रांची। झारखंड में 30 जून से शुरू होने जा रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर शिक्षक संगठनों और सरकार के बीच विवाद गहरा गया है। अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति किए जाने पर झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ का कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सरकारी विद्यालयों में इस फैसले से छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। शिक्षक संघ ने सरकार से की पुनर्विचार की मांग संघ के प्रदेश महासचिव गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि शिक्षकों का मूल दायित्व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन उन्हें लगातार चुनाव, जनगणना और मतदाता पुनरीक्षण जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। इससे विशेष रूप से 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि SIR अभियान में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। जिला सचिव संजय यादव ने भी कहा कि जनगणना के बाद अब मतदाता पुनरीक्षण की जिम्मेदारी मिलने से विद्यालयों में नियमित कक्षाएं प्रभावित होंगी और इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा। अधिकारियों ने बताया जरूरी अभियान चुनाव से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य के करीब 24,520 मतदान केंद्रों पर अभियान सफल बनाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार, लगभग 50 हजार बीएलओ में 7,500 शिक्षक पहले से कार्यरत हैं और आवश्यकता पड़ने पर 25 हजार से अधिक शिक्षकों की सेवाएं ली जा सकती हैं। अधिकारियों का दावा है कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक चलने वाले इस अभियान के बीच शिक्षा और चुनावी जिम्मेदारियों के संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार शिक्षक संगठनों की मांगों पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करती है या अपने मौजूदा फैसले पर कायम रहती है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार स्कूलों में प्रतिदिन योग सत्र शुरू करने पर विचार कर रही है। कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा है कि छात्र-छात्राओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए रोजाना योग को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। रोजाना आधे घंटे के योग सत्र का प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले बिधाननगर नगर निगम के सहयोग से आयोजित एक योग कार्यक्रम में अग्निमित्रा पॉल और स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में छह स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। इस दौरान अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सरकार स्कूलों में प्रतिदिन 30 मिनट का योग सत्र शुरू करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है और इसके लिए मुख्यमंत्री से औपचारिक अनुमति मांगी जाएगी। उन्होंने कहा, “योग केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। हमारी योजना है कि बच्चे जब स्कूल आएं, तो दिन का पहला आधा घंटा योग के लिए निर्धारित किया जाए। बच्चे राज्य और देश का भविष्य हैं, इसलिए उनका स्वस्थ और मानसिक रूप से मजबूत होना हमारी प्राथमिकता है।” एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है योग मंत्री ने कहा कि योग विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ाने, तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनका मानना है कि नियमित योग अभ्यास से बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित होती है। 20 जून को कोलकाता आएंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अग्निमित्रा पॉल ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ समारोह में भाग लेने के लिए कोलकाता पहुंचेंगे। इसके अगले दिन, 21 जून को प्रधानमंत्री शहर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। योग दिवस से पहले राज्यव्यापी स्वच्छता अभियान स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी और अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि योग दिवस से पहले पूरे पश्चिम बंगाल में ‘महा-स्वच्छता अभियान’ चलाया जाएगा। इस अभियान में स्कूलों के विद्यार्थी, सामाजिक संगठन, बुजुर्ग और आम नागरिक भाग लेंगे। सरकार का उद्देश्य योग और स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। योग को स्थायी व्यवस्था बनाने की तैयारी राज्य सरकार का मानना है कि यदि स्कूलों में योग को नियमित गतिविधि के रूप में लागू किया जाता है, तो इससे विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी मानसिक क्षमता और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों को मिला दूसरा मौका केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2026 के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और मार्क्स वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने 2 जून को ऑनलाइन पोर्टल सक्रिय कर दिया, जिसके जरिए छात्र अपने प्राप्त अंकों की दोबारा जांच और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। CBSE ने इस संबंध में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए छात्रों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करने की सलाह दी है। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए कर सकेंगे आवेदन अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड ने इसके लिए एक विशेष पोर्टल उपलब्ध कराया है, जहां उम्मीदवार आवश्यक विवरण भरकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। री-इवैल्यूएशन की सुविधा उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्हें लगता है कि उनके अंकों में किसी प्रकार की त्रुटि हो सकती है या उनकी उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं हुआ है। आवेदन प्रक्रिया समझाने के लिए जारी किया वीडियो छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए CBSE ने एक विस्तृत वीडियो गाइड भी जारी किया है। इस वीडियो में आवेदन की पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से समझाई गई है। बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले वीडियो को ध्यानपूर्वक देखें ताकि फॉर्म भरते समय किसी प्रकार की गलती न हो। क्या है मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन? मार्क्स वेरिफिकेशन के दौरान बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि उत्तर पुस्तिका में दिए गए सभी अंकों का सही तरीके से जोड़ किया गया है या नहीं और कोई उत्तर जांच से छूटा तो नहीं है। वहीं री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में संबंधित प्रश्नों के उत्तरों का दोबारा मूल्यांकन किया जाता है। इससे छात्रों को अपने परिणाम की निष्पक्ष समीक्षा का अवसर मिलता है। आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान CBSE ने छात्रों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले पात्रता नियम, निर्धारित शुल्क और अंतिम तिथि की जानकारी अवश्य जांच लें। सभी निर्देश बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। छात्रों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आवेदन प्रक्रिया समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाए, क्योंकि निर्धारित तिथि के बाद किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। छात्रों के लिए राहत भरा कदम शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की यह सुविधा उन छात्रों के लिए राहत लेकर आती है जो अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं। इससे उन्हें अपने अंकों की पारदर्शी समीक्षा कराने का अवसर मिलता है और मूल्यांकन प्रक्रिया पर विश्वास भी मजबूत होता है।
CBSE ने क्लास 9वीं के मैथ्स सिलेबस में बड़ा बदलाव किया है। 2026-27 सत्र से अब 12 की जगह 15 चैप्टर पढ़ाए जाएंगे, और 2027 की परीक्षा इसी नए पैटर्न पर होगी। क्या बदला है सिलेबस में? नए सिलेबस में कई अहम टॉपिक्स जोड़े गए हैं: नंबर सिस्टम सिक्वेंसेस और प्रोग्रेशन अरिथमेटिक आइडेंटिटीज यूक्लिड ज्योमेट्री एक्सिओम और पोस्टुलेट ट्राएंगल कांग्रुएंस थ्योरम क्वाड्रिलेटरल और मेंसुरेशन कुल मिलाकर अब स्टूडेंट्स को ज्यादा गहराई और विविधता के साथ मैथ्स पढ़ना होगा। बदलाव का मकसद क्या है? यह बदलाव NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) के तहत किया गया है, जिसमें फोकस है: रटने की बजाय समझने पर जोर लॉजिकल और क्रिटिकल थिंकिंग बढ़ाना प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को मजबूत करना मैथ्स को रियल लाइफ से जोड़ना भारतीय गणितज्ञ भी सिलेबस में अब स्टूडेंट्स पढ़ेंगे: आर्यभट्ट ब्रह्मगुप्त बौधायन इससे छात्रों को गणित में भारत के योगदान और इतिहास की जानकारी मिलेगी। एग्जाम और मार्किंग में बदलाव 80 मार्क्स: लिखित परीक्षा 20 मार्क्स: इंटरनल असेसमेंट 10 मार्क्स: पेन-पेपर टेस्ट 10 मार्क्स: प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो, लैब एक्टिविटी फायदा या दबाव? फायदे: कॉन्सेप्ट क्लियर होंगे रियल लाइफ एप्लिकेशन समझ आएगा प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद चुनौतियां: सिलेबस बढ़ने से स्टडी लोड बढ़ सकता है कमजोर बेस वाले छात्रों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 11वीं और 12वीं कक्षा का नया करिकुलम जारी कर दिया है। इस नए सिलेबस के साथ स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों के लिए नए अकादमिक सत्र की तैयारी का रास्ता साफ हो गया है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए पूरा करिकुलम डाउनलोड कर सकते हैं और अपने विषयों की योजना पहले से तैयार कर सकते हैं। NEP 2020 और NCF 2023 का असर नया करिकुलम National Education Policy 2020 और National Curriculum Framework 2023 के तहत तैयार किया गया है। इसका मकसद छात्रों के सीखने के तरीके को ज्यादा व्यावहारिक, स्किल-आधारित और इंटरएक्टिव बनाना है। कब जारी होगा बाकी क्लास का सिलेबस? 11वीं-12वीं का करिकुलम: 1 अप्रैल 2026 को जारी 9वीं-10वीं का करिकुलम: 2 अप्रैल 2026 को दोपहर 3 बजे जारी इस तरह CBSE सभी कक्षाओं का नया सिलेबस एक साथ लागू कर रहा है। कैसे करें CBSE नया करिकुलम डाउनलोड? छात्र और शिक्षक इन आसान स्टेप्स से सिलेबस डाउनलोड कर सकते हैं: CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं ‘Curriculum’ सेक्शन में जाएं “Curriculum for Academic Year 2026-27” पर क्लिक करें “Secondary Curriculum: Part-II (XI-XII)” चुनें अपनी जरूरत के अनुसार: Languages (Group-L) Academic Electives (Group-A) Internal Assessment Subjects PDF डाउनलोड करें और प्रिंट निकाल लें नए करिकुलम में क्या खास? सभी विषयों की स्टडी स्कीम और सिलेबस अपडेट इंटरनल असेसमेंट पर ज्यादा फोकस स्किल-बेस्ड और कॉन्सेप्ट क्लियर करने वाली पढ़ाई स्टूडेंट्स के लर्निंग एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने पर जोर यह करिकुलम स्कूलों और शिक्षकों को भी बेहतर अकादमिक प्लानिंग में मदद करेगा। CBSE वेबिनार: आज 3 बजे CBSE आज (2 अप्रैल 2026) दोपहर 3 बजे एक अहम वेबिनार आयोजित कर रहा है, जिसमें नए करिकुलम, स्टडी स्कीम और अन्य बदलावों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। छात्र और शिक्षक इसे यूट्यूब पर लाइव देख सकते हैं। क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण? यह नया करिकुलम छात्रों को सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे शिक्षा प्रणाली ज्यादा आधुनिक और उपयोगी बनेगी।
12वीं कक्षा की गणित परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर उठे विवाद के बीच Central Board of Secondary Education (CBSE) ने स्पष्ट किया है कि 9 मार्च 2026 को आयोजित गणित का प्रश्नपत्र पूरी तरह असली है और परीक्षा की सुरक्षा में किसी भी तरह की सेंध नहीं लगी है। बोर्ड ने कहा कि प्रश्नपत्रों में सुरक्षा के लिए कई आधुनिक फीचर शामिल किए जाते हैं, जिनमें QR कोड भी शामिल हैं, जिनकी मदद से किसी भी संदिग्ध स्थिति में प्रश्नपत्र की सत्यता की जांच की जा सकती है। QR कोड स्कैन करने पर YouTube वीडियो खुलने से उठा विवाद दरअसल कुछ छात्रों और अभिभावकों ने शिकायत की थी कि गणित के प्रश्नपत्र में छपे एक QR कोड को स्कैन करने पर वह YouTube पर मौजूद एक वीडियो की ओर रीडायरेक्ट हो रहा था। इस घटना के बाद कई लोगों ने प्रश्नपत्र की असलियत और परीक्षा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे। CBSE ने कहा – प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित CBSE ने अपने बयान में कहा कि परीक्षा में इस्तेमाल किए गए सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह असली हैं और उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं है। बोर्ड के अनुसार, प्रश्नपत्रों में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होती है, जिसमें QR कोड भी शामिल है। इन कोड्स का उपयोग जरूरत पड़ने पर पेपर की सत्यता और स्रोत की जांच के लिए किया जाता है। भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए कदम CBSE ने यह भी बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।