कच्चा तेल

Share Market
शेयर बाजार में शानदार वापसी, सेंसेक्स 400 अंक उछला; निफ्टी 24,100 के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत दी। पिछले कारोबारी सत्र में मुनाफावसूली के दबाव के बावजूद बाजार ने शानदार वापसी की और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक उछल गया। वहीं, निफ्टी भी 24,100 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रहा। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के कारण देखने को मिली।   कारोबार की शुरुआत में बीएसई का सेंसेक्स 367.18 अंक की बढ़त के साथ 77,358.40 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 104.75 अंक चढ़कर 24,126.40 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में आईटी और एविएशन सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। एचसीएल टेक और इंडिगो के शेयर करीब दो-दो प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।   कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी सबसे बड़ा सहारा   विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की तेजी का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। ब्रेंट क्रूड का भाव घटकर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो पिछले चार महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है। तेल की कीमतों में कमी से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है और इससे कंपनियों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।   वैश्विक संकेतों से भी मिला समर्थन जापान के निक्केई और टोपिक्स सूचकांकों में 1.3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे। हालांकि हांगकांग के हैंग सेंग, शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलियाई बाजारों में कुछ दबाव देखने को मिला।   आगे भी बनी रह सकती है तेजी बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। निवेशकों का सुधरता भरोसा आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार को और मजबूती दे सकता है।

abhishek singh जून 25, 2026 0
Oil and cargo ships safely transit the Strait of Hormuz carrying supplies bound for India.
अमेरिका-ईरान समझौते से भारत को राहत, तेल और LPG लेकर 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य

  अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की ओर आने वाले तेल, एलपीजी और अन्य जरूरी सामान लेकर चल रहे 11 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया रणनीतिक समुद्री मार्ग रणधीर जायसवाल ने बताया कि 17 जून को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत आने वाले 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय ध्वज वाले 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जबकि हाल ही में दो अन्य जहाज भी इस क्षेत्र में पहुंचे हैं। तीन भारतीय तेल टैंकरों में लाखों टन कच्चा तेल विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षित रूप से गुजरने वाले जहाजों में भारतीय ध्वज वाले तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक जहाज में 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा एक विदेशी ध्वज वाला एलपीजी वाहक और एक विदेशी ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर भी इस काफिले का हिस्सा रहे। खाद लेकर आ रहे छह भारी मालवाहक पोत जायसवाल ने बताया कि छह विदेशी ध्वज वाले भारी मालवाहक जहाज भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इन जहाजों में खाद (फर्टिलाइजर) लदा हुआ है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बाकी भारतीय जहाजों के भी जल्द पार होने की उम्मीद विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले शेष जहाज भी जल्द ही सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लेंगे। सरकार लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के संपर्क में है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है। ऐसे में इस मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
Oil storage tanks and crude oil facilities symbolize global supply disruptions caused by the Middle East conflict and energy crisis.
ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर, 115 करोड़ बैरल सप्लाई प्रभावित; रणनीतिक भंडार दशकों के निचले स्तर पर

  नई दिल्ली/वर्साय: ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष और मध्य-पूर्व में कई महीनों तक बनी अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरे संकट में डाल दिया है। एनालिटिक्स फर्म केपलर (Kpler) की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के लगभग चार महीनों के दौरान वैश्विक बाजार से करीब 115 करोड़ बैरल (1.15 बिलियन बैरल) तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के दौरान मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में भारी बाधा आई, जिसके कारण दुनिया भर के रणनीतिक (Strategic) और वाणिज्यिक (Commercial) तेल भंडार तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक भंडार से करीब 19 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है। रणनीतिक तेल भंडार कई दशकों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) से जुड़े देशों के रणनीतिक तेल भंडार 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, अमेरिका का आपातकालीन तेल भंडार भी कई दशकों के निचले स्तर पर बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्साय में आयोजित जी7 बैठक के दौरान कहा कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता, तो अमेरिकी तेल भंडार पर गंभीर दबाव पड़ सकता था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भंडार कुछ ही हफ्तों में समाप्त होने की स्थिति तक पहुंच सकते थे। युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में राहत अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के दोबारा खुलने की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिली है। युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में गिरावट के बावजूद सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। सप्लाई चेन बहाली में लग सकते हैं कई महीने ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी तेल आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हो सकती। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, टैंकरों की उपलब्धता, उत्पादन बढ़ाने और लॉजिस्टिक नेटवर्क को फिर से पटरी पर लाने में कई महीने लग सकते हैं। RBC कैपिटल मार्केट्स की ऊर्जा विशेषज्ञ हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि बाजार जरूरत से ज्यादा आशावादी नजर आ रहा है। उनके अनुसार, संकट पूरी तरह समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी क्योंकि तेल आपूर्ति तंत्र के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। OPEC उत्पादन बढ़ा सकता है इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे हैटफील्ड का मानना है कि आर्थिक दबाव का सामना कर रहे कई OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में हो सकते हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस रणनीतिकार विकास द्विवेदी का कहना है कि युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद था, जिससे बाजार पूरी तरह अस्थिर नहीं हुआ। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान गायब हुई 115 करोड़ बैरल तेल आपूर्ति की भरपाई आसान नहीं होगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि दुनिया मांग से प्रतिदिन 50 लाख बैरल अधिक तेल का उत्पादन भी करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक वर्ष लग सकता है। दुनिया में रोजाना 10.3 करोड़ बैरल तेल उत्पादन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा अकेले देता है। इसके बाद सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक का स्थान है। ये पांच देश मिलकर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रमुख उत्पादक देशों में किसी भी प्रकार का युद्ध, प्रतिबंध या उत्पादन संकट सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Share Market
बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार , सेंसेक्स 254 अंक चढ़ा, निफ्टी 24150 के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी दर्ज की। शुरुआती गिरावट के बाद मजबूत खरीदारी के दम पर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.32%) की बढ़त के साथ 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 82.30 अंक (0.34%) चढ़कर 24,168 के स्तर के पार पहुंच गया।   सुबह दबाव में खुला बाजार, दिन में हुई तेज रिकवरी   कारोबार की शुरुआत में बाजार लाल निशान में खुला था, जिसका कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियां और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका रही। हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों की चौतरफा खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी और शुरुआती दबाव पूरी तरह खत्म हो गया।   सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मिश्रित लेकिन मजबूत बाजार में अधिकतर सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। रियल्टी, हेल्थकेयर, केमिकल्स और फार्मा सेक्टर ने तेजी को सबसे अधिक सपोर्ट दिया। बैंकिंग सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को स्थिरता प्रदान की। हालांकि, आईटी सेक्टर आज सबसे बड़ा पिछड़ने वाला क्षेत्र रहा, जहां भारी बिकवाली के कारण दबाव बना रहा।   इन स्टॉक्स ने दिखाया दम कुछ प्रमुख शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में करीब 6% की तेजी देखी गई, जबकि इंडिगो के शेयरों में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई।   कच्चे तेल में गिरावट से मिला सपोर्ट बाजार की मजबूती का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी रहा। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत मिली और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। सस्ते तेल और चुनिंदा खरीदारी ने बाजार को वैश्विक दबाव से बचाने में अहम भूमिका निभाई। लगातार पांचवें दिन की तेजी इस बात का संकेत है कि घरेलू बाजार की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और निवेशक अभी भी भारतीय इक्विटी में भरोसा बनाए हुए हैं।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Share Market
शेयर मार्केट में चौथे दिन भी तेजी बरकरार, सेंसेक्स-निफ्टी ने बढ़ाया निवेशकों का उत्साह

मुंबई,एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। बाजार में खरीदारी का माहौल बने रहने से निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 347 अंकों की बढ़त के साथ 77,155.62 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 96 अंकों की मजबूती के साथ 24,085.70 के स्तर पर बंद हुआ।   बैंकिंग और आईटी शेयरों में दिखी मजबूती   बाजार की तेजी में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों का अहम योगदान रहा। निवेशकों ने चुनिंदा ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।   कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन   विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।   निवेशकों में बढ़ा उत्साह   लगातार चार दिनों से जारी तेजी के कारण निवेशकों का बाजार के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार का व्यापक दायरा मजबूत रहा है।   आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल   बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों का समर्थन मिलता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में सकारात्मक रुख बना रह सकता है। हालांकि निवेशकों को उतार-चढ़ाव को देखते हुए सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह दी गई है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Government raises windfall tax on diesel and ATF exports amid West Asia tensions
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, डीजल और ATF निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स

डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर बढ़ी अतिरिक्त उत्पाद शुल्क दर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) यानी विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर लगने वाला शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं ATF निर्यात पर टैक्स 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें 16 जून 2026 से लागू हो गई हैं। पेट्रोल निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल पर पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर की दर से निर्यात शुल्क लागू रहेगा। इस फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल डीजल और विमानन ईंधन की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना चाहती है, जबकि पेट्रोल के मामले में मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा गया है। आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा तत्काल असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को तत्काल किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना होगा। क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स? सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विंडफॉल टैक्स व्यवस्था को फिर से लागू किया था। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। सरकार हर पंद्रह दिन में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा कर निर्यात शुल्क में बदलाव करती रही है। 16 मई 2026 को पेट्रोल निर्यात को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया गया था। घरेलू ईंधन आपूर्ति सुरक्षित रखना है लक्ष्य सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तब रिफाइनरी कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम रहता है। इसी वजह से सरकार अतिरिक्त शुल्क लगाकर अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करना चाहती है। रिफाइनर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल और ATF निर्यात शुल्क बढ़ने से रिफाइनिंग कंपनियों के निर्यात लाभ में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। ऐसे में सरकार संतुलन बनाते हुए घरेलू जरूरतों और वैश्विक व्यापार दोनों पर नजर बनाए हुए है। आगे क्या होगा? विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और संभावित ईरान-अमेरिका समझौते की दिशा आने वाले दिनों में सरकार की कर नीति को प्रभावित कर सकती है। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है, तो विंडफॉल टैक्स में आगे भी संशोधन देखने को मिल सकता है।  

surbhi जून 16, 2026 0
Share Market
हरे निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार , सेंसेक्स 1,695 अंक उछला; निफ्टी 23,600 के पार

मुंबई, एजेंसियां। कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 1,695.40 अंकों की छलांग लगाकर 75,527.95 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 461.31 अंक चढ़कर 23,622.90 के स्तर पर पहुंच गया।   चार प्रमुख कारणों से बाजार में आई तेजी विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की इस मजबूत बढ़त के पीछे चार अहम वजहें रहीं। पहली, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा। दूसरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत का माहौल बनाया। तीसरी, एशियाई और यूरोपीय बाजारों में मजबूत रैली का सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। चौथी, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया।   रियल्टी, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी शुक्रवार के कारोबार में लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। रियल्टी सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि ऑटो, मीडिया, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। श्रीराम फाइनेंस के शेयर करीब 8 प्रतिशत तक उछले, वहीं लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में भी मजबूती रही, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत सीमित बढ़त देखने को मिली।   रुपया मजबूत, वैश्विक बाजारों में भी तेजी डॉलर के मुकाबले रुपया 72 पैसे मजबूत होकर 95.13 के स्तर पर पहुंच गया। एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में भी मजबूती का रुख देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और आर्थिक संकेतक सकारात्मक बने रहते हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में तेजी का माहौल बरकरार रह सकता है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Petrol Pump Rule
अब पेट्रोल पंप से नहीं खरीद सकेंगे ज्यादा तेल! सरकार ने लागू किए नए नियम

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी करते हुए बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ता अब सामान्य पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल और डीजल केवल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट्स (थोक बिक्री केंद्रों) से ही खरीदना होगा। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।   मध्य-पूर्व संकट के बीच लिया गया फैसला सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की, जबकि थोक ग्राहकों के लिए ईंधन महंगा कर दिया गया। इसी वजह से कई बड़े उद्योग और संस्थान सस्ता ईंधन पाने के लिए पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने लगे, जिससे कई क्षेत्रों में आम लोगों के लिए आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई।   200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ग्राहक या वाहन को एक पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इससे अधिक मात्रा में ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा डीजल की बिक्री केवल वाहन के मुख्य ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से प्रमाणित कंटेनरों में ही की जाएगी।   नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा मुनाफे के लिए बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों या पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।   जांच और जब्ती का अधिकार भी बढ़ाया गया नए निर्देशों के तहत अधिकृत अधिकारी, डीएसपी स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी तथा तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल पंपों की जांच कर सकेंगे। यदि कहीं अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे ईंधन और संबंधित सामग्री जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Share Market
शेयर बाजार गुलजार, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को शानदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत दी। वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद तथा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। कारोबार के शुरुआती घंटों में बीएसई सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक उछलकर करीब 74,700 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी लगभग 23,400 के स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी ने निवेशकों के मजबूत भरोसे का संकेत दिया।   किन सेक्टर्स ने सबसे ज्यादा दम दिखाया? बाजार की इस रैली में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। रियल्टी सेक्टर सबसे बड़ा गेनर रहा, जबकि ऑटो, मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। बैंकिंग शेयरों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया, वहीं एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टरों में भी लगातार बढ़त बनी रही। हालांकि, आईटी सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और इसमें केवल मामूली तेजी देखने को मिली।   दुनियाभर के बाजारों का क्या है हाल ? वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने भी भारतीय बाजार की तेजी को बल दिया। एशियाई बाजारों में जापान का टोपिक्स इंडेक्स और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। वहीं, हैंग सेंग फ्यूचर्स, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स भी हरे निशान में रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Sensex Nifty Update
शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक गिरा, निफ्टी 23150 से नीचे

मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई। बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,983.18 अंक के मुकाबले गिरकर 73,615.99 अंक पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 भी 23,214.95 अंक से फिसलकर 23,104.40 अंक पर खुला और बाद में 23,100 के स्तर से नीचे पहुंच गया।   मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह विश्लेषकों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी डर के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।   तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव बन सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए बिकवाली को प्राथमिकता दी।   इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा कमजोरी बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर, ऑयल एंड गैस सेक्टर की कुछ कंपनियों में खरीदारी देखी गई, क्योंकि तेल कीमतों में वृद्धि से इन कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है।   निवेशकों के लिए क्या है सलाह? विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच घबराकर निवेश संबंधी फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। बाजार की आगे की दिशा मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Venezuela acting President Delcy Rodríguez with oil facilities amid India energy supply discussions
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लग सकती है लगाम, भारत दौरे पर आ सकती हैं वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत की उम्मीद दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez जल्द भारत दौरे पर आ सकती हैं। इस संभावित दौरे को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सस्ते कच्चे तेल की सप्लाई से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बीते 10 दिनों में चार बार ईंधन महंगा हो चुका है, जिससे आम लोगों और उद्योगों पर दबाव बढ़ा है। अमेरिका ने दिया सस्ते तेल का संकेत अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका भारत की जरूरत के अनुसार तेल और गैस उपलब्ध कराने को तैयार है। इसी बीच वेनेजुएला से तेल सप्लाई बढ़ाने के संकेत भी सामने आए हैं। उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए दावे - जैसे अमेरिका द्वारा Nicolás Maduro की गिरफ्तारी - की कोई आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड्स में मादुरो अभी भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति माने जाते हैं। इसलिए इस दावे को सत्यापित जानकारी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। भारत के लिए क्यों अहम है वेनेजुएला का तेल? भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। होर्मुज संकट के बाद पश्चिम एशिया से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोत भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक मौजूद है। यदि भारत को वहां से रियायती दरों पर कच्चा तेल मिलता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। रूस के तेल को लेकर अमेरिका की नाराजगी रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने पर अमेरिका ने पहले चिंता जताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले भारत की रूस से ऊर्जा खरीद पर तीखी टिप्पणी भी की थी। अब अमेरिका भारत को वैकल्पिक सप्लाई चैन देने की कोशिश करता दिख रहा है, जिसमें वेनेजुएला का तेल अहम भूमिका निभा सकता है। एस जयशंकर ने क्या कहा? भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ऊर्जा सुरक्षा पर कहा कि भारत के लिए कई भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा रहा है। जयशंकर ने यह भी कहा कि ऊर्जा बाजार को बाधित नहीं किया जाना चाहिए और भारत अपनी राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार फैसले लेगा। क्या सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत को वेनेजुएला या अमेरिका से स्थिर और रियायती तेल सप्लाई मिलती है, तो तेल कंपनियों पर आयात लागत का दबाव कम हो सकता है। घरेलू ईंधन कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता हो जाएगा, लेकिन वैकल्पिक तेल स्रोत भारत के लिए राहत जरूर दे सकते हैं।  

surbhi मई 25, 2026 0
Fuel station displaying updated petrol and diesel prices after latest nationwide hike
पेट्रोल-डीजल तीसरी बार महंगे, जानें आपके शहर में क्या हो गए नए रेट

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल और Iran-अमेरिका तनाव के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। शनिवार 23 मई 2026 को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा कर दिया गया। इस महीने यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। दिल्ली में पेट्रोल ₹99.51 प्रति लीटर नई कीमतों के बाद New Delhi में पेट्रोल ₹99.51 प्रति लीटर और डीजल ₹92.49 प्रति लीटर पहुंच गया है। सरकारी कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण लागत लगातार बढ़ रही है। खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी अनिश्चितता ने वैश्विक सप्लाई को प्रभावित किया है। चार महानगरों में पेट्रोल-डीजल के नए रेट शहर पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर) New Delhi 99.51 (+0.87) 92.49 (+0.91) Kolkata 110.64 (+0.94) 97.02 (+0.95) Mumbai 108.49 (+0.90) 95.02 (+0.94) Chennai 105.31 (+0.82) 96.98 (+0.87) राज्यों में अलग-अलग VAT दरों की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग-अलग रहती हैं। मई में तीसरी बार बढ़े दाम मई 2026 में अब तक तीन बार पेट्रोल-डीजल महंगे हो चुके हैं: 15 मई 2026: पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी 19 मई 2026: दूसरी बार पेट्रोल करीब 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा 23 मई 2026: तीसरी बार फिर पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ा क्यों बढ़ रहे हैं दाम? विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक बाजार में कीमतों में तेजी की वजह से भारत पर आयात लागत का दबाव बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।  

surbhi मई 23, 2026 0
HPCL oil refinery operations as India increases Russian crude imports amid rising global energy prices
HPCL का बड़ा फैसला: बढ़ती ऊर्जा लागत से बचने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई

भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनी Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) ने बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद में तेजी लाने का फैसला किया है, ताकि उत्पादन लागत और मुनाफे पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Vikas Kaushal ने पोस्ट-अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस कॉल में बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए कंपनी अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए रूसी तेल पर अधिक निर्भर हो रही है। मुनाफे को स्थिर रखने की रणनीति HPCL ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण लागत बढ़ रही है। ऐसे में कंपनी अपने रिफाइनिंग मार्जिन को बचाने के लिए सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रही है। प्रबंधन के अनुसार, कंपनी ने अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुरक्षित कर ली है। साथ ही, जुलाई महीने के लिए स्पॉट कार्गो की खरीद भी शुरू कर दी गई है। रूस से बढ़ी खरीद, वैश्विक संकट का असर जानकारी के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जैसे हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इसी दबाव को कम करने के लिए HPCL अब रूस से ज्यादा मात्रा में कच्चा तेल खरीद रही है। कंपनी का मानना है कि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों को स्थिर रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वित्तीय नतीजे: मुनाफे में 20% की बढ़ोतरी HPCL ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी के शुद्ध मुनाफे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुद्ध मुनाफा: ₹4,902 करोड़ पिछले तिमाही में: ₹4,703 करोड़ EBITDA में वृद्धि: 27.9% की मजबूत बढ़त कुल राजस्व: लगभग ₹1.14 लाख करोड़ (स्थिर) कंपनी ने वित्त वर्ष के लिए ₹19.25 प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड भी घोषित किया है। ईंधन खपत पर सरकार की चिंता कंपनी की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब देश में ऊर्जा खपत और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की ओर से भी ईंधन की बचत और खपत कम करने की अपील की गई है। हालांकि HPCL का कहना है कि वह बाजार की परिस्थितियों के अनुसार संतुलित नीति अपना रही है ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ न बढ़े। क्या है आगे की चुनौती? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत की तेल कंपनियों को सप्लाई और कीमत दोनों स्तर पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में रूस जैसे स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखी जा रही है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Investors tracking falling Sensex and Nifty amid crude oil surge and global market tensions
तेल संकट से कांपा शेयर बाजार, सेंसेक्स 550 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला

ग्लोबल तनाव का भारतीय बाजार पर बड़ा असर BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते बाजार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 553 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 100 अंकों से ज्यादा फिसल गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,400 और निफ्टी 24,213 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली आज के कारोबार में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HDFC Bank, ICICI Bank और Reliance Industries जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार की गिरावट की बड़ी वजह बन रही है। हालांकि आईटी और फार्मा सेक्टर में कुछ खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई, रुपये और शेयर बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशकों में घबराहट बढ़ी हुई है। बाजार को अब किस बात का इंतजार? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, तो भारतीय बाजार और रुपये को राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और रिटेल निवेशक अभी भी बाजार में सक्रिय हैं, जिसकी वजह से मिडकैप और पावर सेक्टर के कुछ शेयर मजबूती दिखा रहे हैं।  

surbhi मई 8, 2026 0
Brent crude oil prices surge above $120 amid Trump Iran sanctions and Hormuz tensions
ट्रंप की सख्ती से कच्चे तेल में लगी आग, ब्रेंट क्रूड $120 के पार, वैश्विक बाजार में हड़कंप

वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है और ब्रेंट क्रूड ऑयल $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस अचानक बढ़ोतरी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का कड़ा रुख बताया जा रहा है, जिन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और समुद्री नाकाबंदी फिलहाल जारी रहेगी। ईरान पर सख्ती और बढ़ता तनाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों पर परमाणु समझौते को स्वीकार नहीं करता, तब तक Strait of Hormuz पर नौसैनिक दबाव और नाकाबंदी जारी रहेगी। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यह रणनीति सैन्य कार्रवाई की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनता है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है तो आगे सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है दुनिया के लिए अहम? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। जब इस मार्ग में बाधा आती है, तो सप्लाई चेन प्रभावित होती है और तेल की उपलब्धता घट जाती है। परिणामस्वरूप कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है, जिसका असर सीधे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे के बादल इस स्थिति को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी दी है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Jeffrey Sachs ने कहा है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बाजार फिलहाल यह उम्मीद लगाए बैठा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन यदि सप्लाई बाधित रही तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। आम जनता पर सीधा असर तेल कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे परिवहन, खाद्य वस्तुएं और अन्य जरूरी सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो महंगाई एक बार फिर आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है।  

surbhi अप्रैल 30, 2026 0
Oil tanker passing through Strait of Hormuz amid rising US-Iran tensions and global energy concerns.
दुनिया की ‘तेल नली’ पर संकट: होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी से वैश्विक बाजार में हलचल, भारत पर भी असर तय

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े बंदरगाहों पर नाकेबंदी की घोषणा के बाद दुनिया भर के तेल बाजार में अनिश्चितता गहरा गई है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20% परिवहन होता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य चेतावनियों ने इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। United States Central Command ने स्पष्ट किया है कि यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू होगी, हालांकि “न्यूट्रल ट्रांजिट” को रोका नहीं जाएगा। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि मंगलवार को हल्की गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समयानुसार सुबह करीब 8:30 बजे ब्रेंट क्रूड 1.24% गिरकर 98.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी पूरी तरह लागू होती है, तो तेल कीमतें 100 डॉलर के पार स्थिर हो सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। ईरान की कड़ी चेतावनी अमेरिकी कदम के जवाब में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य जहाज को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। ईरान ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर वह निर्णायक सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट तनाव के कारण होर्मुज मार्ग पर शिपिंग ट्रैफिक में भारी गिरावट दर्ज की गई है: सामान्य समय की तुलना में जहाजों की आवाजाही लगभग 90% तक कम खाड़ी क्षेत्र में 187 टैंकरों में 17.2 करोड़ बैरल तेल मौजूद युद्धविराम के बाद केवल 58 जहाज ही इस मार्ग से गुजर पाए टैंकर कंपनियां जोखिम से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। तेल सप्लाई पर संकट के संकेत ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार: मार्च में ईरान ने 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात किया अप्रैल में यह घटकर 17.1 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया साथ ही, लगभग 18 करोड़ बैरल तेल पहले से समुद्र में स्टोरेज के रूप में मौजूद है, जो आपूर्ति संकट को कुछ समय तक संभाल सकता है, लेकिन स्थिति लंबी खिंचने पर जोखिम बढ़ जाएगा। भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर देश पर पड़ सकता है: कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है रुपया कमजोर पड़ सकता है हालांकि हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ ढील के बाद भारत को ईरानी तेल आयात का मौका मिला था, लेकिन मौजूदा संकट इस सप्लाई को फिर से प्रभावित कर सकता है। एशिया पर सबसे ज्यादा दबाव होर्मुज से गुजरने वाला अधिकांश तेल एशियाई देशों–खासकर चीन और भारत–को जाता है। ऐसे में यह संकट एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे ज्यादा असर डाल सकता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
US Navy enforcing maritime restrictions near Strait of Hormuz amid escalating tensions with Iran and global oil disruption
ईरान पर US का शिकंजा और कसा: 13 अप्रैल से समुद्री नाकेबंदी लागू, वैश्विक व्यापार और तेल बाजार में बढ़ी हलचल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने Iran के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा समुद्री कदम उठाया है। United States Central Command (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 13 अप्रैल (सोमवार) सुबह 10 बजे से ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी लागू कर दी जाएगी। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश के बाद लिया गया है और इसे ईरान पर आर्थिक व रणनीतिक दबाव बढ़ाने की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। समुद्र से घेराबंदी: क्या है पूरा प्लान? अमेरिका की यह रणनीति सीधे ईरान के समुद्री व्यापार को निशाना बनाती है। CENTCOM के अनुसार: ईरान के सभी पोर्ट्स पर आने-जाने वाले जहाजों पर रोक लगेगी यह नियम हर देश के जहाजों पर समान रूप से लागू होगा जहाजों की पहचान, निगरानी और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोका जाएगा ईरानी तटीय क्षेत्रों में भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी इस कदम का मकसद ईरान की आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना है। हॉर्मुज स्ट्रेट: टकराव का सबसे बड़ा केंद्र इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम बिंदु Strait of Hormuz है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है यह खाड़ी देशों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है यहां किसी भी सैन्य या रणनीतिक कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए जाने वाले जहाजों को फिलहाल छूट दी जाएगी, लेकिन ईरान से जुड़े हर जहाज पर सख्त नजर रखी जाएगी। जहाजों के लिए चेतावनी और सुरक्षा निर्देश अमेरिकी नौसेना ने इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए सभी व्यापारिक जहाजों और शिपिंग कंपनियों के लिए एडवाइजरी जारी की है: ‘Notice to Mariners’ (आधिकारिक अलर्ट) को नियमित रूप से चेक करें Gulf of Oman और हॉर्मुज क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतें किसी भी आपात स्थिति में चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क करें जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरते समय वैकल्पिक मार्गों की योजना रखें पेट्रोडॉलर सिस्टम पर सीधा असर इस पूरी कार्रवाई के पीछे सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति भी छिपी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि: कुछ जहाज डॉलर के बजाय दूसरी करेंसी (जैसे चीनी युआन) में लेन-देन कर रहे हैं यह लंबे समय से चले आ रहे पेट्रोडॉलर सिस्टम के लिए चुनौती है अमेरिका इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठा रहा है पेट्रोडॉलर सिस्टम वह व्यवस्था है जिसमें दुनिया भर में कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, जिससे अमेरिका को वैश्विक आर्थिक बढ़त मिलती है। चीन-ईरान समीकरण और अमेरिका की चिंता इस कदम का एक बड़ा लक्ष्य China और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियां भी हैं। चीन ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहा है दोनों देश डॉलर के विकल्प तलाश रहे हैं रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी मजबूत हो रही है अमेरिका इसे अपने वैश्विक प्रभाव के लिए खतरा मानता है और इसी कारण अब दबाव की रणनीति अपना रहा है। बढ़ते तनाव के संभावित असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं: कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव का खतरा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता इसके अलावा, अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। क्या हो सकता है आगे? ईरान की ओर से सैन्य या आर्थिक प्रतिक्रिया संभव कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं, लेकिन सफलता अनिश्चित अमेरिका अपनी नौसैनिक मौजूदगी और बढ़ा सकता है क्षेत्र में अन्य देशों की भूमिका भी अहम हो सकती है

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
US Navy deployment in Strait of Hormuz amid rising tensions between America and Iran affecting global oil supply
पाकिस्तान वार्ता फेल: ट्रंप का ईरान पर बड़ा वार, हॉर्मुज में घेराबंदी से तेल संकट गहराया

पाकिस्तान में हुई लंबी शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटता है या नहीं, और दावा किया कि तेहरान की स्थिति इस समय बेहद कमजोर है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी कदम अमेरिकी नौसेना ने Strait of Hormuz में घेराबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाले उन जहाजों को रोका जाएगा, जो ईरान के बंदरगाहों से जुड़े हैं। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है फैसले के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई न्यूक्लियर हथियार पर अमेरिका की दो टूक ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। अमेरिका की प्रमुख मांगें हैं: यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पूरी तरह बंद हो क्षेत्रीय हथियारबंद समूहों को समर्थन रोका जाए सूत्रों के मुताबिक, वार्ता के दौरान ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने के संकेत दिए थे, जिससे गतिरोध और गहरा गया। NATO पर भी ट्रंप का हमला अमेरिकी राष्ट्रपति ने NATO पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा: अमेरिका संगठन पर भारी खर्च करता है लेकिन संकट के समय सहयोग नहीं मिलता NATO की भूमिका की फिर से समीक्षा की जाएगी ईरान की चेतावनी ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज क्षेत्र में कोई सैन्य हस्तक्षेप हुआ, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। स्थिति को संभालने के लिए Pakistan, European Union, Oman और Russia कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच Israel की लेबनान में सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर लंबे समय तक पड़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Bank Nifty stock market chart showing sharp decline amid crude oil price surge above 100 dollars
Bank Nifty में बड़ी गिरावट: कच्चे तेल की कीमत $100 पार, PSU बैंक शेयरों में भारी बिकवाली – आगे क्या संकेत?

मुंबई: हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही, जहां बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में तेज गिरावट देखने को मिली। Bank Nifty इंडेक्स सोमवार को करीब 2.5% तक टूट गया, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के पार जाना रहा। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई (Inflation) के बढ़ने और सख्त मौद्रिक नीति (Tighter Monetary Policy) की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिससे बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ गया। PSU बैंकों में सबसे ज्यादा गिरावट इस गिरावट की अगुवाई पब्लिक सेक्टर बैंकों ने की, जहां कई शेयरों में 4% तक की कमजोरी दर्ज की गई। प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे: Union Bank of India Bank of India Bank of Maharashtra Punjab National Bank इन बैंकों पर दबाव का कारण यह है कि बढ़ती महंगाई से ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जिससे लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी प्रभावित होती है। प्राइवेट बैंकों में भी कमजोरी सिर्फ PSU बैंक ही नहीं, बल्कि प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। State Bank of India करीब 2.5% तक गिरा HDFC Bank में 2.47% तक कमजोरी IndusInd Bank लगभग 1.85% नीचे Axis Bank और Kotak Mahindra Bank भी दबाव में रहे इंडेक्स का प्रदर्शन कैसा रहा? Bank Nifty इंट्राडे में 1,556 अंक टूटकर 54,356 के स्तर तक पहुंच गया Nifty PSU Bank इंडेक्स 2.24% गिरा Nifty Private Bank इंडेक्स 1.37% नीचे रहा यह दिन बैंकिंग सेक्टर के लिए सबसे कमजोर सत्रों में से एक रहा। गिरावट की असली वजह क्या है? कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है क्योंकि भारत आयात पर निर्भर है। इसके प्रमुख प्रभाव: महंगाई बढ़ने का खतरा RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लोन डिमांड और बैंकिंग ग्रोथ पर असर इन्हीं कारणों से निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी। आगे क्या रह सकता है रुख? (एक्सपर्ट व्यू) Religare Broking के रिसर्च हेड अजीत मिश्रा के अनुसार: Bank Nifty पहले करीब 8.5% की तेजी दिखा चुका है अब यह 56,700 (200 DEMA) के स्तर को फिर टेस्ट कर सकता है इसके बाद 57,800 तक की रिकवरी संभव है सपोर्ट लेवल: पहला सपोर्ट: 54,300 अगला मजबूत सपोर्ट: 53,000 निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो? मौजूदा हालात में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: जल्दबाजी में खरीदारी से बचें प्रमुख सपोर्ट लेवल्स पर नजर रखें लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में चुनिंदा शेयरों पर नजर रख सकते हैं कच्चे तेल की कीमत और RBI के रुख पर खास ध्यान दें 

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Iran-Israel ceasefire impact on global markets with rising Nifty and falling oil prices.
ईरान-इजराइल सीजफायर: बाजार को राहत मिली या अभी भी खतरा? निवेशक क्या करें?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran और Israel के बीच अचानक हुए दो हफ्ते के सीजफायर ने वैश्विक बाजारों को राहत की सांस दी है। 8 अप्रैल को आखिरी समय में हुए इस समझौते ने तेल से लेकर शेयर बाजार तक तेज हलचल पैदा कर दी। अमेरिकी मध्यस्थता में हुए इस समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, वहीं भारतीय बाजार में Nifty 50 ने जोरदार उछाल दिखाया और रुपया भी मजबूत हुआ। कुछ समय के लिए ऐसा लगा मानो वैश्विक अनिश्चितता थम गई हो। लेकिन क्या यह राहत स्थायी है? विशेषज्ञों का साफ कहना है - यह सिर्फ एक “pause” है, समाधान नहीं। स्थिति क्या कहती है? सीजफायर के बावजूद जमीन पर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ईरान के शीर्ष नेताओं ने पहले ही समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है, वहीं Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या भी सामान्य से काफी कम बनी हुई है। अब बाजार की नजर दो अहम तारीखों पर टिकी है -  11 अप्रैल: अमेरिका-ईरान वार्ता की फिर से शुरुआत 22 अप्रैल: सीजफायर की समाप्ति इन तारीखों के बीच हर खबर बाजार की दिशा तय कर सकती है। निवेशकों के लिए रणनीति 1. शॉर्ट वोलैटिलिटी (सिर्फ स्थिर माहौल में) सीजफायर के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव (IV) कम हुआ है। अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो बाजार सीमित दायरे में रह सकता है। Iron Condor या Iron Fly जैसी रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं लेकिन नियम स्पष्ट है: कोई भी नकारात्मक खबर आते ही तुरंत बाहर निकलें 2. सीमित जोखिम के साथ तेजी का फायदा उठाएं अगर Nifty 50 मजबूत सपोर्ट के ऊपर बना रहता है, तो कुछ सेक्टर्स में तेजी देखी जा सकती है - खासतौर पर वे जो इस तनाव से प्रभावित हुए थे। Bull Call Spread या हेज के साथ पुट बेचने की रणनीति अपनाएं उद्देश्य: सीमित जोखिम के साथ लाभ कमाना 3. हर हाल में हेजिंग जरूरी यह बाजार “event-driven” है - यानि एक खबर पूरी दिशा बदल सकती है। हर 2 bullish पोजिशन के साथ 1 bearish हेज रखें बिना हेज के ट्रेड करना जोखिम भरा हो सकता है

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Sensex and Nifty surge after oil prices fall
तेज गिरावट के बाद शेयर बाजार में सुधार: सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल, तेल कीमतों में नरमी से राहत

भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को आंशिक सुधार दिखाया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों को राहत मिली और बाजार में खरीदारी का माहौल बना। सुबह कारोबार के दौरान Nifty50 करीब 1.05% बढ़कर 23,243 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि BSE Sensex 1% से ज्यादा चढ़कर 74,958 के आसपास कारोबार करता दिखा। तेल कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। ब्रेंट क्रूड, जो गुरुवार को 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अब घटकर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे यूरोपीय देशों और जापान द्वारा समुद्री मार्गों की सुरक्षा के प्रयास और अमेरिका द्वारा सप्लाई बढ़ाने के संकेत अहम माने जा रहे हैं। सभी सेक्टरों में दिखी तेजी शुक्रवार को बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली और सभी 16 प्रमुख सेक्टर हरे निशान में रहे। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूती रही, जहां क्रमशः 0.8% और 1.3% की बढ़त दर्ज की गई। PSU बैंक और मेटल शेयरों में उछाल पब्लिक सेक्टर बैंकिंग शेयरों में जोरदार वापसी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 3.2% की तेजी आई, जबकि State Bank of India के शेयर करीब 3% चढ़े। मेटल सेक्टर में भी तेजी रही और इसमें करीब 2.2% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं Tata Steel के शेयर लगभग 4% उछले, जिसका कारण ब्रोकरेज द्वारा टारगेट प्राइस बढ़ाना बताया जा रहा है। IT और अन्य सेक्टरों में भी सुधार आईटी सेक्टर में भी 1.7% की बढ़त देखी गई, जो गुरुवार की गिरावट के बाद रिकवरी का संकेत है। हालांकि, HDFC Bank के शेयरों पर दबाव बना रहा और इसमें और गिरावट दर्ज की गई। रुपया कमजोर, निवेशकों में सतर्कता इस बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल फिलहाल मध्य पूर्व के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। IPO की हलचल भी तेज इसी बीच SBI Funds Management ने IPO के लिए आवेदन किया है, जिसमें State Bank of India और Amundi अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। यह कदम बाजार में नई हलचल पैदा कर सकता है। आगे कैसा रहेगा बाजार? विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में तेजी जारी रह सकती है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0