Patriot से दर्शकों और ट्रेड एक्सपर्ट्स को काफी बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आ रही है। Mammootty और Mohanlal जैसे बड़े सितारों के बावजूद फिल्म की कमाई लगातार गिरती जा रही है।
Patriot ने अपने दूसरे सोमवार को सिर्फ 50 लाख रुपये का कलेक्शन किया। यह फिल्म की रिलीज के दूसरे हफ्ते में बड़ा गिरावट वाला दिन माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की कमाई में दूसरे शुक्रवार की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले सोमवार के मुकाबले गिरावट करीब 70 प्रतिशत रही।
Patriot का अब तक का कुल केरल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 27.65 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। हालांकि मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए माना जा रहा है कि फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों से बाहर हो सकती है।
ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म इस सप्ताह करीब 29 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है और अपने पूरे थिएट्रिकल रन में केरल बॉक्स ऑफिस पर लगभग 35 करोड़ रुपये तक सिमट सकती है।
फिल्म को दर्शकों से उम्मीद के मुताबिक सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। यही वजह है कि शुरुआती ओपनिंग अच्छी होने के बावजूद फिल्म अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल नहीं हो पाई।
Mammootty और Mohanlal की जोड़ी को लेकर काफी चर्चा थी, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर दर्शकों की राय बंटी हुई नजर आई।
फिल्म का निर्देशन Mahesh Narayanan ने किया है। स्पाई थ्रिलर जॉनर की इस फिल्म को रिलीज से पहले काफी बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा था।
Patriot के कमजोर प्रदर्शन के बाद अब इंडस्ट्री की नजरें Drishyam 3 पर टिक गई हैं। खासकर Mohanlal के फैंस को उम्मीद है कि यह फिल्म फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को बरकरार रख पाएगी।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Krishnavataram Part 1: The Heart बॉक्स ऑफिस पर शुरुआती दिनों में ठीक-ठाक प्रदर्शन करती नजर आ रही है, लेकिन पहले सोमवार की कमाई ने फिल्म के आगे के सफर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। Siddharth Gupta और Sanskruti Jayana स्टारर इस माइथोलॉजिकल फैंटेसी ड्रामा ने अपने पहले सोमवार को करीब 1 से 1.10 करोड़ रुपये की नेट कमाई की। सामान्य तौर पर यह कलेक्शन ठीक माना जा सकता है, लेकिन जिस तरह की ग्रोथ फिल्म को चाहिए थी, उसके मुकाबले यह थोड़ा कमजोर माना जा रहा है। सोमवार को नहीं बनी वीकेंड जैसी पकड़ फिल्म ने शनिवार और रविवार को अच्छी बढ़त दिखाई थी। खासकर रविवार को फिल्म ने 3.25 करोड़ रुपये की कमाई कर उम्मीदें बढ़ा दी थीं। हालांकि सोमवार को कलेक्शन फिर से शुक्रवार के स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे संकेत मिला कि फिल्म को दर्शकों से स्थिर सपोर्ट अभी नहीं मिल पा रहा। Krishnavataram Part 1: The Heart का हिंदी बॉक्स ऑफिस पर कुल नेट कलेक्शन अब 7.75 करोड़ रुपये पहुंच गया है। वहीं तेलुगु और तमिल डब वर्जन से फिल्म ने लगभग 65 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई की है। पहले हफ्ते में 10 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म पहले हफ्ते के अंत तक हिंदी में करीब 10 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू सकती है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि फिल्म में कोई बड़ा स्टार नहीं है और इसे हिंदी बेल्ट में सिर्फ 700 स्क्रीन पर रिलीज किया गया है। ऐसे में इसकी अब तक की कमाई को पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा रहा। Mahavatar Narsimha से हो रही तुलना पिछले साल रिलीज हुई Mahavatar Narsimha का उदाहरण भी लगातार दिया जा रहा है। भगवान विष्णु के अवतारों पर आधारित इस एनिमेटेड फिल्म ने शुरुआत में धीमी कमाई की थी, लेकिन बाद में जबरदस्त ग्रोथ दिखाते हुए हिंदी में करीब 170 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया था। इसी तरह Laalo: Krishna Sada Sahayate ने भी शुरुआती हफ्तों में खास प्रदर्शन नहीं किया था, लेकिन बाद में अचानक तेजी पकड़ ली थी। इसी वजह से ट्रेड एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि Krishnavataram Part 1: The Heart के लिए अभी उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। दूसरे हफ्ते में असली परीक्षा अब फिल्म के लिए सबसे जरूरी होगा कि वीकडेज में इसकी कमाई शनिवार के स्तर के करीब बनी रहे और दूसरे हफ्ते में स्क्रीन काउंट और दर्शकों का सपोर्ट बढ़े। माइथोलॉजिकल फिल्मों का ट्रेंड कई बार धीरे-धीरे मजबूत होता है, इसलिए आने वाले दिन फिल्म के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं। Krishnavataram Part 1 Hindi Box Office Collection दिन नेट कलेक्शन प्रीव्यू ₹0.40 करोड़ शुक्रवार ₹1.00 करोड़ शनिवार ₹2.10 करोड़ रविवार ₹3.25 करोड़ सोमवार ₹1.00 करोड़ (अनुमानित) कुल ₹7.75 करोड़
Outer Ring Road पर हुआ भीषण एक्सीडेंट K Bharat Kanth और उनके दोस्त G Sai Trilok की हैदराबाद में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। यह हादसा रविवार तड़के शहर के Outer Ring Road (ORR) पर आदिबटला इलाके के पास हुआ। पुलिस के मुताबिक दोनों की उम्र 31 साल थी और वे आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के रहने वाले थे। हादसे के समय वे हैदराबाद की ओर जा रहे थे। कंटेनर से टकराई कार, मौके पर गई जान आदिबटला पुलिस के अनुसार कार चला रहे K Bharat Kanth ने कथित तौर पर वाहन से नियंत्रण खो दिया। इसके बाद उनकी कार आगे चल रहे या सड़क किनारे खड़े कंटेनर ट्रक से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस को आशंका है कि तेज रफ्तार और ड्राइवर की थकान इस दुर्घटना की वजह हो सकती है। फिलहाल मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सोशल मीडिया और शॉर्ट फिल्मों से मिली थी पहचान K Bharat Kanth तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता, डांसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर पहचान बना चुके थे। उन्होंने ‘Tenant’ और ‘Gramam’ जैसी फिल्मों और शॉर्ट फिल्मों में काम किया था। सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी फैन फॉलोइंग थी। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 40 हजार फॉलोअर्स और यूट्यूब पर लगभग 30 हजार सब्सक्राइबर थे। सिनेमैटोग्राफर थे Sai Trilok G Sai Trilok डिजिटल और फिल्म प्रोजेक्ट्स में सिनेमैटोग्राफर के तौर पर काम करते थे। वे यूट्यूब पर भी सक्रिय थे और कंटेंट क्रिएशन से जुड़े हुए थे। दोनों की अचानक मौत से तेलुगु मनोरंजन जगत और उनके फैंस में शोक की लहर है।
चेन्नई, एजेंसियां। दक्षिण भारतीय फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता विजय देवरकोंडा ने शादी के बाद अपना पहला जन्मदिन बेहद खास अंदाज में मनाया। 9 मई को 37वां जन्मदिन मना रहे विजय अपने हैदराबाद स्थित जुबली हिल्स वाले घर से बाहर निकलकर फैंस से मिले। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी रश्मिका मंदाना और मां माधवी देवरकोंडा भी मौजूद रहीं। अभिनेता को देखने के लिए उनके घर के बाहर सैकड़ों फैंस जमा हुए थे। वायरल हुआ फैंस संग जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विजय देवरकोंडा अपने नए “रणबाली” लुक में नजर आए। उन्होंने ऑरेंज टी-शर्ट पहन रखी थी और हमेशा की तरह बेहद कैजुअल अंदाज में दिखाई दिए। विजय ने बाहर आकर फैंस का अभिवादन किया और उनके प्यार व शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद कहा। इस दौरान रश्मिका मंदाना फैंस के साथ खुशी जाहिर करती नजर आईं और खास पलों को अपने कैमरे में रिकॉर्ड करती दिखीं। तीन मंजिला केक काटकर मनाया बर्थडे बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान विजय ने फैंस के साथ मिलकर तीन मंजिला बड़ा केक काटा। अभिनेता ने काफी देर तक फैंस से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। फैंस के उत्साह और प्यार को देखकर विजय की मां भी बेहद खुश नजर आईं। यह खास पल वहां मौजूद लोगों के लिए यादगार बन गया। ‘गीता गोविंदम’ से शुरू हुई थी प्रेम कहानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की मुलाकात फिल्म Geetha Govindam के सेट पर हुई थी। दोनों ने 2018 के आसपास एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया। इसी साल 26 फरवरी को दोनों ने उदयपुर में करीबी दोस्तों और परिवार की मौजूदगी में शादी की थी। बाद में हैदराबाद में भव्य रिसेप्शन भी आयोजित किया गया था।