही यह भी दिखाता है कि हॉर्मुज संकट ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर गहरा असर डाला है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Saudi Arabia and Pakistan officials shaking hands after announcing $3 billion financial support to boost reserves.
सऊदी अरब से पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की मदद, सही समय पर मिला बड़ा सहारा

  इस्लामाबाद: पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर के डिपॉजिट देने का ऐलान किया है। यह रकम अगले सप्ताह तक मिलने की उम्मीद है और इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। वित्त मंत्री ने की पुष्टि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगज़ेब ने वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मदद की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि: सऊदी अरब 3 अरब डॉलर का नया डिपॉजिट देगा पहले से मौजूद 5 अरब डॉलर की राशि को भी 2028 तक बढ़ाया जाएगा इससे देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी UAE के पैसे लौटाने के बाद आई राहत हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात ने अपने डिपॉजिट वापस ले लिए थे। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सरकार ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया लेकिन बाजार में चिंता बढ़ गई थी ऐसे में सऊदी अरब की मदद को “टाइमली सपोर्ट” माना जा रहा है। कूटनीतिक हलचल के बीच फैसला यह आर्थिक सहायता ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में: शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व से मुलाकात की शांति वार्ता से पहले दोनों देशों में बातचीत हुई इसके तुरंत बाद आर्थिक सहायता का ऐलान हुआ सैन्य सहयोग भी बढ़ा सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत होता दिख रहा है। पाकिस्तान का सैन्य दस्ता सऊदी अरब पहुंचा शाह अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर तैनाती वायुसेना के लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल पाकिस्तान के लिए क्यों अहम? पाकिस्तान इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार सीमित आयात पर दबाव कर्ज का बोझ ऐसे में 3 अरब डॉलर की यह मदद: रुपये को स्थिर करने में मदद करेगी बाजार में भरोसा बढ़ाएगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रेडिबिलिटी मजबूत करेगी आगे क्या? यह कदम सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। फिलहाल, सऊदी अरब की यह मदद पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है, लेकिन लंबे समय तक स्थिरता के लिए उसे आर्थिक सुधारों पर भी जोर देना होगा।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir meeting Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi in Tehran for peace talks
US-Iran तनाव: क्या पाकिस्तान कराएगा सुलह? तेहरान पहुंचे आर्मी चीफ मुनीर, 21 अप्रैल को खत्म होगा सीजफायर

  तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे हैं। तेहरान में हाई-लेवल बातचीत तेहरान में आसिम मुनीर का स्वागत ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया। यह मुलाकात अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले दूसरे दौर की वार्ता को सफल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। अराघची ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से पश्चिम एशिया में शांति कायम करने की उम्मीद बढ़ी है। शांति के लिए पाकिस्तान की कूटनीति पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर पेश कर रहा है। इससे पहले इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शुरुआती बातचीत भी कराई गई थी। अब इस पूरी प्रक्रिया का लक्ष्य है— अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध खत्म करना एक स्थायी समझौते की दिशा में बढ़ना क्षेत्र में युद्ध की संभावना को टालना 21 अप्रैल को खत्म होगा सीजफायर इस बीच डोनाल्ड ट्रंप का रुख सख्त नजर आ रहा है। उन्होंने संकेत दिया है कि वह मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, जो 21 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में बातचीत से कोई बड़ा और सकारात्मक नतीजा निकल सकता है। सऊदी अरब भी बना अहम कड़ी दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के जेद्दा में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इस दौरान: शांति प्रयासों पर चर्चा हुई पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी कोशिशों से ही सीजफायर संभव हुआ स्थायी समझौते की दिशा में सहयोग की बात हुई आगे क्या? पश्चिम एशिया की नजर अब अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है। अगर बातचीत सफल रही, तो क्षेत्र में स्थायी शांति की राह खुल सकती है। लेकिन अगर वार्ता विफल होती है और सीजफायर खत्म होता है, तो तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। फिलहाल, पाकिस्तान की मध्यस्थता इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम कड़ी बनकर उभर रही है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Pakistan and Saudi Arabia flags symbolizing financial ties after UAE loan repayment decision.
पाकिस्तान का यूएई कर्ज़ लौटाने का फैसला: सऊदी अरब से क्या है कनेक्शन?

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: पाकिस्तान ने United Arab Emirates (यूएई) को करीब 3.5 अरब डॉलर के डिपॉज़िट्स और कर्ज़ लौटाने का फैसला किया है। इस कदम के बाद पाकिस्तान अब वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए Saudi Arabia सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। क्या बोले वित्त मंत्री? पाकिस्तान के वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb ने कहा कि: विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए सभी विकल्प खुले हैं इसमें सऊदी अरब से कर्ज़, यूरो बॉन्ड और अन्य वित्तीय स्रोत शामिल हैं यूएई को कर्ज़ क्यों लौटाया? यूएई ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर डिपॉज़िट और करीब 1.5 अरब डॉलर कर्ज़ दिया था यह डिपॉज़िट 2018 से बार-बार “रोल ओवर” होता रहा हाल ही में इसे शॉर्ट-टर्म रोलओवर में बदला गया अब इसकी अवधि पूरी होने पर पाकिस्तान इसे लौटा रहा है विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम: उच्च ब्याज दरों से बचने के लिए उठाया गया पूरी तरह “सामान्य वित्तीय लेन-देन” का हिस्सा है सऊदी अरब से क्या कनेक्शन? यूएई को रकम लौटाने के बाद पाकिस्तान: Saudi Arabia से नए कर्ज़ की संभावना देख रहा है पहले ही सऊदी वित्त मंत्री और पाक प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की मुलाकात हो चुकी है साथ ही, सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं, जो रणनीतिक रिश्तों को दर्शाती हैं मिडिल ईस्ट तनाव का असर ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच पाकिस्तान ने: रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने की जरूरत बताई अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर बढ़ने का संकेत दिया विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति कुल भंडार: करीब 21 अरब डॉलर स्टेट बैंक के पास: ~16 अरब डॉलर इसमें से 12 अरब डॉलर चीन, सऊदी और यूएई के डिपॉज़िट्स यूएई को रकम लौटाने से दबाव बढ़ेगा, लेकिन: International Monetary Fund (IMF) से 1.2 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद अन्य कर्ज़ और बॉन्ड्स से राहत मिल सकती है आगे की रणनीति पाकिस्तान सरकार: इस साल Euro Bonds और Sukuk Bonds जारी करने की योजना में है वाणिज्यिक बैंकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से फंड जुटाने पर विचार कर रही है यूएई को कर्ज़ लौटाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा वित्तीय कदम है, लेकिन इसके साथ ही सऊदी अरब और अन्य स्रोतों से फंड जुटाने की रणनीति भी तैयार है। मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Pakistan receives financial aid from Saudi Arabia and Qatar amid UAE debt repayment pressure and IMF crisis
पाकिस्तान को सऊदी-कतर से ₹46,500 करोड़ की मदद, UAE का कर्ज चुकाने की तैयारी

पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। सऊदी अरब और कतर मिलकर उसे 5 अरब डॉलर (करीब ₹46,500 करोड़) की वित्तीय मदद देंगे। यह सहायता ऐसे समय पर मिल रही है, जब पाकिस्तान पर UAE का 3.5 अरब डॉलर (करीब ₹29,000 करोड़) का कर्ज चुकाने का दबाव है। सिर्फ 11 दिन में चुकाना है कर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को 23 अप्रैल तक UAE का पूरा कर्ज चुकाना है। तय शेड्यूल के अनुसार 11, 17 और 23 अप्रैल को किस्तों में भुगतान किया जाएगा। यानी देश के पास कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम समय बचा है। विदेशी मुद्रा संकट में राहत पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति को देखते हुए यह मदद बेहद अहम मानी जा रही है। देश को अप्रैल में कुल करीब 4.8 अरब डॉलर का भुगतान करना है, जिसमें एक बड़ा इंटरनेशनल बॉन्ड भी शामिल है। IMF की शर्तें भी अहम International Monetary Fund (IMF) ने पाकिस्तान के लिए 7 अरब डॉलर का 3 साल का राहत पैकेज शुरू किया है। इसके तहत शर्त रखी गई है कि बड़े कर्जदाता–जैसे चीन, सऊदी अरब और UAE–अपना पैसा कम से कम 3 साल तक पाकिस्तान में ही बनाए रखें। UAE की नई नीति से बढ़ा दबाव हाल ही में UAE ने कर्ज रोलओवर पॉलिसी में बदलाव कर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन लागू किया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ गया। इसके बाद पाकिस्तान ने तय समय में कर्ज चुकाने का फैसला लिया। सऊदी-पाक रिश्ते और मजबूत सऊदी अरब पहले भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है और 5 अरब डॉलर तक के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। IMF मीटिंग के लिए वॉशिंगटन दौरा पाकिस्तान के वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb 13–18 अप्रैल तक Washington, D.C. में होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान वे कई देशों और निवेशकों के साथ अहम बैठकों में शामिल होंगे।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Foreign ministers meeting in Islamabad amid Iran US tensions, diplomatic talks ending without agreement
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिश फेल, समय से पहले खत्म हुई अहम बैठक

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच खुद को “पीस ब्रोकर” के तौर पर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। इस्लामाबाद में आयोजित विदेश मंत्रियों की अहम बैठक तय समय से पहले ही समाप्त हो गई, जिससे इस पहल की गंभीरता और तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक दिन में खत्म हुआ दो दिन का समिट यह बैठक 29–30 मार्च तक दो दिन चलने वाली थी, लेकिन यह सिर्फ एक दिन में ही खत्म हो गई। इस सम्मेलन में तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया था। बैठक का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक मध्यस्थता ढांचा तैयार करना था, लेकिन इसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। क्यों नहीं बनी सहमति? कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, बैठक के विफल होने के पीछे कई कारण रहे: ईरान की कड़ी शर्तें, जिसमें सुरक्षा की गारंटी की मांग अमेरिका पर भरोसे को लेकर स्पष्ट आश्वासन का अभाव शामिल देशों के बीच आपसी मतभेद जहां पाकिस्तान और तुर्की बातचीत को आगे बढ़ाने के पक्ष में थे, वहीं सऊदी अरब और मिस्र ने अधिक सतर्क रुख अपनाया। सऊदी और मिस्र ने क्यों छोड़ी बैठक? रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्री पहले ही दिन बैठक छोड़कर लौट गए। इन देशों का मानना था कि: किसी भी मध्यस्थता से पहले सीधे अमेरिका से बातचीत जरूरी है बिना स्पष्ट रणनीति के आगे बढ़ना जोखिम भरा हो सकता है इससे बैठक में एकजुटता की कमी साफ नजर आई। क्या आगे बनेगा रास्ता? हालांकि बैठक से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, लेकिन सभी देशों ने कूटनीतिक बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। पाकिस्तान और तुर्की, ईरान को शर्तों में नरमी लाने के लिए मनाने की कोशिश करेंगे अगर अमेरिका और ईरान सकारात्मक संकेत देते हैं, तो जल्द नई बैठक हो सकती है फिलहाल, यह साफ है कि क्षेत्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर एकमत बनाना आसान नहीं है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Iran missile attack Saudi Arabia
सऊदी अरब में ईरान का मिसाइल हमला, प्रिंस सुल्तान एयर बेस निशाने पर; 5 अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त

रियाद, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Iran ने Saudi Arabia में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने Prince Sultan Air Base पर मिसाइल हमला किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में United States Air Force के पांच एयर-टैंकर (रिफ्यूलिंग) विमान क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि किसी के घायल होने या मौत की सूचना नहीं मिली है।   15वें दिन में पहुंचा संघर्ष पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब और उग्र होता जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह टकराव करीब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी दौरान ईरान ने सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए जोरदार हमला किया।   पांच अमेरिकी विमान हुए क्षतिग्रस्त सूत्रों के मुताबिक, हमले के समय एयरबेस पर खड़े अमेरिकी वायुसेना के पांच रिफ्यूलिंग विमान क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि विमान पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं और उन्हें मरम्मत के लिए भेजा गया है।   पहले भी हुए कई सैन्य हादसे इससे पहले पश्चिमी इराक में अमेरिकी वायुसेना का एक केसी-135 सैन्य रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें छह क्रू मेंबर की मौत हो गई थी। वहीं कुवैत में फ्रेंडली फायर की घटना में तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान भी गिर गए थे, हालांकि उस घटना में एयरक्रू सुरक्षित रहे थे।   अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़ा तनाव गौरतलब है कि यह संकट तब शुरू हुआ जब United States और Israel ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े हमले किए थे। इसके बाद से ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरा पश्चिम एशिया युद्ध जैसे माहौल में पहुंच गया है और इसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ रहा है।

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0