भारत में ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पहले E20 पेट्रोल के विस्तार ने चर्चा को गर्माया था, और अब E85 फ्यूल को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यह सिर्फ एक नया ईंधन नहीं, बल्कि देश की फ्यूल नीति, ऑटो इंडस्ट्री और आम उपभोक्ताओं के लिए एक संभावित बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या भारत इस हाई-एथेनॉल फ्यूल सिस्टम के लिए तैयार है या यह बदलाव अभी समय से पहले है।
भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। E20 तक का सफर अपेक्षाकृत आसान माना गया क्योंकि मौजूदा पेट्रोल इंजन मामूली बदलावों के साथ इसे स्वीकार कर सकते हैं।
लेकिन E85 फ्यूल पूरी तरह अलग तकनीक पर आधारित है। इसमें एथेनॉल की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे:
इसी कारण इसे सिर्फ पेट्रोल का विकल्प नहीं, बल्कि एक नई फ्यूल कैटेगरी के रूप में देखा जा रहा है।
E85 को अपनाने के लिए मौजूदा वाहनों में बड़े तकनीकी बदलाव आवश्यक होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार:
यानी सामान्य पेट्रोल इंजन E85 को सुरक्षित तरीके से हैंडल नहीं कर सकते।
भारत में E85 का भविष्य फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFV) पर निर्भर करेगा।
ये वाहन:
कुछ दोपहिया कंपनियों ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं, लेकिन कार सेगमेंट में यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है।
E85 को लागू करना सिर्फ गाड़ियों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे ईंधन ढांचे को बदलने की जरूरत है।
मुख्य चुनौतियां:
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सही जानकारी के गलत फ्यूल भरने से इंजन को गंभीर नुकसान हो सकता है।
भारत में चल रही अधिकांश गाड़ियां अभी:
अगर E85 को तेजी से लागू किया गया तो:
इसलिए माना जा रहा है कि E85 को धीरे-धीरे और सीमित स्तर पर ही लागू किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत में ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पहले E20 पेट्रोल के विस्तार ने चर्चा को गर्माया था, और अब E85 फ्यूल को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यह सिर्फ एक नया ईंधन नहीं, बल्कि देश की फ्यूल नीति, ऑटो इंडस्ट्री और आम उपभोक्ताओं के लिए एक संभावित बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या भारत इस हाई-एथेनॉल फ्यूल सिस्टम के लिए तैयार है या यह बदलाव अभी समय से पहले है। E20 से E85 तक की छलांग क्यों बड़ी मानी जा रही है? भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। E20 तक का सफर अपेक्षाकृत आसान माना गया क्योंकि मौजूदा पेट्रोल इंजन मामूली बदलावों के साथ इसे स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन E85 फ्यूल पूरी तरह अलग तकनीक पर आधारित है। इसमें एथेनॉल की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे: इंजन की कार्यप्रणाली बदल जाती है फ्यूल सिस्टम पर अलग तरह का दबाव पड़ता है तकनीकी संरचना पूरी तरह एडवांस हो जाती है इसी कारण इसे सिर्फ पेट्रोल का विकल्प नहीं, बल्कि एक नई फ्यूल कैटेगरी के रूप में देखा जा रहा है। इंजन टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव की जरूरत E85 को अपनाने के लिए मौजूदा वाहनों में बड़े तकनीकी बदलाव आवश्यक होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार: फ्यूल पाइप और इंजेक्टर को अलग सामग्री से बनाना होगा एथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता को संभालने के लिए खास सिस्टम चाहिए एडवांस ECU (Electronic Control Unit) की जरूरत होगी जो फ्यूल मिक्स के अनुसार इंजन को एडजस्ट कर सके यानी सामान्य पेट्रोल इंजन E85 को सुरक्षित तरीके से हैंडल नहीं कर सकते। फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स बनेंगे भविष्य की कुंजी भारत में E85 का भविष्य फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFV) पर निर्भर करेगा। ये वाहन: अलग-अलग एथेनॉल ब्लेंड पर चल सकते हैं प्रदर्शन में स्थिरता बनाए रखते हैं फ्यूल बदलने पर भी इंजन को नुकसान नहीं पहुंचाते कुछ दोपहिया कंपनियों ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं, लेकिन कार सेगमेंट में यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। सबसे बड़ी चुनौती: इंफ्रास्ट्रक्चर E85 को लागू करना सिर्फ गाड़ियों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे ईंधन ढांचे को बदलने की जरूरत है। मुख्य चुनौतियां: पेट्रोल पंप पर अलग स्टोरेज टैंक की आवश्यकता E85 के लिए अलग डिस्पेंसिंग सिस्टम उपभोक्ताओं को जागरूक करना विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सही जानकारी के गलत फ्यूल भरने से इंजन को गंभीर नुकसान हो सकता है। मौजूदा गाड़ियों पर क्या असर होगा? भारत में चल रही अधिकांश गाड़ियां अभी: E10 या E20 मानकों के अनुसार डिजाइन की गई हैं अगर E85 को तेजी से लागू किया गया तो: पुराने वाहनों के लिए तकनीकी समस्याएं बढ़ सकती हैं माइलेज और इंजन पर असर पड़ सकता है इसलिए माना जा रहा है कि E85 को धीरे-धीरे और सीमित स्तर पर ही लागू किया जाएगा।
नई दिल्ली: देश में बढ़ती गर्मी के बीच Tata Motors ने अपने ग्राहकों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। कंपनी ने देशभर में अपना विशेष Summer Check-Up Camp शुरू कर दिया है, जिसके तहत कार मालिकों को न केवल फ्री में गाड़ी की जांच की सुविधा मिल रही है, बल्कि कई आकर्षक ऑफर्स और डिस्काउंट भी दिए जा रहे हैं। यह कैंप 28 अप्रैल 2026 तक सभी अधिकृत वर्कशॉप्स पर आयोजित किया जा रहा है। 30-पॉइंट फ्री हेल्थ चेक-अप: गर्मी से पहले गाड़ी पूरी तरह तैयार इस कैंप का सबसे बड़ा आकर्षण है 30-पॉइंट फ्री चेक-अप, जिसमें गाड़ी के हर जरूरी हिस्से की बारीकी से जांच की जाती है। इसमें शामिल हैं: AC की कूलिंग और परफॉर्मेंस बैटरी की स्थिति इंजन ऑयल और कूलेंट लेवल टायर अलाइनमेंट और ब्रेक सिस्टम इलेक्ट्रिकल सिस्टम CNG किट और EV डायग्नोस्टिक्स इस तरह की जांच से संभावित खराबियों का पहले ही पता चल जाता है, जिससे लंबी यात्रा या तेज गर्मी में गाड़ी के खराब होने का जोखिम कम हो जाता है। सभी गाड़ियों के लिए लागू: ICE, CNG और EV यह सर्विस कैंप Tata Motors की सभी श्रेणी की गाड़ियों पर लागू है—चाहे वे पेट्रोल-डीजल (ICE), CNG या इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) हों। गर्मी के मौसम में कूलिंग सिस्टम और इंजन पर अधिक दबाव पड़ता है, ऐसे में यह चेक-अप गाड़ी की सुरक्षा और बेहतर प्रदर्शन के लिए बेहद अहम साबित होता है। ग्राहकों के लिए खास ऑफर्स और छूट कंपनी इस कैंप के दौरान कई फायदे भी दे रही है: एक्सटेंडेड वारंटी पर 10% की छूट स्पेयर पार्ट्स, लुब्रिकेंट्स और सर्विस पर 10% तक डिस्काउंट Genuine Accessories (TMGA) पर 15% तक की छूट AMC और वारंटी के लिए आसान EMI विकल्प ये ऑफर्स खास तौर पर उन पार्ट्स को समय पर बदलने के लिए प्रेरित करते हैं, जो गर्मी में जल्दी खराब हो सकते हैं—जैसे बेल्ट, फिल्टर और होज। जल्दी बुक करें अपॉइंटमेंट चूंकि यह कैंप सीमित समय के लिए है, ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्द से जल्द अपनी सर्विस स्लॉट बुक करें। अंतिम दिनों में भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे देरी हो सकती है। ग्राहकों का सकारात्मक फीडबैक सोशल मीडिया पर कई ग्राहकों ने इस कैंप को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स का कहना है कि चेक-अप के बाद उनकी कार की AC कूलिंग और ओवरऑल परफॉर्मेंस में सुधार देखने को मिला है। यह कैंप Tata Nexon, Tata Punch, Tata Tiago, Tata Altroz, Tata Harrier और Tata Safari जैसे लोकप्रिय मॉडलों पर भी लागू है।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई रफ्तार देते हुए Bajaj Auto ने अपना नया इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पोर्टफोलियो WEGO लॉन्च कर दिया है। यह रेंज खास तौर पर पैसेंजर और कार्गो–दोनों सेगमेंट को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और एक बार चार्ज में 149Km से लेकर 296Km तक की रेंज देने का दावा करती है। बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के बीच यह लॉन्च ऑटो ड्राइवरों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। हर जरूरत के लिए अलग मॉडल Bajaj की WEGO रेंज को देश का सबसे व्यापक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पोर्टफोलियो बताया जा रहा है। इसमें: पैसेंजर सेगमेंट: 50, 70 और 90 सीरीज कार्गो सेगमेंट: C9009 और C9012 मॉडल इनकी कीमत करीब ₹3.11 लाख से ₹3.87 लाख के बीच रखी गई है, जिससे यह अलग-अलग बजट और उपयोग के हिसाब से विकल्प देता है। दमदार रेंज और स्मार्ट फीचर्स WEGO EV सिर्फ रेंज में ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी में भी आगे है। इसमें मिलते हैं: दो-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन रीजनरेटिव ब्रेकिंग हिल-होल्ड असिस्ट क्लाइंब मोड Bluetooth कनेक्टिविटी डिजिटल LCD डिस्प्ले पैसेंजर वेरिएंट्स में आरामदायक सीटिंग और ज्यादा लेगरूम दिया गया है, जबकि कार्गो मॉडल्स को भारी लोड और टिकाऊ उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। ऑटो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और लंबी रेंज के कारण यह EV रेंज खासतौर पर: ऑटो ड्राइवर्स डिलीवरी और ई-कॉमर्स बिजनेस के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। Bajaj का मजबूत सर्विस नेटवर्क इस सेगमेंट में भरोसा भी बढ़ाएगा। EV मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा अब तक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार में छोटे और मिड-लेवल प्लेयर्स का दबदबा था, लेकिन Bajaj की एंट्री से प्रतिस्पर्धा तेज होगी। इससे ग्राहकों को बेहतर विकल्प और तकनीक मिलने की उम्मीद है। WEGO EV का लॉन्च यह संकेत देता है कि भारत में कमर्शियल वाहनों का भविष्य तेजी से इलेक्ट्रिक की ओर बढ़ रहा है। खासकर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और डिलीवरी सेक्टर में यह एक बड़ा बदलाव ला सकता है।