Crisil Report: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय कंपनियों की कमाई पर भी दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी CRISIL की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय कंपनियों के परिचालन लाभ (Operating Margin) में करीब 200 बेसिस पॉइंट यानी 2 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती ईंधन लागत, महंगा परिवहन, कमजोर होता रुपया और सप्लाई चेन की समस्याएं कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा रही हैं।
क्रिसिल ने 34 ऐसे उद्योग क्षेत्रों का स्ट्रेस टेस्ट किया, जो उसकी रेटेड कॉर्पोरेट ऋण का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति पूरे वित्त वर्ष में करीब नौ महीने तक बनी रह सकती है।
रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि इस दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकती है, जो पहले के 95 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी अधिक है।
क्रिसिल रेटिंग्स के प्रबंध निदेशक Subodh Rai के अनुसार, कंपनियों के लिए बिक्री बढ़ाने से ज्यादा मुश्किल लागत और मुनाफे को संभालना होगा।
उन्होंने कहा कि जिन 34 क्षेत्रों का अध्ययन किया गया, उनमें से 22 सेक्टरों की परिचालन लाभप्रदता में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ सकती है। इसकी मुख्य वजह बढ़ती इन्वेंट्री लागत और उपभोक्ताओं पर पूरा लागत बोझ तुरंत न डाल पाना है।
पश्चिम एशिया संकट के चलते कई कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन में बदलाव करना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्हें निम्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है-
इन कारणों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत है। घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) और बेहतर बैलेंस शीट उन्हें इस संकट से निपटने में मदद कर सकती हैं।
पिछले 10 वर्षों में भारत की कंपनियों का औसत कर्ज अनुपात (Gearing Ratio) घटकर 0.5 गुना रह गया है, जबकि ब्याज भुगतान क्षमता (Interest Coverage Ratio) दोगुनी होकर 5 गुना से अधिक हो गई है।
क्रिसिल का अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद अधिकांश कंपनियां अपने क्रेडिट प्रोफाइल को स्थिर बनाए रखेंगी। एजेंसी के अनुसार केवल 8 सेक्टर, जो कुल रेटेड कॉर्पोरेट ऋण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हैं, उनकी क्रेडिट गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में सरकार की नई ECLGS 5.0 (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) की भी सराहना की गई है। क्रिसिल का मानना है कि यह योजना विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को राहत देने में मदद करेगी, क्योंकि इस वर्ग की कंपनियों के पास बड़े कॉर्पोरेट्स की तुलना में कम वित्तीय सुरक्षा होती है।
क्रिसिल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत इंक की समग्र क्रेडिट गुणवत्ता फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि कंपनियों को आने वाले महीनों में लागत प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला और नकदी प्रवाह पर विशेष ध्यान देना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार का कारोबार सुस्त और मिला-जुला रुख लेकर बंद हुआ। कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक अलग-अलग दिशा में बंद हुए, जहां सेंसेक्स ने मामूली बढ़त दर्ज की, वहीं निफ्टी दबाव में लाल निशान पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 64 अंकों की बढ़त बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 64.42 अंकों की हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ। यह 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,983.18 के स्तर पर स्थिर रहा। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने मामूली बढ़त के साथ निवेशकों को सीमित राहत दी। निफ्टी में गिरावट, लाल निशान में बंद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स कमजोर रुख के साथ बंद हुआ। यह 27.15 अंकों की गिरावट यानी 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,214.95 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में दिनभर बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यह लाल निशान में फिसल गया। प्रमुख शेयरों में मिला-जुला प्रदर्शन बाजार में सेक्टोरल और स्टॉक आधारित मूवमेंट देखने को मिला। एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी एचयूएल के शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसने बाजार को कुछ सहारा दिया। वहीं, मेटल सेक्टर की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को के शेयरों में 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ। रुपये में मजबूती विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। रुपया 14 पैसे की बढ़त के साथ डॉलर के मुकाबले 95.27 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, रिजर्व बैंक की संभावित हस्तक्षेप नीति ने रुपये को सपोर्ट दिया। बाजार में सतर्कता का माहौल कुल मिलाकर, बाजार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा। सेंसेक्स की मामूली बढ़त और निफ्टी की गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में चुनिंदा खरीदारी और बिकवाली का दबाव समान रूप से बना रहा।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए 'कोल एक्सचेंज नियम, 2026' अधिसूचित कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत देश में कोल एक्सचेंज स्थापित किए जाएंगे, जहां बाजार आधारित प्रणाली के जरिए कोयले की खरीद-बिक्री और कीमतों का निर्धारण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कोयला व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। कोयला मंत्रालय के अनुसार, इन नियमों के जरिए कोल एक्सचेंज स्थापित करने और उनके संचालन के लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया गया है। इससे कोयले की कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होंगी और उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी बाजार उपलब्ध होगा। क्या होंगे बड़े बदलाव? नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोयला क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे: कोयले की कीमतें बाजार आधारित तरीके से तय होंगी। खरीद-बिक्री प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी बनेगी। कमर्शियल और कैप्टिव खदान संचालकों को अधिक खरीदार मिल सकेंगे। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र के खिलाड़ी इस प्लेटफॉर्म पर भाग ले सकेंगे। ऊर्जा क्षेत्र की दक्षता और आपूर्ति सुरक्षा मजबूत होगी। कोयला व्यापार में डिजिटल और आधुनिक व्यवस्था विकसित होगी। MMDR संशोधन अधिनियम 2025 से मिला आधार कोयला मंत्रालय ने बताया कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत पहली बार खनिज एक्सचेंज की अवधारणा पेश की गई थी। इस कानून ने केंद्र सरकार को कोयला और उसके प्रसंस्कृत रूपों सहित विभिन्न खनिजों के पारदर्शी और कुशल व्यापार को बढ़ावा देने का अधिकार दिया। इसी प्रावधान के तहत 4 जून 2026 को आधिकारिक राजपत्र में कोल एक्सचेंज नियम, 2026 प्रकाशित किए गए। CCO करेगा निगरानी और रेगुलेशन सरकार ने कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (CCO) को कोल एक्सचेंजों के पंजीकरण और नियमन की जिम्मेदारी सौंपी है। दिसंबर 2025 में CCO को इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया था। नई व्यवस्था के तहत पात्र संस्थाओं को: कोल एक्सचेंज स्थापित करने, उनका संचालन करने, बाजार के नियम और उप-नियम बनाने, तथा कोयला व्यापार को सुगम बनाने की अनुमति दी जाएगी। इन एक्सचेंजों का रजिस्ट्रेशन 25 वर्षों तक वैध रहेगा। सरकार का क्या है उद्देश्य? सरकार पारंपरिक आपूर्ति तंत्र से आगे बढ़कर एक अधिक प्रतिस्पर्धी और आधुनिक कोयला बाजार विकसित करना चाहती है। इसका उद्देश्य उद्योगों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना, व्यापार को आसान बनाना और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था को बढ़ावा देना है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, यह पहल Ease of Doing Business, पारदर्शिता और आधुनिक ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बिजली और उद्योग जगत को होगा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि कोल एक्सचेंज शुरू होने से बिजली उत्पादन कंपनियों, इस्पात उद्योग और अन्य कोयला आधारित क्षेत्रों को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बाजार मिलेगा। साथ ही देश की ऊर्जा आपूर्ति को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भारत की विदेशी पर्यटन नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि विदेशों में पर्यटन प्रचार (टूरिज्म मार्केटिंग) के बजट में भारी कटौती करने से भारत को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। उनके मुताबिक इस फैसले का सीधा असर विदेशी पर्यटकों की संख्या पर पड़ा और देश अरबों डॉलर के संभावित राजस्व से वंचित रह गया। इकोनॉमिक टाइम्स में लिखे अपने लेख में अमिताभ कांत ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में पर्यटन ऐसा क्षेत्र है, जो विदेशी मुद्रा अर्जित करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने का सबसे तेज माध्यम बन सकता है। 2019 के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाया भारत अमिताभ कांत के अनुसार पिछले चार वर्षों में भारत का विदेशी पर्यटन मार्केटिंग बजट लगभग समाप्त कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2024 में भारत में करीब 99 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे, जो कोविड-19 महामारी से पहले वर्ष 2019 के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कम है। उन्होंने दावा किया कि भारत के कई प्रतिस्पर्धी देश महामारी से पहले के स्तर को पार कर चुके हैं और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। एक विदेशी पर्यटक से मिलता है ज्यादा आर्थिक लाभ कांत के अनुसार एक विदेशी पर्यटक भारत की जीडीपी में औसतन 3,000 डॉलर (करीब 2.87 लाख रुपये) का योगदान देता है, जबकि एक घरेलू पर्यटक का योगदान केवल 75 डॉलर (करीब 7,000 रुपये) के आसपास होता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत विदेशी पर्यटन प्रचार पर 200 मिलियन डॉलर का निवेश करे, तो लगभग 10 लाख अतिरिक्त विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इससे— 3.6 अरब डॉलर की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होगी। लगभग 400 मिलियन डॉलर का GST संग्रह होगा। करीब 2.83 लाख नए रोजगार पैदा होंगे। अमिताभ कांत के मुताबिक मार्केटिंग पर खर्च किए गए प्रत्येक डॉलर पर लगभग 18 गुना रिटर्न प्राप्त हो सकता है। दूसरे देशों के उदाहरण भी दिए अपने लेख में उन्होंने कई देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटन प्रचार में निवेश बढ़ाने से वहां विदेशी पर्यटकों की संख्या और राजस्व दोनों में तेजी आई। मलेशिया मार्केटिंग बजट: 7 करोड़ डॉलर विदेशी पर्यटक: 31% वृद्धि के साथ 2.73 करोड़ राजस्व: 22 अरब डॉलर थाईलैंड मार्केटिंग बजट: 12 करोड़ डॉलर विदेशी पर्यटक: 26% वृद्धि के साथ 3.55 करोड़ राजस्व: 48 अरब डॉलर ब्राजील मार्केटिंग खर्च: 9 करोड़ डॉलर विदेशी पर्यटकों में 22% की वृद्धि सऊदी अरब लगभग 3 करोड़ अतिरिक्त पर्यटक 41 अरब डॉलर का राजस्व अमेरिका Brand USA अभियान के तहत 24 करोड़ डॉलर का निवेश हर एक डॉलर पर लगभग 25 डॉलर का रिटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारत की मौजूदगी कमजोर अमिताभ कांत ने कहा कि आज वैश्विक पर्यटन उद्योग सोशल मीडिया, यूट्यूब और डिजिटल कंटेंट पर आधारित हो चुका है, लेकिन भारत इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि "Incredible India" के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फॉलोअर्स तो हैं, लेकिन एंगेजमेंट काफी कम है। इसके मुकाबले कई अन्य देश डिजिटल प्रचार के जरिए करोड़ों लोगों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। क्या दिए सुझाव? अमिताभ कांत ने पर्यटन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव दिए— होटल, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए नियमों को सरल बनाया जाए। मल्टीपल लाइसेंस व्यवस्था की जगह यूनिफाइड लाइसेंस सिस्टम लागू किया जाए। ऑटोमैटिक रिन्यूअल व्यवस्था शुरू की जाए। ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को रणनीतिक साझेदार माना जाए। उनका मानना है कि किसी वास्तविक यात्री का अनुभव साझा करने वाला वीडियो, पारंपरिक सरकारी विज्ञापनों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित होता है।