US Iran Conflict

China calls for peace amid US Iran tensions with diplomats discussing Middle East crisis
मिडिल ईस्ट संकट: ट्रंप-ईरान टकराव के बीच चीन ने शांति के लिए बढ़ाया हाथ

बीजिंग/मिडिल ईस्ट: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच जहां दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, वहीं चीन ने युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बहरीन के साथ मिलकर शांति पहल चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल ज़यानी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि: चीन युद्ध खत्म कराने और स्थिरता लाने के लिए तैयार है बहरीन के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयास किए जाएंगे चीन का साफ संदेश: ‘आक्रामकता का विरोध’ वांग यी ने स्पष्ट किया कि: चीन किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ है क्षेत्र में संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान चाहता है चीन-पाकिस्तान की 5 सूत्रीय योजना चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक पांच सूत्रीय पहल भी पेश की है, जिसमें शामिल हैं: नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर हमले रोकना युद्धविराम लागू करना होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना समुद्री व्यापार और आवाजाही को सामान्य करना क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करना संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर जोर चीन ने कहा कि: युद्धविराम अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जरूरत है UN सिक्योरिटी काउंसिल को तनाव कम करने और बातचीत बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए बहरीन की चिंता बहरीन ने भी माना कि: खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा गंभीर खतरे में है हॉर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही प्रभावित हो रही है बहरीन ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के जरिए समाधान और चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही। ‘ग्लोबल साउथ’ पर फोकस चीन ने खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति बताते हुए कहा कि वह: पाकिस्तान के साथ मिलकर शांति बहाल करने में योगदान देगा खासकर छोटे और विकासशील देशों (Global South) के हितों की रक्षा करेगा

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Donald Trump addressing nation on Iran war claiming victory and warning of major military action soon
ट्रम्प का बड़ा दावा: ईरान जंग में जीत, 2-3 हफ्तों में बड़े हमले की चेतावनी

अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ जंग में “जीत” मिल चुकी है और जल्द ही हालात पूरी तरह उनके नियंत्रण में होंगे। ट्रम्प के दावे क्या हैं? ट्रम्प ने कहा: ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म हो चुकी है ईरानी नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचा है ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो गई है यह अभियान अपने अंतिम लक्ष्य के करीब है 2-3 हफ्तों में बड़े हमले की चेतावनी ट्रम्प ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। ‘स्टोन एज’ वाली सख्त चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो अमेरिका ईरान को “स्टोन एज” (पाषाण काल) में पहुंचा देगा। उनके इस बयान को अब तक का सबसे सख्त रुख माना जा रहा है। ईरान में सत्ता परिवर्तन का दावा ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नई लीडरशिप पहले के मुकाबले कम कट्टर है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान का पलटवार ट्रम्प के बयान के बाद ईरान की सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य कमान खातम अल-अनबिया ने कहा कि युद्ध जारी रहेगा अमेरिका और इजरायल को करारा जवाब दिया जाएगा आने वाले समय में और बड़े हमलों की चेतावनी दी गई बढ़ता तनाव, वैश्विक चिंता मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। दोनों पक्षों के सख्त बयानों से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Donald Trump speaking on Iran war with jets and nuclear symbols representing geopolitical tension
ट्रंप का बड़ा दावा: “जंग जीत ली”, बोले-ईरान परमाणु हथियार न रखने पर हुआ सहमत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस जंग को “जीत चुका है” और ईरान अब कभी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है। “ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की न्यूक्लियर क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा: अगर हमला नहीं किया जाता, तो ईरान दो हफ्ते में परमाणु हथियार बना लेता ईरान इसका इस्तेमाल इजरायल और पूरे पश्चिम एशिया में कर सकता था अमेरिकी कार्रवाई ने इस खतरे को पूरी तरह खत्म कर दिया “तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं हमारे विमान” ट्रंप ने यह भी कहा कि जंग में ईरान की नौसेना और वायुसेना खत्म हो चुकी है। उनके मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमान तेहरान और अन्य इलाकों के ऊपर उड़ान भर रहे हैं, जो उनकी सैन्य बढ़त को दिखाता है। “समझौते के लिए तैयार है ईरान” ट्रंप ने कहा कि ईरान अब समझौता करना चाहता है। बातचीत में शामिल प्रमुख नाम: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रूबियो विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जेरेड कुशनर हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह पहले से सब कुछ सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो चुका है। ईरान में “सत्ता परिवर्तन” का दावा ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उनके मुताबिक: मौजूदा नेतृत्व पहले से अलग है नए लोग सत्ता में आए हैं यह बदलाव “रिजीम चेंज” जैसा है पाकिस्तान की एंट्री: मध्यस्थता की पेशकश इस बीच पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर पहल दिखाई है। ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि: पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करना चाहता है शांति वार्ता के लिए “सार्थक और निर्णायक भूमिका” निभाने को तैयार है

surbhi मार्च 25, 2026 0
US-Israel Iran war day 25 escalation with strikes, Gulf tension and Strait of Hormuz crisis
US-Israel vs Iran War Day 25: बातचीत के दावे पर टकराव, हमले जारी; खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई जंग मंगलवार को 25वें दिन में प्रवेश कर गई। इस बीच शांति वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी दावे सामने आए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हमले लगातार जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ” और “प्रोपेगेंडा” बताया है। ईरान बनाम अमेरिका: बातचीत या रणनीति? ट्रंप का दावा: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी, जल्द समझौते के संकेत ईरान का जवाब: बातचीत से इनकार, कहा- अमेरिका समय खरीदने की कोशिश कर रहा डेडलाइन: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसे अब 5 दिन बढ़ाया गया ट्रंप का कदम: ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिन के लिए टाले विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती महंगाई और घरेलू दबाव के कारण ट्रंप इस युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। ईरान के अंदर क्या हो रहा है? तेहरान समेत कई शहरों में सरकार के समर्थन में रैलियां ईरान ने साफ किया- होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर रुख नहीं बदलेगा पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से बात कर शांति की अपील की खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा कुवैत: एक ही रात में 7 बार मिसाइल/ड्रोन अलर्ट सऊदी अरब: 20 ड्रोन हमले नाकाम बहरीन: लगातार चेतावनी सायरन ब्रिटेन: मिडिल ईस्ट में एयर डिफेंस सिस्टम भेजे खाड़ी देशों में सरकारें और आम लोग तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। इजराइल पर हमले और सिस्टम फेल ईरान ने इजराइल के उत्तरी हिस्से पर मिसाइल दागीं “डेविड्स स्लिंग” डिफेंस सिस्टम में खराबी, 2 मिसाइलें टकराईं हमले में कई लोग घायल इजराइली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और कहा कि सैन्य बढ़त को समझौते में बदला जा सकता है। लेबनान, इराक और सीरिया में जंग का विस्तार लेबनान: बेरूत के उपनगरों पर इजराइली हमला, हिज़्बुल्लाह को निशाना इराक: अमेरिका ने ईरान समर्थित गुट पर एयरस्ट्राइक की सीरिया: सैन्य बेस पर मिसाइल हमला विशेषज्ञों का कहना है कि इराक अब “सेकेंडरी बैटलफील्ड” बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद, जिससे तेल सप्लाई पर बड़ा असर दक्षिण कोरिया: 70% से ज्यादा तेल मिडिल ईस्ट से, संकट गहराया जापान: 95% तेल इसी रास्ते से, इमरजेंसी जैसे हालात UAE: इसे “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका के अंदर भी हलचल व्हाइट हाउस ने कहा- बातचीत को लेकर कोई फाइनल फैसला नहीं पेंटागन ने मीडिया एक्सेस में बदलाव किया मॉरिटानिया में अमेरिकी दूतावास ने आतंकी खतरे का अलर्ट जारी किया

surbhi मार्च 24, 2026 0
Iranian drones and missiles in action highlighting strategy over fighter jets in Middle East conflict
ईरान ने क्यों नहीं उतारे फाइटर जेट? अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जंग में ‘हवाई सन्नाटा’ की पूरी रणनीति समझिए

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को 18 दिन हो चुके हैं, जहां ईरान लगातार इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। लेकिन इस पूरी जंग में एक बात सबसे ज्यादा चर्चा में है- ईरान ने अब तक अपने लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? क्या यह कमजोरी है या सोची-समझी सैन्य रणनीति?   ईरान की एयरफोर्स: पुरानी ताकत, सीमित क्षमता ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक एयर फोर्स (IRIAF) के पास कागजों पर 400-600 विमान जरूर हैं, लेकिन इनमें से केवल 200-230 के आसपास ही फाइटर जेट हैं। इनमें से ज्यादातर विमान 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले खरीदे गए थे, जब ईरान के पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका से अच्छे संबंध थे। ईरान के प्रमुख लड़ाकू विमान: F-14 Tomcat – दुनिया में अब सिर्फ ईरान के पास सक्रिय   F-4 Phantom II और F-5 Tiger II – 1960-70 के दशक के   MiG-29 और Su-24 – सीमित संख्या में   स्वदेशी जेट: Kowsar और Saeqeh   विशेषज्ञों के अनुसार, ये स्वदेशी जेट भी आधुनिक नहीं बल्कि पुराने अमेरिकी डिजाइनों के अपग्रेडेड संस्करण हैं।   क्यों नहीं उतार रहा ईरान अपने फाइटर जेट? 1. तकनीकी रूप से पिछड़े विमान ईरान के अधिकांश जेट पुराने हैं और उनमें आधुनिक रडार, स्टेल्थ और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की कमी है। इसके मुकाबले इजरायल के पास F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ जेट हैं, जो रडार से बच निकलते हैं। 2. एयर डिफेंस का बड़ा खतरा अमेरिका और इजरायल के पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम हैं जैसे: Iron Dome Patriot Missile System ऐसे में ईरानी जेट दुश्मन के इलाके में घुसते ही मार गिराए जा सकते हैं। 3. स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस की समस्या अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को पुराने जेट्स के लिए जरूरी पार्ट्स नहीं मिलते। इससे कई विमान सिर्फ सीमित समय तक ही उड़ान भर सकते हैं या पूरी तरह निष्क्रिय हैं। 4. लंबी दूरी और रिफ्यूलिंग की कमी ईरान और इजरायल के बीच सीधी सीमा नहीं है। ऐसे में जेट्स को लंबी दूरी तय करनी होगी, जिसके लिए हवा में ईंधन भरने (air-to-air refueling) की जरूरत होती है- इसमें ईरान कमजोर है।   मिसाइल और ड्रोन: ईरान की असली ताकत जहां फाइटर जेट कमजोर हैं, वहीं ईरान ने मिसाइल और ड्रोन टेक्नोलॉजी में भारी निवेश किया है। मुख्य हथियार: बैलिस्टिक मिसाइल: Fateh-110, Sejjil   क्रूज मिसाइल: Soumar   ड्रोन: Shahed-136   इनकी खासियत: लंबी दूरी तक सटीक हमला   कम लागत (एक ड्रोन ~20,000 डॉलर)   बड़ी संख्या में एक साथ इस्तेमाल   इसके उलट, एक इंटरसेप्टर मिसाइल (जैसे पैट्रियट) की कीमत 30-40 लाख डॉलर तक होती है। यानी ईरान “कम लागत में ज्यादा नुकसान” की रणनीति अपना रहा है।   रणनीति या मजबूरी? विशेषज्ञों का मानना है कि: यह पूरी तरह कमजोरी नहीं, बल्कि “असिमेट्रिक वॉरफेयर” (Asymmetric Warfare) की रणनीति है   ईरान जानबूझकर अपने जेट्स को बचाकर रख रहा है   ड्रोन और मिसाइल से दुश्मन के संसाधनों को थका रहा है   ईरान का फाइटर जेट इस्तेमाल न करना उसकी कमजोरी कम, रणनीति ज्यादा दिखता है। वह सीधे हवाई युद्ध में उतरने के बजाय कम लागत वाले और प्रभावी हथियारों- मिसाइल और ड्रोन- के जरिए दबाव बना रहा है।    

surbhi मार्च 17, 2026 0
Cargo ships and naval vessels near Chabahar Port amid India denying claims of port use in Iran conflict
‘झूठा और मनगढ़ंत’: ईरान युद्ध में भारतीय बंदरगाहों के इस्तेमाल के दावों को भारत ने किया खारिज

अमेरिकी चैनल के इंटरव्यू के बाद विदेश मंत्रालय का सख्त बयान, लोगों को अफवाहों से सतर्क रहने की सलाह ईरान के साथ जारी तनाव के बीच भारतीय बंदरगाहों के इस्तेमाल को लेकर किए गए दावों पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने साफ कहा है कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान पर हमले के लिए भारतीय पोर्ट्स के इस्तेमाल की खबरें पूरी तरह “झूठी और मनगढ़ंत” हैं। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच X पर अपने फैक्ट-चेक अकाउंट के जरिए बयान जारी कर इन दावों को खारिज किया। मंत्रालय ने कहा कि एक अमेरिकी चैनल पर किए गए दावे पूरी तरह फर्जी हैं और लोगों को ऐसी आधारहीन टिप्पणियों से सावधान रहना चाहिए।   क्या था दावा? दरअसल, अमेरिकी सेना के पूर्व अधिकारी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने Open America News Network (OAN) को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि अमेरिकी ठिकानों और बंदरगाह सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है और अमेरिका को भारत के नौसैनिक बंदरगाहों पर निर्भर होना पड़ रहा है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई थीं, जिसके जवाब में भारत सरकार ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी किया।   विदेश मंत्रालय ने बताया ‘फेक न्यूज’ विदेश मंत्रालय (MEA) ने इंटरव्यू के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उस पर “फेक न्यूज” की मुहर लगाई और स्पष्ट किया कि भारतीय बंदरगाहों के इस्तेमाल का दावा पूरी तरह गलत है। मंत्रालय ने कहा कि भारत की संप्रभुता और विदेश नीति को लेकर भ्रामक सूचनाएं फैलाना गैर-जिम्मेदाराना है। सरकार ने लोगों से अपील की कि वे अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।   बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अफवाहों पर सख्ती मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इस तरह की खबरें संवेदनशील मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में किसी भी देश की भूमिका को लेकर फैलाई गई गलत सूचनाएं कूटनीतिक संबंधों पर असर डाल सकती हैं। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति के तहत निर्णय लेता है और किसी भी तरह की भ्रामक खबरों को बर्दाश्त नहीं करेगा।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0