शिक्षा

UGC-NET फेलोशिप को लेकर संसद में उठा सवाल, शशि थरूर ने सरकार से मांगा जवाब

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Shashi Tharoor
Shashi Tharoor on UGC - NET Fellowship

नई दिल्ली, एजेंसियां। उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े छात्रों को मिलने वाली UGC-NET जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) को लेकर संसद में सवाल उठाया गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार से फेलोशिप की राशि, पात्र उम्मीदवारों की संख्या और शोध छात्रों के सामने आ रही आर्थिक चुनौतियों को लेकर जवाब मांगा है।

 

रिसर्च छात्रों की समस्याओं पर उठी चर्चा

 

संसद में शशि थरूर ने कहा कि उच्च शिक्षा और शोध को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि शोधार्थियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिले। उन्होंने सरकार से पूछा कि UGC-NET JRF के तहत कितने छात्रों को फेलोशिप मिल रही है और पिछले वर्षों में इसमें क्या बदलाव किए गए हैं।

 

फेलोशिप राशि और बढ़ती लागत का मुद्दा

 

शोध छात्रों का कहना है कि महंगाई और शिक्षा से जुड़े खर्च बढ़ने के कारण वर्तमान फेलोशिप राशि में सुधार की आवश्यकता है। कई छात्र लंबे समय से फेलोशिप बढ़ाने और समय पर भुगतान की मांग कर रहे हैं।

 

सरकार से मांगी गई जानकारी

 

थरूर ने सरकार से यह भी जानकारी मांगी कि UGC-NET योग्य उम्मीदवारों को मिलने वाली फेलोशिप के लिए क्या कोई नई योजना बनाई जा रही है। उन्होंने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

 

उच्च शिक्षा नीति पर बढ़ी बहस

 

UGC-NET और शोध फेलोशिप का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और शोध को बढ़ावा देने को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत फेलोशिप व्यवस्था से ज्यादा छात्र रिसर्च क्षेत्र की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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शिक्षा

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NEET विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा ऐलान, 2027 से कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की तैयारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार 2027 से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Test) मोड में कराने की तैयारी कर रही है। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और गड़बड़ी मुक्त बनाना है।   OMR आधारित परीक्षा से डिजिटल सिस्टम की ओर बदलाव   धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि NEET जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से प्रश्नपत्र लीक, पेपर छपाई और वितरण जैसी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।   छात्रों की सुविधा के लिए बनाई जाएगी योजना   शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, देशभर में लाखों छात्रों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने, तकनीकी सुविधाएं मजबूत करने और छात्रों को डिजिटल परीक्षा प्रणाली से परिचित कराने की योजना बनाई जाएगी।   NEET विवाद के बाद सुधारों पर जोर   NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध के बाद सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर लगातार जोर दे रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों का भरोसा बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा।   विशेषज्ञों ने बताया बड़ा कदम   शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज हो सकती है और पारदर्शिता बढ़ सकती है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस बदलाव की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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IGNOU Placement Drive 2026: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के छात्रों और पूर्व छात्रों के लिए रोजगार का शानदार अवसर सामने आया है। विश्वविद्यालय 27 और 28 जुलाई 2026 को दो दिवसीय मेगा प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करने जा रहा है, जिसमें 350 से अधिक नौकरी के अवसर उपलब्ध होंगे। इस भर्ती अभियान में बैंकिंग, इंश्योरेंस, एविएशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, मार्केटिंग, सप्लाई चेन और कस्टमर सपोर्ट जैसे कई क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियां हिस्सा लेंगी। इस प्लेसमेंट ड्राइव की खास बात यह है कि कुछ स्किल-आधारित पदों पर 12 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज भी ऑफर किया जाएगा। ऐसे में यह आयोजन फ्रेशर्स और अनुभवी उम्मीदवारों दोनों के लिए बेहतरीन अवसर साबित हो सकता है। कौन कर सकता है आवेदन? इस प्लेसमेंट ड्राइव में निम्न उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं— IGNOU के वर्तमान छात्र IGNOU के पूर्व छात्र (Alumni) फ्रेश ग्रेजुएट फाइनल सेमेस्टर के छात्र इन कोर्सों के विद्यार्थी आवेदन के पात्र हैं— BA BSc BCom BBA BEd MCom डिप्लोमा पीजी डिप्लोमा अन्य पात्र पाठ्यक्रम उम्मीदवार आवेदन के लिए IGNOU की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Announcement सेक्शन के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। किन कंपनियों में मिलेगा मौका? इस मेगा प्लेसमेंट ड्राइव में कई प्रतिष्ठित कंपनियां भाग लेंगी, जिनमें शामिल हैं— Axis Bank Bajaj Life Insurance Bajaj Capital Insurance Broking Birds Flight India Pvt. Ltd. CII-IGNOU Services and Hospitality AAJ Supply Chain Management Proof-of-Skill किन पदों पर होगी भर्ती? उम्मीदवारों को विभिन्न प्रोफाइल पर नौकरी के अवसर मिलेंगे, जिनमें प्रमुख हैं— ऑफिस सेल्स इंश्योरेंस रिलेशनशिप मैनेजर कस्टमर सर्विस एजेंट कस्टमर सपोर्ट एग्जीक्यूटिव सेल्स सपोर्ट डेटा एनालिस्ट UI/UX डिजाइनर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव बिजनेस डेवलपमेंट कॉपीराइटर एचआर एग्जीक्यूटिव अन्य तकनीकी एवं गैर-तकनीकी पद कितना मिलेगा वेतन? कंपनी और पद के अनुसार वेतन अलग-अलग होगा। शुरुआती पैकेज: 2.3 लाख रुपये प्रति वर्ष अधिकतम पैकेज: 12 लाख रुपये प्रति वर्ष AI, डेटा एनालिटिक्स, UI/UX और अन्य स्किल-आधारित भूमिकाओं में बेहतर वेतन मिलने की संभावना है। इंटरव्यू के लिए क्या साथ लेकर जाएं? उम्मीदवारों को इंटरव्यू के दौरान निम्न दस्तावेज साथ रखने होंगे— अपडेटेड CV (कम से कम दो प्रतियां) सरकारी पहचान पत्र या IGNOU ID कार्ड पासपोर्ट साइज फोटो शैक्षणिक प्रमाण पत्र अनुभव प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) क्यों है यह प्लेसमेंट ड्राइव खास? 350 से अधिक नौकरी के अवसर 12 लाख रुपये तक का वार्षिक पैकेज कई प्रतिष्ठित कंपनियों की भागीदारी फ्रेशर्स और एलुमनाई दोनों के लिए मौका बैंकिंग, AI, मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स समेत कई सेक्टर में भर्ती ध्यान रखें: आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और इंटरव्यू की तैयारी पूरी कर लें। निर्धारित तिथि पर समय से पहुंचना सुनिश्चित करें।  

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IIM Admission Through JEE Score: 12वीं के बाद सिर्फ IIT ही नहीं, अब JEE Main और JEE Advanced स्कोर के जरिए देश के कई IIM में मैनेजमेंट, डेटा साइंस, AI और डिजिटल बिजनेस जैसे अंडरग्रेजुएट कोर्स में भी दाखिला लिया जा सकता है। IIT नहीं तो IIM सही! JEE स्कोर से खुल सकते हैं देश के टॉप मैनेजमेंट संस्थानों के दरवाजे हर साल लाखों छात्र JEE Main और JEE Advanced परीक्षा देते हैं। हालांकि, सभी छात्रों को IIT में सीट नहीं मिल पाती। ऐसे में निराश होने की जरूरत नहीं है। अगर आपका JEE स्कोर अच्छा है, तो उसी स्कोर के आधार पर देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) के कुछ अंडरग्रेजुएट (UG) प्रोग्राम में भी प्रवेश पाने का अवसर मिल सकता है। आज कई IIM 12वीं के बाद मैनेजमेंट, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिजनेस एनालिटिक्स और डिजिटल बिजनेस जैसे आधुनिक विषयों में बैचलर डिग्री प्रोग्राम ऑफर कर रहे हैं। इनमें कुछ कोर्स के लिए JEE Main या JEE Advanced स्कोर को प्रवेश प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। किन IIM में JEE स्कोर से मिल सकता है एडमिशन? IIM लखनऊ JEE Advanced स्कोर के आधार पर Bachelor of Science (B.Sc.) प्रोग्राम में आवेदन का अवसर मिलता है। IIM मुंबई Digital Science and Business Management जैसे चार वर्षीय UG प्रोग्राम में JEE Main स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। IIM संबलपुर कुछ अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में JEE Main स्कोर के आधार पर एडमिशन की सुविधा उपलब्ध है। IIM सिरमौर Bachelor of Management Studies (BMS) प्रोग्राम में JEE Main स्कोर के आधार पर आवेदन किया जा सकता है। यहां मैनेजमेंट और बिजनेस एनालिटिक्स जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। किन क्षेत्रों में बना सकते हैं करियर? इन UG प्रोग्राम के जरिए छात्र आगे चलकर इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं— मैनेजमेंट डेटा साइंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बिजनेस एनालिटिक्स डिजिटल बिजनेस कॉर्पोरेट मैनेजमेंट एडमिशन से पहले रखें इन बातों का ध्यान हर IIM की प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता, कटऑफ और चयन मानदंड अलग हो सकते हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित IIM की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर योग्यता, आवेदन तिथि और चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी जरूर जांच लें। कई संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। देश के टॉप IIM राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा के आधार पर IIM अहमदाबाद, IIM बैंगलोर और IIM कोझिकोड प्रमुख संस्थानों में शामिल हैं। यदि आपका लक्ष्य प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान से पढ़ाई करना है, तो JEE स्कोर आपके लिए एक नया अवसर साबित हो सकता है।  

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