Tamil Nadu Government

Karur Stampede
करूर भगदड़ पीड़ितों के लिए तमिलनाडु सरकार का बड़ा ऐलान

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु सरकार ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिवारों के लिए बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है। सरकार ने फैसला लिया है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य हादसे से प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संबल प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि यह कदम पीड़ित परिवारों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।   मुख्यमंत्री करेंगे पीड़ित परिवारों से मुलाकात मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 10 और 11 जुलाई को करूर के दौरे पर रहेंगे। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान वह सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के वितरण कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना देंगे। साथ ही, सरकार द्वारा घोषित राहत पैकेज के तहत पात्र परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र भी सौंपे जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला करूर दौरा होगा, जिसे प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   पिछले साल चुनावी कार्यक्रम में हुई थी दर्दनाक घटना गौरतलब है कि 27 सितंबर 2025 को टीवीके (TVK) के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान करूर में अचानक भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे तमिलनाडु को झकझोर कर रख दिया था और राजनीतिक दलों के चुनावी कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।   हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव भगदड़ के बाद तत्कालीन टीवीके नेता विजय ने चेन्नई में पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की थी। हालांकि, उस समय करूर नहीं जाने को लेकर उन्हें विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके बाद राज्य सरकार और प्रशासन ने राजनीतिक रैलियों एवं बड़े सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कई नए दिशा-निर्देश लागू किए। अब सरकार द्वारा सरकारी नौकरी देने की घोषणा को पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
State governments in Tamil Nadu, Kerala and West Bengal announcing major administrative reforms and VIP culture changes
तमिलनाडु, केरल और बंगाल की नई सरकारों के बड़े फैसले, VIP कल्चर से लेकर AI मंत्रालय तक बदलाव

Tamil Nadu, Kerala और West Bengal में नई सरकारों ने सत्ता संभालने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर कई बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। कहीं मुख्यमंत्री ने अपने काफिले के लिए ट्रैफिक न रोकने का आदेश दिया है, तो कहीं आशा वर्करों का मानदेय बढ़ाया गया है। कुछ राज्यों ने AI मंत्रालय बनाकर नई तकनीक पर भी फोकस बढ़ाया है। तमिलनाडु: CM विजय ने VIP कल्चर पर लिया बड़ा फैसला Vijay ने मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरुआती दिनों में कई अहम फैसले लिए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि उनके काफिले के लिए आम लोगों का ट्रैफिक न रोका जाए। सीएम का काफिला अलग लेन से गुजरेगा, लेकिन बाकी लेन में यातायात जारी रहेगा। बताया जा रहा है कि विजय रोज सुबह सचिवालय पहुंचते हैं और शाम तक वहीं काम करते हैं। वह घर से टिफिन लेकर भी पहुंचते हैं। तमिलनाडु सरकार के बड़े फैसले 33 सदस्यीय कैबिनेट में 11 मंत्री 40 साल से कम उम्र के 32 नए चेहरों को मौका दशकों बाद किसी ब्राह्मण नेता को हिंदू धर्मार्थ विभाग मंदिर, स्कूल और बस स्टैंड के 500 मीटर दायरे में आने वाली 717 शराब दुकानों को बंद करने का आदेश महिला सुरक्षा के लिए ‘सिंगप्पेन फोर्स’ की शुरुआत हर थाने में 24 घंटे CCTV निगरानी और शिकायत दर्ज करने की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य 21 साल से कम उम्र वालों को शराब बेचने पर सख्त कार्रवाई तमिलनाडु सरकार ने R. Kumar को AI मंत्री भी बनाया है। केरल: सादगी और जनता से सीधे संपर्क पर जोर V. D. Satheesan की सरकार ने VIP संस्कृति कम करने और सरकारी पहुंच आसान बनाने पर फोकस किया है। केरल सरकार के प्रमुख फैसले मुख्यमंत्री के काफिले में सिर्फ दो वाहन मंत्रियों के सरकारी आवासों का लग्जरी रेनोवेशन नहीं पिछली सरकार की लग्जरी गाड़ियों से दूरी आम लोगों के लिए सचिवालय और मंत्रियों के आवास तक पहुंच आसान मंत्रियों को ऑफिस और घर दोनों जगह लोगों से मिलना होगा आशा वर्करों को बड़ी राहत सरकार ने आशा वर्करों का मानदेय ₹3 हजार बढ़ाकर ₹12 हजार प्रति माह कर दिया है। AI मंत्रालय और सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट केरल सरकार ने देश का पहला AI मंत्रालय बनाने का दावा किया है। इसके लिए P. K. Kunhalikutty को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पर्यावरण और विस्थापन के विरोध के बाद सिल्वरलाइन सेमी हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा कैबिनेट बैठकों के बाद साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग की परंपरा भी दोबारा शुरू की गई है। बंगाल: छोटे काफिले और विधानसभा की लाइव स्ट्रीमिंग Suvendu Adhikari ने मुख्यमंत्री बनने के बाद VIP मूवमेंट और सरकारी कामकाज में बदलाव के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि उनके काफिले के लिए आम वाहनों को न रोका जाए और एस्कॉर्ट वाहनों की संख्या भी कम रखी जाए। बंगाल सरकार के अहम फैसले मंत्रियों और अधिकारियों को फील्ड विजिट के दौरान सड़कें खाली न कराने की सलाह विधानसभा कार्यवाही का लाइव टेलीकास्ट 1 जून से महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा की तैयारी मदरसों समेत सभी शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य करने के निर्देश नई सरकारों के इन फैसलों को प्रशासनिक सुधार, सादगी और जनता से सीधे जुड़ाव की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।  

surbhi मई 23, 2026 0
Tamil Nadu Government
TVK की आंधी में उड़े द्रविड़ दल, 60 साल की सत्ता ढही

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की सियासत में अभिनेता-से-नेता बने जोसफ विजय चंद्रशेखर (थलापति विजय) ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम के साथ पहली ही चुनावी परीक्षा में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। करीब छह दशकों से सत्ता पर काबिज़ द्रविड़ दलों द्रविड़ मुनेत्र कषगम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम को इस नतीजे ने बड़ा झटका दिया है।   नई पार्टी, नई रणनीति विजय ने 2 फरवरी 2024 को TVK की स्थापना कर राजनीति में कदम रखा। उन्होंने अपनी रैलियों में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलताओं और जनहित के मुद्दों को उठाया। उनके निशाने पर खास तौर पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी सरकार रही। साथ ही, उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय को जोड़ने की कोशिश की, जिससे उन्हें व्यापक सामाजिक समर्थन मिला।   रैलियों से लोकप्रियता, संकट में संवेदनशीलता सितंबर 2025 में करूर रैली के दौरान भीड़भाड़ से हुई दुखद घटना में कई लोगों की मौत हो गई। इस पर विजय ने तुरंत आर्थिक सहायता की घोषणा कर संवेदनशील नेता की छवि बनाई। उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ने लगी, जिसमें सिर्फ प्रशंसक ही नहीं बल्कि बदलाव चाहने वाले मतदाता भी शामिल थे।   द्रविड़ राजनीति को चुनौती तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन की जड़ें ई.वी. रामासामी पेरियार और सी.एन. अन्नादुरई जैसे नेताओं से जुड़ी रही हैं। बाद में एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता ने भी इसी धारा को आगे बढ़ाया। लेकिन विजय की जीत ने इस लंबे राजनीतिक प्रभुत्व को पहली बार गंभीर चुनौती दी है।   सामाजिक और राजनीतिक कारण विश्लेषकों के अनुसार, मतदाता लंबे समय से DMK और AIADMK के बीच सत्ता के अदला-बदली से ऊब चुके थे। युवाओं, महिलाओं और नए वोटरों ने बड़ी संख्या में विजय का समर्थन किया। साथ ही, भाषा नीति और धार्मिक मुद्दों पर सरकार के रुख ने भी कुछ वर्गों में असंतोष पैदा किया। विजय की जीत को आंध्र प्रदेश में एन.टी. रामाराव के उभार से भी जोड़ा जा रहा है, जिन्होंने फिल्मी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदला था। अब तमिलनाडु की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है, जहां TVK एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है और पारंपरिक दलों के सामने अस्तित्व की चुनौती खड़ी हो गई है।

Unknown मई 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

abhishek singh जून 30, 2026 0