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विदेशी निवेशकों की वापसी से IPO बाजार में जोश, जियो प्लेटफॉर्म्स और NSE की मेगा लिस्टिंग पर टिकी निगाहें

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
JIO IPO NSE
JIO NSE IPO

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ने लगी है, जिससे IPO बाजार में नई जान लौटती दिखाई दे रही है। हाल ही में SBI फंड्स मैनेजमेंट के रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन वाले IPO के बाद अब निवेशकों की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की बहुप्रतीक्षित मेगा लिस्टिंग पर टिकी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 की दूसरी छमाही भारत के IPO बाजार के लिए सबसे व्यस्त दौर साबित हो सकती है।

 

SBI फंड्स IPO ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

 

हाल ही में समाप्त हुए SBI फंड्स मैनेजमेंट के IPO को करीब 31 अरब डॉलर (लगभग ₹2.6 लाख करोड़) की बोलियां मिलीं, जिससे यह भारत के सबसे अधिक सब्सक्राइब होने वाले IPO में शामिल हो गया। इस शानदार प्रतिक्रिया ने विदेशी और घरेलू दोनों निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

 

जियो प्लेटफॉर्म्स और NSE पर बाजार की नजर

 

अब बाजार की सबसे बड़ी उम्मीद जियो प्लेटफॉर्म्स और NSE के IPO से जुड़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO भारत के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है, जबकि NSE की लंबे समय से प्रतीक्षित लिस्टिंग भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

 

दूसरी छमाही में आ सकती है IPO की बाढ़

 

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि 2026 की दूसरी छमाही में कई बड़ी कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए शेयर बाजार का रुख कर सकती हैं। मजबूत निवेशक मांग, बेहतर बाजार माहौल और विदेशी निवेशकों की वापसी से नई लिस्टिंग के लिए अनुकूल वातावरण बनता दिखाई दे रहा है।

 

विशेषज्ञों ने दी सतर्क निवेश की सलाह

 

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े IPO निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर हो सकते हैं, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और जोखिमों का आकलन करना जरूरी है। उनका मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां स्थिर रहीं, तो भारतीय IPO बाजार वर्ष 2026 का नया रिकॉर्ड बना सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Reserve Bank of India
RBI के विशेष फॉरेक्स उपायों से 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह, रुपये को सहारा देने की कोशिश तेज

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए उठाए गए विशेष कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी है कि उसके हालिया फॉरेक्स उपायों के जरिए अब तक 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह हुआ है। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करना है।   विशेष फॉरेक्स योजनाओं से बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह   RBI ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई विशेष उपाय लागू किए थे। इनमें विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं और बैंकों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल रहे, जिनके चलते विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है।   रुपये को मिली मजबूती   केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन उपायों से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे रुपये पर दबाव कम करने और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिली है।   वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राहत   विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के बावजूद RBI के कदमों ने भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार को सहारा दिया है।   आगे भी स्थिति पर RBI की नजर   RBI ने संकेत दिया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि जरूरत पड़ी तो रुपये की स्थिरता और वित्तीय बाजारों में संतुलन बनाए रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में लिक्विडिटी का दबाव मार्च 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर, बाजार में सुधार के संकेत

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सुधार के बीच स्मॉलकैप म्यूचुअल फंडों पर लिक्विडिटी का दबाव मार्च 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालिया बाजार तेजी और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते फंड हाउसों के लिए नकदी प्रबंधन की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है।    बाजार में तेजी से सुधरी स्थिति   विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में स्मॉलकैप शेयरों में आई रिकवरी और निवेशकों के सकारात्मक रुख से फंडों को राहत मिली है। इससे पोर्टफोलियो में मौजूद शेयरों की खरीद-बिक्री पहले की तुलना में आसान हुई है और नकदी का दबाव कम हुआ है।    निवेशकों का भरोसा लौटा   म्यूचुअल फंड उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉलकैप योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ रही है। नियमित निवेश (SIP) और नए निवेश प्रवाह ने फंड मैनेजरों को बेहतर लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद की है।    SEBI की निगरानी का भी दिखा असर   विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार नियामक SEBI द्वारा जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो पारदर्शिता को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। फंड हाउस अब लिक्विडिटी जोखिम का पहले से अधिक व्यवस्थित तरीके से आकलन कर रहे हैं।    विशेषज्ञों ने निवेशकों को दी सलाह   बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि लिक्विडिटी में सुधार सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्मॉलकैप फंड अभी भी अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले निवेश विकल्प हैं। उन्होंने निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए और संतुलित पोर्टफोलियो रणनीति के साथ निवेश करने की सलाह दी है।

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Paytm Q1 Results: पेटीएम ने बनाया नया रिकॉर्ड, 79% बढ़ा मुनाफा, अब तक का सबसे ऊंचा एबिटा दर्ज

नई दिल्ली: देश की प्रमुख डिजिटल भुगतान कंपनी पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के शानदार नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 79 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ 220 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) दर्ज किया है। मजबूत भुगतान कारोबार और वित्तीय सेवाओं में तेज वृद्धि के दम पर कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक एबिटा (EBITDA) भी हासिल किया। 79% बढ़ा कंपनी का मुनाफा जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन कई प्रमुख मोर्चों पर मजबूत रहा। शुद्ध लाभ (Net Profit): 220 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 79 प्रतिशत कंपनी का कहना है कि यह वृद्धि डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के कारोबार में लगातार बढ़ती मांग का परिणाम है। आय में भी शानदार बढ़ोतरी जून तिमाही में कंपनी की कुल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। कुल आय: 2,630 करोड़ रुपये पिछले वर्ष समान तिमाही: 2,159 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 22 प्रतिशत वहीं, परिचालन से होने वाला राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर 2,448 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा एबिटा पेटीएम ने इस तिमाही में अपने इतिहास का सबसे अधिक एबिटा दर्ज किया। एबिटा (EBITDA): 203 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 182 प्रतिशत एबिटा मार्जिन: 8 प्रतिशत कंपनी के लिए यह अब तक का सबसे मजबूत परिचालन प्रदर्शन माना जा रहा है। भुगतान कारोबार में लगातार मजबूती डिजिटल भुगतान कारोबार भी तेजी से बढ़ा। मर्चेंट पेमेंट वॉल्यूम (GMV) में वृद्धि: 31 प्रतिशत कुल जीएमवी: 7.1 लाख करोड़ रुपये इसके अलावा— नेट पेमेंट रेवेन्यू: 601 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि: 25 प्रतिशत वित्तीय सेवाओं से कमाई में 45% उछाल पेटीएम की वित्तीय सेवाओं का कारोबार भी मजबूत गति से आगे बढ़ा। फाइनेंशियल सर्विसेज से आय: 45 प्रतिशत की सालाना वृद्धि यह कारोबार कंपनी की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। शेयर बाजार में कैसा रहा प्रदर्शन? मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद सोमवार को शेयर बाजार में कमजोरी के बीच पेटीएम के शेयर में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। बीएसई बंद भाव: ₹1,348 दिन की शुरुआत: ₹1,355 दिन का उच्च स्तर: ₹1,357.15 दिन का निचला स्तर: ₹1,335.10 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर: ₹1,407

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