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'लू में औंधा हो गया कॉकरोच का मुखिया', शेखर सुमन के व्यंग्य ने बटोरी सुर्खियां

abhishek singh जून 16, 2026 0
Shekhar Suman
Shekhar Suman Shekhar Tonight

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने यूट्यूब शो 'शेखर टुनाइट' के नए एपिसोड में अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में राजनीति और समसामयिक घटनाओं पर तीखे तंज कसे। इस दौरान उन्होंने कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP), उसके प्रमुख अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी व्यंग्य किया। शो के कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

 

शेखर सुमन ने


शेखर सुमन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी ने लोगों के बीच उम्मीदें तो जगा दी हैं, लेकिन अब उन्हें जंतर-मंतर से "छूमंतर" नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का "पलटने" का पुराना इतिहास रहा है और इसी संदर्भ में अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए दावा किया कि उन्होंने राजनीति में नहीं आने, सरकारी मकान और सरकारी गाड़ी नहीं लेने जैसी बातें कही थीं, लेकिन बाद में अपने फैसले बदल दिए।

 

अपने व्यंग्य को आगे बढ़ाते हुए शेखर ने कहा कि असली कॉकरोच अगर एक बार पलट जाए तो अपने आप सीधा नहीं हो पाता। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज हमेशा जीवित रहनी चाहिए, अन्यथा हालात ऐसे हो सकते हैं कि "झाड़ू भी कुछ नहीं कर पाएगा।"

 

शो में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके बेहोश हो गए। इस टिप्पणी के बहाने उन्होंने केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि "अमेरिका से आए कॉकरोच दिल्ली की गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं, और दिल्ली भी अमेरिका की गर्मी नहीं झेल पा रही है।"

 

शेखर सुमन के इन राजनीतिक व्यंग्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स उनके बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Tamannaah Bhatia Vijay Verma
ब्रेकअप के बाद साथ दिखे तमन्ना, विजय और फातिमा, वायरल वीडियो ने खींचा फैंस का ध्यान

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री तमन्ना भाटिया, अभिनेता विजय वर्मा और अभिनेत्री फातिमा सना शेख का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। खास बात यह है कि विजय वर्मा और तमन्ना भाटिया के कथित ब्रेकअप के बाद पहली बार तीनों को एक साथ सार्वजनिक रूप से देखा गया है। वीडियो सामने आने के बाद फैंस उनकी प्रोफेशनल बॉन्डिंग और परिपक्व व्यवहार की सराहना कर रहे हैं।   वायरल वीडियो में तमन्ना भाटिया पारंपरिक सूट में नजर आ रही हैं। वह विजय वर्मा और फातिमा सना शेख के साथ सहजता से बातचीत करती और पैपराजी के सामने मुस्कुराकर तस्वीरें खिंचवाती दिखाई देती हैं। तीनों कलाकारों का यह सहज अंदाज सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान आकर्षित कर रहा है।   वीडियो पर फैंस लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं  कई यूजर्स ने तमन्ना के शांत और सम्मानजनक व्यवहार की प्रशंसा की है। एक यूजर ने लिखा कि ब्रेकअप के बाद भी तमन्ना ने विजय के प्रति सम्मान बनाए रखा, जो काफी सराहनीय है। वहीं दूसरे यूजर ने टिप्पणी की कि रिश्तों से बढ़कर सम्मान होता है। कई लोगों ने तीनों कलाकारों के प्रोफेशनल रवैये को भी सकारात्मक उदाहरण बताया। दरअसल, विजय वर्मा और तमन्ना भाटिया लगभग दो वर्षों तक कथित तौर पर एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों ने मार्च 2025 में अपने रिश्ते को समाप्त करने का फैसला किया था। हालांकि, दोनों में से किसी ने भी सार्वजनिक रूप से ब्रेकअप के कारणों पर कोई बयान नहीं दिया।   ब्रेकअप के बाद विजय वर्मा को कई मौकों पर फातिमा सना शेख के साथ देखा गया, जिसके बाद दोनों के बीच रिश्ते की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, विजय और फातिमा ने इन चर्चाओं पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऐसे में तीनों का एक साथ नजर आना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। बॉलीवुड के जाने-माने निर्माता करण जौहर ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में अपनी नई शुरुआत का ऐलान कर दिया है। धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनने वाली फिल्म ‘ओडियन: द एज ऑफ इल्यूजन’ के साथ करण पहली बार मलयालम सिनेमा में कदम रख रहे हैं। फिल्म का आधिकारिक पोस्टर जारी कर इसकी घोषणा की गई, जिसे दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।   पृथ्वीराज और मंजू वारियर की दमदार जोड़ी फिल्म में मलयालम सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिका निभाएंगे, जबकि उनके साथ मंजू वारियर लीड अभिनेत्री के रूप में नजर आएंगी। निर्देशन की जिम्मेदारी चर्चित फिल्मकार राहुल सदाशिवन संभाल रहे हैं, जो लोककथाओं और हॉरर शैली की फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। करण जौहर ने इस परियोजना को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि मलयालम सिनेमा में यह उनकी पहली प्रस्तुति है और इसके लिए उन्हें बेहतरीन सहयोगी मिले हैं।   लोककथाओं और रहस्य से भरपूर होगी कहानी ‘ओडियन: द एज ऑफ इल्यूजन’ की कहानी केरल की लोककथाओं में वर्णित एक रहस्यमयी ‘शेप-शिफ्टर’ (रूप बदलने वाले जीव) पर आधारित है। फिल्म में एक शक्तिशाली महिला-प्रधान परिवार और इस रहस्यमयी शक्ति के बीच टकराव को दिखाया जाएगा। कहानी में मिथक, रहस्य, मनोवैज्ञानिक रोमांच और डर का अनोखा संगम देखने को मिलेगा, जो इसे पारंपरिक हॉरर फिल्मों से अलग बनाता है।   बड़ी टीम के साथ तैयार हो रही फिल्म फिल्म का निर्माण करण जौहर, अदार पूनावाला, अपूर्व मेहता और सुप्रिया मेनन मिलकर कर रहे हैं। निर्माताओं के अनुसार, यह राहुल सदाशिवन का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। मलयालम सिनेमा के बड़े सितारों और दमदार हानी के साथ ‘ओडियन’ से दर्शकों को एक नया सिनेमाई अनुभव मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही करण जौहर ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मौजूदगी को भी नई दिशा देने की शुरुआत कर दी है।

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राम चरण की ‘पेद्दी’ के चलते टली अखिल अक्किनेनी की ‘लेनिन’, अब 10 जुलाई को होगी रिलीज

हैदराबाद, एजेंसियां। साउथ सुपरस्टार अखिल अक्किनेनी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लेनिन’ एक बार फिर पोस्टपोन हो गई है। यह तीसरी बार है जब फिल्म की रिलीज डेट में बदलाव किया गया है। पहले यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसे 10 जुलाई 2026 को रिलीज करने का फैसला किया है। नई रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा के साथ मेकर्स ने इसकी वजह भी स्पष्ट की है।   फिल्म के टलने की सबसे बड़ी वजह राम चरण की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पेद्दी’ का शानदार प्रदर्शन बताया जा रहा है। बॉक्स ऑफिस पर ‘पेद्दी’ लगातार शानदार कमाई कर रही है और दुनिया भर में लगभग 400 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब पहुंच चुकी है। फिल्म की जबरदस्त सफलता के कारण अधिकांश सिनेमाघरों में उसी को प्राथमिकता मिल रही है। ऐसे में ‘लेनिन’ को पर्याप्त स्क्रीन मिलने की संभावना कम थी, इसलिए मेकर्स ने रिलीज आगे बढ़ाने का फैसला लिया।   बेहतर गुणवत्ता के लिए बढ़ाई गई रिलीज डेट फिल्म के निर्माता नागार्जुन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नई रिलीज डेट की घोषणा करते हुए बताया कि फिल्म की टीम ने उनसे कुछ अतिरिक्त समय मांगा था ताकि फिल्म को और बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि टीम के समर्पण और जुनून को देखते हुए उन्होंने रिलीज डेट आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। नागार्जुन ने अपने संदेश में लिखा कि दर्शकों को इस बार अखिल अक्किनेनी का बिल्कुल नया अंदाज देखने को मिलेगा और फिल्म हर मायने में उम्मीदों पर खरी उतरेगी।   फिल्म को लेकर बना हुआ है उत्साह 'लेनिन' का निर्देशन मुरली किशोर अब्बुरु ने किया है, जबकि भाग्यश्री बोरसे फिल्म में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म का निर्माण नागार्जुन और सूर्यदेवरा नागा वंशी ने संयुक्त रूप से किया है। फिल्म के पोस्टर, टीजर और गानों को दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिला है, जिससे रिलीज को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। अब फैंस को 10 जुलाई का इंतजार है, जब अखिल अक्किनेनी अपनी नई फिल्म के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे।

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