United States

The U.S. Capitol building in Washington, D.C., symbolizing a proposed sanctions bill that could impose tariffs on countries continuing to import Russian oil.
भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी संसद में नया प्रतिबंध बिल

वॉशिंगटन: अमेरिका में रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया प्रतिबंध (Sanctions) विधेयक पेश किया गया है। प्रस्तावित बिल में भारत समेत पांच देशों पर रूस से तेल खरीद जारी रखने की स्थिति में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह अभी केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और कानून बनने से पहले इसे अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित विधेयक में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रहने से मॉस्को को आर्थिक समर्थन मिल रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध जारी रखने में उसे मदद मिलती है। पहले 500% टैरिफ का प्रस्ताव था इससे पहले पेश किए गए एक प्रस्ताव में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। हालांकि, उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। नए विधेयक में अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे अपेक्षाकृत व्यावहारिक माना जा रहा है। अंतिम निर्णय USTR करेगा प्रस्ताव के अनुसार, किसी देश पर कितना टैरिफ लगाया जाएगा, इसका अंतिम फैसला अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) करेगा। आवश्यकता पड़ने पर टैरिफ की दर कम भी की जा सकती है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी संसद को सूचना देना अनिवार्य होगा। अगस्त से पहले पारित कराने की कोशिश विधेयक में रूस के ऊर्जा, रक्षा, वित्त और औद्योगिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। अमेरिकी सांसदों का लक्ष्य इसे अगस्त से पहले संसद से पारित कराना है, हालांकि इसकी प्रक्रिया अभी जारी है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है? यदि यह विधेयक कानून बनता है और भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका को निर्यात होने वाले कई भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर विशेष रूप से इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है— ज्वेलरी और रत्न उद्योग टेक्सटाइल एवं परिधान इंजीनियरिंग उत्पाद अन्य निर्यात आधारित उद्योग टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता अमेरिकी बाजार में प्रभावित हो सकती है। रूस से तेल आयात बना अहम मुद्दा भारत पिछले कुछ वर्षों से रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्तावित अमेरिकी कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को सीमित करना और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर वैकल्पिक स्रोत अपनाने का दबाव बनाना है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित बिल है। इसके कानून बनने, अंतिम स्वरूप और संभावित प्रभाव को लेकर आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद की प्रक्रिया और प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Mouni Roy reacts to paparazzi while sitting in a car after a restaurant outing with Anusha Dandekar in Mumbai.
Mouni Roy Viral Video: पपाराजी पर भड़कीं मौनी रॉय, कार के अंदर तक रिकॉर्डिंग से बढ़ा विवाद; अनुषा दांडेकर ने संभाला मामला

Mouni Roy Viral Video: अभिनेत्री मौनी रॉय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पपाराजी पर नाराज़ होती दिखाई दे रही हैं। घटना उस समय हुई जब मौनी रॉय अभिनेत्री अनुषा दांडेकर के साथ मुंबई के एक रेस्टोरेंट से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठ रही थीं। इसी दौरान पपाराजी लगातार उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते रहे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कार के अंदर तक पहुंची रिकॉर्डिंग, नाराज़ हुईं मौनी वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले अनुषा दांडेकर कार में बैठती हैं और उसके बाद मौनी रॉय वहां पहुंचती हैं। चारों ओर मौजूद फोटोग्राफर लगातार कैमरे उनकी ओर किए हुए थे। वीडियो के अनुसार, रिकॉर्डिंग कार के काफी करीब तक जारी रही, जिससे मौनी स्पष्ट रूप से असहज नजर आईं। शुरुआत में उन्होंने खुद को शांत रखने की कोशिश की, लेकिन जब रिकॉर्डिंग नहीं रुकी तो उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा, "बंद करो... बंद करो इसे।" उनके चेहरे पर गुस्सा और असहजता साफ दिखाई दे रही थी। अनुषा दांडेकर ने शांत कराया माहौल स्थिति बिगड़ती देख अनुषा दांडेकर ने बीच-बचाव किया। उन्होंने पपाराजी से रिकॉर्डिंग रोकने का इशारा किया और साथ ही मौनी रॉय को भी शांत करने की कोशिश की। इसके बाद मामला धीरे-धीरे सामान्य हुआ और दोनों वहां से रवाना हो गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि निजी स्पेस का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि कुछ लोगों ने मौनी के गुस्से पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। हालांकि, वीडियो के आधार पर उनकी नाराज़गी के पीछे किसी व्यक्तिगत कारण की पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। हाल ही में निजी जिंदगी भी रही चर्चा में हाल के दिनों में मौनी रॉय अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। उनके और पति सूरज नांबियार के अलग होने की खबरों ने काफी चर्चा बटोरी थी। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में अपने बारे में फैली कुछ अफवाहों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि उनके बारे में कई गलत बातें कही गईं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। प्राइवेसी बनाम पपाराजी कल्चर पर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद एक बार फिर सेलिब्रिटीज़ की निजता और पपाराजी कल्चर को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर कवरेज की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या कलाकारों की निजी जगह का सम्मान किया जाना चाहिए। यह चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार जारी है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks on trade policy as the U.S. Supreme Court's ruling leads to the refund of billions of dollars in tariff collections to companies.
ट्रंप की टैरिफ नीति पर कोर्ट की रोक, अमेरिका को लौटाने पड़े 81 अरब डॉलर

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कंपनियों से वसूले गए करीब 81 अरब डॉलर (लगभग 6.7 लाख करोड़ रुपये) वापस करने पड़े हैं। अदालत ने ट्रंप प्रशासन की विवादित टैरिफ व्यवस्था को कानून के अनुरूप नहीं माना था। मई-जून में लौटाए गए 71 अरब डॉलर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिकी सरकार ने मई और जून के दौरान लगभग 71 अरब डॉलर कंपनियों को वापस कर दिए हैं। शेष राशि का भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। क्यों लगा था टैरिफ? राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन, यूरोप सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी सामान महंगे होंगे, अमेरिकी उत्पादों की मांग बढ़ेगी और घरेलू उद्योग को लाभ मिलेगा। हालांकि, कई बड़ी कंपनियों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष फरवरी में सुनाए गए फैसले में कहा कि संबंधित टैरिफ नियम कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद सरकार को कंपनियों से वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया गया। नए टैरिफ की तैयारी में ट्रंप अदालती फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन नए आयात शुल्क लागू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा टैरिफ व्यवस्था समाप्त होने के बाद कई देशों के आयात पर 10% से 12.5% तक नया शुल्क लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसका असर भारत, चीन, जापान, ब्रिटेन और ताइवान जैसे देशों के निर्यात पर पड़ सकता है। ब्राजील और यूरोप को भी चेतावनी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ब्राजील पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि यूरोपीय देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर नए कर लागू करते हैं, तो अमेरिका उनके उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नई टैरिफ नीति लागू करता है, तो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
A symbolic image showing rising tensions between Iran, the United States and Israel amid unverified reports of a purported "hit list" circulating in Iranian media.
ईरानी मीडिया में 'हिट लिस्ट' का दावा, ट्रंप-नेतन्याहू समेत 13 नेताओं के नाम बताए गए; आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी मीडिया में एक कथित "हिट लिस्ट" को लेकर दावा सामने आया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के पहले सार्वजनिक संबोधन के दौरान अमेरिका, इजरायल और यूरोप के कई शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही ईरान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सूची जारी की गई है। रिपोर्टों में किन नेताओं के नाम? ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर ब्रैड कूपर, इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी, आईडीएफ प्रमुख एयाल जमीर और इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार के नाम बताए गए हैं। ग्राफिक पोस्टर का भी दावा कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एक ग्राफिक पोस्टर जारी किया गया, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों पर स्नाइपर के निशान दर्शाए गए, जबकि अन्य नेताओं को नारंगी रंग की जेल की वर्दी में दिखाया गया। इस ग्राफिक की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मोजतबा खामेनेई के नाम से बयान का दावा रिपोर्टों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई के नाम से जारी कथित संदेश में कहा गया कि "प्रतिशोध हमारे राष्ट्र की सामूहिक इच्छा है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।" हालांकि, इस बयान की भी किसी आधिकारिक या स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। बढ़ते तनाव के बीच सामने आए दावे ये दावे ऐसे समय सामने आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तनाव जारी है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल ईरान सरकार, अमेरिकी प्रशासन या सूची में शामिल अन्य देशों की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन रिपोर्टों को आधिकारिक पुष्टि होने तक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Iranian military officials address the media as tensions escalate over the Strait of Hormuz following U.S. security announcements.
हॉर्मुज पर महायुद्ध की आहट: ईरान ने अमेरिका को दी खुली चेतावनी, कहा- मदद करने वाले देशों को भी नहीं छोड़ेंगे

तेहरान/वॉशिंगटन: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहरा गया है। ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह किसी भी कीमत पर अमेरिका को हॉर्मुज में दखल नहीं देने देगा। साथ ही खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने अमेरिका को सैन्य या लॉजिस्टिक सहायता दी, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध में भागीदारी माना जाएगा।  ईरान की अमेरिका को सीधी चेतावनी ईरानी सेना के खात्म अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोलफघारी ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और प्रबंधन में किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सैन्य जहाज या सुरक्षा बल ईरान की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में सक्रिय हुए, तो उन्हें कड़ा जवाब दिया जाएगा।  खाड़ी देशों को भी दी चेतावनी ईरान ने बहरीन, कुवैत, ओमान और अन्य क्षेत्रीय देशों को भी संदेश दिया है कि यदि उन्होंने अमेरिका को सैन्य अड्डे, हथियार, खुफिया जानकारी या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई, तो उन्हें भी संघर्ष का पक्ष माना जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में पूरा पश्चिम एशिया बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है।  ट्रंप ने खुद को बताया 'गार्डियन ऑफ हॉर्मुज' इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका अब "Guardian of the Hormuz Strait" की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान के जहाजों और उससे जुड़े व्यापार पर समुद्री नाकेबंदी लागू की जाएगी, जबकि अन्य देशों के जहाजों को सुरक्षित आवाजाही दी जाएगी। साथ ही हॉर्मुज से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाने की भी घोषणा की गई है। हालिया सैन्य कार्रवाई से बढ़ा तनाव अमेरिकी सेना ने हाल के दिनों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया। दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है।  वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां सैन्य टकराव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Cargo ships transit through the Strait of Hormuz as U.S. President Donald Trump announces a new security policy and proposed security fee amid rising regional tensions.
ट्रंप का बड़ा ऐलान: होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा, ईरान पर फिर नाकेबंदी; बाकी जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का "गार्डियन" होगा। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकेबंदी (Blockade) लागू करने की घोषणा की है और कहा है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी गैर-ईरानी व्यापारिक जहाजों से 20% सुरक्षा शुल्क (Security Fee) लिया जाएगा। ट्रंप ने Truth Social पर किया ऐलान डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा और अमेरिका इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के जहाजों और उसके व्यापारिक साझेदारों पर नाकेबंदी लागू रहेगी, जबकि अन्य देशों के जहाज इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था की लागत के बदले सभी कार्गो जहाजों पर 20% शुल्क लगाया जाएगा। सिर्फ ईरान और उसके साझेदार होंगे निशाने पर ट्रंप के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य वैश्विक व्यापार को रोकना नहीं बल्कि ईरान पर दबाव बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध केवल ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले जहाजों पर लागू होगा, जबकि अन्य देशों के लिए मार्ग खुला रहेगा। 20% सुरक्षा शुल्क की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अमेरिका का भारी खर्च होता है। इसी खर्च की भरपाई के लिए इस मार्ग से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20% सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल ट्रंप की घोषणा के बाद संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था (IMO) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एकतरफा शुल्क लगाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप नहीं माना जाता। कई शिपिंग विशेषज्ञों ने भी इस प्रस्ताव की वैधता और व्यवहारिकता पर सवाल उठाए हैं।  ईरान की चेतावनी ईरान की सैन्य कमान ने अमेरिका के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। ईरान ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा तथा इसके लिए अमेरिका और उसके सहयोगी जिम्मेदार होंगे।  क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नई पाबंदी वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकती है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Senior Republican Senator Lindsey Graham speaking at a public event before his death, as tributes pour in from US and Israeli leaders.
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन, ईरान में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं; ट्रंप और नेतन्याहू ने जताया शोक

वॉशिंगटन: अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके कार्यालय के अनुसार, शनिवार शाम एक संक्षिप्त और अचानक आई बीमारी के बाद उनका निधन हुआ। बाद में शुरुआती मेडिकल जांच में मौत का कारण महाधमनी (एओर्टिक) डिसेक्शन बताया गया। ग्राहम के निधन के बाद अमेरिका और इजरायल के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, जबकि ईरान से जुड़े कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों, सोशल मीडिया खातों और समर्थकों ने उनके निधन पर खुशी जाहिर की। ट्रंप और नेतन्याहू ने दी श्रद्धांजलि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिंडसे ग्राहम को "महान सीनेटर" और "सच्चा देशभक्त" बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इजरायल ने अपना एक मजबूत मित्र खो दिया है।  ईरान से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग प्रतिक्रिया ईरान से जुड़े कुछ समाचार प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया खातों ने ग्राहम के निधन पर जश्न जैसा रुख अपनाया। कुछ पोस्टों में उनके खिलाफ तीखी टिप्पणियां की गईं और उनके लंबे समय से ईरान विरोधी रुख का उल्लेख किया गया। सोशल मीडिया पर कुछ ईरान समर्थक खातों ने ग्राहम की तस्वीर वाला एक ग्राफिक भी साझा किया, जिसमें लाल "X" का निशान लगाया गया था। इन पोस्टों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने जताया दुख ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने ग्राहम के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ग्राहम ईरानी जनता की स्वतंत्रता के समर्थक थे और लोकतंत्र समर्थक ईरानियों के बीच उनका सम्मान था। ईरान सरकार के मुखर आलोचक थे ग्राहम लिंडसे ग्राहम लंबे समय से ईरान की मौजूदा सरकार के आलोचक रहे थे। वे ईरान के खिलाफ कड़े अमेरिकी रुख के समर्थक माने जाते थे और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरानी विपक्ष तथा लोकतांत्रिक बदलाव के समर्थन में बयान दे चुके थे। लंबे राजनीतिक करियर का हुआ अंत दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम 2002 से अमेरिकी सीनेट के सदस्य थे। इससे पहले वे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य भी रह चुके थे। विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। उनके निधन से अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण आवाज का अंत माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
Commercial oil tankers transit the Strait of Hormuz amid heightened tensions between the United States and Iran over navigation and maritime security.
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद, अमेरिका ने बताया खुला, ईरान ने किया इनकार

US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर दोनों देशों के दावों में टकराव सामने आया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग खुला है, जबकि ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि ट्रांजिट परमिट के बिना यहां से गुजरना संभव नहीं होगा। अमेरिका का दावा- अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए रास्ता खुला अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत कानूनी रूप से यात्रा करना चाहते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान का इस जलडमरूमध्य पर कोई नियंत्रण नहीं है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। ईरान ने अमेरिकी दावे को बताया गलत फारसी खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (PGCA) ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के कारण फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन संभव नहीं है। प्राधिकरण ने कहा कि इस मार्ग से गुजरने के लिए ट्रांजिट परमिट अनिवार्य होगा और परमिट केवल आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाएंगे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बाद ही सामान्य आवाजाही बहाल की जाएगी। जहाज पर हमले के बाद बढ़ा सैन्य तनाव रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की दिशा में मिसाइल हमले किए। हमले के दौरान कंटेनर जहाज में आग लग गई और चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। अमेरिका का दावा- ईरान के 140 ठिकानों पर हमला अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इनमें कथित तौर पर मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, हथियार भंडार, संचार केंद्र और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर डाल सकता है।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
Oil tankers sailing through the Strait of Hormuz as U.S.-Iran tensions rise over maritime security and global energy supplies.
US-Iran Conflict: होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमले रोकने को अमेरिका का ईरान को अल्टीमेटम, बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। युद्धविराम खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और कूटनीतिक दबाव तेज हो गया है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जहाजों पर हमले रोकने और समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की सख्त चेतावनी अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और तेल टैंकरों पर होने वाले हमलों को तुरंत रोके तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को बिना किसी बाधा के खुला रखे। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो ईरान को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप ने युद्धविराम खत्म होने का किया ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। ट्रंप का दावा है कि ईरान ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई थी, लेकिन अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि अब हालात पहले जैसे नहीं हैं और आगे की कार्रवाई ईरान के व्यवहार पर निर्भर करेगी। अमेरिका की नई शर्तें मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि: होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई हमला नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त ट्रांजिट शुल्क नहीं लिया जाएगा। समुद्री व्यापार बाधित नहीं किया जाएगा। अमेरिका का कहना है कि इन शर्तों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रह सकेगी। ईरान ने अमेरिकी दावे खारिज किए ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया कि उसने सीधे वॉशिंगटन से बातचीत का अनुरोध किया है। तेहरान का कहना है कि यदि कोई बातचीत होगी तो वह कतर जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए होगी। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी सैन्य दबाव का जवाब दिया जाएगा। होर्मुज पर अमेरिकी मांगों का विरोध ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी गतिविधियां उसके अधिकार क्षेत्र और क्षेत्रीय व्यवस्थाओं से संबंधित हैं। तेहरान का आरोप है कि बाहरी देशों का हस्तक्षेप पहले से बने समझौतों के खिलाफ है और इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। हमलों को लेकर अमेरिका का रुख अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि जहाजों पर हमलों में ईरान समर्थित समूह शामिल भी हों, तब भी इसकी जिम्मेदारी ईरान की मानी जाएगी। वॉशिंगटन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। कूटनीतिक प्रयास भी जारी तनाव के बीच कतर ने दोनों देशों के बीच संवाद बहाल कराने की पहल की है। रिपोर्टों के अनुसार, कतर के अधिकारी तेहरान में बातचीत कर रहे हैं। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची के ओमान जाकर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समुद्री मार्गों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की संभावना जताई जा रही है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यह ओमान की खाड़ी को फारस की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज में स्थिति और बिगड़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
U.S. Capitol and Russian oil infrastructure with an Indian oil tanker, symbolizing proposed U.S. sanctions targeting countries importing Russian energy.
US Russia Sanctions: अमेरिका के नए रूस प्रतिबंध कानून से बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें, जानिए पूरा मामला

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध कानून की तैयारी कर रहा है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे देशों में भारत भी शामिल है, जो पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। क्या है नया अमेरिकी प्रस्ताव? अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के एक समूह ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों वाला विधेयक आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस पहल का नेतृत्व रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम और रोजर विकर तथा डेमोक्रेटिक सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन कर रहे हैं। सांसदों का तर्क है कि यूक्रेन युद्ध जारी रहने के कारण रूस की ऊर्जा आय को कम करना जरूरी है। इसलिए उन देशों पर भी आर्थिक दबाव बनाया जाए, जो रूस से ऊर्जा खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। भारत पर क्या पड़ सकता है असर? यदि प्रस्तावित कानून लागू होता है, तो रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक के शुरुआती मसौदे में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, हालांकि बाद में इसमें संशोधन किए गए हैं। अंतिम कानून में क्या प्रावधान होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यदि अमेरिका ऐसे टैरिफ लागू करता है, तो भारत के अमेरिका के साथ व्यापार और ऊर्जा आयात नीति पर असर पड़ सकता है। राष्ट्रपति को मिलेगी राहत देने की शक्ति प्रस्तावित विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देने का भी प्रावधान है कि वे राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए किसी मित्र देश को 180 दिनों तक की छूट दे सकें। इसका मतलब है कि यदि अमेरिका चाहे, तो भारत जैसे रणनीतिक साझेदार देशों को अस्थायी राहत मिल सकती है। अमेरिकी संसद में मिल रहा समर्थन इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में व्यापक समर्थन मिल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, 84 सीनेटर इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, विधेयक को अभी संसद से पारित होकर कानून बनना बाकी है। भारत क्यों है अहम? यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। इससे भारत को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली है। अमेरिका ने पहले कुछ परिस्थितियों में इस व्यापार के लिए अस्थायी छूट दी थी, लेकिन यह लाइसेंस 17 जून को समाप्त हो चुका है। आगे क्या होगा? यदि अमेरिकी कांग्रेस इस विधेयक को मंजूरी देती है और राष्ट्रपति इसे कानून का रूप देते हैं, तो भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लग सकते हैं। हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कानून का अंतिम स्वरूप क्या होता है और क्या अमेरिका भारत जैसे रणनीतिक साझेदार देशों को कोई विशेष छूट देता है। फिलहाल भारत और अन्य प्रभावित देश अमेरिकी फैसले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Qatari and Iranian officials meet in Tehran amid renewed diplomatic efforts to ease tensions between the United States and Iran.
Iran-US Tension: तनाव के बीच फिर शुरू हुई सुलह की कोशिश, तेहरान पहुंचा कतर का प्रतिनिधिमंडल

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास एक बार फिर तेज हो गए हैं। हालिया सैन्य टकराव के बाद कतर ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बातचीत बहाल कराने की पहल शुरू की है। इसी सिलसिले में कतर का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को तेहरान पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच रुकी हुई वार्ता को दोबारा शुरू कराने पर जोर दिया जा रहा है। कतर ने संभाली मध्यस्थ की भूमिका मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कतर के वार्ताकार तेहरान पहुंचे हैं ताकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव को कम किया जा सके। यह पहल ऐसे समय में हुई है, जब हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियों में कुछ नरमी देखने को मिली है और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिर से बनती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका की सहमति से शुरू हुई पहल रिपोर्ट के मुताबिक, कतर का यह प्रयास अमेरिका के साथ समन्वय में किया जा रहा है। मध्यस्थों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़े अविश्वास को कम करना और संवाद की प्रक्रिया को फिर से शुरू करना है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शुरुआती बातचीत सकारात्मक रहती है, तो आगे व्यापक वार्ता का रास्ता खुल सकता है। कैसे बढ़ा था अमेरिका-ईरान तनाव हालिया तनाव उस समय बढ़ा जब अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। सैन्य तैयारी के साथ कूटनीति भी जारी अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन ने सैन्य विकल्प खुले रखे हैं, लेकिन फिलहाल उसकी प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान तलाशना है। अमेरिकी प्रशासन सीमित सैन्य कार्रवाई के बाद तनाव को नियंत्रित रखते हुए बातचीत का अवसर बनाए रखना चाहता है। पुरानी वार्ता को फिर पटरी पर लाने की कोशिश कतर इससे पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं की मेजबानी कर चुका है। हालांकि हालिया सैन्य संघर्ष के बाद बातचीत की प्रक्रिया रुक गई थी। अब क्षेत्रीय देशों की कोशिश है कि दोनों पक्ष एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटें, ताकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम किया जा सके और किसी बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका को टाला जा सके। क्षेत्रीय स्थिरता पर टिकी नजरें विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कतर की मध्यस्थता और दोनों देशों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि अमेरिका और ईरान के रिश्ते टकराव की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर कूटनीति के जरिए समाधान का रास्ता निकलता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान में चल रही इस नई पहल पर टिकी हैं।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
U.S. President Donald Trump and Iranian flags displayed against the backdrop of rising Middle East tensions, following Trump's remarks on renewed talks with Iran.
Iran-US Tension: ट्रंप का दावा- ईरान फिर चाहता है बातचीत, लेकिन युद्धविराम खत्म होने की दी चेतावनी

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने दोबारा बातचीत की इच्छा जताई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भी वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उनके इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ट्रंप बोले- ईरान बातचीत चाहता है डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है और वॉशिंगटन इसके लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका पहले से अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। हालिया हमलों के बाद बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले दो दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कतर, बहरीन और कुवैत की दिशा में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कार्रवाई के दौरान ईरान में लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें मिसाइल लॉन्चर, हवाई अड्डों के रनवे और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 78 अन्य घायल हुए हैं। ट्रंप की नई चेतावनी नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने फिर हमला किया तो अमेरिका दस गुना अधिक ताकत से जवाब देगा। ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों, समुद्री जल शोधन संयंत्रों और खर्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों को भी संभावित लक्ष्य बताया। तनाव कम कराने की कोशिशें तेज सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। इसी सिलसिले में कतर के मध्यस्थ तेहरान पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई वार्ता को दोबारा शुरू कराने और क्षेत्रीय तनाव कम करने का रास्ता तैयार करना है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल वॉशिंगटन सीमित सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीतिक समाधान की रणनीति पर भी काम कर रहा है ताकि व्यापक युद्ध की स्थिति से बचा जा सके। बातचीत और सैन्य तैयारी साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सभी सैन्य विकल्प खुले हैं, लेकिन प्राथमिकता अब भी राजनयिक समाधान तलाशने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कतर और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटते हैं तो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की संभावना बन सकती है, हालांकि मौजूदा हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks during an interview while discussing Iran, security threats and possible U.S. military response.
Donald Trump: 'अगर मेरी हत्या हुई तो ईरान पर होगा सबसे बड़ा हमला', ट्रंप का बड़ा दावा

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि यदि उनकी हत्या होती है और इसके पीछे ईरान का हाथ होता है, तो उन्होंने पहले से ऐसे निर्देश जारी कर रखे हैं कि ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य हमला किया जाए। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह खुद ईरान के "नंबर-1 टारगेट" हैं। ट्रंप बोले- पहले ही दे चुका हूं निर्देश अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर उनके साथ कुछ भी होता है, तो अमेरिका ईरान पर ऐसी कार्रवाई करेगा जैसी दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उनके पास ऐसी कोई नई खुफिया जानकारी नहीं है, जिससे लगे कि उन पर तत्काल कोई हमला होने वाला है। क्यों आया ट्रंप का यह बयान? ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि इजरायल ने अमेरिका के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की है, जिसमें ईरान द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति को निशाना बनाने की कथित साजिश का उल्लेख किया गया है। इन रिपोर्टों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। खुद को बताया ईरान का 'नंबर-1 टारगेट' ट्रंप ने कहा कि ईरान कई वर्षों से उन्हें निशाना बनाना चाहता है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, "अगर मैं नहीं रहूंगा तो उम्मीद है कि आप मुझे याद करेंगे।" उन्होंने दावा किया कि वह ईरान के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य हैं और कहा कि ईरान के कई शीर्ष नेता पहले ही मारे जा चुके हैं तथा भविष्य में भी उसके नेतृत्व पर दबाव बना रहेगा। परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया रुख ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। उनका कहना था कि यदि भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता भी है, तो अमेरिका अपनी रणनीति के तहत उसका जवाब देगा। सुलेमानी की मौत के बाद बढ़ा विवाद न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में ट्रंप के आदेश पर बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हुई थी। इसके बाद से ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान उनसे बदला लेना चाहता है और वह खुद को ईरान के निशाने पर मानते हैं। बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच हाल के सैन्य घटनाक्रमों और तीखे बयानों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर दोनों देशों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बयानबाजी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
US and Iranian military forces exchange strikes as missile launches and air operations intensify across the Gulf region following attacks on strategic military bases.
अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज: अमेरिका ने 90 ठिकानों पर किए हमले, जवाब में ईरान ने बहरीन-कुवैत में दागीं मिसाइलें

US-Iran Conflict: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। अमेरिका ने 90 ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हालिया सैन्य अभियान में ईरान के लगभग 90 सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट, सैन्य ठिकाने और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की गई। अमेरिका का कहना है कि यह अभियान क्षेत्र में अमेरिकी हितों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया। ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, मिसाइलों और ड्रोन के जरिए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान के अनुसार, जिन प्रमुख ठिकानों पर हमला किया गया उनमें शामिल हैं: कुवैत का कैंप आरिफजान अली अल सलेम एयर बेस बहरीन का जुफफायर सैन्य ठिकाना शेख ईसा एयर बेस हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। IRGC की अमेरिका को कड़ी चेतावनी आईआरजीसी ने बयान जारी कर अमेरिका पर समझौते तोड़ने और आक्रामक कार्रवाई करने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि यदि अमेरिका ने आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखी तो जवाब और अधिक व्यापक होगा। आईआरजीसी ने कहा कि अगली कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी संसद अध्यक्ष का बयान ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि दादागिरी और वादाखिलाफी की अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका हमला करेगा तो ईरान उसका जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिका ने जारी किया अभियान का वीडियो अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभियान के कुछ ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो भी जारी किए हैं। इन वीडियो में ईरान के सैन्य ठिकानों, रनवे और मिसाइल लॉन्चरों पर सटीक हमले दिखाए गए हैं। CENTCOM ने कहा कि फिलहाल हवाई हमलों का यह चरण पूरा हो चुका है, लेकिन अमेरिकी सेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है और राष्ट्रपति के अगले निर्देश मिलते ही किसी भी नए अभियान के लिए तैयार है। पूरे पश्चिम एशिया में बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Parents encouraging a child to eat healthy food and stay active to help reduce the risk of type 2 diabetes.
परिवार में है डायबिटीज का इतिहास? बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा ऐसे करें कम, डॉक्टरों ने बताए असरदार उपाय

अगर परिवार में किसी को डायबिटीज है, तो अक्सर माता-पिता को यह चिंता रहती है कि कहीं उनके बच्चों को भी भविष्य में यह बीमारी न हो जाए। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक इतिहास जोखिम जरूर बढ़ाता है, लेकिन यह तय नहीं करता कि बच्चे को डायबिटीज होगी ही। सही खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स के अनुसार, बचपन में अपनाई गई अच्छी आदतें लंबे समय तक मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। क्या केवल जेनेटिक्स ही जिम्मेदार हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज केवल आनुवंशिक कारणों से नहीं होती। यह जेनेटिक प्रवृत्ति और जीवनशैली दोनों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। यदि माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीज है, तो बच्चे में इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन यह जोखिम बीमारी में बदलेगा या नहीं, यह काफी हद तक उसकी रोजमर्रा की आदतों पर निर्भर करता है। बचपन से डालें स्वस्थ खानपान की आदत डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को सख्त डाइट पर रखने की बजाय पूरे परिवार में हेल्दी खाने की आदत विकसित करनी चाहिए। दैनिक भोजन में शामिल करें: ताजे फल हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें और फलियां कम वसा वाले प्रोटीन हेल्दी फैट्स वहीं, इन चीजों का सेवन सीमित रखें: मीठे पेय पदार्थ पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड फूड फास्ट फूड विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे वही आदतें सीखते हैं जो वे घर में रोज देखते हैं। रोजाना शारीरिक गतिविधि है जरूरी बच्चों को जिम भेजने की जरूरत नहीं है। उन्हें ऐसी गतिविधियों के लिए प्रेरित करें जिनमें उन्हें आनंद आता हो। बेहतर विकल्प हो सकते हैं: साइकिल चलाना तैराकी क्रिकेट या फुटबॉल खेलना दौड़ना डांस करना स्केटिंग आउटडोर गेम्स डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को हर दिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। पर्याप्त नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण अक्सर लोग खानपान और एक्सरसाइज पर ध्यान देते हैं, लेकिन अच्छी नींद को नजरअंदाज कर देते हैं। कम नींद लेने से शरीर के उन हार्मोन्स पर असर पड़ता है जो नियंत्रित करते हैं: भूख भूख बढ़ाने वाले हार्मोन ब्लड शुगर वजन इसलिए बच्चों के लिए नियमित सोने और जागने का समय तय करना जरूरी है। साथ ही रात में मोबाइल और अन्य स्क्रीन का उपयोग कम करना चाहिए। स्क्रीन टाइम रखें सीमित लंबे समय तक मोबाइल, टीवी या टैबलेट का इस्तेमाल बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम कर देता है, जिससे: वजन बढ़ सकता है मोटापे का खतरा बढ़ता है नींद प्रभावित होती है टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है इसलिए स्क्रीन टाइम और एक्टिव प्ले के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है और बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। बार-बार प्यास लगना बार-बार पेशाब आना बिना कारण वजन घटना लगातार थकान महसूस होना गर्दन या बगल में काले, मखमली धब्बे (Acanthosis Nigricans) तेजी से वजन बढ़ना या मोटापा जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड शुगर टेस्ट, बीएमआई और कमर की माप जैसी जांच की सलाह भी दे सकते हैं। बच्चे वही सीखते हैं जो माता-पिता करते हैं विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे केवल सलाह नहीं, बल्कि अपने माता-पिता की आदतों की नकल करते हैं। यदि माता-पिता: संतुलित भोजन खाते हैं नियमित व्यायाम करते हैं समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाते हैं मीठे पेय पदार्थों से बचते हैं पर्याप्त नींद लेते हैं तो बच्चों में भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की संभावना अधिक रहती है। परिवार में डायबिटीज है तो घबराएं नहीं, सतर्क रहें डॉक्टरों का मानना है कि पारिवारिक इतिहास को डर की तरह नहीं, बल्कि समय रहते बचाव करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। जेनेटिक्स बदले नहीं जा सकते, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि बच्चे में डायबिटीज से जुड़े लक्षण दिखाई दें या परिवार में बीमारी का मजबूत इतिहास हो, तो चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Diplomatic and military tensions rise in the Middle East as Pakistan calls for dialogue following renewed US-Iran military clashes after the ceasefire collapsed.
अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर भड़का, पाकिस्तान ने की संयम की अपील; मध्यस्थता की पेशकश दोहराई

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि अंतरिम युद्धविराम (सीजफायर) अब समाप्त हो चुका है। लगातार दो दिनों से दोनों देशों के बीच हमले जारी हैं। इस बीच, पहले मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर चुका पाकिस्तान अब दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील कर रहा है। पाकिस्तान ने जताई चिंता पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुआ सैन्य संघर्ष किसी के हित में नहीं है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचे। पाकिस्तान ने कहा कि स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत से ही संभव है। मध्यस्थता की पेशकश पाकिस्तान ने यह भी कहा कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पहले हुए समझौतों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे। ट्रंप ने कहा- सीजफायर खत्म अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भी असर देखने को मिला और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी दर्ज की गई। दोनों ओर से जारी हैं हमले अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है तथा व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तनाव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो उसका जवाब और कड़े तरीके से दिया जाएगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। बढ़ी वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है, ताकि पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध की स्थिति से बचा जा सके।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
US and Iranian military forces remain on high alert as tensions escalate around the Strait of Hormuz following continued retaliatory strikes.
ईरान-अमेरिका तनाव गहराया: ट्रंप अधिकारी का दावा- महीनों तक चल सकते हैं हमले, होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। लगातार दो दिनों से दोनों देशों के बीच जवाबी हमले जारी हैं। इस बीच अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान ने आशंका बढ़ा दी है कि यह संघर्ष कुछ दिनों नहीं, बल्कि महीनों तक चल सकता है। अधिकारी ने संकेत दिया कि आगे की कार्रवाई काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रखता है या नहीं। अमेरिकी अधिकारी का दावा- संघर्ष लंबा खिंच सकता है अमेरिकी समाचार वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि मौजूदा सैन्य अभियान एक-दो दिन, एक सप्ताह या कई महीनों तक चल सकता है। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका का उद्देश्य ईरान को यह संदेश देना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपनी आक्रामक गतिविधियां जारी रखता है, तो अमेरिकी कार्रवाई भी जारी रहेगी। ट्रंप बोले- हर हमले का मिलेगा कई गुना जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच लागू अंतरिम युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उनका दावा है कि ईरान के हमलों के बाद अमेरिका अब सख्त सैन्य नीति अपनाएगा। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान अमेरिका पर एक हमला करेगा तो जवाब में उससे कई गुना बड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका ने 90 ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरी रात ईरान के लगभग 90 ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्ग को खुला रखना है। बताया गया कि इस अभियान में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान का पलटवार अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देता रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव की सबसे बड़ी वजह दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात इसी समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में यहां जारी सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है.  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Bhojpuri actress Anjana Singh and writer Akhilesh Kashyap controversy sparks social media discussion in entertainment industry.
'पोल खोल दी तो चर्चा हो जाएगी...' भोजपुरी इंडस्ट्री में नया विवाद, अंजना सिंह पर अखिलेश कश्यप के बयान से बढ़ी हलचल

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में एक नया विवाद चर्चा का विषय बन गया है। गीतकार और लेखक अखिलेश कश्यप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री अंजना सिंह को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव के करीबी माने जाने वाले अखिलेश कश्यप के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। 'अगर पोल खोल दी तो काफी चर्चा हो जाएगी' अखिलेश कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो वीडियो साझा किए हैं। पहले वीडियो में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कुछ लोग लगातार उनसे जवाब देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता। इसके बाद दूसरे वीडियो में उन्होंने कहा कि, "अगर मैंने पोल खोल दी तो फ्री में ही काफी चर्चा हो जाएगी।" साथ ही उन्होंने लखनऊ आने का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कुछ दिखाने की बात भी कही। हालांकि, इन बयानों में उन्होंने किसी आरोप के समर्थन में कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया है और न ही विवाद के पूरे कारण का खुलासा किया है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चाएं अखिलेश कश्यप के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स उनके बयान पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले पर अभिनेत्री अंजना सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कौन हैं अंजना सिंह? अंजना सिंह भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने कम उम्र में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की और शुरुआती वर्षों में ही कई फिल्मों में अभिनय कर अपनी पहचान बना ली। उन्होंने अपने करियर में दिनेश लाल यादव 'निरहुआ', पवन सिंह, रवि किशन समेत भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारों के साथ काम किया है। उनकी चर्चित फिल्मों में दिल ले गई ओढ़नियावाली, दिलदार सांवरिया, बिहारी रिक्शावाला, सांकी दरोगा, नागराज और खून भरी हमार मांग जैसी फिल्में शामिल हैं। निजी जीवन भी रहा चर्चा में अंजना सिंह ने वर्ष 2013 में अभिनेता यश कुमार मिश्रा से विवाह किया था। बाद में दोनों ने वर्ष 2018 में आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। दोनों की एक बेटी भी है। फिलहाल अखिलेश कश्यप के वायरल वीडियो और अंजना सिंह को लेकर दिए गए बयान चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, पूरे विवाद को लेकर दोनों पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
US President Donald Trump speaks to reporters aboard Air Force One, reiterating his claim that he helped prevent a nuclear conflict between India and Pakistan.
ट्रंप ने फिर दोहराया भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकने का दावा, बोले- 'परमाणु युद्ध टाल दिया, नोबेल शांति पुरस्कार का हूं हकदार'

Donald Trump on India-Pakistan Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। ब्रिटेन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो दोनों देशों के बीच संघर्ष परमाणु युद्ध में बदल सकता था। भारत-पाकिस्तान तनाव पर दोहराया पुराना दावा ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस पर एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष बेहद गंभीर हो चुका था। उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था। कई विमान मार गिराए गए थे और स्थिति परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रही थी। हमने समय रहते इसे रोकने का काम किया।" शहबाज शरीफ का किया जिक्र ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उनकी भूमिका की सराहना की थी। उनके अनुसार, संघर्ष रुकने से लाखों लोगों की जान बची। हालांकि, ट्रंप के इस दावे पर भारत की ओर से पहले भी अलग रुख सामने आ चुका है। 'मैंने आठ युद्ध रुकवाए' ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दुनिया के कई संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई। उन्होंने अजरबैजान-आर्मेनिया और कांगो-रवांडा जैसे विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक वह आठ युद्धों को रुकवाने में सफल रहे हैं। नोबेल शांति पुरस्कार पर जताई दावेदारी ट्रंप ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में उन्होंने अधिक शांति स्थापित करने का काम किया है और इसी कारण वह इस सम्मान के वास्तविक हकदार हैं। टैरिफ की धमकी का भी किया जिक्र अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने के लिए उन्होंने दोनों देशों को व्यापारिक टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी थी। उनके अनुसार, उन्होंने दोनों पक्षों से कहा था कि यदि संघर्ष जारी रहा तो अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठाएगा। भारत पहले ही कर चुका है दावे का खंडन भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम होने में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद ट्रंप ने कई बार संघर्ष रोकने का श्रेय लिया, लेकिन नई दिल्ली ने अमेरिकी मध्यस्थता के दावों को लगातार खारिज किया है। फिलहाल ट्रंप के ताजा बयान पर भारत सरकार की ओर से कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Italian Prime Minister Giorgia Meloni during his Türkiye visit, highlighting differences over Iran policy.
ट्रंप ने बदले सुर, तुर्किए में इटली की पीएम मेलोनी की तारीफ भी की और नाराजगी भी जताई

Donald Trump on Giorgia Meloni: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्किए दौरे के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर बदले हुए तेवर दिखाए। उन्होंने मेलोनी को "अच्छा इंसान" बताया, लेकिन ईरान से जुड़े मुद्दे पर सहयोग नहीं मिलने को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। ट्रंप के इस बयान को दोनों देशों के रिश्तों में आई हालिया तल्खी के बीच अहम माना जा रहा है। ट्रंप बोले- मेलोनी पसंद हैं, लेकिन उन्होंने गलती की तुर्किए की राजधानी अंकारा में ट्रंप ने कहा कि ईरान के मामले में मेलोनी के साथ उनके संबंध कुछ खराब हो गए थे क्योंकि उन्होंने अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने कहा, "मैं उन्हें पसंद करता हूं। वह वास्तव में एक अच्छी इंसान हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने इस मामले में गलती की।" हाल के महीनों में बढ़ी थी दोनों नेताओं के बीच दूरी कुछ समय पहले तक जॉर्जिया मेलोनी को ट्रंप का करीबी सहयोगी माना जाता था, लेकिन पिछले महीने दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी के बाद रिश्तों में तनाव आ गया। ट्रंप ने दावा किया था कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई थी। मेलोनी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे मनगढ़ंत बताया था। इस विवाद के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया था। ईरान मुद्दे पर भी बढ़ा था विवाद ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए थे। जब ट्रंप ने पोप लियो की ईरान संबंधी टिप्पणी की आलोचना की थी, तब मेलोनी ने उनका विरोध किया। बाद में ट्रंप ने आरोप लगाया कि इटली ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी किया था पोस्ट हाल ही में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर जॉर्जिया मेलोनी की एक तस्वीर साझा की थी। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा था, "रोक लगाने वाले आदेश की ज़रूरत है।" हालांकि इटली सरकार ने इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि ट्रंप अक्सर सोशल मीडिया पर उकसाने वाले बयान देते हैं और इटली ने इस पर प्रतिक्रिया न देने का फैसला किया है। पहले भी अमेरिका को नहीं मिली थी इजाजत मार्च में इटली ने सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों को उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इटली का कहना था कि अमेरिका ने इस संबंध में पहले से आवश्यक अनुमति नहीं ली थी। ट्रंप के ताजा बयान के बाद माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में पैदा हुई कूटनीतिक दूरी को कम करने की कोशिश शुरू हो सकती है।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
US military launches airstrikes on multiple military sites in southern Iran as tensions escalate over alleged attacks in the Strait of Hormuz.
अमेरिकी एयरस्ट्राइक से दक्षिणी ईरान में बड़ा हमला, तेहरान की चेतावनी- अमेरिका को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। ईरान के अनुसार, इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं। वहीं केशम (Qeshm) और खार्ग (Kharg) द्वीप पर तेज धमाकों की आवाजें सुनाई देने की भी खबर है। अमेरिका ने क्यों किया हमला? अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के कथित हमलों के जवाब में की गई। अमेरिका का आरोप है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर ईरान की कार्रवाई युद्धविराम समझौते का उल्लंघन थी। CENTCOM के मुताबिक, यह अभियान 7 जुलाई को चलाया गया और इसमें ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमला अमेरिकी सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन में 80 से अधिक ठिकानों पर सटीक हथियारों से हमला किया गया। इनमें शामिल हैं: एयर डिफेंस सिस्टम कमांड और कंट्रोल सेंटर तटीय रडार स्टेशन एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से अधिक तेज गति वाली नौकाएं अमेरिका का कहना है कि इन संसाधनों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। ईरान ने दी कड़ी चेतावनी हमलों के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की कार्रवाई की तीखी आलोचना की। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने समझौते का खुला उल्लंघन किया है और इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। यहां बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालिया घटनाओं के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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