शिक्षा

Jamia Admission 2026: Courses & Placements

जामिया में चाहिए एंट्री? जानें एडमिशन प्रोसेस, कोर्स और प्लेसमेंट की पूरी डिटेल

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Main entrance gate of Jamia Millia Islamia University with students walking on campus.
Jamia Millia Islamia Admission Guide

दिल्ली स्थित Jamia Millia Islamia देश की सबसे प्रतिष्ठित सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में से एक है। हर साल हजारों छात्र यहां एडमिशन पाने का सपना देखते हैं, खासकर वे जो कम फीस में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा चाहते हैं। अपनी बेहतरीन फैकल्टी, विविध कोर्स और मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड के चलते जामिया छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है।

NIRF रैंकिंग 2025 में जामिया मिलिया इस्लामिया को 4वां स्थान मिला, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रतिष्ठा को दर्शाता है। आइए विस्तार से जानते हैं एडमिशन प्रक्रिया, उपलब्ध कोर्स और प्लेसमेंट की स्थिति।

कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं?

जामिया यूनिवर्सिटी में लगभग हर स्ट्रीम के कोर्स उपलब्ध हैं:

  • ग्रेजुएशन: BA, BSc, BCom
  • पोस्ट ग्रेजुएशन: MA, MSc, MCom
  • प्रोफेशनल कोर्स: BTech, MTech
  • लॉ: BA LLB
  • मास कम्युनिकेशन
  • PhD प्रोग्राम

एडमिशन प्रोसेस कैसे होता है?

जामिया में एडमिशन मुख्य रूप से दो तरीकों से होता है:

  1. यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम:
    कई कोर्स के लिए जामिया खुद एंट्रेंस टेस्ट आयोजित करती है।
  2. CUET स्कोर के जरिए एडमिशन:
    अब कई कोर्स में Common University Entrance Test (CUET) के स्कोर के आधार पर भी दाखिला मिलता है।

एडमिशन मेरिट और कटऑफ पर आधारित होता है, जो हर साल कोर्स और प्रतिस्पर्धा के अनुसार बदलती रहती है।

प्लेसमेंट रिकॉर्ड कैसा है?

जामिया का प्लेसमेंट रिकॉर्ड लगातार बेहतर रहा है। यहां हर साल कई बड़ी कंपनियां कैंपस में आती हैं, जैसे:

  • TCS
  • Accenture
  • Tech Mahindra
  • ICICI Bank

मुख्य आंकड़े:

  • हाईएस्ट पैकेज: लगभग 24 लाख रुपये
  • मार्केटिंग फील्ड प्लेसमेंट (2025): 43%

यह आंकड़े बताते हैं कि जामिया न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि करियर के लिहाज से भी एक मजबूत विकल्प है।

एडमिशन के लिए ऐसे करें आवेदन

  1. जामिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
  2. Admission सेक्शन खोलें
  3. रजिस्ट्रेशन करें
  4. आवेदन फॉर्म भरें
  5. जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें
  6. फीस जमा करें
  7. फॉर्म सबमिट कर प्रिंट निकाल लें 
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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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पटना: बिहार में होने वाली बहुप्रतीक्षित BPSC सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) परीक्षा 2026 कल यानी 14 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इस बार इस भर्ती में 10 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, जिससे यह राज्य की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो गई है। परीक्षा से ठीक पहले उम्मीदवारों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है–पेपर में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे? इस चिंता को दूर करते हुए परीक्षा आयोजित करने वाले अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने खुद परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। आयोग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पॉडकास्ट के जरिए यह जानकारी दी है, ताकि अभ्यर्थी अंतिम समय में सही दिशा में तैयारी कर सकें। परीक्षा में कैसे होंगे सवाल? परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, सामान्य अध्ययन (General Studies) का दायरा व्यापक होगा। हालांकि इसमें इतिहास, भूगोल, विज्ञान, अर्थशास्त्र और राजनीति जैसे विषय शामिल होंगे, लेकिन प्रश्न पूरी तरह सीमित नहीं होंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि: “जीके डिफाइंड है, लेकिन जीएस पूरी तरह सीमित नहीं है। इसमें वह सब कुछ पूछा जा सकता है जो एक पढ़े-लिखे व्यक्ति को सामान्य रूप से पता होना चाहिए।” इसका मतलब है कि उम्मीदवारों को सिर्फ रटने के बजाय अवधारणात्मक समझ और व्यापक ज्ञान पर ध्यान देना होगा। जनरल एप्टीट्यूड और भाषा पर खास फोकस जनरल एप्टीट्यूड सेक्शन को दो हिस्सों में बांटा गया है: रीजनिंग मेंटल एबिलिटी इसके अलावा, हिंदी और अंग्रेजी भाषा का पेपर बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। परीक्षा नियंत्रक ने साफ कहा कि अगर अभ्यर्थी इन भाषा पेपर्स में न्यूनतम अंक हासिल नहीं करते हैं, तो बाकी विषयों में अच्छे अंक लाने के बावजूद मेरिट लिस्ट में जगह नहीं मिलेगी। एग्जाम पैटर्न और मार्किंग स्कीम परीक्षा तीन प्रमुख हिस्सों में आयोजित होगी: सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी कुल अंक: 100 अवधि: 2 घंटे न्यूनतम योग्यता: 30% सामान्य अध्ययन (GS) कुल अंक: 100 अवधि: 2 घंटे सामान्य योग्यता (Aptitude) कुल अंक: 100 अवधि: 2 घंटे महत्वपूर्ण: हर गलत उत्तर पर 1/3 अंक की निगेटिव मार्किंग लागू होगी। इसलिए उम्मीदवारों को अनुमान के आधार पर उत्तर देने से बचने की सलाह दी गई है। अभ्यर्थियों के लिए अंतिम रणनीति परीक्षा से एक दिन पहले विशेषज्ञों की सलाह है कि उम्मीदवार: बेसिक कॉन्सेप्ट्स को रिवाइज करें करेंट अफेयर्स और सामान्य जानकारी पर नजर डालें मॉक टेस्ट के आधार पर समय प्रबंधन सुधारें और सबसे जरूरी–घबराहट से बचें और आत्मविश्वास बनाए रखें

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नई दिल्ली, एजेंसियां। Central Board of Secondary Education ने स्कूलों के लिए एक अहम सर्कुलर जारी करते हुए कक्षा 6 से “तीसरी भाषा (R3)” पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। यह नई व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी। यह फैसला National Education Policy 2020 के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाना और उनकी संवाद क्षमता को बेहतर करना है।   स्कूलों को 7 दिन में करना होगा लागू CBSE ने साफ निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों में अभी तक तीसरी भाषा नहीं पढ़ाई जा रही है, वे इसे 7 दिनों के भीतर लागू करें। बोर्ड ने कहा है कि इस प्रक्रिया में देरी स्वीकार नहीं होगी और सभी स्कूलों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।   भाषा चयन में स्कूलों को छूट बोर्ड ने स्कूलों को यह स्वतंत्रता दी है कि वे भारत की किसी भी मान्यता प्राप्त भाषा को तीसरी भाषा के रूप में चुन सकते हैं। स्कूलों को यह जानकारी अपने क्षेत्रीय कार्यालय और OASIS पोर्टल पर अपडेट करनी होगी, ताकि बोर्ड निगरानी कर सके।   एक बार चुनी भाषा आगे तक रहेगी जारी सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 6 में चुनी गई तीसरी भाषा कक्षा 9 और 10 तक जारी रहेगी। ऐसे में स्कूलों को भाषा का चयन सोच-समझकर करना होगा, क्योंकि इसका सीधा असर छात्रों की आगे की पढ़ाई पर पड़ेगा।   बच्चों के समग्र विकास पर फोकस तीसरी भाषा का उद्देश्य केवल पढ़ना नहीं, बल्कि बोलना, समझना और लिखना भी है। इसके तहत छात्रों को रोजमर्रा की बातचीत, कहानी और कविता समझने, सही उच्चारण के साथ पढ़ने और अपने विचार लिखने की ट्रेनिंग दी जाएगी।   निगरानी भी करेगा बोर्ड CBSE ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय अधिकारी स्कूलों से जानकारी लेकर यह सुनिश्चित करेंगे कि नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि सही तरीके से लागू भी हों।

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