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Top 5 Affordable Countries for MBBS After NEET

NEET के बाद विदेश से MBBS का शानदार मौका, जानें 5 सबसे किफायती देश

anmol जुलाई 21, 2026 0
Indian students exploring affordable MBBS abroad options in Russia, Kazakhstan, Kyrgyzstan, Uzbekistan and Georgia after NEET.
Affordable MBBS Abroad for Indian Students

MBBS Abroad for Indian Students: भारत में मेडिकल सीट न मिलने या प्राइवेट कॉलेजों की महंगी फीस से परेशान छात्रों के लिए विदेश में MBBS एक बेहतर विकल्प बन सकता है। रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और जॉर्जिया जैसे देशों में अपेक्षाकृत कम खर्च में मेडिकल शिक्षा उपलब्ध है। हालांकि, एडमिशन से पहले NMC और WDOMS की मान्यता, स्टूडेंट वीजा प्रक्रिया और भारत में लागू मेडिकल लाइसेंसिंग नियमों की जानकारी जरूर जांच लें।

हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा पास करने के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिलने या निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के कारण डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं कर पाते। ऐसे में विदेश से MBBS करना भारतीय छात्रों के लिए एक किफायती और व्यवहारिक विकल्प बनकर सामने आया है।

रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और जॉर्जिया जैसे देशों की कई मेडिकल यूनिवर्सिटीज भारतीय छात्रों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई, आधुनिक लैब, अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मेडिकल शिक्षा प्रदान करती हैं। इन देशों में भारत के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम खर्च में MBBS की पढ़ाई पूरी की जा सकती है।

कम बजट में MBBS कराने वाले 5 देश

1. रूस (Russia)

  • अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹18–25 लाख
  • 6 वर्षीय MBBS प्रोग्राम
  • सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी और बेहतर क्लिनिकल ट्रेनिंग के लिए लोकप्रिय।

2. किर्गिस्तान (Kyrgyzstan)

  • अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹18–25 लाख
  • 5–6 वर्षीय कोर्स
  • कम फीस और रहने-खाने का अपेक्षाकृत कम खर्च।

3. उज्बेकिस्तान (Uzbekistan)

  • अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹18–25 लाख
  • भारतीय छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय।
  • सुरक्षित माहौल और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई।

4. कजाकिस्तान (Kazakhstan)

  • अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹25–35 लाख
  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर लैब और अस्पतालों में प्रशिक्षण।

5. जॉर्जिया (Georgia)

  • अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹25–38 लाख
  • यूरोपीय स्तर की मेडिकल शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर।

विदेश से MBBS करने के प्रमुख फायदे

  • भारत के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम खर्च।
  • अधिकांश विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई।
  • आधुनिक अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग।
  • पारदर्शी एडमिशन प्रक्रिया।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की मेडिकल शिक्षा।

एडमिशन और स्टूडेंट वीजा प्रक्रिया

विदेश में MBBS के लिए सबसे पहले NMC और WDOMS से मान्यता प्राप्त मेडिकल यूनिवर्सिटी का चयन करें। इसके बाद 10वीं-12वीं की मार्कशीट, NEET स्कोरकार्ड, पासपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करें। आवेदन स्वीकृत होने पर विश्वविद्यालय Admission/Invitation Letter जारी करता है। इसी पत्र के आधार पर संबंधित देश के Embassy में Student Visa के लिए आवेदन किया जाता है। वीजा स्वीकृत होने के बाद छात्र अपनी यात्रा और विश्वविद्यालय में रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

ध्यान रखें

विदेश से MBBS करने का निर्णय लेने से पहले संबंधित विश्वविद्यालय की NMC मान्यता, WDOMS सूची, भारत में लागू FMGE/NExT नियम, इंटर्नशिप, भाषा, रहने का खर्च और लाइसेंसिंग प्रक्रिया की पूरी जानकारी अवश्य जांच लें। सही जानकारी और सही संस्थान का चयन आपके मेडिकल करियर की मजबूत शुरुआत बन सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anmol Manisha

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NEET UG 2026: झारखंड के सुहर्ष कुमार गुप्ता बने स्टेट टॉपर, ज्ञानेंद्र गर्व को AIR 676

रांची। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार झारखंड के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य का गौरव बढ़ाया है। सुहर्ष कुमार गुप्ता ने 99.9771 पर्सेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 455 हासिल कर झारखंड के स्टेट टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया। वहीं रांची के ज्ञानेंद्र गर्व ने 99.96 पर्सेंटाइल और 655 अंक हासिल करते हुए AIR 676 प्राप्त की।   ज्ञानेंद्र गर्व की इस उपलब्धि से उनके परिवार और शिक्षकों में खुशी की लहर है। उनके पिता मयंक भूषण गढ़वा में एसडीओ के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां कुमारी अंजली सरकारी शिक्षिका हैं। ज्ञानेंद्र ने अपनी दसवीं की पढ़ाई डीएवी कपिलदेव स्कूल, रांची से और बारहवीं की पढ़ाई जेवीएम श्यामली से पूरी की है।   रांची के अन्य विद्यार्थियों ने  भी अच्छा प्रदर्शन किया रांची के अन्य विद्यार्थियों ने भी परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। अक्षत प्रेम ने 642 अंक के साथ AIR 2034, साकिब अहमद ने 640 अंक के साथ AIR 2282, मयंक कुमार ने AIR 3211 और सर्वजीत ने AIR 4271 हासिल की। इस वर्ष रांची से लगभग 10 हजार अभ्यर्थी NEET UG परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें कई छात्रों ने शानदार सफलता दर्ज की।   इस बार NEET UG 2026 का परिणाम ऐसे समय आया है, जब पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी। इसके बावजूद देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। NTA के अनुसार, 11.21 लाख उम्मीदवार मेडिकल, डेंटल, आयुष और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्वालिफाई हुए हैं।   अब सफल अभ्यर्थी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड के छात्रों का यह प्रदर्शन राज्य में चिकित्सा शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता, बेहतर शैक्षणिक माहौल और लगातार मेहनत का सकारात्मक संकेत है।

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IIT Delhi ने लॉन्च किया Applied Quantum Computing और AI सर्टिफिकेट कोर्स, JEE स्कोर की जरूरत नहीं; जानें कैसे करें आवेदन

IIT Delhi AI Certificate Course 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए अच्छी खबर है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने Applied Quantum Computing and AI में नया 6.5 महीने का ऑनलाइन सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू किया है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं है। यह कोर्स उन प्रोफेशनल्स के लिए तैयार किया गया है जो नई तकनीकों में अपने कौशल को बेहतर बनाकर करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं। IIT Delhi ने जारी किया आधिकारिक नोटिस IIT दिल्ली ने अपने नोटिस में बताया है कि Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme को इंडस्ट्री की मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस कोर्स के माध्यम से प्रतिभागियों को क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्योग-उन्मुख स्किल्स भी सिखाई जाएंगी। आवेदन की अंतिम तिथि इच्छुक उम्मीदवार इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 6.5 महीने का ऑनलाइन प्रोग्राम यह कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन मोड में संचालित किया जाएगा, जिससे वर्किंग प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी के साथ भी इसे आसानी से पूरा कर सकेंगे। इसके अलावा, प्रतिभागियों को IIT Delhi कैंपस विजिट का अवसर भी मिलेगा, जहां वे संस्थान के अकादमिक वातावरण और विशेषज्ञों के साथ सीखने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। किन लोगों के लिए है यह कोर्स? यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए डिजाइन किया गया है जो: AI और Quantum Computing में नई स्किल्स सीखना चाहते हैं। टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इंडस्ट्री-ओरिएंटेड और एडवांस तकनीकी ज्ञान हासिल करना चाहते हैं। नौकरी के साथ ऑनलाइन सीखने का विकल्प चाहते हैं। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं: IIT Delhi CEP के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme चुनें। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। कोर्स की मुख्य विशेषताएं संस्थान: IIT Delhi कोर्स: Applied Quantum Computing and AI अवधि: 6.5 महीने मोड: ऑनलाइन कैंपस इमर्शन का अवसर JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर 2026 AI और Quantum Computing आने वाले वर्षों की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हैं। ऐसे में IIT Delhi का यह सर्टिफिकेट प्रोग्राम उन प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन अवसर हो सकता है जो भविष्य की तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल कर अपने करियर को नई दिशा देना चाहते हैं।  

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