गिरिडीह। गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड अंतर्गत मोतिलेदा पंचायत के लखठाही गांव में सोमवार को प्रेम प्रसंग को लेकर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। गांव का एक युवक अपनी प्रेमिका से शादी कराने की मांग को लेकर 150 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक के टावर पर चढ़ने की खबर फैलते ही गांव में अफरातफरी मच गई और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद बेंगाबाद थाना पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास में जुट गई। सुबह 4 बजे से शुरू हुआ ड्रामा दरअसल, लखठाही गांव निवासी 25 वर्षीय संजय रजक सोमवार सुबह करीब चार बजे गांव स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गया। बताया जा रहा है कि युवक नगर थाना क्षेत्र के चूड़ी मोहल्ला की रहने वाली एक युवती से प्रेम करता है। कुछ दिन पहले युवती अपने प्रेमी के घर भी पहुंची थी। दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पहले युवती अपने प्रेमी के घर भी पहुंची थी, जिसके बाद दोनों परिवारों के बीच शादी को लेकर बातचीत शुरू हुई थी। बताया जाता है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने की बात भी सामने आई थी। इसी बीच किसी बात को लेकर मामला बिगड़ गया और युवती पक्ष की ओर से थाना में युवक और उसके परिजन पर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई। कहा जा रहा है कि इस घटना से युवक काफी आहत हो गया। प्रेमिका और उसके परिजनों को बुलाने की मांग इसके बाद सोमवार सुबह वह सीधे गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गया और वहीं से अपनी मांग रखने लगा। युवक का कहना है कि जब तक उसकी प्रेमिका और उसके परिजनों को मौके पर नहीं बुलाया जाएगा, तब तक वह नीचे नहीं उतरेगा। ग्रामीणों ने देर तक युवक को समझाने की कोशिश की घटना की सूचना मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। काफी संख्या में ग्रामीण टावर के नीचे जमा होकर युवक को समझाने का प्रयास करते रहे। वहीं, पुलिसकर्मी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी युवक को समझाकर सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश में लगे रहे। पुलिस लगातार युवक से बातचीत कर रही है, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
तमिल फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री Trisha Krishnan एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को चेन्नई के रोहिणी सिल्वर स्क्रीन्स में उनकी फिल्म Karuppu की स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान ऐसा वाकया हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। शो खत्म होने के बाद जैसे ही Trisha Krishnan बाहर निकलीं, फैंस ने उनकी कार को घेर लिया और तस्वीरें व वीडियो लेने लगे। इस दौरान फैंस लगातार Joseph Vijay के नारे लगाते नजर आए। विजय के नाम पर शरमाईं तृषा वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक फैन ने Trisha Krishnan से कहा— “थलपति को मेरा नमस्ते कहना।” इस पर एक्ट्रेस मुस्कुराईं और जवाब दिया “कंडीपा” (जरूर), जिसके बाद उन्होंने तुरंत नजरें झुका लीं। इसी दौरान उनका शरमाना और मुस्कुराना कैमरों में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस ने कार को घेरकर लगाए नारे स्क्रीनिंग के बाद जैसे ही Trisha Krishnan बाहर निकलीं, फैंस ने उनकी कार को घेर लिया। कई लोग तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे और लगातार Joseph Vijay को लेकर सवाल पूछते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिससे यह मामला चर्चा में आ गया है। पहले भी साथ नजर आए थे तृषा और विजय Trisha Krishnan पहले भी कई मौकों पर Joseph Vijay के साथ नजर आ चुकी हैं, जिसके चलते दोनों के रिश्ते को लेकर अक्सर अटकलें लगती रही हैं। हाल ही में एक शादी समारोह में दोनों को एक साथ देखा गया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में जोड़ी फैंस के बीच यह वीडियो अब नए सिरे से चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे सिर्फ फैन मोमेंट बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे लेकर अलग-अलग कयास लगा रहे हैं।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान ने फिर से एक वीडियो जारी कर धनबाद SSP प्रभात कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने यहां तक दावा किया है कि धनबाद से दुबई भागने में उसकी मदद किस-किस ने की। प्रिंस खान ने इस दौरान ये भी दावा किया उसे अपराधी किसने बनाया और किस कारण उसने धनबाद छोड़ा। कैसे उसने तत्कालीन बैंक मोड़ थाना प्रभारी को 10 लाख रुपए देकर अपना पासपोर्ट बनवाया। प्रिंस खान का एक और नया वीडियो इस वीडियो के झारखंड में तेजी से वायरल होने के बाद मानो भूचाल आ गया हो। प्रिंस खान के इस वीडियो को भी झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट X पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई सवाल पूछे हैं। साथ ही धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को तत्काल हटाने की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान द्वारा विदेश से जारी कथित वीडियो को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। बाबूलाल मरांडी ने SSP पर उठाए सवाल बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 'आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर ही पुलिस के कथित काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं। धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का मीडिया में वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो न केवल पुलिस को चुनौती दे रहा है, बल्कि एसएसपी के कार्यकाल का मूल्यांकन भी कर रहा है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। पुलिस और क्रिमिनल्स में गैंगवार- बाबूलाल मरांडी बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 'ऐसा प्रतीत होता है कि मानो धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच गैंगवार चल रहा हो। दोनों पक्षों में होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा। फर्क बस इतना है कि एक वर्दी पहनकर कथित वसूली कर रहा है, तो दूसरा बिना वर्दी के। सबसे भयावह पक्ष सत्ता संरक्षण की आशंका है। जब चर्चा आम हो कि करोड़ों की 'बोली' लगाकर संवेदनशील जिलों में पोस्टिंग ली जाती है, तो जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। क्या ऐसी पोस्टिंग कानून सुधारने के लिए है या यह किसी एक्सटॉर्शन लाइसेंस की तरह काम कर रही है?'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुआ हमला जर्मनी की राजधानी बर्लिन में ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर एक व्यक्ति ने लाल रंग का तरल पदार्थ फेंक दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टमाटर केचप था। घटना उस समय हुई जब पहलवी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अपने समर्थकों का अभिवादन कर रहे थे। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कैसे हुआ हमला? वीडियो में देखा जा सकता है कि रेजा पहलवी समर्थकों की ओर हाथ हिला रहे थे। तभी पीछे से एक व्यक्ति अचानक आया और उन पर लाल तरल फेंक दिया। लाल पदार्थ उनके कोट और गर्दन पर गिरा सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया पुलिस ने मौके पर ही उसे हिरासत में ले लिया हालांकि, पहलवी इस घटना में पूरी तरह सुरक्षित रहे। हमले के बाद भी नहीं रुके पहलवी हमले के बावजूद रेजा पहलवी ने संयम बनाए रखा। उन्होंने समर्थकों का अभिवादन जारी रखा और बाद में अपनी कार में बैठकर वहां से रवाना हो गए। यह घटना उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच मौजूद गहरे राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाती है। सीजफायर पर की थी तीखी आलोचना घटना से कुछ देर पहले पहलवी ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि तेहरान के मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा करना एक बड़ी भूल होगी और पश्चिमी देशों को ईरान के साथ केवल "यथास्थिति" बनाए रखने की नीति छोड़नी चाहिए। कौन हैं रेजा पहलवी? रेजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। 1967 में उन्हें क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद उनका परिवार निर्वासन में चला गया। वे लंबे समय से ईरान की मौजूदा इस्लामिक सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं। हाल के महीनों में वे ईरान में राजनीतिक बदलाव की मांग को लेकर काफी सक्रिय रहे हैं।
शहर पर अचानक मधुमक्खियों का हमला दक्षिणी इज़राइल के नेटीवोट शहर में अचानक हजारों मधुमक्खियों के विशाल झुंड ने लोगों को दहशत में डाल दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि पूरा इलाका मधुमक्खियों से ढक गया है, जिससे लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने को कहा। मधुमक्खियों को हटाने और उनके अचानक आने के कारणों की जांच के लिए टीमें तैनात कर दी गई हैं। वायरल वीडियो और दहशत इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में मधुमक्खियां अचानक शहर में कैसे पहुंच गईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस कारण हवाई गतिविधियां भी प्रभावित हुईं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर धार्मिक व्याख्याएं इस घटना के बाद इंटरनेट पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई यूजर्स इसे धार्मिक संकेत या “दैवीय चेतावनी” के रूप में देख रहे हैं। कुछ लोगों ने बाइबिल की पुस्तक Isaiah 7:18 का हवाला दिया, जिसमें मधुमक्खियों और अन्य प्राकृतिक घटनाओं का उल्लेख मिलता है। वहीं कुछ यूजर्स ने कुरान की आयतों का जिक्र करते हुए इसे ऐतिहासिक संकेतों से जोड़ने की कोशिश की। विशेषज्ञों की अलग राय हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं अक्सर पर्यावरणीय बदलाव, मौसम या कॉलोनी मूवमेंट जैसे प्राकृतिक कारणों से होती हैं। मधुमक्खियों का एक जगह से दूसरी जगह अचानक बड़ी संख्या में जाना कोई असामान्य जैविक घटना नहीं है। मध्य पूर्व तनाव के बीच चर्चा तेज यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब मध्य पूर्व पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनावों से गुजर रहा है। इसी कारण सोशल मीडिया पर लोग इसे मौजूदा हालात से जोड़कर अलग-अलग व्याख्याएं कर रहे हैं। नेटीवोट में मधुमक्खियों का यह असामान्य झुंड भले ही प्राकृतिक घटना हो, लेकिन इसने लोगों के बीच डर, जिज्ञासा और धार्मिक बहस को जन्म दे दिया है। फिलहाल प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है और विशेषज्ञ इसके कारणों की जांच कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को ईरानी ड्रोन का पीछा करते हुए दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि कम कीमत वाला ईरानी ड्रोन अमेरिकी जेट को चकमा देने में सफल रहा। हालांकि, इस वीडियो की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में? आसमान में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट ईरान के कथित शाहेद ड्रोन का पीछा इसके बाद जमीन पर जोरदार धमाका और धुएं का गुबार सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का दावा है कि अमेरिकी जेट ड्रोन को रोकने में नाकाम रहा, जिससे सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। एरबिल में तेल प्लांट पर हमला रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना इराक के एरबिल शहर में एक ब्रिटिश कंपनी के मोटर ऑयल प्लांट पर हुए हमले से जुड़ी हो सकती है। प्लांट में भीषण आग लगी आसमान में काला धुआं फैल गया सुबह के समय तीन ड्रोन से हमला किए जाने की बात बताया जा रहा है कि यह प्लांट एक ब्रिटिश ब्रांड का था, जिसे सरदार ग्रुप संचालित करता है। आधिकारिक पुष्टि नहीं अब तक अमेरिका, ब्रिटेन या किसी सहयोगी देश की ओर से इस हमले या वायरल वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दावों की सत्यता पर सवाल बने हुए हैं। इराक में बढ़ता तनाव मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर इराक पर भी साफ दिख रहा है: अमेरिका और ईरान समर्थित समूहों के बीच टकराव बढ़ा कई सैन्य ठिकानों पर हमले इराक सरकार संतुलन बनाने की कोशिश में इराक ने कुछ समूहों को आत्मरक्षा की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अमेरिकी हितों पर हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्या संकेत देता है यह मामला? यदि वायरल दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि कम लागत वाले ड्रोन भी बड़ी सैन्य चुनौती बन सकते हैं पारंपरिक फाइटर जेट्स के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं
रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धुरंधर 2 (धुरंधर: द रिवेंज) बॉक्स ऑफिस पर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। रिलीज के सिर्फ 10 दिनों में फिल्म ने दुनियाभर में 1,226.44 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन कर लिया है। इस बीच एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां पाकिस्तान के कराची स्थित ल्यारी इलाके के कुछ लोगों ने फिल्म की कमाई में हिस्सा मांग लिया है। वायरल वीडियो से उठी मांग सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो, जिसे ‘कंपैरिजन टीवी’ नाम के यूट्यूब चैनल ने शेयर किया है, में ल्यारी के स्थानीय लोग फिल्म की सफलता पर प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में लोगों ने कहा कि अगर फिल्म ने इतनी बड़ी कमाई की है, तो इसका कुछ हिस्सा उनके इलाके के विकास में लगाया जाना चाहिए। कुछ लोगों ने 500 करोड़ रुपये देने की मांग की, जबकि कुछ ने फिल्म की कुल कमाई का 70-80% हिस्सा मांगा। उनका कहना है कि ल्यारी इलाके में सड़कें और बुनियादी सुविधाएं बेहद खराब हैं, जिन्हें सुधारने के लिए फंड की जरूरत है। बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड प्रदर्शन फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय सिनेमा की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का स्थान हासिल कर लिया है। इसने KGF चैप्टर 2 (1,215 करोड़) और जवान (1,160 करोड़) जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक: भारत में नेट कलेक्शन: 778.77 करोड़ रुपये भारत में ग्रॉस कलेक्शन: 930.44 करोड़ रुपये ओवरसीज कलेक्शन: 296 करोड़ रुपये वर्ल्डवाइड ग्रॉस: 1,226.44 करोड़ रुपये दसवें दिन फिल्म ने भारत में 62.85 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जिसमें हिंदी वर्जन का योगदान सबसे ज्यादा रहा। पहले पार्ट की भी रही थी बड़ी सफलता फिल्म के पहले भाग धुरंधर ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया था और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपये कमाए थे। यह हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही और विदेशी बाजारों में भी इसे शानदार रिस्पॉन्स मिला।
पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद प्रेरणादायक और मानवीय घटना सामने आई है, जहां एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की सूझबूझ और तत्परता ने एक जवान की जिंदगी बचा ली। बिहार पुलिस द्वारा साझा किए गए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है, और अब हर कोई इस पुलिसकर्मी की सराहना कर रहा है। क्या है पूरा मामला? घटना पटना के मीठापुर बाइपास की है, जहां से गुजर रहे एक CISF जवान को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई और वह सड़क पर ही गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। कुछ ही पलों में एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल वहां पहुंचा और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना देर किए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। कैसे बची जवान की जान? वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जवान लगभग बेहोशी की हालत में था। ट्रैफिक कॉन्स्टेबल ने लगातार CPR देकर उसकी सांसें वापस लाने की कोशिश की। कुछ ही देर में जवान को होश आ गया, जिससे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कॉन्स्टेबल ने जवान को निर्देश दिया कि वह सिर नीचे रखे, पैर फैलाए और पानी पीकर खुद को सामान्य करे। उनकी सतर्कता और सही समय पर लिए गए फैसले ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। बिहार पुलिस का संदेश इस घटना का वीडियो साझा करते हुए बिहार पुलिस ने लिखा- “बिहार पुलिस सदैव आपके साथ। हर संकट में आपके साथ, हर परिस्थिति में आपके लिए समर्पित। आपकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर तारीफ वीडियो वायरल होते ही लोग ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सैल्यूट इस जज्बे को।” दूसरे ने कहा, “CPR की ट्रेनिंग हर स्कूल-कॉलेज में जरूरी होनी चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “वेलडन, बदलता हुआ बिहार।” क्यों खास है यह घटना? यह घटना सिर्फ एक जान बचाने की नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सही प्रशिक्षण और त्वरित निर्णय की अहमियत को भी दर्शाती है। अगर हर नागरिक को CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीक की जानकारी हो, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
स्टेशन पर मचा हड़कंप कटिहार जंक्शन पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो सरकारी विभागों के जवान आपस में ही भिड़ गए। जीआरपी और मद्य निषेध विभाग के बीच हुई इस झड़प में एक सिपाही घायल हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शराब तस्करी की सूचना पर पहुंची थी टीम मद्य निषेध विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बंगाल के रास्ते आने वाली ट्रेन में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम कटिहार स्टेशन पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई शुरू करने लगी, तभी जीआरपी के जवान वहां पहुंच गए। बहस से शुरू हुई मारपीट प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि जीआरपी के जवानों ने मद्य निषेध टीम के काम में हस्तक्षेप किया और फिर मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया। वीडियो वायरल, जांच के आदेश घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरी झड़प का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट तलब की गई है। सिपाही देव शंकर कुमार घायल इस झगड़े में मद्य निषेध विभाग के सिपाही देव शंकर कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए कटिहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर मद्य निषेध विभाग का आरोप है कि जीआरपी जानबूझकर उनकी कार्रवाई में बाधा डालती है और इसी कारण यह विवाद हुआ। विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वे तस्करों को पकड़ने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपने ही वर्दीधारी साथियों के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस महकमे पर उठे सवाल इस घटना ने पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर कानून-व्यवस्था संभालने वाली ‘खाकी’ का इस तरह आपस में भिड़ना व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है।
नई दिल्ली: सोशल मीडिया सेंसेशन और Bigg Boss 19 की चर्चित कंटेस्टेंट Tanya Mittal ने आखिरकार अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत कर दी है। खास बात यह रही कि उन्हें डेब्यू के लिए किसी पारंपरिक हीरो के बजाय दिग्गज कॉमेडियन Rajpal Yadav के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला। यह डेब्यू एक विज्ञापन के जरिए हुआ है, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर रिलीज हुआ और तेजी से वायरल हो रहा है। इस अनोखे कोलैब ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है और इसे एक “फ्रेश और हटके” प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। विवादों के बाद वापसी और वादा निभाने की कहानी दरअसल, हाल ही में चेक बाउंस मामले में कानूनी मुश्किलों का सामना कर चुके Rajpal Yadav को इंडस्ट्री और बिजनेस जगत से भरपूर समर्थन मिला। इसी दौरान Yes Madam के सीईओ मयंक आर्य ने उन्हें अपने ब्रांड के विज्ञापन में काम देने का वादा किया था। अब यह वादा पूरा हो चुका है और यही विज्ञापन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह कदम न केवल एक कलाकार के प्रति समर्थन का संकेत है, बल्कि इंडस्ट्री में भरोसे और प्रतिबद्धता का उदाहरण भी माना जा रहा है। ‘छोटा डॉन’ अवतार में नजर आए राजपाल यादव इस विज्ञापन में Rajpal Yadav अपने लोकप्रिय किरदार ‘छोटा डॉन’ के अंदाज में दिखाई देते हैं। कहानी में वह गुंडों से घिरी Tanya Mittal को बचाने आते हैं और अपने खास कॉमिक स्टाइल में सब पर भारी पड़ते हैं। विज्ञापन का टोन हल्का-फुल्का और मनोरंजक है, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा है। खुद राजपाल यादव ने इसे शेयर करते हुए मजेदार कैप्शन दिया-“छोटा डॉन वापस आ गया…” सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया इस वीडियो को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं बेहद सकारात्मक रही हैं। कई यूजर्स ने इसे “क्यूट”, “मजेदार” और “आइकॉनिक कोलैब” बताया। खास तौर पर Tanya Mittal की एक्टिंग को लेकर लोगों ने सराहना की और इसे उनके करियर की शानदार शुरुआत माना। Bigg Boss से एक्टिंग तक का सफर Tanya Mittal को Bigg Boss 19 के दौरान ही निर्माता Ekta Kapoor की ओर से एक शो का ऑफर मिला था। हालांकि उस प्रोजेक्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है। फिलहाल, इस विज्ञापन को ही उनका पहला ऑन-स्क्रीन डेब्यू माना जा रहा है, जिसे दर्शकों ने खुलकर सराहा है।
झारखंड के हजारीबाग जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पूर्व मंत्री पर कोयला खनन परियोजना में काम कर रहे मजदूरों पर तीर-धनुष से हमला करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कोयला परियोजना में अचानक हमला, मजदूरों में अफरा-तफरी यह पूरा मामला हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र स्थित चट्टी बरियातू कोल परियोजना का बताया जा रहा है। यहां काम कर रहे मजदूरों पर अचानक हमला कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पूर्व मंत्री पर लगे गंभीर आरोप इस हमले का आरोप झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पहाड़ी के ऊपर खड़े होकर हाथ में तीर-धनुष लिए कंपनी के वर्करों और वाहनों की ओर निशाना साधते नजर आए। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कोयला खनन के विरोध से जुड़ा मामला बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद इलाके में चल रहे कोयला खनन कार्य को लेकर है। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का विरोध किया जा रहा था और उसी क्रम में यह घटना सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित परियोजना एनटीपीसी से जुड़ी बताई जा रही है, जहां खनन कार्य जारी है। तीर चलाने से मची दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूर्व मंत्री पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए और वहां से नीचे काम कर रहे मजदूरों की ओर तीर चलाया। इस दौरान मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां कंपनी के कर्मचारियों का दावा है कि इससे पहले भी उन्हें काम बंद करने के लिए धमकाया गया था। आरोप है कि यह घटना उसी विवाद का हिस्सा हो सकती है। जांच के बाद होगी कार्रवाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजनीति में भी गरमाया मुद्दा यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई है। विवादों से रहा है पुराना नाता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पहले भी अपने बयानों और गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार तीर-धनुष से हमले के आरोप ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।