Mohanlal

Salman Khan, Prabhas, Ram Charan and other stars set for major box office clashes in 2026-2027
सलमान से प्रभास तक, 2026-2027 में बॉक्स ऑफिस पर भिड़ेंगे बड़े सुपरस्टार्स

आने वाले दो साल में होगा बड़ा सिनेमाई मुकाबला भारतीय सिनेमा में 2026 और 2027 के दौरान कई बड़ी फिल्मों के बीच जबरदस्त बॉक्स ऑफिस क्लैश देखने को मिलने वाला है। बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के बड़े सितारे अपनी फिल्मों के साथ आमने-सामने होंगे, जिससे सिनेमाघरों में बड़ी टक्कर तय मानी जा रही है। Salman Khan, Prabhas, Ram Charan और Mohanlal जैसे सुपरस्टार्स की फिल्मों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। ‘पति पत्नी और वो 2’ बनाम ‘करुप्पु’ बॉक्स ऑफिस की यह जंग इसी हफ्ते से शुरू हो चुकी है। Suriya की फिल्म Karuppu सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर Ayushmann Khurrana की फिल्म Pati Patni Aur Woh 2 इसी शुक्रवार रिलीज हो रही है। एक तरफ एक्शन और दूसरी तरफ कॉमेडी का मुकाबला देखने को मिलेगा। ‘दृश्यम 3’ और ‘चांद मेरा दिल’ की टक्कर 21 मई को Drishyam 3 रिलीज होने जा रही है, जिसमें Mohanlal एक बार फिर अपने चर्चित किरदार में नजर आएंगे। इसके ठीक अगले दिन 22 मई को फिल्म Chand Mera Dil रिलीज होगी। इस रोमांटिक फिल्म में Ananya Panday और लक्ष्य मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे। वरुण धवन और राम चरण आमने-सामने Varun Dhawan की फिल्म Hai Jawani To Ishq Hona Hai पहले सोलो रिलीज मानी जा रही थी, लेकिन अब Peddy की रिलीज डेट भी 4 जून तय कर दी गई है। इस फिल्म में Ram Charan और Janhvi Kapoor मुख्य भूमिका में हैं। अब दोनों फिल्मों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। 2027 की ईद पर सलमान बनाम प्रभास सबसे बड़ी भिड़ंत 2027 की ईद पर हो सकती है। Salman Khan की फिल्म SVC63 और Spirit एक ही समय पर रिलीज होने की तैयारी में हैं। पहले चर्चा थी कि प्रभास की फिल्म की रिलीज डेट बदली जा सकती है, लेकिन अब फिल्म की टीम ने साफ कर दिया है कि वे अपनी तय तारीख पर ही फिल्म रिलीज करेंगे। बॉक्स ऑफिस पर बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा इन बड़ी फिल्मों के क्लैश से भारतीय सिनेमा में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि दर्शकों के लिए यह दौर बेहद रोमांचक रहने वाला है, क्योंकि हर फिल्म बड़े स्टार्स, भारी बजट और हाई एक्सपेक्टेशन के साथ आ रही है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Mammootty and Mohanlal in Patriot movie poster as box office collections slow during second week
Mammootty और Mohanlal की फिल्म Patriot बॉक्स ऑफिस पर धीमी, दूसरे सोमवार सिर्फ 50 लाख की कमाई

Patriot से दर्शकों और ट्रेड एक्सपर्ट्स को काफी बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आ रही है। Mammootty और Mohanlal जैसे बड़े सितारों के बावजूद फिल्म की कमाई लगातार गिरती जा रही है। Patriot ने अपने दूसरे सोमवार को सिर्फ 50 लाख रुपये का कलेक्शन किया। यह फिल्म की रिलीज के दूसरे हफ्ते में बड़ा गिरावट वाला दिन माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की कमाई में दूसरे शुक्रवार की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पिछले सोमवार के मुकाबले गिरावट करीब 70 प्रतिशत रही। 27 करोड़ के पार पहुंची फिल्म Patriot का अब तक का कुल केरल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 27.65 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। हालांकि मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए माना जा रहा है कि फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों से बाहर हो सकती है। ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म इस सप्ताह करीब 29 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है और अपने पूरे थिएट्रिकल रन में केरल बॉक्स ऑफिस पर लगभग 35 करोड़ रुपये तक सिमट सकती है। दर्शकों से मिला मिला-जुला रिस्पॉन्स फिल्म को दर्शकों से उम्मीद के मुताबिक सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। यही वजह है कि शुरुआती ओपनिंग अच्छी होने के बावजूद फिल्म अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल नहीं हो पाई। Mammootty और Mohanlal की जोड़ी को लेकर काफी चर्चा थी, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर दर्शकों की राय बंटी हुई नजर आई। फिल्म का निर्देशन Mahesh Narayanan ने किया है। स्पाई थ्रिलर जॉनर की इस फिल्म को रिलीज से पहले काफी बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा था। अब Drishyam 3 पर टिकी नजरें Patriot के कमजोर प्रदर्शन के बाद अब इंडस्ट्री की नजरें Drishyam 3 पर टिक गई हैं। खासकर Mohanlal के फैंस को उम्मीद है कि यह फिल्म फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को बरकरार रख पाएगी। Patriot का डे-वाइज बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (केरल) दिन कमाई Day 1 ₹8.50 करोड़ Day 2 ₹5.25 करोड़ Day 3 ₹5.00 करोड़ Day 4 ₹1.75 करोड़ Day 5 ₹1.50 करोड़ Day 6 ₹1.25 करोड़ Day 7 ₹1.00 करोड़ Day 8 ₹0.80 करोड़ Day 9 ₹1.00 करोड़ Day 10 ₹1.10 करोड़ Day 11 ₹0.50 करोड़ कुल ₹27.65 करोड़ (अनुमानित)

surbhi मई 12, 2026 0
Mammootty and Mohanlal in Patriot film showcasing intense spy thriller face-off scene
‘पैट्रियट’ को पैन-इंडिया नहीं मानते Mammootty, बोले— यह फिल्म खासतौर पर मलयालियों के लिए बनी है

मलयालम सिनेमा की बहुप्रतीक्षित स्पाई-थ्रिलर Patriot इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। करीब 13 साल बाद Mammootty और Mohanlal एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आने वाले हैं, जिससे फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह है। हालांकि, फिल्म को लेकर चल रही ‘पैन-इंडिया’ बहस पर Mammootty ने साफ शब्दों में अपनी राय रख दी है। “यह फिल्म मलयालियों के लिए बनी है” कोच्चि में एक प्रेस मीट के दौरान Mammootty ने कहा कि ‘पैट्रियट’ को पैन-इंडिया फिल्म के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य केरल के दर्शकों को ध्यान में रखकर कहानी पेश करना है। उन्होंने कहा कि मलयालम दर्शकों का सिनेमा स्वाद अब काफी विकसित हो चुका है और यह फिल्म उसी स्तर को ध्यान में रखकर बनाई गई है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म को देश के अन्य हिस्सों में भी पसंद किया जाएगा। दमदार स्टारकास्ट और हाई-बजट प्रोडक्शन Mahesh Narayanan के निर्देशन में बनी इस फिल्म में कई बड़े सितारे नजर आएंगे— Fahadh Faasil Nayanthara Revathi Kunchacko Boban करीब 130 दिनों तक अंतरराष्ट्रीय लोकेशनों पर शूट की गई यह फिल्म मलयालम इंडस्ट्री की सबसे महंगी फिल्मों में से एक मानी जा रही है। कहानी और किरदार फिल्म में Mammootty डॉ. डेनियल जेम्स की भूमिका निभा रहे हैं, जो जासूसी के झूठे आरोप में फंसने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने के मिशन पर निकलते हैं। वहीं Mohanlal कर्नल रहीम नाइक के किरदार में नजर आएंगे। ट्रेलर में दोनों के बीच टकराव दिखाया गया है, जिसे लेकर अभिनेता ने कहा कि यह सिर्फ एक्शन के लिए नहीं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा है। रिलीज और उम्मीदें 1 मई 2026 को रिलीज होने जा रही Patriot को इंडस्ट्री के लिए “गेम-चेंजर” माना जा रहा है। Mammootty का मानना है कि यह फिल्म मलयालम सिनेमा में बड़े बजट की फिल्मों के लिए नए रास्ते खोलेगी।  

surbhi अप्रैल 27, 2026 0
Nivin Pauly speaking about Mohanlal during Prathichaya promotion interview
‘मोहनलाल से तुलना संभव नहीं’, निविन पॉली ने दिया साफ संदेश

मलयालम सिनेमा के चर्चित अभिनेता Nivin Pauly ने सुपरस्टार Mohanlal के साथ अपनी तुलना को सिरे से खारिज कर दिया है। अपनी आगामी फिल्म Prathichaya के प्रमोशन के दौरान दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि “लालेत्तन, लालेत्तन हैं — उनका कोई मुकाबला नहीं।” ‘मोहनलाल अतुलनीय हैं’, निविन पॉली का बयान मीडिया से बातचीत में निविन पॉली ने कहा कि वह खुद को किसी से तुलना करने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपने डायरेक्टर के निर्देशों का पालन करता हूं और सहज तरीके से अभिनय करता हूं। सेट पर कुछ दिन लगते हैं विज़न समझने में, उसके बाद मैं उसी के अनुसार खुद को ढाल लेता हूं। एक बार समझ आ जाए, तो मैं ज्यादा तनाव नहीं लेता।” उनका यह बयान इंडस्ट्री में उनकी सादगी और पेशेवर सोच को दर्शाता है। ‘Prathichaya’ की कहानी और स्टारकास्ट Prathichaya एक राजनीतिक थ्रिलर है, जिसका निर्देशन Unnikrishnan B ने किया है। फिल्म की कहानी एक टेक एंटरप्रेन्योर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो राज्य के मुख्यमंत्री का बेटा होता है। जब एक खतरनाक साजिश में उसके पिता की मौत हो जाती है, तो वह सच्चाई उजागर करने और अपने पिता की विरासत बचाने के लिए संघर्ष करता है। फिल्म में राजनीति, साजिश और रणनीति का गहरा मिश्रण देखने को मिलेगा। फिल्म में Sharaf U Dheen, Balachandra Menon, Harisree Ashokan, Ann Augustine और Sai Kumar जैसे कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इसका संगीत Justin Varghese ने तैयार किया है। ‘Drishyam 3’ से वापसी करेंगे मोहनलाल वहीं, Mohanlal जल्द ही अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म Drishyam 3 में नजर आएंगे, जिसका निर्देशन Jeethu Joseph कर रहे हैं। यह फिल्म अब 21 मई 2026 को रिलीज होगी, जो मोहनलाल के जन्मदिन के साथ मेल खाती है। दोनों सितारों के अलग-अलग रास्ते जहां एक ओर मोहनलाल अपने अनुभव और दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं, वहीं निविन पॉली नई पीढ़ी के लोकप्रिय सितारों में शामिल हैं। निविन का यह बयान यह स्पष्ट करता है कि वह अपनी अलग पहचान बनाए रखना चाहते हैं, बजाय किसी दिग्गज से तुलना के।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0