Suriya

Suriya in an intense action scene from Karuppu as the film nears ₹94 crore at the box office.
‘करुप्पु’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल, 4 दिनों में 94 करोड़ के करीब पहुंची सूर्या की फिल्म

Karuppu बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। Suriya स्टारर इस फिल्म ने रिलीज के चौथे दिन यानी सोमवार को भी दमदार कमाई करते हुए अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है। फिल्म ने सोमवार को भारतीय बॉक्स ऑफिस पर करीब 16.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। खास बात यह रही कि ओपनिंग डे के मुकाबले फिल्म की कमाई में सिर्फ लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जिसे ट्रेड एक्सपर्ट्स शानदार होल्ड मान रहे हैं। तमिलनाडु में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन तमिलनाडु में फिल्म का प्रदर्शन और भी ज्यादा मजबूत रहा। यहां सोमवार को फिल्म ने करीब 11 करोड़ रुपये की कमाई की, जो ओपनिंग डे से सिर्फ 8 प्रतिशत कम है। चार दिनों में फिल्म का कुल भारतीय कलेक्शन लगभग 94 करोड़ रुपये पहुंच चुका है, जिसमें से करीब 58 करोड़ रुपये केवल तमिलनाडु से आए हैं। सूर्या के करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल होने को तैयार ‘करुप्पु’ अब Suriya के करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल होने जा रही है। फिल्म को सूर्या की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने के लिए सिर्फ 2 करोड़ रुपये की जरूरत है वहीं 100 करोड़ क्लब में एंट्री के लिए महज 6 करोड़ रुपये और चाहिए ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म मंगलवार को ही दोनों बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है। नॉन-हॉलिडे मंडे कलेक्शन में बड़ा रिकॉर्ड तमिलनाडु में ‘करुप्पु’ का सोमवार कलेक्शन इतिहास के सबसे बड़े मंडे कलेक्शंस में शामिल हो गया है। नॉन-हॉलिडे सोमवार के हिसाब से यह तीसरा सबसे बड़ा कलेक्शन माना जा रहा है। इससे आगे सिर्फ: The Greatest of All Time Vikram जैसी फिल्में हैं। इन आंकड़ों को देखते हुए माना जा रहा है कि फिल्म तमिलनाडु में 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस कर सकती है। दूसरे राज्यों में भी मजबूत पकड़ फिल्म सिर्फ तमिलनाडु में ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। भारत में क्षेत्रवार कलेक्शन क्षेत्र कलेक्शन तमिलनाडु ₹58 करोड़ आंध्र प्रदेश/तेलंगाना ₹15 करोड़ कर्नाटक ₹11.25 करोड़ केरल ₹8.25 करोड़ बाकी भारत ₹1.50 करोड़ कुल भारत ₹94 करोड़ फिल्म का तेलुगु वर्जन भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, जबकि शुरुआती ऑडियंस रिस्पॉन्स मिश्रित बताया गया था। 2013 के बाद सूर्या की पहली बड़ी HIT रिपोर्ट्स के अनुसार ‘करुप्पु’ सिर्फ ब्लॉकबस्टर ही नहीं बल्कि 2013 में आई Singam II के बाद Suriya की पहली बड़ी हिट फिल्म बनती दिख रही है। पिछले कई वर्षों में सूर्या की फिल्मों को या तो मजबूत ओपनिंग मिली लेकिन कंटेंट की वजह से टिक नहीं पाईं, या फिर अच्छी समीक्षाओं के बावजूद बड़ी शुरुआत नहीं मिल सकी। कोविड दौर में उनकी कुछ चर्चित फिल्मों को थिएटर रिलीज भी नहीं मिली थी। ऐसे में ‘करुप्पु’ को अभिनेता की लंबे समय बाद मिली बड़ी बॉक्स ऑफिस सफलता माना जा रहा है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Rajinikanth in Jailer 2 poster look with intense action avatar and cinematic background
रजनीकांत की ‘Jailer 2’ की रिलीज टली? अब सितंबर 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक देने की चर्चा

अगस्त नहीं, अब सितंबर में आ सकती है फिल्म साउथ सुपरस्टार Rajinikanth एक बार फिर ‘टाइगर’ मुथुवेल पांडियन के किरदार में वापसी करने जा रहे हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म Jailer 2 को लेकर नया अपडेट सामने आया है। पहले खबरें थीं कि फिल्म अगस्त 2026 में रिलीज होगी, लेकिन अब नई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब फिल्म को 4 सितंबर 2026 को कृष्ण जयंती के मौके पर रिलीज करने की तैयारी चल रही है। हालांकि, मेकर्स की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सूर्या की फिल्म भी बदल सकती है रिलीज डेट रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि Suriya की आने वाली फिल्म Vishwanath And Sons, जो पहले जुलाई 2026 में रिलीज होने वाली थी, अब अगस्त में सिनेमाघरों में आ सकती है। इसके अलावा अभिनेता Soori की फिल्म Mandadi भी इसी दौरान रिलीज होने की चर्चा में है। हालांकि इन सभी फिल्मों की रिलीज डेट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘Jailer 2’ में फिर दिखेगा स्टार्स का बड़ा धमाका Jailer 2 का निर्देशन Nelson Dilipkumar कर रहे हैं। यह फिल्म 2023 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘Jailer’ का सीक्वल है। फिल्म में रजनीकांत के अलावा Mithun Chakraborty, Vidya Balan, SJ Suryah और Suraj Venjaramoodu अहम भूमिकाओं में नजर आ सकते हैं। वहीं, Mohanlal और Shiva Rajkumar के भी अपने पुराने किरदार दोहराने की संभावना जताई जा रही है। शाहरुख खान के कैमियो की खबरें भी रहीं चर्चा में कुछ समय पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि Shah Rukh Khan फिल्म में कैमियो कर सकते हैं। हालांकि बाद में रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अपनी फिल्म King की व्यस्तता के चलते उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया। इसके बाद किसी दूसरे बड़े स्टार को शामिल किए जाने की चर्चाएं भी हुईं, लेकिन अब तक इस पर कोई नया अपडेट सामने नहीं आया है। रजनीकांत की आने वाली फिल्मों पर भी नजर रजनीकांत जल्द ही अपनी अगली फिल्म Thalaivar173 में दिखाई देंगे। इस फिल्म को Raaj Kamal Films International प्रोड्यूस कर रही है, जो Kamal Haasan का प्रोडक्शन हाउस है। पहले इस फिल्म को Sundar C डायरेक्ट करने वाले थे, लेकिन बाद में उनके बाहर होने की खबर आई। अब रिपोर्ट्स के मुताबिक Ashwath Marimuthu इस प्रोजेक्ट से जुड़ सकते हैं। इसके अलावा रजनीकांत और कमल हासन एक बार फिर साथ नजर आने वाले हैं। दोनों की आगामी फिल्म को फिलहाल KHxRK Reunion नाम दिया गया है, जिसका निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार करेंगे।  

surbhi मई 13, 2026 0
Top Tamil cinema stars including Vijay, Rajinikanth and Kamal Haasan with highest film salaries
तमिल सिनेमा के सबसे महंगे सितारे: विजय से रजनीकांत तक, एक फिल्म के लिए लेते हैं करोड़ों की फीस

  दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री, खासकर तमिल सिनेमा, इन दिनों सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के लिए ही नहीं बल्कि सुपरस्टार्स की बढ़ती फीस को लेकर भी सुर्खियों में है। बीते कुछ वर्षों में फिल्मों की फ्रेंचाइजी वैल्यू, ग्लोबल मार्केट और प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल के कारण कलाकारों की कमाई में जबरदस्त उछाल आया है। इसी वजह से आज तमिल सिनेमा के कई बड़े सितारे एक फिल्म के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये तक फीस ले रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा Thalapathy Vijay, Rajinikanth और Kamal Haasan जैसे दिग्गजों की होती है। आइए जानते हैं तमिल सिनेमा के उन सुपरस्टार्स के बारे में, जो एक फिल्म के लिए सबसे ज्यादा फीस वसूलते हैं।   थलापति विजय तमिल फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेता फिलहाल Thalapathy Vijay माने जाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह एक फिल्म के लिए करीब 200 से 250 करोड़ रुपये तक चार्ज करते हैं। उनकी फिल्म The Greatest of All Time (GOAT) की जबरदस्त सफलता ने उनकी स्टार पावर को और मजबूत कर दिया है।   रजनीकांत सुपरस्टार Rajinikanth आज भी तमिल सिनेमा के सबसे बड़े नामों में शामिल हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी फिल्मों का क्रेज कम नहीं हुआ है। बताया जाता है कि वह एक फिल्म के लिए 110 से 210 करोड़ रुपये तक लेते हैं, जिसमें उनकी फिक्स फीस के साथ-साथ मुनाफे में हिस्सेदारी भी शामिल होती है। उनकी फिल्म Jailer की सफलता ने यह साबित किया कि आज भी उनके नाम पर फिल्में रिकॉर्ड ओपनिंग हासिल कर सकती हैं।   कमल हासन तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Kamal Haasan की फीस भी हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है। उनकी फिल्म Vikram की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब वह एक फिल्म के लिए लगभग 100 से 150 करोड़ रुपये तक चार्ज कर रहे हैं।   अजित कुमार तमिल इंडस्ट्री में ‘थाला’ के नाम से मशहूर Ajith Kumar भी सबसे महंगे अभिनेताओं में गिने जाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वह एक फिल्म के लिए करीब 105 से 120 करोड़ रुपये फीस लेते हैं। खास बात यह है कि वह फिल्मों का ज्यादा प्रमोशन नहीं करते, फिर भी उनकी फिल्मों को फैंस का जबरदस्त समर्थन मिलता है।   सूर्या अभिनेता Suriya ने भी हाल के वर्षों में अपनी स्टार वैल्यू को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। वह एक फिल्म के लिए करीब 40 से 70 करोड़ रुपये तक चार्ज करते हैं। उनकी फिल्म Kanguva के बड़े बजट और भव्य स्तर ने उनकी बाजार कीमत को और बढ़ाया है।   धनुष बहुमुखी प्रतिभा के धनी Dhanush अपनी एक फिल्म के लिए लगभग 25 से 50 करोड़ रुपये तक फीस लेते हैं। अभिनय के अलावा वह निर्देशन और प्रोडक्शन में भी सक्रिय हैं और आर्ट फिल्मों व कमर्शियल सिनेमा के बीच शानदार संतुलन बनाए रखते हैं।   विजय सेतुपति तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे व्यस्त अभिनेताओं में से एक Vijay Sethupathi एक फिल्म के लिए करीब 15 से 25 करोड़ रुपये चार्ज करते हैं। उनकी खासियत यह है कि वह हीरो के साथ-साथ विलेन के किरदारों में भी उतनी ही मजबूती से नजर आते हैं, जिसकी वजह से वह तमिल के अलावा तेलुगु और हिंदी फिल्मों में भी काफी लोकप्रिय हैं।   बदल रहा है स्टार्स की कमाई का मॉडल विशेषज्ञों के अनुसार अब कलाकारों की कमाई सिर्फ फीस तक सीमित नहीं रही। कई बड़े सितारे फिल्मों के मुनाफे में हिस्सेदारी भी लेते हैं। यही वजह है कि दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कई अभिनेता आज दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले कलाकारों में शामिल हो गए हैं। तमिल सिनेमा का बाजार लगातार वैश्विक स्तर पर फैल रहा है और आने वाले वर्षों में इन सितारों की फीस और ब्रांड वैल्यू में और भी बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0