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RBI Cancels Paytm Payments Bank License

बड़ा फैसला: Reserve Bank of India ने रद्द किया Paytm Payments Bank Limited का लाइसेंस, ग्राहकों के लिए क्या मायने?

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
RBI cancels Paytm Payments Bank license, impacting banking services and customer accounts
RBI Cancels Paytm Payments Bank License

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए Reserve Bank of India (RBI) ने Paytm Payments Bank Limited (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह फैसला 24 अप्रैल 2026 की शाम से प्रभावी हो गया, जिसके बाद बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियों पर पूर्ण रोक लग गई है।

यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही नियामकीय जांच और बार-बार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने के चलते की गई है।

RBI ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?

RBI के अनुसार, Paytm Payments Bank का संचालन जमाकर्ताओं के हित में नहीं पाया गया।

  • बैंक निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करने में विफल रहा
  • मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे
  • बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं हुआ

इसी आधार पर बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22(4) के तहत लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया।

अब बैंक का क्या होगा?

लाइसेंस रद्द होने के बाद:

  • बैंक किसी भी प्रकार की नई बैंकिंग सेवा नहीं दे सकेगा
  • नए ग्राहक जोड़ना और ट्रांजैक्शन पूरी तरह बंद
  • RBI अब बैंक को बंद (Winding Up) करने की प्रक्रिया शुरू करेगा
  • इसके लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया जाएगा

सरल शब्दों में, बैंक अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

क्या ग्राहकों का पैसा सुरक्षित है?

RBI ने ग्राहकों को राहत देते हुए कहा है कि:

  • बैंक के पास पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है
  • सभी जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस किया जाएगा
  • रिफंड प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी

हालांकि, ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक अपडेट्स पर नजर बनाए रखें और निर्देशों का पालन करें।

क्या यह फैसला अचानक लिया गया?

यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम है:

  • मार्च 2022: नए ग्राहक जोड़ने पर रोक
  • जनवरी–फरवरी 2024: डिपॉजिट, वॉलेट टॉप-अप और क्रेडिट ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध
  • लगातार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने पर अंतिम कार्रवाई

ग्राहकों के लिए क्या करें?

  • अपने खाते और बैलेंस की जानकारी नियमित रूप से जांचें
  • RBI और बैंक की आधिकारिक घोषणाओं को फॉलो करें
  • किसी भी अफवाह से बचें
  • रिफंड प्रक्रिया शुरू होते ही आवश्यक कार्रवाई करें
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Mahindra & Mahindra Financial Services (MMFS) के शेयर पर ‘Accumulate’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹325 का टारगेट प्राइस तय किया है। 25 अप्रैल 2026 की रिसर्च रिपोर्ट में कंपनी के फंडामेंटल्स और ग्रोथ आउटलुक को संतुलित लेकिन सकारात्मक बताया गया है। Q4 में ग्रोथ में सुधार रिपोर्ट के मुताबिक, चौथी तिमाही में कंपनी की डिस्बर्समेंट ग्रोथ 11% सालाना (YoY) रही। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ट्रैक्टर, यूज्ड कमर्शियल व्हीकल (CV) और पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट की वजह से आई। कंपनी का AUM (Assets Under Management) 12% बढ़कर ₹1,341 अरब तक पहुंच गया, जो इसके बिजनेस विस्तार को दर्शाता है। आगे की ग्रोथ का अनुमान ब्रोकरेज ने FY27 और FY28 के लिए AUM ग्रोथ क्रमशः 13% और 13.5% रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि बॉन्ड यील्ड्स बढ़ने से कॉस्ट ऑफ फंड (CoF) पर दबाव है, लेकिन बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और फीस-बेस्ड इनकम में बढ़ोतरी से मार्जिन स्थिर रहने की उम्मीद है। खर्च और मुनाफे का आकलन कंपनी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बिजनेस डाइवर्सिफिकेशन में निवेश कर रही है, जिससे ऑपरेशनल खर्च (Opex) फिलहाल सीमित दायरे में रहने का अनुमान है। हालांकि, उच्च उधारी लागत और संभावित धीमी ग्रोथ को देखते हुए FY27 और FY28 की आय अनुमान में 6-7% की कटौती की गई है। एसेट क्वालिटी में सुधार, लेकिन नजर जरूरी रिपोर्ट में कहा गया है कि एसेट क्वालिटी में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन यह अभी भी निगरानी का विषय है। FY27 और FY28 के लिए क्रेडिट कॉस्ट क्रमशः 1.7% और 1.6% रहने का अनुमान लगाया गया है। वैल्यूएशन और टारगेट प्राइस ब्रोकरेज ने MMFS के स्टैंडअलोन बिजनेस को FY28E के आधार पर 1.3x P/ABV पर वैल्यू किया है। स्टैंडअलोन वैल्यूएशन: ₹309 सब्सिडियरी वैल्यू: ₹21 25% होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट के बाद कुल टारगेट: ₹325 निवेशकों के लिए क्या संकेत? कुल मिलाकर, रिपोर्ट बताती है कि कंपनी की ग्रोथ ट्रैक पर है, लेकिन निवेशकों को एसेट क्वालिटी और उधारी लागत पर नजर बनाए रखनी चाहिए। ‘Accumulate’ रेटिंग का मतलब है कि लंबी अवधि के निवेशक इस शेयर में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं।      

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फ्लाइट कैंसिल होने पर घबराएं नहीं: रीबुकिंग और रिफंड के ये नियम जानना जरूरी, यात्रियों के लिए अहम गाइड

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए हालिया वैश्विक हालात चिंता बढ़ा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जेट फ्यूल की सप्लाई पर पड़े असर के चलते कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द करनी शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में लुफ्थांसा जैसी बड़ी एयरलाइंस ने भी हजारों फ्लाइट्स कैंसिल करने का निर्णय लिया है। इसका सीधा असर यात्रियों की यात्रा योजनाओं और बजट दोनों पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अगर आपकी फ्लाइट अचानक कैंसिल हो जाए तो क्या करें, और अपने पैसे व नई उड़ान कैसे सुनिश्चित करें। फ्लाइट कैंसिल होने पर सबसे पहले क्या करें? विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी मिलते ही घबराने के बजाय तुरंत एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लॉगइन करें। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस, खासकर अमेरिकी कंपनियां, ऐप के जरिए तुरंत रीबुकिंग की सुविधा देती हैं अन्य एयरलाइंस में कस्टमर केयर या एयरपोर्ट डेस्क से संपर्क करना पड़ सकता है यात्रियों को आमतौर पर दो विकल्प मिलते हैं– अगली उपलब्ध फ्लाइट में रीबुकिंग टिकट का पूरा रिफंड लेना क्या पूरा पैसा वापस मिलेगा? ज्यादातर मामलों में, अगर एयरलाइन खुद फ्लाइट कैंसिल करती है तो यात्री को पूरा रिफंड मिलने का अधिकार होता है। इसमें शामिल हो सकते हैं: बेस टिकट राशि अतिरिक्त सेवाओं का शुल्क (बैगेज, सीट चयन आदि) यूरोप में नियम अधिक सख्त हैं। वहां एयरलाइंस को केवल रिफंड ही नहीं, बल्कि यात्रियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था (Duty of Care) भी करनी होती है। वहीं अमेरिका और एशिया में नियम थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए यात्रियों को अपने संबंधित क्षेत्र के पैसेंजर राइट्स की जानकारी लेना जरूरी है। मुआवजे के लिए जरूरी सावधानियां विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों को हर दस्तावेज सुरक्षित रखना चाहिए, जैसे– बोर्डिंग पास कैंसिलेशन ईमेल एयरलाइन से बातचीत के स्क्रीनशॉट साथ ही, एयरलाइन से लिखित में कैंसिलेशन का कारण मांगना भी जरूरी है। यह भविष्य में मुआवजा क्लेम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यात्रा को आसान बनाने के जरूरी टिप्स हमेशा एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट से सीधे टिकट बुक करें दिन की पहली फ्लाइट चुनने की कोशिश करें, ताकि वैकल्पिक विकल्प मिल सके फ्लाइट ट्रैकिंग और अलर्ट ऐप्स का उपयोग करें पास के वैकल्पिक एयरपोर्ट का विकल्प भी ध्यान में रखें

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surbhi अप्रैल 24, 2026 0

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