अमेरिका ईरान तनाव

Indian rupee falls to record low against US dollar amid rising crude oil prices and global tensions.
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले ₹96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया

Indian Rupee सोमवार, 18 मई को भारी दबाव में नजर आया और शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर ₹96.25 प्रति डॉलर तक फिसल गया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सिर्फ करेंसी मार्केट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखने को मिली। कैसे टूटा रुपया? विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक: रुपया सुबह ₹96.19 प्रति डॉलर पर खुला बाजार खुलते ही बिकवाली बढ़ी कुछ ही समय में यह 44 पैसे टूटकर ₹96.25 पर पहुंच गया इससे पहले शुक्रवार को रुपया ₹95.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को वह रिकॉर्ड भी टूट गया। रुपये पर दबाव बढ़ाने वाली 3 बड़ी वजहें 1. कच्चा तेल 111 डॉलर के पार Brent Crude की कीमतें बढ़कर 111.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ जाता है। 2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती United States Dollar लगातार मजबूत बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 99.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। डॉलर मजबूत होने का मतलब है कि उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ना। 3. वैश्विक तनाव और बाजार में डर Middle East में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं, जिससे डॉलर की मांग और बढ़ जाती है। शेयर बाजार में भी भारी गिरावट रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकेतों का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखा। BSE SENSEX शुरुआती कारोबार में 833 अंक से ज्यादा टूटा 74,404.79 के स्तर तक फिसला NIFTY 50 234 अंक गिरकर 23,401.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। क्या कोई राहत भी है? एक राहत की बात यह रही कि हाल के दिनों में लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को कुछ खरीदारी की थी। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने 1,329 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह राहत फिलहाल काफी नहीं दिख रही। आगे क्या? विशेषज्ञों के मुताबिक अगर: कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं अमेरिका-ईरान तनाव गहराता है डॉलर मजबूत बना रहता है तो भारतीय रुपया और दबाव में आ सकता है। इसका असर महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Traders monitor Brent crude oil surge amid rising US-Iran tensions and global supply concerns.
111 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार में बढ़ी बेचैनी

Brent Crude और West Texas Intermediate की कीमतों में सोमवार, 18 मई को जोरदार उछाल देखने को मिला। इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 7% और एक महीने में 23% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। इस तेजी ने वैश्विक बाजारों में नई चिंता पैदा कर दी है। आखिर क्यों बढ़ रही है तेल की कीमत? तेल बाजार में यह उछाल मुख्य रूप से United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव की वजह से आया है। Donald Trump ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि समझौते के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। उनके इस बयान के बाद बाजार में बेचैनी बढ़ गई और निवेशकों ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है। अगर इस समुद्री मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। UAE की घटना ने बढ़ाया तनाव वीकेंड में United Arab Emirates के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट के बाहरी हिस्से में ड्रोन हमले के बाद आग लगने की खबर ने बाजार को और चिंतित कर दिया। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने साफ किया कि किसी के घायल होने या रेडिएशन लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और तेल बाजार में तेजी को और हवा मिली। सोने की कीमतों पर दबाव जहां कच्चा तेल तेजी से ऊपर गया, वहीं COMEX Gold की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब 0.62% टूटकर 4,533 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे इसकी मांग कमजोर हो जाती है। आगे क्या? अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत और व्हाइट हाउस की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर वैश्विक महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump speaking to media amid rising US-Iran tensions and military conflict debate
“ये अमेरिकी कायर हैं...”, ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, आलोचकों पर साधा निशाना

Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य ताकत पर सवाल उठाने वालों पर तीखा हमला बोला है। चीन दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान सैन्य मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, वे “देशद्रोही” मानसिकता दिखा रहे हैं। ट्रंप ने कहा: “ये अमेरिकी कायर हैं जो हमारे देश के खिलाफ हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान ईरान को “झूठी उम्मीद” देते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। “ईरान की नेवी और एयर फोर्स खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की नौसैनिक और वायु सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक: ईरान के 159 नौसैनिक जहाज अब नष्ट हो चुके हैं ईरानी एयर फोर्स लगभग खत्म हो गई है सैन्य तकनीक और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है हालांकि ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी ट्रंप ने कहा कि ईरान अब आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल “लूजर और एहसान फरामोश लोग” ही अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को घरेलू आलोचकों और विपक्षी नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी किया बचाव इस बीच Pete Hegseth ने भी ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति का बचाव किया। सीनेट एप्रोप्रिएशन सबकमेटी के सामने पेश होते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और Strait of Hormuz में तनाव के बावजूद अमेरिका के पास अभी भी “सभी कार्ड” मौजूद हैं। इंडो-पैसिफिक सहयोगियों को संदेश पीट हेगसेथ ने Dan Caine के साथ सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बढ़ते तनाव से वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल कीमतों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Pakistani airbase linked to reports of Iranian military aircraft shelter during US-Iran tensions.
पाकिस्तान पर दोहरा खेल खेलने के आरोप, ईरानी विमानों को शरण देने की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान चुपचाप ईरानी सैन्य और निगरानी विमानों को अपने एयरबेस पर शरण दी। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ईरान के कुछ विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर तैनात किए गए थे। इनमें ईरानी वायु सेना का RC-130 विमान भी शामिल बताया गया, जो टोही और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह विमान प्रसिद्ध लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस का विशेष सैन्य संस्करण माना जाता है। पाकिस्तान ने आरोपों से किया इनकार हालांकि Pakistan ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एयरबेस पर मौजूद विमान राजनयिक और प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े थे, जो संघर्ष विराम वार्ता के दौरान वहां पहुंचे थे। इस्लामाबाद ने दावा किया कि इन विमानों की कोई सैन्य भूमिका नहीं थी और मीडिया रिपोर्ट भ्रामक अटकलों पर आधारित है। लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि एक ओर पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ और निष्पक्ष देश के रूप में पेश कर रहा था, वहीं दूसरी ओर वह ईरान को अप्रत्यक्ष मदद भी पहुंचा रहा था। पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड पर फिर उठे सवाल इस विवाद के बाद पाकिस्तान के अतीत को भी याद किया जा रहा है। पूर्व ISI प्रमुख Hamid Gul का वह चर्चित बयान फिर चर्चा में है जिसमें उन्होंने कहा था कि ISI ने पहले अमेरिका की मदद से सोवियत संघ को हराया और फिर अमेरिका को भी अफगानिस्तान में मात दी। विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी और अमेरिकी सेना की वापसी के बाद भी अमेरिका पाकिस्तान की रणनीति को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करता रहा है। ट्रंप के करीबी नेता ने जताई चिंता इस मामले ने अमेरिकी राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है तो अमेरिका को ईरान और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के इजरायल विरोधी बयानों को देखते हुए ऐसे आरोप पूरी तरह चौंकाने वाले नहीं हैं। क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो इसका असर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों, मध्य पूर्व की कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल पाकिस्तान इन दावों को गलत बता रहा है, लेकिन इस मुद्दे ने एक बार फिर उसकी विदेश नीति और रणनीतिक विश्वसनीयता पर वैश्विक बहस छेड़ दी है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Traders monitoring sharp crude oil price swings during US-Iran conflict amid insider trading allegations
अमेरिका-ईरान जंग के बीच शेयर बाजार में ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ का शक, 70 मिनट में करोड़ों का खेल

US Iran War and Insider Trading in Share Market: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब शेयर और कमोडिटी बाजार में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या कुछ लोगों को युद्ध और संभावित समझौते से जुड़ी अंदरूनी जानकारी पहले से थी, जिसके आधार पर करोड़ों डॉलर का मुनाफा कमाया गया. 70 मिनट में हुआ बड़ा खेल रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6 मई की सुबह अमेरिकी समयानुसार करीब 3:40 बजे अचानक भारी मात्रा में क्रूड ऑयल “शॉर्ट” कॉन्ट्रैक्ट खरीदे गये. “शॉर्ट” ट्रेडिंग का मतलब होता है कि निवेशक यह दांव लगाता है कि किसी वस्तु की कीमत गिरने वाली है. बताया जा रहा है कि करीब 10,000 क्रूड ऑयल शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट खरीदे गये, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 920 मिलियन डॉलर यानी हजारों करोड़ रुपये थी. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी ट्रेडिंग सामान्य परिस्थितियों में बेहद असामान्य मानी जाती है. 70 मिनट बाद आयी बड़ी खबर इन सौदों के लगभग 70 मिनट बाद अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म Axios की रिपोर्ट सामने आयी, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए 14 सूत्रीय समझौते के करीब पहुंच चुके हैं. इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आयी. सुबह 7 बजे तक क्रूड ऑयल की कीमतें 12 प्रतिशत से ज्यादा नीचे चली गयीं. रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों ने पहले से शॉर्ट पोजिशन ली थी, उन्हें इस गिरावट से लगभग 125 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ. फिर अचानक पलटा बाजार हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. कुछ ही समय बाद ईरान ने “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” से जुड़ा बड़ा कदम उठाया, जिसके बाद तेल की कीमतों में फिर उछाल आ गया. तेल की कीमतें अचानक लगभग 8 प्रतिशत तक चढ़ गयीं. इस तेज उतार-चढ़ाव ने बाजार में और ज्यादा संदेह पैदा कर दिया. इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप क्यों लग रहे? सोशल मीडिया और वित्तीय जगत में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ ट्रेडर्स को संभावित डील की जानकारी पहले से थी? क्योंकि जिस समय इतनी बड़ी शॉर्ट ट्रेडिंग की गयी, उस समय तक सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई खबर सामने नहीं आयी थी जो तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का संकेत देती. मार्केट विश्लेषकों का कहना है कि अगर किसी को गोपनीय कूटनीतिक बातचीत या संभावित समझौते की जानकारी पहले से थी और उसी आधार पर ट्रेडिंग की गयी, तो यह इनसाइडर ट्रेडिंग के दायरे में आ सकता है. कोबेसी लेटर ने उठाये सवाल ग्लोबल मार्केट पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म “कोबेसी लेटर” ने इस पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक किया. उनके अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में अचानक की गयी ट्रेडिंग ने बाजार में गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. हालांकि अब तक अमेरिकी प्रशासन या नियामक एजेंसियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं की गयी है. युद्ध और बाजार का खतरनाक रिश्ता विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति अक्सर वैश्विक बाजारों को प्रभावित करती है. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कुछ निवेशक भारी मुनाफा कमाते हैं, लेकिन अगर इसमें अंदरूनी जानकारी का इस्तेमाल हो, तो यह गंभीर वित्तीय अपराध माना जाता है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Donald Trump angrily reacting during press briefing over question on Indian ships attack
Iran-US War: भारतीय जहाजों पर हमले के सवाल पर ट्रंप भड़के, पत्रकार को कहा–“Out”

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump का गुस्सा कैमरे पर देखने को मिला। Strait of Hormuz में भारतीय टैंकरों पर हुए हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने सख्त प्रतिक्रिया दी और पत्रकार को बाहर जाने के लिए कह दिया। क्या हुआ था? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को निशाना बनाया। इस घटना पर India ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे बेहद गंभीर बताया। सवाल पर क्यों भड़के ट्रंप? 18 अप्रैल को व्हाइट हाउस में प्रेस इंटरैक्शन के दौरान: CBS News की रिपोर्टर Olivia Rinaldi ने ट्रंप से सवाल पूछा सवाल था: भारतीय जहाजों पर हुए हमले पर अमेरिका का क्या रुख है? जैसे ही सवाल पूछा गया, ट्रंप नाराज हो गए और उन्होंने रिपोर्टर को “Out” कहकर बाहर जाने को कहा। यह पूरा वाकया कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर विवाद इस घटना के बाद: कई लोगों ने ट्रंप के व्यवहार की आलोचना की पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे खुद ओलिविया रिनाल्डी ने भी वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल पूछा था। कौन हैं ओलिविया रिनाल्डी? Olivia Rinaldi: CBS News में व्हाइट हाउस रिपोर्टर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान को कवर कर चुकी हैं “CBS Evening News” और “60 Minutes” जैसे कार्यक्रमों से जुड़ी रही हैं क्यों बढ़ा तनाव? United States और ईरान के बीच तनाव चरम पर है होर्मुज में जहाजों पर हमलों से स्थिति और गंभीर हो गई है कूटनीतिक बातचीत में फिलहाल कोई खास प्रगति नहीं दिख रही

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Residents in Tehran amid rising US-Iran tensions and uncertainty after failed peace talks.
US-Iran तनाव के बीच बढ़ी चिंता: शांति वार्ता नाकाम, जंग की आशंका से डरे ईरानी नागरिक

  मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के विफल होने के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिससे दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम पर भी खतरा मंडराने लगा है। युद्धविराम पर संकट, सैन्य गतिविधियां तेज अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और संभावित नाकेबंदी के संकेत दिए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच किसी भी समय हालात बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। आम लोगों में डर और अनिश्चितता ईरान के शहर करज और राजधानी तेहरान में रहने वाले लोगों के बीच गहरी चिंता देखी जा रही है। एक स्थानीय युवक ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि बातचीत से हल निकलेगा, लेकिन अब उसे लगता है कि युद्ध कभी भी दोबारा शुरू हो सकता है। वहीं, एक युवती ने उम्मीद जताई कि हालात जल्द सामान्य होंगे और बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा। इंटरनेट बंदी से बढ़ी मुश्किलें ईरान में पिछले कई हफ्तों से इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, जिससे लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर हमलों से बचाव के लिए उठाया गया है, लेकिन आम नागरिकों और व्यवसायों को इससे भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कंटेंट क्रिएटर और छोटे कारोबारी खासतौर पर प्रभावित हुए हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “कोई भी इस संघर्ष में नहीं जीत रहा है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी जरूर मुश्किल हो गई है।” आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता युद्ध और प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। लोगों का कहना है कि भले ही युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते जीवन आसान नहीं होगा। कुछ नागरिकों का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू राजनीतिक कारणों से सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिससे समझौते की संभावना और कम हो गई है। शांति वार्ता के अगले दौर की कोई तारीख तय नहीं हुई है। ऐसे में ईरान के लोग अनिश्चितता, डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Iranian missiles and US naval warships facing off in the Strait of Hormuz amid escalating tensions.
US-Iran तनाव चरम पर: ‘पहली मिसाइल में डुबो देंगे जहाज’, नाकेबंदी पर ईरान की सीधी चेतावनी

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी के जवाब में खुली धमकी देते हुए कहा है कि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी जहाजों को “पहली मिसाइल” में ही डुबो दिया जाएगा। नाकेबंदी के बाद भड़का ईरान अमेरिका ने हाल ही में ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर सख्त रोक लगा दी है। अमेरिकी सेना ने साफ चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर बल प्रयोग किया जाएगा। हजारों सैनिक और युद्धपोत तैनात कई जहाजों को वापस लौटाया गया होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ी निगरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नाकेबंदी शांति वार्ता फेल होने के बाद लागू की गई।  ईरान की खुली चेतावनी ईरान के सैन्य नेतृत्व ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दबाव बनाया, तो जवाब सैन्य होगा। अमेरिकी जहाज मिसाइलों के निशाने पर नाकेबंदी को “उकसावे की कार्रवाई” बताया युद्धविराम टूटने की चेतावनी ईरान ने यह भी कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो पूरे क्षेत्र में व्यापार और शिपिंग बाधित हो सकती है।  ट्रंप का सख्त रुख, बढ़ी सैन्य तैनाती डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में हजारों अतिरिक्त सैनिक भेजे गए कई एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात रणनीति: ईरान को समझौते के लिए मजबूर करना  वैश्विक असर, तेल बाजार पर दबाव होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। सप्लाई बाधित होने का खतरा तेल कीमतों में उछाल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर शांति वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। पहले दौर की वार्ता फेल दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी सीजफायर भी खतरे में आगे क्या? अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की धमकी ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव: बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा सकता है पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान के अगले कदम और संभावित शांति वार्ता पर टिकी हुई है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Donald Trump speaking on Iran nuclear program and US-Iran tensions during a press interview.
“जंग अंत के करीब” – Donald Trump का बड़ा दावा, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त संदेश

वॉशिंगटन: अमेरिका और Iran के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच चल रही जंग अब अपने अंत के करीब है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाया होता, तो तेहरान अब तक परमाणु हथियार बना चुका होता। “परमाणु हथियार होता तो ‘सर’ कहना पड़ता” Donald Trump ने तीखे अंदाज में कहा: “अगर ईरान के पास परमाणु बम होता, तो आज सबको उन्हें ‘सर’ कहना पड़ता।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है। “ईरान को उबरने में लगेंगे 20 साल” ट्रंप के मुताबिक: अमेरिका और Israel के हमलों से ईरान को भारी नुकसान हुआ है देश को दोबारा खड़ा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं सीजफायर के बावजूद जारी दबाव दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है, जिससे हालात कुछ हद तक शांत हुए हैं। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि: अमेरिका का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है ईरान पर दबाव बनाए रखा जाएगा बातचीत के संकेत Donald Trump ने यह भी कहा कि: ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है जल्द ही बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है सूत्रों के मुताबिक, Islamabad में बैक-चैनल वार्ता जारी है। अमेरिका का फोकस ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी रोक भविष्य में किसी भी परमाणु खतरे को खत्म करना ट्रंप के बयान से संकेत मिलते हैं कि एक ओर अमेरिका युद्ध खत्म होने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान पर कड़ा दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात पूरी तरह शांत होते हैं या फिर तनाव दोबारा बढ़ता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Donald Trump speaking on US Iran nuclear negotiations amid rising tensions and diplomatic talks
US–Iran Tension: इस्लामाबाद वार्ता फेल के बाद ‘झुका’ ईरान? ट्रंप का बड़ा दावा

United States और Iran के बीच Islamabad में हुई 21 घंटे लंबी शांति वार्ता भले ही बेनतीजा रही, लेकिन अब हालात नया मोड़ लेते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि Tehran ने खुद आगे बढ़कर समझौते के लिए संपर्क किया है। ‘ईरान डील के लिए बेताब’–ट्रंप ट्रंप ने कहा: “ईरान ने हमें कॉल किया है” “वे हर हाल में समझौता करना चाहते हैं” “वे डील के लिए उत्सुक हैं” हालांकि, इस दावे पर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परमाणु मुद्दा बना सबसे बड़ा अड़ंगा ट्रंप ने साफ किया: अगर ईरान अपनी न्यूक्लियर क्षमता बनाए रखता है, तो समझौता मुश्किल है “ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा” उन्होंने बताया कि बातचीत में कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन परमाणु हथियारों के मुद्दे पर गतिरोध जारी रहा। ‘मुझे पूरा भरोसा है, वे मान जाएंगे’ ट्रंप ने भरोसा जताते हुए कहा: “मुझे यकीन है कि ईरान आखिरकार मान जाएगा” “अगर वे नहीं मानते, तो कोई समझौता नहीं होगा” नाकेबंदी से बढ़ाया दबाव अमेरिका ने पहले ही: Strait of Hormuz और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है, ताकि तेहरान पर बातचीत के लिए दबाव बनाया जा सके। ‘दुनिया को ब्लैकमेल नहीं करने देंगे’ ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाते हुए कहा: “वे दुनिया को ब्लैकमेल कर रहे हैं” “हम ऐसा होने नहीं देंगे” क्या आगे बन सकता है समझौता? मौजूदा हालात में: एक तरफ अमेरिका आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ा रहा है दूसरी तरफ बातचीत की संभावना भी बनी हुई है अगर ट्रंप का दावा सही साबित होता है और Iran नरमी दिखाता है, तो जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता शुरू हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस उभरती कूटनीतिक हलचल पर टिकी है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Oil tanker passing through Strait of Hormuz amid rising US-Iran tensions and global energy concerns.
दुनिया की ‘तेल नली’ पर संकट: होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी से वैश्विक बाजार में हलचल, भारत पर भी असर तय

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े बंदरगाहों पर नाकेबंदी की घोषणा के बाद दुनिया भर के तेल बाजार में अनिश्चितता गहरा गई है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20% परिवहन होता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य चेतावनियों ने इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। United States Central Command ने स्पष्ट किया है कि यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू होगी, हालांकि “न्यूट्रल ट्रांजिट” को रोका नहीं जाएगा। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि मंगलवार को हल्की गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समयानुसार सुबह करीब 8:30 बजे ब्रेंट क्रूड 1.24% गिरकर 98.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी पूरी तरह लागू होती है, तो तेल कीमतें 100 डॉलर के पार स्थिर हो सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। ईरान की कड़ी चेतावनी अमेरिकी कदम के जवाब में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य जहाज को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। ईरान ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर वह निर्णायक सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट तनाव के कारण होर्मुज मार्ग पर शिपिंग ट्रैफिक में भारी गिरावट दर्ज की गई है: सामान्य समय की तुलना में जहाजों की आवाजाही लगभग 90% तक कम खाड़ी क्षेत्र में 187 टैंकरों में 17.2 करोड़ बैरल तेल मौजूद युद्धविराम के बाद केवल 58 जहाज ही इस मार्ग से गुजर पाए टैंकर कंपनियां जोखिम से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। तेल सप्लाई पर संकट के संकेत ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार: मार्च में ईरान ने 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात किया अप्रैल में यह घटकर 17.1 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया साथ ही, लगभग 18 करोड़ बैरल तेल पहले से समुद्र में स्टोरेज के रूप में मौजूद है, जो आपूर्ति संकट को कुछ समय तक संभाल सकता है, लेकिन स्थिति लंबी खिंचने पर जोखिम बढ़ जाएगा। भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर देश पर पड़ सकता है: कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है रुपया कमजोर पड़ सकता है हालांकि हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ ढील के बाद भारत को ईरानी तेल आयात का मौका मिला था, लेकिन मौजूदा संकट इस सप्लाई को फिर से प्रभावित कर सकता है। एशिया पर सबसे ज्यादा दबाव होर्मुज से गुजरने वाला अधिकांश तेल एशियाई देशों–खासकर चीन और भारत–को जाता है। ऐसे में यह संकट एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे ज्यादा असर डाल सकता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
US and Iran diplomatic meeting illustration showing peace talks tension over Middle East geopolitical conflict
US-Iran Peace Talks: क्या बनेगी ऐतिहासिक डील या भड़क सकती है नई जंग?

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: वैश्विक कूटनीति के बेहद अहम मोड़ पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने जा रही है, जिसकी मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच यह बातचीत उम्मीद की किरण भी है और आशंकाओं से भरी भी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन सख्त चेतावनी भी दी है कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं होगी। ऐसे में यह वार्ता विश्वास और अविश्वास के बीच संतुलन साधने की चुनौती बन गई है। लेबनान बना सबसे बड़ा शुरुआती विवाद इस वार्ता की शुरुआत से पहले ही लेबनान का मुद्दा सबसे बड़ी अड़चन बनकर सामने आया है। ईरान चाहता है कि लेबनान में पूर्ण युद्धविराम लागू हो, जबकि इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को रोकने के मूड में नहीं है। इस टकराव ने वार्ता की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इसमें तीसरे पक्ष की भूमिका भी बेहद अहम है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। ईरान इसे अपना संप्रभु क्षेत्र बताते हुए नए ट्रांजिट नियम और टोल लागू करना चाहता है, जबकि अमेरिका ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह मुद्दा केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला बन चुका है। परमाणु कार्यक्रम पर आमने-सामने ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस वार्ता का सबसे संवेदनशील और जटिल पहलू है। डोनाल्ड ट्रंप का स्पष्ट रुख है कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना होगा, जबकि ईरान परमाणु अप्रसार संधि का हवाला देते हुए शांतिपूर्ण उपयोग के लिए इसे अपना अधिकार बता रहा है। यही मतभेद इस मुद्दे को सबसे कठिन बना देता है। ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ पर टकराव मध्य पूर्व में ईरान का प्रभाव उसके “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” नेटवर्क के जरिए मजबूत होता है, जिसमें लेबनान, यमन और गाजा के संगठन शामिल हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताता है। सीरिया में हालिया घटनाओं के बावजूद ईरान इस नेटवर्क को छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। $120 अरब की मांग ने बढ़ाई मुश्किल वार्ता से पहले ही ईरान ने अपनी जमी हुई लगभग 120 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंध हटाने की मांग रख दी है। अमेरिका ने इस पर अभी तक कोई स्पष्ट सहमति नहीं दी है, जिससे यह आशंका बनी हुई है कि यह मांग वार्ता को पटरी से उतार सकती है। क्या होगा नतीजा? इन सभी जटिल मुद्दों के बीच यह साफ है कि यह वार्ता या तो इतिहास रच सकती है या फिर तनाव को और गहरा कर सकती है। अगर दोनों पक्ष लचीलापन दिखाते हैं, तो मध्य पूर्व में शांति की नई शुरुआत हो सकती है, लेकिन अगर मतभेद कायम रहे, तो यह टकराव और गंभीर रूप ले सकता है।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Iran war tensions with Israel and global concerns over escalating Middle East conflict
ईरान का बड़ा बयान: मुआवजा मिलने तक जारी रहेगी जंग, प्रतिबंध हटाने और अमेरिकी दखल न देने की मांग

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान ने कहा है कि जब तक उसे युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने कहा कि ईरान की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं- सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और अमेरिका यह गारंटी दे कि भविष्य में वह किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं करेगा। रजेई ने टीवी बयान में कहा कि ईरानी सेना पूरी ताकत से ऑपरेशन चला रही है और नया नेतृत्व हालात को मजबूती से संभाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह युद्ध एक हफ्ते में खत्म हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख की वजह से संघर्ष लंबा खिंच गया। इजराइल पर लगातार मिसाइल हमले इजराइल की सेना (IDF) के मुताबिक, ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हालांकि ताजा हमले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और मिसाइल खुले इलाके में गिरी। तेल अवीव, पेटाह टिक्वा और आसपास के इलाकों में सायरन बजाए गए, जिसके बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। बाद में इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने खतरा टलने की पुष्टि की। अमेरिका में मतभेद, ट्रम्प के बयान चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना क्षमता को खत्म करना जरूरी है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं बताए जा रहे, जबकि कुछ अधिकारियों ने विरोध में इस्तीफा भी दिया है। वैश्विक असर: तेल संकट और कूटनीतिक हलचल तेज ईरान-इजराइल तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। जापान ने तेल संकट को देखते हुए अपने भंडार जारी करने का फैसला लिया है। दक्षिण कोरिया ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर चिंता जताई है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। जमीनी हालात: हमले, मौतें और राहत कार्य जारी तेहरान में एक हमले में एक प्रोफेसर और उनके दो बच्चों की मौत हो गई, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, मलबे में फंसे एक बच्चे को सुरक्षित निकालने का वीडियो भी सामने आया है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Mojtaba Khamenei receives North Korea’s support amid global divisions over Iran’s new Supreme Leader.
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को मिला उत्तर कोरिया का समर्थन, दुनिया दो खेमों में बंटी

  तेहरान/प्योंगयांग: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भी तेज हो गई है। अब North Korea ने भी खुले तौर पर उनके नेतृत्व का समर्थन किया है और अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को “अवैध सैन्य कार्रवाई” बताया है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, देश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ईरान के लोगों को अपने सर्वोच्च नेता चुनने का पूरा अधिकार है और प्योंगयांग तेहरान के इस फैसले का सम्मान करता है।   28 फरवरी के हमले के बाद बदला नेतृत्व मध्य पूर्व में मौजूदा संकट की शुरुआत तब हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei को निशाना बनाया, जिसमें उनकी मौत हो गई। इसके बाद ईरान की सर्वोच्च धार्मिक परिषद, Assembly of Experts ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना। इस फैसले के बाद दुनिया के कई देशों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जो स्पष्ट रूप से अलग-अलग खेमों में बंटी दिखाई दे रही हैं।   इन देशों और संगठनों ने किया समर्थन मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व का समर्थन करने वालों में कई देश और संगठन शामिल हैं। Vladimir Putin की अगुवाई वाला Russia ईरान के साथ “अटूट साझेदारी” की बात कह चुका है।   China ने भी कहा कि यह फैसला ईरान के संविधान के तहत लिया गया है और बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।   Haitham bin Tariq के नेतृत्व वाला Oman भी नए नेतृत्व को बधाई दे चुका है।   Mohammed Shia al-Sudani की सरकार वाले Iraq ने भी मोजतबा खामेनेई पर भरोसा जताया है।   यमन के Houthi Movement ने इसे “इस्लामिक क्रांति की नई जीत” बताया।   अब North Korea ने भी खुलकर समर्थन कर दिया है।   इन देशों ने जताया विरोध दूसरी ओर कई देशों ने नए नेतृत्व की आलोचना की है। Donald Trump ने मोजतबा खामेनेई को “कमजोर नेता” बताते हुए कहा कि उनके पास ईरान के लिए अलग विकल्प हो सकता है।   Israel के विदेश मंत्रालय ने उन्हें “एक और तानाशाह” बताया और कहा कि उनकी नीतियां भी उनके पिता की तरह हिंसक होंगी।   रिपोर्टों के मुताबिक इज़राइली सेना ने मोजतबा खामेनेई को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है।   उत्तर कोरिया की कड़ी प्रतिक्रिया उत्तर कोरिया ने अमेरिका और इज़राइल के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता को कमजोर करती है। प्योंगयांग ने कहा कि किसी भी देश की राजनीतिक व्यवस्था और क्षेत्रीय अखंडता पर हमला पूरी दुनिया द्वारा निंदा किए जाने योग्य है।   किम जोंग उन ने कराया मिसाइल परीक्षण इसी बीच उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong Un ने देश के सबसे बड़े युद्धपोत से रणनीतिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण भी करवाया। KCNA के अनुसार यह परीक्षण Choe Hyon नाम के नए विध्वंसक युद्धपोत से किया गया। किम जोंग उन ने इस दौरान कहा कि देश के लिए “मजबूत और विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना बेहद जरूरी है।”   वैश्विक राजनीति में बढ़ता तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष में उत्तर कोरिया जैसे परमाणु हथियार संपन्न देश की खुली भागीदारी से स्थिति और जटिल हो सकती है। यह भी माना जा रहा है कि अगर यह टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर, ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर दुनिया साफ तौर पर दो खेमों में बंटती दिखाई दे रही है-एक तरफ ईरान के सहयोगी देश हैं, जबकि दूसरी ओर अमेरिका और उसके करीबी सहयोगी इस बदलाव को चुनौती दे रहे हैं।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0