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BSEB Inter Result 2026 Expected After March 20

BSEB 12th Result 2026: जल्द होंगे टॉपर्स के इंटरव्यू, 20 मार्च के बाद आ सकता है बिहार बोर्ड इंटर का रिजल्ट

surbhi मार्च 12, 2026 0
Students checking Bihar Board 12th Result 2026 onlin
BSEB 12th Result 2026 Update

 

बिहार के लाखों छात्रों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। Bihar School Examination Board (BSEB) ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की कॉपियों का मूल्यांकन पूरा कर लिया है और अब बोर्ड जल्द ही रिजल्ट घोषित करने की तैयारी में जुटा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार बोर्ड का 12वीं का रिजल्ट 20 मार्च के बाद जारी किया जा सकता है।

 

टॉपर्स के इंटरव्यू के बाद जारी होगा रिजल्ट

बोर्ड की परंपरा के अनुसार परिणाम घोषित करने से पहले टॉपर्स का इंटरव्यू लिया जाता है। कॉपियों की जांच पूरी होने के बाद अब टॉप करने वाले छात्रों को बुलाकर उनकी कॉपियों का वेरिफिकेशन और इंटरव्यू लिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा।

 

ऑनलाइन जारी होगा परिणाम

छात्र अपना रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट results.biharboardonline.com पर जाकर देख सकेंगे। रिजल्ट चेक करने के लिए छात्रों को रोल नंबर और रोल कोड दर्ज करना होगा।

 

रिजल्ट के साथ जारी होगी टॉपर्स लिस्ट

बिहार बोर्ड रिजल्ट जारी करते समय राज्य के टॉपर्स की सूची भी जारी करता है। जो छात्र राज्य में शीर्ष स्थान हासिल करते हैं, उन्हें राज्य सरकार की ओर से सम्मानित किया जाता है।

 

टॉपर्स को मिलेगा नकद इनाम और लैपटॉप

पिछले साल के पैटर्न के अनुसार-

  • पहला स्थान पाने वाले छात्र को 2 लाख रुपये
  • दूसरा स्थान पाने वाले को 1.5 लाख रुपये
  • तीसरा स्थान पाने वाले को 1 लाख रुपये

इसके अलावा टॉपर्स को लैपटॉप, किंडल ई-बुक रीडर, मेडल और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाता है। वहीं चौथे और पांचवें स्थान पर आने वाले छात्रों को 30-30 हजार रुपये, लैपटॉप और मेडल से सम्मानित किया जाता है।

 

पास होने के लिए जरूरी हैं 33% अंक

बोर्ड परीक्षा में पास होने के लिए छात्रों को हर विषय में कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। अगर कोई छात्र एक या दो विषयों में फेल हो जाता है तो वह बोर्ड द्वारा आयोजित विशेष परीक्षा में शामिल होकर उसी साल परीक्षा पास कर सकता है।

अब छात्रों और अभिभावकों की नजर बिहार बोर्ड की ओर से घोषित होने वाली रिजल्ट डेट पर टिकी हुई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली: देशभर में संचालित Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) के स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि आज के समय में केंद्रीय विद्यालयों (KV) को प्राइवेट स्कूलों का मजबूत विकल्प माना जाता है। खासकर दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले अभिभावकों के बीच इन स्कूलों में एडमिशन को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। दिल्ली-एनसीआर में कितने केंद्रीय विद्यालय हैं? दिल्ली रीजन में अकेले लगभग 46 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा एनसीआर के प्रमुख शहरों-Noida, Ghaziabad, Gurugram और Faridabad-में मिलाकर करीब 18-20 केंद्रीय विद्यालय सक्रिय हैं। इस तरह पूरा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र केवी के मजबूत नेटवर्क से कवर होता है। प्रमुख केवी स्कूल (शहरवार) नोएडा और ग्रेटर नोएडा केवी सेक्टर 24, नोएडा केवी ग्रेटर नोएडा केवी एनटीपीसी दादरी केवी CISF सूरजपुर गाजियाबाद केवी नंबर 1 हिंडन AFS केवी नंबर 2 हिंडन AFS केवी कमला नेहरू नगर केवी मुरादनगर केवी बाबूगढ़ कैंट गुरुग्राम केवी नंबर 1 AFS गुरुग्राम केवी सोहना रोड केवी CRPF कादरपुर केवी NSG मानेसर फरीदाबाद केवी नंबर 1 केवी नंबर 2 केवी नंबर 3 इन स्कूलों को अलग-अलग क्लस्टर में बांटा गया है ताकि हर क्षेत्र के छात्रों को नजदीक में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। कौन ले सकता है एडमिशन? केंद्रीय विद्यालयों में एडमिशन “प्रायोरिटी सिस्टम” के आधार पर होता है: कैटेगरी 1: केंद्र सरकार के कर्मचारी (डिफेंस, रेलवे) कैटेगरी 2: PSUs और स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारी कैटेगरी 3: राज्य सरकार के कर्मचारी कैटेगरी 4: राज्य सरकार के उपक्रम कैटेगरी 5: आम नागरिक (प्राइवेट जॉब/बिजनेस) इसके अलावा Right to Education Act के तहत EWS वर्ग के लिए 25% सीटें आरक्षित होती हैं। उम्र सीमा क्या है? कक्षा 1 में एडमिशन के लिए बच्चे की उम्र 31 मार्च 2026 तक: न्यूनतम: 6 वर्ष अधिकतम: 8 वर्ष एडमिशन प्रक्रिया कैसे होती है? कक्षा 1: पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया कक्षा 2 और ऊपर: ऑफलाइन (सीट उपलब्धता के आधार पर) रजिस्ट्रेशन के लिए आधिकारिक वेबसाइट: kvsangathan.nic.in जरूरी डॉक्यूमेंट्स जन्म प्रमाण पत्र निवास प्रमाण पत्र कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू) माता-पिता का सर्विस सर्टिफिकेट 

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बचपन में आसमान की ओर देखकर “काश मैं भी अंतरिक्ष में जा पाऊं” - ये सपना बहुतों ने देखा होता है। लेकिन एस्ट्रोनॉट बनना सिर्फ सपना नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, सही पढ़ाई और लंबे समय की तैयारी का नतीजा होता है। अगर आप भी NASA के Artemis II जैसे मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं पूरा रोडमैप। आर्टिमिस II मिशन क्या है? Artemis II NASA का एक अहम मिशन है, जिसमें इंसानों को चंद्रमा के पास तक भेजा जाएगा। यह मिशन चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं करेगा इसका उद्देश्य स्पेसक्राफ्ट और क्रू सिस्टम की टेस्टिंग है यह भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन की तैयारी का बड़ा कदम है एस्ट्रोनॉट बनने के लिए कौन-सा कोर्स जरूरी है? एस्ट्रोनॉट बनने के लिए कोई एक तय डिग्री नहीं होती, लेकिन कुछ फील्ड्स बेहद महत्वपूर्ण हैं: जरूरी विषय:Astronaut training simulation for Artemis II mission with spacecraft and crew preparing for lunar journey Mathematics (गणित) Physics (भौतिकी) Aerospace Engineering Computer Science आगे की ट्रेनिंग: Pilot Training (पायलट ट्रेनिंग) Space Mission Simulation Rocket Science & Space Technology इन सभी का कॉम्बिनेशन आपको अंतरिक्ष मिशनों के लिए तैयार करता है। कहां से करें पढ़ाई? भारत में प्रमुख संस्थान: ISRO (Indian Space Research Organisation) IITs (Indian Institutes of Technology) IISc Bangalore यहां से पढ़ाई करने वाले छात्र स्पेस साइंस और इंजीनियरिंग में मजबूत करियर बना सकते हैं। जरूरी स्किल्स और योग्यता एस्ट्रोनॉट बनने के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि कुछ खास गुण भी जरूरी हैं: Strong Physical Fitness  Mental Stability  Teamwork Skills  Problem Solving Ability Leadership Qualities एस्ट्रोनॉट बनने का स्टेप-बाय-स्टेप रास्ता 10वीं-12वीं में Science (PCM) चुनें Graduation में Engineering/Physics/Maths करें Higher Studies (M.Tech/PhD) करें (फायदा मिलता है) ISRO/NASA जैसी एजेंसियों में काम का अनुभव लें Astronaut Selection Program के लिए अप्लाई करें क्या भारत से भी बन सकते हैं एस्ट्रोनॉट? बिलकुल! ISRO का Gaganyaan Mission भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें भारतीय एस्ट्रोनॉट भेजे जाएंगे। आने वाले समय में भारत में भी इस क्षेत्र में बड़े अवसर बढ़ने वाले हैं।

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रांची: झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 21 मई 2026 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित तिथि के भीतर आवेदन कर सकते हैं। यह परीक्षा राज्य के प्राथमिक (कक्षा 1–5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6–8) विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए आवश्यक पात्रता तय करती है। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 21 अप्रैल 2026 अंतिम तिथि: 21 मई 2026 पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सूचना जिन उम्मीदवारों ने पहले विज्ञापन संख्या 30/2024 के तहत आवेदन किया था, उन्हें भी दोबारा आवेदन करना अनिवार्य होगा। हालांकि, ऐसे अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्हें नए नियमों के अनुसार: भाषा-2 का चयन करना होगा पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट करनी होगी शैक्षणिक योग्यता प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की योग्यता अधिसूचना संख्या 487 (दिनांक 26.03.2026) के अनुसार निर्धारित की गई है। विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन देख सकते हैं। आरक्षित वर्ग को राहत SC/ST/OBC/EBC/दिव्यांग अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंकों में 5% की छूट दी जाएगी  ट्रेनिंग कर रहे अभ्यर्थियों को भी मौका जो उम्मीदवार शिक्षक प्रशिक्षण (Training) की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते: निर्धारित तिथि तक अंतिम अंकपत्र जमा करें परिणाम जारी होने से पहले दस्तावेज सत्यापन कराएं यह प्रक्रिया NCTE के दिशा-निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार होगी। जरूरी नियम आवेदन करने से पात्रता स्वतः प्रमाणित नहीं होगी अंतिम सत्यापन नियुक्ति के समय जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा किया जाएगा उम्मीदवार अपने अंक सुधार के लिए एक से अधिक बार परीक्षा दे सकते हैं आयु सीमा न्यूनतम आयु: 21 वर्ष (1 अगस्त 2026 तक) अधिकतम आयु: राज्य सरकार के नियमानुसार विशेष छूट पारा शिक्षकों को सेवा अवधि के बराबर छूट (अधिकतम 58 वर्ष तक) 2016–2026 के बीच परीक्षा अंतराल को देखते हुए अधिकतम 9 वर्ष की छूट क्यों जरूरी है JTET? JTET पास करना झारखंड में सरकारी शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य पात्रता है। ध्यान रखें कि यह परीक्षा केवल पात्रता तय करती है, सीधे नौकरी नहीं देती। अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सलाह आवेदन से पहले नियमावली ध्यान से पढ़ें भाषा चयन सोच-समझकर करें सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें अंतिम तिथि का इंतजार न करें

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अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?