नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में हराकर खिताब अपने नाम किया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद जश्न की जगह मैदान पर तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। अंतिम सीटी बजते ही दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ी आपस में भिड़ गए और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। अब इस पूरे घटनाक्रम पर FIFA ने आधिकारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है। यदि अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो खिलाड़ियों और संबंधित टीम अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। मैच खत्म होते ही बढ़ा विवाद फाइनल समाप्त होने के बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस और स्पेन के खिलाड़ी एरिक गार्सिया तथा रॉडरी के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और दोनों टीमों के कई खिलाड़ी एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। स्थिति को बिगड़ता देख अर्जेंटीना के कोच और टीम स्टाफ ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद खिलाड़ियों को अलग किया गया और मामला शांत कराया गया। FIFA ने शुरू की अनुशासनात्मक जांच घटना के बाद FIFA ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि फाइनल मुकाबले की मैच रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है। संगठन ने FIFA Disciplinary Code (FDC) के अनुच्छेद 36 के तहत पूरे मामले की जांच के लिए एक डिसिप्लिनरी और एथिक्स प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है। FIFA के बयान के अनुसार: "स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेले गए विश्व कप फाइनल से जुड़ी मैच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद मैच के बाद हुई घटनाओं में संभावित अनुशासनात्मक उल्लंघन की जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डिसिप्लिनरी कमिटी आगे की कार्रवाई और निर्णय की जानकारी देगी।" यदि जांच में खिलाड़ियों या अधिकारियों की गलती साबित होती है, तो जुर्माना, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। एक्स्ट्रा टाइम में स्पेन ने जीता विश्व कप मैच की बात करें तो दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट में फैसला नहीं हो सका, जिसके बाद मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंचा। स्पेन के लिए फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में निर्णायक गोल दागा। उन्होंने निको विलियम्स के हेडर से मिले शानदार पास को नियंत्रित करते हुए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया, जिसे अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज नहीं रोक सके। इस गोल की बदौलत स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। हार के बाद भावुक हुए लियोनेल मेसी फाइनल में हार के बाद अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि यह हार बेहद दर्दनाक है और इस जख्म को भरने में समय लगेगा। मेसी ने अपने संदेश में कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार संघर्ष किया और देशवासियों के समर्थन की बदौलत एक बार फिर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में जगह बनाई। उन्होंने लिखा कि इस हार का दर्द जरूर रहेगा, लेकिन टीम द्वारा बनाई गई यादें और पूरे टूर्नामेंट में दिखाई गई मेहनत हमेशा उनके साथ रहेगी।
स्पेन ने फीफा विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। न्यू जर्सी में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में किए गए एकमात्र गोल की बदौलत अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर विश्व फुटबॉल का सबसे प्रतिष्ठित खिताब जीत लिया। इस जीत के साथ स्पेन ने 16 साल बाद दोबारा विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया। 90 मिनट तक नहीं हुआ कोई गोल फाइनल मुकाबला शुरुआत से ही बेहद कड़ा और संतुलित रहा। निर्धारित 90 मिनट और इंजरी टाइम तक दोनों टीमें गोल करने में नाकाम रहीं। स्पेन ने अपने पारंपरिक पजेशन आधारित खेल से गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा, जबकि अर्जेंटीना ने तेज काउंटर अटैक के जरिए मौके बनाने की कोशिश की। दोनों टीमों के डिफेंडरों और गोलकीपरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हर हमले को विफल कर दिया। पहले हाफ के दौरान अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांड्रो मार्टिनेज को मिकेल ओयारजाबल पर फाउल करने के कारण येलो कार्ड दिखाया गया। रेड कार्ड ने बदला मैच का रुख दूसरे हाफ में भी मुकाबला बराबरी पर बना रहा, लेकिन मैच का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांडेज को रेड कार्ड दिखाया गया। रेड कार्ड मिलने के बाद अर्जेंटीना को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। इसका फायदा स्पेन ने अतिरिक्त समय में उठाया और लगातार आक्रामक खेल दिखाते हुए अर्जेंटीना के डिफेंस पर दबाव बनाए रखा। फेरन टॉरस ने किया निर्णायक गोल एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में स्पेन के स्टार फॉरवर्ड फेरन टॉरस ने शानदार गोल दागकर मैच का इकलौता और निर्णायक गोल किया। यही गोल स्पेन को जीत दिलाने के लिए काफी साबित हुआ। गोल के बाद अर्जेंटीना ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन स्पेनिश डिफेंस ने कोई मौका नहीं दिया और अंतिम सीटी बजते ही स्पेन की टीम विश्व कप ट्रॉफी जीतने का जश्न मनाने लगी। 16 साल बाद फिर विश्व विजेता बना स्पेन इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप का खिताब जीता। दूसरी ओर अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने से चूक गया। फाइनल में स्पेन का अनुशासित खेल, मजबूत रक्षा पंक्ति और अतिरिक्त समय में फेरन टॉरस का गोल टीम की ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी वजह बना।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जहां मैदान पर रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं, वहीं भीषण गर्मी भी खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई मैचों के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह 43 डिग्री सेल्सियस के पार भी दर्ज किया गया। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को हीट स्ट्रेस और थकान से बचाने के लिए टीमों ने अत्याधुनिक 'क्लाइमाकूल सिस्टम' अपनाया है, जिसमें कूलिंग वेस्ट, इंसुलेटेड जैकेट और कूलिंग ओवरबूट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मैदान पर गर्मी से बचाने में मददगार 'कूलिंग वेस्ट' रविवार को फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में फ्रांस और पराग्वे के बीच खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान तापमान 43.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ऐसे हालात को देखते हुए फीफा ने खिलाड़ियों के लिए हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की है। वहीं कई टीमों ने मैच से पहले और हाफ टाइम के दौरान खिलाड़ियों को ठंडा रखने के लिए कूलिंग वेस्ट का इस्तेमाल किया। इस वेस्ट के अंदर विशेष प्रकार का जेल भरा होता है, जिसे उपयोग से पहले फ्रीज किया जाता है। खिलाड़ी जब इसे पहनते हैं तो यह धीरे-धीरे शरीर की अतिरिक्त गर्मी को सोखता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक शरीर के आंतरिक तापमान को लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस और त्वचा के तापमान को करीब 13 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है। जर्सी और जूतों में भी हाई-टेक बदलाव सिर्फ कूलिंग वेस्ट ही नहीं, खिलाड़ियों की जर्सियों में भी माइक्रो-वेंटिलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक पसीने को तेजी से बाहर निकालती है और शरीर में हवा का बेहतर प्रवाह बनाए रखती है, जिससे खिलाड़ी लंबे समय तक सहज महसूस करते हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों के जूतों पर विशेष कूलिंग ओवरबूट लगाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य पैरों की गर्मी और सूजन को कम करना है। दावा किया जा रहा है कि इन ओवरबूट्स की मदद से केवल सात मिनट में पैरों का तापमान करीब दो डिग्री सेल्सियस तक घटाया जा सकता है, जिससे रिकवरी भी तेज होती है। फॉर्मूला-1 से फुटबॉल तक पहुंची तकनीक दिलचस्प बात यह है कि कूलिंग वेस्ट और अन्य उपकरणों को शुरुआत में फॉर्मूला-1 ड्राइवरों के लिए विकसित किया गया था। अब इन्हें फुटबॉल में भी सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। टीमें इनका उपयोग मैच से पहले, हाफ टाइम और ट्रेनिंग सत्रों के दौरान खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए कर रही हैं। जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में खेल आयोजनों के दौरान अत्यधिक गर्मी अब बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में फीफा वर्ल्ड कप 2026 में खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल, हाइड्रेशन ब्रेक और आधुनिक कूलिंग तकनीकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन उपायों की बदौलत खिलाड़ी भीषण गर्मी के बावजूद अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।
अर्लिंगटन: फुटबॉल की दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेसी आज 24 जून को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी मेसी का प्रदर्शन दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को हैरान कर रहा है। फीफा विश्व कप 2026 में उनका शानदार फॉर्म जारी है और शुरुआती दो मुकाबलों में ही वह पांच गोल दाग चुके हैं। हाल ही में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने दो गोल करके एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। इसके साथ ही वह फीफा विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनके नाम अब कुल 18 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाकर जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। 39 की उम्र में भी कायम है मेसी का जादू ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र उनके खेल पर कोई असर नहीं डाल पाई है। टूर्नामेंट के शुरुआती दो मैचों में ही पांच गोल कर चुके मेसी की तारीफ करते हुए ऑस्ट्रिया के कोच राल्फ रंगनिक ने कहा कि 39 साल की उम्र में इस तरह का प्रदर्शन असाधारण है और यही उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। जन्मदिन पर भावुक भी हैं मेसी इस खास दिन पर मेसी भावनात्मक दौर से भी गुजर रहे हैं। उनके पिता अर्जेंटीना में अस्वस्थ हैं और वह अपने परिवार से लगभग 10 हजार किलोमीटर दूर विश्व कप में टीम की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बावजूद इसके उन्होंने निजी चिंताओं को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया और अर्जेंटीना के अब तक हुए सभी पांच गोल खुद किए हैं। मेसी ने कहा, "विश्व कप का हर मैच कठिन है। कोई टीम आसानी से मौके नहीं देती, लेकिन मैं हर पल का आनंद ले रहा हूं।" पेनल्टी मिस करने के बाद शानदार वापसी ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैच के शुरुआती मिनटों में मेसी पेनल्टी पर गोल करने से चूक गए थे। उनके शॉट के पोस्ट के बाहर जाने से स्टेडियम में सन्नाटा छा गया था। हालांकि, आठ बार के बैलन डी'ओर विजेता मेसी ने बाद में शानदार वापसी करते हुए दो गोल दागे और अपनी गलती की भरपाई कर दी। मेसी ने मैच के बाद कहा, "पेनल्टी मिस करने से मैं काफी नाराज था, लेकिन बाद में इसकी भरपाई करने में सफल रहा।" यही मेसी की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वह हर असफलता के बाद और अधिक मजबूती के साथ वापसी करते हैं। स्टॉपेज टाइम में भी दिखी वही पुरानी फुर्ती मैच के स्टॉपेज टाइम में मेसी ने अपना 18वां विश्व कप गोल दागा। पहले प्रयास को गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन मेसी ने शानदार नियंत्रण और ड्रिब्लिंग का प्रदर्शन करते हुए कई डिफेंडरों को छकाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। 70 हजार दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद अधिकांश अर्जेंटीनी समर्थकों ने इस पल का जोरदार जश्न मनाया। लियोनेल मेसी के बड़े रिकॉर्ड 6 विश्व कप (2006-2026) खेलने वाले पहले खिलाड़ी। लगातार 6 विश्व कप मैचों में गोल करने वाले इकलौते फुटबॉलर। 18 विश्व कप गोल के साथ ऑलटाइम टॉप स्कोरर। 26 गोल योगदान (18 गोल + 8 असिस्ट), जिससे उन्होंने पेले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 28 विश्व कप मैच खेलकर सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बने। विश्व कप में कुल 2489 मिनट मैदान पर बिताने का रिकॉर्ड। 12 मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी। दो बार गोल्डन बॉल (2014 और 2022) जीतने वाले दुनिया के अकेले फुटबॉलर। 128 सफल ड्रिब्लिंग के साथ डिएगो माराडोना के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 39 साल की उम्र में भी लियोनेल मेसी जिस स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं, वह उन्हें सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं बल्कि फुटबॉल इतिहास का 'अल्टीमेट किंग' साबित करता है।
Lionel Messi World Cup Record: फुटबॉल के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। अर्जेंटीना के कप्तान ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे और इसी के साथ विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के नाम था, जिन्होंने अपने करियर में वर्ल्ड कप में 16 गोल किए थे। अब मेसी 18 गोल के साथ उनसे आगे निकल चुके हैं। रिकॉर्ड टूटने पर मिरोस्लाव क्लोज ने दी बधाई अपना रिकॉर्ड टूटने के बाद मिरोस्लाव क्लोज ने मेसी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से कहता आया हूं कि मेसी का कोई मुकाबला नहीं है। वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर हैं। मुझे उनका मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने और हर चुनौती से ऊपर उठने का तरीका बेहद पसंद है।" क्लोज ने यह भी कहा था कि अगर कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है, तो वह लियोनेल मेसी ही हैं। छठा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं मेसी लियोनेल मेसी साल 2006 से लगातार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे हैं और 2026 का टूर्नामेंट उनके करियर का छठा विश्व कप है। वर्ल्ड कप में मेसी का सफर 2006 – 1 गोल 2014 – 4 गोल 2022 – 7 गोल और अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया 2026 – अब तक 5 गोल (अल्जीरिया के खिलाफ 3 और ऑस्ट्रिया के खिलाफ 2) मेसी का मौजूदा फॉर्म शानदार है और वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने के मिशन पर नजर आ रहे हैं। ऑस्ट्रिया के खिलाफ ऐसा रहा मुकाबला मैच के शुरुआती दौर में ऑस्ट्रिया के मजबूत डिफेंस ने अर्जेंटीना को काफी परेशान किया। हालांकि, 38वें मिनट में मेसी ने अपनी शानदार ड्रिब्लिंग और फिनिशिंग का नमूना पेश करते हुए पहला गोल दागा और टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद ऑस्ट्रिया ने बराबरी की भरपूर कोशिश की, लेकिन इंजरी टाइम के 95वें मिनट में मेसी ने दूसरा गोल करके मुकाबले पर अर्जेंटीना की पकड़ मजबूत कर दी और टीम को जीत दिलाई। मेसी के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और महान खिलाड़ी बड़े मंच पर इतिहास रचने का हुनर रखते हैं।
नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में शुक्रवार (19 जून) को कनाडा और कतर के बीच खेले गए मुकाबले के बाद मैदान पर तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। वैंकूवर में खेले गए इस मैच में कनाडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कतर को 6-0 से करारी शिकस्त दी, लेकिन मैच के अंत में खिलाड़ियों के बीच हुई तीखी झड़प ने मुकाबले की चर्चा का रुख बदल दिया। कनाडा की बड़ी जीत के बावजूद टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता मिडफील्डर इस्माइल कोने की चोट रही। एक खतरनाक टक्कर के बाद उन्हें गंभीर चोट लगी और स्ट्रेचर की मदद से मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। इस्माइल कोने की चोट के बाद बढ़ा विवाद मुकाबले के दौरान कतर के खिलाड़ी असीम मदीबो और कनाडा के मिडफील्डर इस्माइल कोने के बीच जोरदार टक्कर हुई। इस चुनौती में कोने बुरी तरह घायल हो गए और मेडिकल टीम को तुरंत मैदान पर बुलाना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाया गया। घटना की VAR समीक्षा के बाद रेफरी ने असीम मदीबो को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया। मैच खत्म होते ही भिड़ गए दोनों टीमों के खिलाड़ी घटना के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया। अंतिम सीटी बजते ही मैदान पर तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि कनाडा के खिलाड़ी पूरे मैच के दौरान कतर की आक्रामक टैकलिंग से नाराज थे और इसी वजह से माहौल और अधिक गर्म हो गया। कोच भी बहस में हुए शामिल स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोनों टीमों के मुख्य कोच भी विवाद का हिस्सा बन गए। कनाडा के कोच जेसी मार्श और कतर के कोच जुलेन लोपेटेगी के बीच भी मैदान पर बहस देखने को मिली। हालांकि, बाद में अधिकारियों और सपोर्ट स्टाफ ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। कनाडा की शानदार जीत विवाद से पहले कनाडा ने पूरे मैच में अपना दबदबा बनाए रखा और कतर को 6-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। हालांकि, इस्माइल कोने की चोट और मैच के बाद हुए हंगामे ने इस जीत की चमक कुछ फीकी कर दी।
फुटबॉल जगत की नजरें एक बार फिर अर्जेंटीना के महान कप्तान Lionel Messi पर टिकी हैं। मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अपने खिताब की रक्षा करने उतरेगा और इस दौरान मेसी के पास कई ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा जो उन्हें फुटबॉल इतिहास में और भी ऊंचा स्थान दिला सकते हैं। 2022 में अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने वाले मेसी इस बार सिर्फ ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि कई बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं। 1. छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में होंगे शामिल मेसी 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 के बाद 2026 में अपना छठा विश्व कप खेलेंगे। इसके साथ ही वह Cristiano Ronaldo और Guillermo Ochoa के साथ छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो सकते हैं। यह उपलब्धि विश्व फुटबॉल में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। 2. मिरोस्लाव क्लोजे का गोल रिकॉर्ड तोड़ने का मौका मेसी अब तक विश्व कप में 26 मैचों में 13 गोल कर चुके हैं। विश्व कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड Miroslav Klose के नाम है, जिन्होंने 16 गोल किए थे। अगर मेसी इस टूर्नामेंट में चार या उससे अधिक गोल करते हैं तो वह क्लोजे को पीछे छोड़कर विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर बन सकते हैं। 3. पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप में गोल करने का रिकॉर्ड मेसी अब तक चार अलग-अलग विश्व कप संस्करणों में गोल कर चुके हैं। यदि वह वर्ल्ड कप 2026 में एक भी गोल करने में सफल रहते हैं तो वह पांच अलग-अलग फीफा विश्व कप में गोल करने वाले दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह उपलब्धि केवल क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम दर्ज है। इसके साथ ही मेसी दक्षिण अमेरिका के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे जो यह कारनामा करेंगे। 4. असिस्ट के मामले में माराडोना को छोड़ सकते हैं पीछे मेसी ने विश्व कप में अब तक 8 असिस्ट किए हैं। इस मामले में वह अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी Diego Maradona की बराबरी पर हैं। एक और असिस्ट करते ही मेसी अर्जेंटीना के लिए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। दो असिस्ट करने पर वह Fritz Walter के 9 असिस्ट के विश्व रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकते हैं। 5. कप्तान के रूप में बना सकते हैं सबसे बड़ा रिकॉर्ड मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना 2014 और 2022 के विश्व कप फाइनल में पहुंच चुकी है। अगर अर्जेंटीना 2026 में भी फाइनल में पहुंचती है तो मेसी विश्व फुटबॉल इतिहास के पहले कप्तान बन जाएंगे जो अपनी टीम को तीन बार विश्व कप फाइनल तक ले गए हों। वहीं यदि अर्जेंटीना खिताब जीतती है तो मेसी बतौर कप्तान दो फीफा विश्व कप जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन सकते हैं। क्या फिर इतिहास रच पाएंगे मेसी? 39 वर्ष की उम्र के करीब पहुंच चुके मेसी के लिए यह संभवतः आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों की नजरें सिर्फ अर्जेंटीना के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि उन रिकॉर्ड्स पर भी रहेंगी जिन्हें मेसी इस टूर्नामेंट में अपने नाम कर सकते हैं। अगर अर्जेंटीना खिताब बचाने में सफल रहती है और मेसी अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी हासिल कर लेते हैं, तो उनका नाम फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में और मजबूती से दर्ज हो जाएगा।
शौकिया स्तर के फुटबॉल खिलाड़ियों पर किए गए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह संकेत मिला है कि मैच के दौरान बार-बार की जाने वाली ‘हेडिंग’ (ball heading) गतिविधि से मस्तिष्क से जुड़े कुछ बायोमार्कर्स में अस्थायी बदलाव हो सकते हैं। यह बदलाव न्यूरल इंजरी और ब्रेन इंटेग्रिटी से जुड़े संकेतकों में देखा गया है, जिससे खेल सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। क्या कहता है नया अध्ययन? यह रिसर्च नीदरलैंड्स में आयोजित शौकिया पुरुष फुटबॉल खिलाड़ियों पर आधारित एक केस-स्टडी है, जिसमें मैच के दौरान और बाद में खिलाड़ियों के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि मैच के तुरंत बाद उन खिलाड़ियों में, जिन्होंने हेडिंग की थी, कुछ खास प्रोटीन स्तरों में बढ़ोतरी देखी गई, जो मस्तिष्क पर हल्के लेकिन मापने योग्य प्रभाव का संकेत देते हैं। कैसे किया गया शोध? इस अध्ययन में 300 से अधिक शौकिया खिलाड़ियों को शामिल किया गया। खिलाड़ियों के ब्लड सैंपल तीन चरणों में लिए गए- मैच से पहले मैच के तुरंत बाद (1 घंटे के भीतर) 24 से 48 घंटे बाद इसके साथ ही वीडियो एनालिसिस और हार्ट रेट ट्रैकिंग के जरिए यह भी रिकॉर्ड किया गया कि किस खिलाड़ी ने कितनी बार हेडिंग की और उसकी तीव्रता क्या थी। क्या मिले प्रमुख नतीजे? शोध में पाया गया कि: लगभग 72% खिलाड़ियों ने मैच के दौरान हेडिंग की औसतन प्रति खिलाड़ी लगभग 2 हेडिंग दर्ज की गई अधिक हेडिंग करने वालों में न्यूरल डैमेज से जुड़े बायोमार्कर्स में अधिक बढ़ोतरी देखी गई यह प्रभाव 24–48 घंटे के भीतर सामान्य हो गया विशेष रूप से S100B और phosphorylated tau 217 जैसे बायोमार्कर्स में बदलाव दर्ज किया गया, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं से जुड़े संकेतक माने जाते हैं। विशेषज्ञों की राय और चिंता शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रभाव अस्थायी है, लेकिन यह इस बात का संकेत देता है कि बार-बार की जाने वाली हेडिंग से मस्तिष्क पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंबे समय तक इसके प्रभाव को समझने के लिए और विस्तृत अध्ययन की जरूरत है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पेशेवर और शौकिया दोनों स्तरों पर लगातार हेडिंग की आदत से जुड़ी संभावित न्यूरोलॉजिकल जोखिमों पर और शोध जरूरी है।
FC Bayern Munich को यूईएफए चैंपियंस लीग के बीच बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार खिलाड़ी Alphonso Davies हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण लंबे समय तक मैदान से दूर रहेंगे। क्लब ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर उनकी चोट की पुष्टि की। PSG के खिलाफ मैच में लगी चोट यह चोट Paris Saint-Germain F.C. के खिलाफ खेले गए यूईएफए चैंपियंस लीग सेमीफाइनल के दूसरे लेग के दौरान लगी। मुकाबला Allianz Arena में खेला गया था, जहां डेविस दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे थे। मैच के दौरान उन्हें बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में चोट महसूस हुई, जिसके बाद मेडिकल जांच कराई गई। बायर्न ने बयान में क्या कहा? FC Bayern Munich ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मेडिकल यूनिट की जांच में पुष्टि हुई है कि Alphonso Davies के बाएं हैमस्ट्रिंग मसल में चोट है। इसी कारण वह कई हफ्तों तक टीम से बाहर रहेंगे। हालांकि क्लब ने उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। कई अहम मुकाबलों से बाहर हो सकते हैं डेविस इस चोट के चलते डेविस अब बुंडेसलीगा के आगामी मुकाबलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। माना जा रहा है कि वह VfL Wolfsburg और 1. FC Köln के खिलाफ मैच मिस कर सकते हैं। इसके अलावा 23 मई को VfB Stuttgart के खिलाफ होने वाले डीएफबी फाइनल में भी उनका खेलना मुश्किल माना जा रहा है। बायर्न और कनाडा दोनों के लिए बढ़ी चिंता Alphonso Davies की चोट ने क्लब के साथ-साथ Canada men's national soccer team की चिंता भी बढ़ा दी है। डेविस अपनी रफ्तार, डिफेंस और अटैकिंग खेल के लिए जाने जाते हैं और टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले उनकी फिटनेस पर अब सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल क्लब की मेडिकल टीम उनकी रिकवरी पर लगातार नजर बनाए हुए है।
फुटबॉल की दुनिया के दो सबसे बड़े नाम Cristiano Ronaldo और Lionel Messi एक बार फिर साथ नजर आए हैं-लेकिन इस बार मैदान पर नहीं, बल्कि एक अनोखे अंदाज में। मशहूर खिलौना कंपनी LEGO ने इन दोनों दिग्गजों को अपने नए कैंपेन में मिनीफिगर के रूप में पेश किया है, जो FIFA World Cup 2026 से पहले लॉन्च किया गया है। लेगो में उतरी फुटबॉल की सुपरस्टार दुनिया LEGO ने इस खास कलेक्शन में सिर्फ रोनाल्डो और मेसी ही नहीं, बल्कि Kylian Mbappé और Vinícius Júnior को भी शामिल किया है। हर मिनीफिगर को खिलाड़ियों की खास पहचान, खेलने की शैली और उनके करियर के यादगार पलों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इन सेट्स में “Football Highlights” और “Football Legends” जैसे थीम शामिल हैं, जो फैंस को अपने पसंदीदा खिलाड़ियों के करियर को एक नए अंदाज में जीने का मौका देते हैं। खास डिजाइन और कलेक्टिबल एक्सपीरियंस हर सेट को एक खास लेटर-शेप बेस पर तैयार किया गया है, जिसमें खिलाड़ियों की नेशनल टीम के रंग, जर्सी नंबर और कलेक्टिबल प्लेट भी दी गई है। इसके साथ मिलने वाली मिनीफिगर इन सेट्स को और भी आकर्षक बनाती है। रोनाल्डो ने इस सहयोग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हर दिन ऐसा मौका नहीं मिलता जब आप खुद एक LEGO सेट बन जाएं।” 2022 के बाद फिर साथ दिखे रोनाल्डो-मेसी यह पहली बार नहीं है जब दोनों दिग्गज एक साथ किसी विज्ञापन में नजर आए हैं। इससे पहले 2022 वर्ल्ड कप के दौरान दोनों ने एक लग्जरी ब्रांड के साथ मिलकर यादगार कैंपेन किया था, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया था। वर्ल्ड कप में फिर हो सकता है महामुकाबला आने वाले वर्ल्ड कप में जहां मेसी अपनी टीम के साथ खिताब बचाने उतरेंगे, वहीं रोनाल्डो अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा करने की कोशिश करेंगे। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो क्वार्टरफाइनल में एक बार फिर “रोनाल्डो बनाम मेसी” का ऐतिहासिक मुकाबला देखने को मिल सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।