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Asaduddin Owaisi reacts to Bhojshala High Court verdict comparing it with Babri Masjid case
भोजशाला फैसले पर ओवैसी ने उठाए सवाल, बोले- ‘यह बाबरी मस्जिद केस जैसा फैसला’

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। Asaduddin Owaisi ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसकी तुलना बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद से की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और इससे भविष्य में नए धार्मिक विवाद पैदा हो सकते हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया था। अदालत ने परिसर को राजा भोज से जुड़ा स्थल भी माना है। ‘एक धर्म को प्राथमिकता दी गई’ हैदराबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने कहा कि भोजशाला पर आया फैसला बाबरी मस्जिद मामले में दिए गए निर्णय की तरह दिखाई देता है। उन्होंने कहा, “यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद में भी एक धर्म को प्राथमिकता दी गई थी, जबकि दूसरे समुदाय के पूजा के अधिकार कमजोर कर दिए गए थे।” ओवैसी ने आगे कहा कि ऐसे फैसलों से भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता को चुनौती देने का रास्ता खुल सकता है। प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का किया जिक्र ओवैसी ने न्यायपालिका के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) से जोड़ चुका है, लेकिन अब उसी सिद्धांत को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का मजाक बना दिया गया है।” ‘बाबरी मस्जिद केस जैसा साबित हुआ फैसला’ ओवैसी ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले का फैसला भविष्य में ऐसे कई विवादों का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि बाबरी मस्जिद पर फैसला केवल आस्था के आधार पर दिया गया था। उस समय मैंने कहा था कि इससे आगे कई विवाद खड़े होंगे और आज वही हो रहा है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष लंबे समय से वहां नमाज अदा करता रहा है। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने के दिए संकेत इस बीच Khalid Rashid Firangi Mahli ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय में निराशा जरूर है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास ऐतिहासिक दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भोजशाला विवाद को बाबरी मस्जिद मामले से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को दिया पूजा का अधिकार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को भी आंशिक रूप से निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। हिंदू पक्ष के वकील Vishnu Shankar Jain ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब परिसर में केवल हिंदू पूजा होगी और स्थल के प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार के पास रहेगी। क्या है भोजशाला विवाद? धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वर्षों से यह मामला अदालत में लंबित था।  

surbhi मई 16, 2026 0
Bhojshala complex in Dhar after High Court verdict recognizing it as Maa Saraswati temple
भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हैदराबाद के विधायक टी राजा सिंह ने PM मोदी से की ‘भव्य मंदिर’ बनाने की अपील

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला परिसर को मां सरस्वती यानी मां वाग्देवी का मंदिर माना है और हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह परिसर राजा भोज से जुड़ा हुआ है। इस फैसले के बाद हैदराबाद के गोशामहल से विधायक T. Raja Singh ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से अपील करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की तरह भोजशाला में भी भव्य मंदिर का निर्माण कराया जाना चाहिए। ‘124 साल के संघर्ष के बाद मिला फैसला’ टी राजा सिंह ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि यह फैसला हिंदू समुदाय के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी हिंदू संगठनों ने लगातार इस मुद्दे को उठाया और करीब 124 साल बाद हिंदू पक्ष के समर्थन में फैसला आया है। उन्होंने कहा, “जिस तरह अयोध्या में राम मंदिर बना, उसी तरह भोजशाला मंदिर का भी भव्य निर्माण होना चाहिए। केवल भारत ही नहीं, विदेशों से भी लोग यहां दर्शन करने आएंगे।” 98 दिन तक चला था वैज्ञानिक सर्वे भोजशाला विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में पांच याचिकाएं और तीन इंटरवेंशन आवेदन दाखिल किए गए थे। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने 15 मई को यह फैसला सुनाया। इससे पहले अदालत के आदेश पर 2024 में परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कराया गया था। हिंदू पक्ष के वकीलों के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले में लगातार 24 दिनों तक सुनवाई की थी और 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष के वकील ने फैसले को बताया ऐतिहासिक हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार देते हुए भोजशाला परिसर को राजा भोज से जुड़ा स्थल माना है। उन्होंने बताया कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को परिसर के संरक्षण की जिम्मेदारी जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही पहले का वह आदेश भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। लंदन संग्रहालय में रखी प्रतिमा की वापसी पर भी निर्देश अदालत ने उस प्रतिमा की वापसी की मांग पर भी सरकार को विचार करने का निर्देश दिया है, जो फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में रखी हुई बताई जाती है। वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को भी सरकार के सामने अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि देने पर भी विचार करने को कहा गया है। क्या है भोजशाला विवाद? धार स्थित भोजशाला परिसर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। 1935 में धार रियासत ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी थी। 1995 में हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की इजाजत दी गई। 2003 में यह व्यवस्था फिर लागू हुई। 2013 और 2016 में वसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ने पर विवाद बढ़ा। 2022 में हिंदू पक्ष ने अदालत में नई याचिकाएं दाखिल कीं। 2024 में कोर्ट के आदेश पर 98 दिनों तक सर्वे हुआ। 15 मई 2026 को हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष के समर्थन में फैसला सुनाया। ‘अब वहां केवल पूजा होगी’ हिंदू पक्ष के वकीलों का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद अब भोजशाला परिसर में केवल हिंदू पूजा-अर्चना होगी। साथ ही सरकार को स्थल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष आगे की कानूनी रणनीति पर विचार कर रहा है।  

surbhi मई 16, 2026 0
CBI officials investigate NEET-UG 2026 paper leak case after mastermind lecturer PV Kulkarni arrest
NEET-UG 2026 पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा, मास्टरमाइंड रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी गिरफ्तार

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने इस पूरे रैकेट के कथित मास्टरमाइंड और रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने परीक्षा से पहले ही छात्रों को असली प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल और उनके जवाब याद करवाए थे। सीबीआई के मुताबिक, पीवी कुलकर्णी को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया के दौरान प्रश्नपत्रों तक पहुंच हासिल थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में पुणे स्थित अपने घर पर विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए। छात्रों को नोटबुक में लिखवाए गए थे प्रश्न और उत्तर जांच एजेंसी के अनुसार, इन गुप्त क्लासों में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर हाथ से नोटबुक में लिखवाए गए थे। बाद में जब 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा का वास्तविक प्रश्नपत्र सामने आया, तो वह इन नोट्स से हूबहू मेल खाता पाया गया। सीबीआई का कहना है कि यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था। कई शहरों में छापेमारी, अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में सीबीआई अब तक जयपुर, गुरुग्राम, पुणे, नासिक और अहिल्यानगर समेत कई शहरों में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांच आरोपियों को पहले ही अदालत में पेश किया जा चुका है, जहां उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। वहीं दो अन्य आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है। धनंजय लोखंडे की भूमिका भी आई सामने दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपी धनंजय निवृत्ति लोखंडे को भी छह दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, लोखंडे ने कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र सह-आरोपी शुभम खैरनार को उपलब्ध कराया था। सीबीआई ने अदालत को बताया कि लोखंडे को यह प्रश्नपत्र पुणे निवासी मनीषा वाघमारे से मिला था। जांच में दोनों आरोपियों के बीच करीब छह लाख रुपये के बैंकिंग लेनदेन का भी खुलासा हुआ है। टेलीग्राम के जरिए भेजे गए थे पेपर की PDF जांच में यह भी सामने आया है कि गुरुग्राम निवासी आरोपी यश यादव को 29 अप्रैल को टेलीग्राम ऐप के जरिए प्रश्नपत्रों की PDF फाइलें भेजी गई थीं। इन फाइलों में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्र शामिल थे। सीबीआई ने इन डिजिटल फाइलों को बरामद कर लिया है और उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को हुई थी। लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। सरकार ने मामले की व्यापक जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी सौंपी है। एजेंसी अब इस संगठित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सीबीआई की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Vodafone Idea Vi ₹751 family postpaid plan promotion showing mobile data and streaming apps
हर महीने रिचार्ज की झंझट खत्म: Vodafone Idea (Vi) का ₹751 फैमिली प्लान बना यूजर्स के लिए बड़ा राहत पैकेज

टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा के बीच Vodafone Idea (Vi) ने अपने ग्राहकों के लिए एक किफायती और सुविधाजनक फैमिली प्लान लॉन्च किया है। ₹751 का यह प्लान खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है, जो पूरे परिवार के मोबाइल कनेक्शन को एक ही बिल में मैनेज करना चाहते हैं। यह प्लान Vi Max Family लाइनअप का हिस्सा है और शुरुआत में ही दो कनेक्शनों–एक प्राइमरी और एक सेकेंडरी–को कवर करता है, जिससे छोटे परिवारों के लिए यह एक स्मार्ट और बजट-फ्रेंडली विकल्प बन जाता है। प्राइमरी यूजर को मिलते हैं प्रीमियम फायदे इस प्लान में प्राइमरी यूजर को सबसे ज्यादा बेनिफिट्स दिए गए हैं। हर महीने 70GB डेटा के साथ यूजर आसानी से वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे काम कर सकता है। इसके अलावा: रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक अनलिमिटेड नाइट डेटा 200GB तक डेटा रोलओवर अनलिमिटेड कॉलिंग हर महीने 3000 SMS साथ ही यूजर को Vi Movies & TV और Vi Games जैसे प्लेटफॉर्म का एक्सेस भी मिलता है, जिससे एंटरटेनमेंट का पूरा पैकेज मिलता है। सेकेंडरी यूजर को भी मजबूत पैकेज सेकेंडरी यूजर को भी इस प्लान में 40GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है। SMS दोनों यूजर्स के बीच शेयर होता है, जिससे यह प्लान कपल्स और छोटे परिवारों के लिए और ज्यादा उपयोगी बन जाता है। बड़े परिवार के लिए भी आसान विकल्प अगर परिवार में दो से ज्यादा लोग हैं, तो इस प्लान में ₹299 प्रति अतिरिक्त सदस्य के हिसाब से 7 और कनेक्शन जोड़े जा सकते हैं। हर सदस्य को अलग डेटा और कॉलिंग बेनिफिट मिलता है, जिससे पूरा परिवार एक ही प्लान में कवर हो सकता है। एक्स्ट्रा डेटा और स्मार्ट शेयरिंग डेटा खत्म होने की चिंता को कम करने के लिए Vi इस प्लान में 10GB अतिरिक्त शेयर डेटा भी देता है, जिसे सभी यूजर्स जरूरत के अनुसार इस्तेमाल कर सकते हैं। फ्री OTT और डिजिटल बेनिफिट्स इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका OTT ऑफर है। यूजर्स अपनी पसंद के दो प्लेटफॉर्म चुन सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: Amazon Prime Video (6 महीने) SonyLIV (360 दिन) JioHotstar (1 साल) इसके अलावा Norton Mobile Security जैसे प्रीमियम फीचर्स भी दिए गए हैं, जो इसे एक ‘वैल्यू फॉर मनी’ प्लान बनाते हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Fresh summer fruits like mango, banana and papaya displayed in a market under FSSAI inspection drive
गर्मियों में फलों पर सख्ती: केला, आम और पपीता की मंडियों पर FSSAI की नजर, हो सकती है छापेमारी

नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम के साथ बाजारों में आम, केला और पपीता की आमद तेज हो गई है, लेकिन इस बार इन फलों की गुणवत्ता को लेकर सरकार पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे फल मंडियों, गोदामों और थोक बाजारों में सख्त निगरानी रखें और जरूरत पड़ने पर छापेमारी भी करें। केमिकल से पकाए फलों पर सख्ती FSSAI ने साफ किया है कि आम, केला और पपीता जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायनों पर पूरी तरह प्रतिबंध है। खास तौर पर कैल्शियम कार्बाइड (जिसे आम भाषा में ‘मसाला’ कहा जाता है) का उपयोग गैरकानूनी है। यह केमिकल न सिर्फ फलों की गुणवत्ता को खराब करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर विशेषज्ञों के मुताबिक, कैल्शियम कार्बाइड के संपर्क या सेवन से: निगलने में दिक्कत उल्टी और पेट की परेशानी त्वचा पर जलन या अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा कुछ व्यापारी एथेफोन जैसे घोल का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे भी सुरक्षित नहीं माना जाता। राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि: फल मंडियों और स्टोरेज सेंटर की नियमित जांच हो थोक बाजारों और सप्लाई चेन पर कड़ी नजर रखी जाए संदिग्ध मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाए खासतौर पर उन जगहों पर ज्यादा सतर्कता बरतने को कहा गया है, जहां बड़े पैमाने पर मौसमी फलों का भंडारण किया जाता है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा प्राथमिकता FSSAI का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक जो फल पहुंचें, वे न सिर्फ स्वाद में अच्छे हों बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी हों। गर्मियों में फलों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट और केमिकल के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे में इस बार नियामक पहले से ही एक्शन मोड में नजर आ रहा है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
AI-powered smart devices
Amazon ने लॉन्च किया ‘AI Store’: अब AI-पावर्ड डिवाइसेज की शॉपिंग होगी आसान

ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक नया ‘AI Store’ माइक्रोसाइट लॉन्च किया है। इस स्टोर के जरिए यूजर्स अब आसानी से ऐसे स्मार्ट डिवाइसेज खोज और खरीद सकेंगे, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स और टूल्स मौजूद हैं। कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों को AI-पावर्ड टेक्नोलॉजी को बेहतर तरीके से समझने और सही प्रोडक्ट चुनने में मदद करना है। क्या है Amazon का AI Store? AI Store एक खास माइक्रोसाइट है, जहां केवल उन्हीं कंज्यूमर टेक प्रोडक्ट्स को जगह दी गई है, जिनमें AI की वास्तविक उपयोगिता है। यहां यूजर्स को हर डिवाइस के AI फीचर्स को आसान भाषा में समझाया जाता है, ताकि वे समझ सकें कि तकनीक उनके लिए कैसे काम करेगी। उदाहरण के तौर पर: AI लैपटॉप में मौजूद NPU (Neural Processing Unit) बैटरी लाइफ बेहतर करता है AI स्मार्टफोन ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग के जरिए डेटा प्राइवेसी बढ़ाते हैं किन कैटेगरी के प्रोडक्ट्स मिलेंगे? AI Store में कई तरह के डिवाइसेज शामिल हैं: स्मार्टफोन लैपटॉप स्मार्ट टीवी टैबलेट स्मार्टवॉच स्मार्ट ग्लास होम अप्लायंसेज ये हैं कुछ खास AI डिवाइसेज AI Store पर कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं, जैसे: Samsung Galaxy S26 Ultra OnePlus Nord 6 iQOO 15 HP OmniBook Ultra Lenovo Yoga Slim 7 iPad 11 LG AI Series 4K Smart TV यूजर्स के लिए क्या है खास? Amazon का कहना है कि AI Store सिर्फ प्रोडक्ट बेचने का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह यूजर्स को उनके इस्तेमाल के हिसाब से सही डिवाइस चुनने में मदद करता है। यूज केस के आधार पर प्रोडक्ट ब्राउज़ कर सकते हैं AI फीचर्स को आसान भाषा में समझ सकते हैं बेहतर और स्मार्ट खरीदारी का फैसला ले सकते हैं Amazon के अन्य AI फीचर्स भी हुए मजबूत AI Store के अलावा, Amazon ने अपने प्लेटफॉर्म पर कई AI टूल्स को भी इंटीग्रेट किया है: Rufus: कन्वर्सेशनल शॉपिंग असिस्टेंट Lens AI: विजुअल सर्च टूल View in Your Room: AR के जरिए प्रोडक्ट देखने की सुविधा AI-पावर्ड प्राइस हिस्ट्री ट्रैकिंग Amazon का नया AI Store ग्राहकों के लिए स्मार्ट शॉपिंग का एक नया अनुभव लेकर आया है। इससे न सिर्फ AI टेक्नोलॉजी को समझना आसान होगा, बल्कि यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से सही डिवाइस भी चुन पाएंगे।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Person booking LPG gas cylinder refill through WhatsApp on smartphone in modern kitchen setting
WhatsApp से LPG सिलिंडर बुकिंग आसान: अब एक मैसेज में होगा रिफिल, नया नियम भी जान लें

रसोई गैस सिलिंडर बुक कराने का झंझट अब काफी हद तक खत्म हो गया है। अब Indane Gas, Bharat Gas और HP Gas के ग्राहक WhatsApp, SMS, कॉल और ऐप जैसे कई आसान विकल्पों के जरिए घर बैठे LPG रिफिल बुक कर सकते हैं। पहले जहां डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क करना मुश्किल होता था, वहीं अब यह प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक हो गई है। खास बात यह है कि बुकिंग के तुरंत बाद कन्फर्मेशन भी मिल जाता है। LPG सिलिंडर बुक करने के आसान तरीके Indane Gas कॉल/SMS: 7718955555 WhatsApp: 7588888824 (REFILL भेजें) मिस्ड कॉल: 8454955555 Bharat Gas IVRS: 7715012345 / 7718012345 WhatsApp: 1800224344 HP Gas कॉल: 7718955555 WhatsApp: 9222201122 मिस्ड कॉल: 9493602222 WhatsApp से LPG बुकिंग कैसे करें? अपने LPG प्रोवाइडर का WhatsApp नंबर सेव करें WhatsApp खोलकर उस नंबर पर चैट शुरू करें ‘REFILL’ लिखकर मैसेज भेजें दिए गए निर्देशों का पालन करें (कस्टमर नंबर/मोबाइल वेरिफिकेशन) बुकिंग कन्फर्म करें – आपको तुरंत कन्फर्मेशन मिल जाएगा सुरक्षा के लिए नया सिस्टम अब LPG डिलीवरी को सुरक्षित बनाने के लिए Delivery Authentication Code (DAC) लागू किया गया है। सिलिंडर आने पर आपके मोबाइल पर एक कोड भेजा जाएगा यह कोड डिलीवरी एजेंट को देना जरूरी होगा बिना कोड के डिलीवरी पूरी नहीं होगी साथ ही, eKYC अपडेट रखना भी जरूरी है, वरना सब्सिडी और बुकिंग में परेशानी हो सकती है। नया नियम जरूर जान लें अब LPG सिलिंडर की दो बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर जरूरी है। पहले यह सीमा 21 दिन थी। अगर आप इससे पहले बुकिंग करेंगे, तो सिस्टम आपकी रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करेगा। WhatsApp और अन्य डिजिटल विकल्पों के आने से LPG सिलिंडर बुक करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो गया है। सही जानकारी और नए नियमों का पालन करके आप बिना किसी परेशानी के समय पर गैस रिफिल पा सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Supreme Court of India delivers verdict on government employee accident compensation case
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सड़क हादसे में मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार को दोहरी मुआवजा राशि नहीं मिलेगी

सरकार या MACT में से किसी एक से ही आय नुकसान का मुआवजा मिलेगा Supreme Court of India ने सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की सड़क हादसे में मौत होती है, तो उसके आश्रित परिवार के सदस्य आय के नुकसान के लिए मुआवजा या तो सरकार से ले सकते हैं या फिर Motor Accidents Claims Tribunal (MACT) से-दोनों जगह से एक साथ नहीं। न्यायमूर्ति Sanjay Karol और न्यायमूर्ति Augustine George Masih की पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने Reliance General Insurance की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए Punjab and Haryana High Court के आदेश को रद्द कर दिया। 2009 के सड़क हादसे से जुड़ा है मामला यह मामला 2 नवंबर 2009 को हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। उस दिन रविंदर कुमार की मोटरसाइकिल, जिस पर होम देवी और कनिका सवार थीं, एक जीप से टकरा गई। इस हादसे में सरकारी कर्मचारी होम देवी की मौत हो गई, जबकि बाकी दो लोग घायल हो गए। MACT ने दिया था 8.8 लाख रुपये का मुआवजा दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवार ने MACT में मुआवजे के लिए दावा किया था। ट्रिब्यूनल ने परिवार के आश्रितों को 8 लाख 80 हजार रुपये देने का आदेश दिया। हालांकि परिवार ने इस राशि को कम बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी और मुआवजा बढ़ाने की मांग की। हाई कोर्ट ने बढ़ाकर 29 लाख रुपये किया मुआवजा हाई कोर्ट ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 29 लाख 9 हजार 240 रुपये कर दी। शुरुआत में अदालत ने कहा कि हरियाणा सरकार की योजना-Haryana Compassionate Assistance to Dependents of Deceased Government Employees Rules 2006-के तहत परिवार को मिली राशि को कुल मुआवजे से घटाया जाएगा। लेकिन बाद में एक अन्य आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार से मिली सहायता राशि को मुआवजे से घटाने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का आदेश किया रद्द हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले-Reliance General Insurance vs Shashi Sharma-का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि मुआवजे की गणना करते समय समान प्रकार के लाभों को ध्यान में रखा जाएगा ताकि एक ही आर्थिक नुकसान के लिए दो बार भुगतान न हो। फैसले से स्पष्ट हुई कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह निर्णय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है। इससे पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा तो मिलेगा, लेकिन एक ही नुकसान के लिए दो बार भुगतान नहीं किया जाएगा। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई सहायता अलग प्रकृति की है और मुआवजे से सीधे जुड़ी नहीं है, तो उसे घटाने की आवश्यकता नहीं होगी।

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0