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Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, खरीदारी से पहले जानें ताजा भाव

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Gold Silver Rate
Gold Silver Rate Today

नई दिल्ली, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। पिछले सप्ताह लगातार गिरावट के बाद सोमवार को दोनों कीमती धातुओं ने मजबूती के साथ कारोबार किया। ऐसे में गहनों की खरीदारी या सोने-चांदी में निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए ताजा भाव जानना जरूरी हो गया है।

 

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज 


मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में 294 रुपये (0.21 प्रतिशत) की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद इसकी कीमत 1,41,200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में और अधिक तेजी देखने को मिली। चांदी के वायदा भाव 1,618 रुपये (0.75 प्रतिशत) बढ़कर 2,18,021 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करते दिखाई दिए।

 

घरेलू खुदरा बाजार में भी कीमतों में तेजी का असर साफ नजर आया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी का खुदरा भाव 2,16,110 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। विभिन्न शहरों में स्थानीय करों और ज्वेलर्स के मार्जिन के कारण कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है।

 

बाजार विशेषज्ञों का क्या है कहना 


बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों ने सोने-चांदी की मांग को बढ़ाया है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक महंगाई की चिंता, आर्थिक मंदी की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। सोना परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए वैश्विक अस्थिरता के दौर में इसकी मांग बढ़ जाती है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों को खरीदारी से पहले ताजा बाजार भाव की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Pankaj Chaudhary Statement
सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया— इक्विटी पर LTCG टैक्स हटाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि सूचीबद्ध इक्विटी (Listed Equities) पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को समाप्त करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित उत्तर में कहा कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है और मौजूदा कर व्यवस्था जारी रहेगी।   12.5% की मौजूदा दर रहेगी लागू   सरकार ने स्पष्ट किया कि घरेलू और खुदरा निवेशकों के लिए सूचीबद्ध इक्विटी पर ₹1.25 लाख तक के वार्षिक दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर छूट जारी रहेगी, जबकि इससे अधिक लाभ पर 12.5% LTCG टैक्स लागू रहेगा। सरकार ने कहा कि इस व्यवस्था में फिलहाल कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।   अटकलों पर लगाया विराम   हाल के दिनों में बाजार में ऐसी चर्चाएं थीं कि सरकार निवेशकों को राहत देने के लिए इक्विटी पर LTCG टैक्स समाप्त कर सकती है। लोकसभा में दिए गए जवाब के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। सरकार ने कहा कि पूंजीगत लाभ कर से जुड़े किसी भी बदलाव पर सामान्य बजट प्रक्रिया के दौरान ही विचार किया जाता है।   राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत है LTCG   सरकार ने संकेत दिया कि LTCG टैक्स सरकारी राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। पिछले वित्त वर्ष में इस कर से प्राप्त राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी, इसलिए इसे समाप्त करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।   निवेशकों के लिए क्या मायने हैं   सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद शेयर बाजार में निवेश करने वाले घरेलू निवेशकों को फिलहाल मौजूदा LTCG कर नियमों के तहत ही निवेश और कर योजना बनानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में कोई बदलाव होता है तो उसकी घोषणा बजट के माध्यम से की जाएगी।

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SEBI ने CDSL पर साइबर सुरक्षा में चूक को लेकर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए मालवेयर साइबर हमले की जांच के बाद की गई, जिसमें CDSL की साइबर सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं।   2022 के मालवेयर हमले के बाद हुई कार्रवाई   SEBI की जांच में पाया गया कि CDSL की सुरक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं, जिनके कारण मालवेयर हमला सफल हुआ। इस साइबर हमले की वजह से डिपॉजिटरी की कई अहम सेवाएं बाधित हुईं और शेयर बाजार के सेटलमेंट सिस्टम पर भी असर पड़ा।   46 घंटे से ज्यादा प्रभावित रहीं सेवाएं   नियामक के अनुसार, साइबर हमले के कारण CDSL की कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं करीब 46 घंटे तक प्रभावित रहीं, जबकि इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर जैसी सुविधाओं में भी लंबा व्यवधान आया। SEBI ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण बाजार अवसंरचना से जुड़ी संस्था के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य है।   SEBI ने गिनाईं कई सुरक्षा खामियां   जांच में कमजोर एक्सेस कंट्रोल, सुरक्षा अलर्ट की अपर्याप्त निगरानी, पासवर्ड प्रबंधन में लापरवाही और नियामकीय साइबर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने जैसी कमियां सामने आईं। SEBI ने कहा कि इन खामियों के कारण हमले का जोखिम बढ़ा और बाजार संचालन प्रभावित हुआ।   वित्तीय संस्थानों को दिया सख्त संदेश   SEBI ने स्पष्ट किया कि पूंजी बाजार से जुड़ी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। नियामक ने कहा कि डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा में लापरवाही निवेशकों के हितों और पूरे वित्तीय बाजार की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

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SBI Funds Management Listing: उम्मीदों से फीकी रही देश के सबसे बड़े आईपीओ की लिस्टिंग, निवेशकों को प्रति शेयर सिर्फ ₹39 का फायदा

नई दिल्ली: इस साल के सबसे बड़े आईपीओ एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की शेयर बाजार में बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग आखिरकार हो गई, लेकिन यह निवेशकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकी। ग्रे मार्केट में जहां शेयर के करीब ₹671 पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं वास्तविक लिस्टिंग केवल 6 प्रतिशत से थोड़ा अधिक प्रीमियम पर हुई। इश्यू प्राइस ₹574 प्रति शेयर रखने वाली कंपनी के शेयर ने लिस्टिंग पर निवेशकों को प्रति शेयर केवल करीब ₹39 का लाभ दिया। एनएसई और बीएसई पर कैसी रही लिस्टिंग? बाजार में कमजोरी के बीच कंपनी के शेयर की शुरुआत सीमित बढ़त के साथ हुई। एनएसई पर लिस्टिंग मूल्य: ₹613.30 बीएसई पर लिस्टिंग मूल्य: ₹610.00 इश्यू प्राइस: ₹574 प्रति शेयर इस तरह एनएसई पर शेयर करीब 6.85 प्रतिशत और बीएसई पर 6.27 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुआ। ग्रे मार्केट की उम्मीदें टूटीं लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का प्रीमियम लगभग ₹97 प्रति शेयर चल रहा था। इसके आधार पर शेयर के करीब ₹671 पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग अनुमान से काफी कम रही और निवेशकों को अपेक्षा से कम मुनाफा मिला। आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स कंपनी का ₹9,795.31 करोड़ का आईपीओ 14 जुलाई 2026 को खुला था और 16 जुलाई 2026 को बंद हुआ था। इस सार्वजनिक निर्गम को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला और यह कुल 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ। निवेशकों की श्रेणीवार मांग क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): 140.11 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 22.51 गुना रिटेल निवेशक: 3.60 गुना संस्थागत निवेशकों की ओर से सबसे अधिक रुचि देखने को मिली। कंपनी को नहीं मिला कोई नया पैसा यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था। इसमें कंपनी के मौजूदा प्रमोटर और शेयरधारकों— भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) अमुंडी ने कुल 17.10 करोड़ शेयर बेचे। चूंकि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल था, इसलिए इस आईपीओ से एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को कोई नई पूंजी प्राप्त नहीं हुई। भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल वर्ष 1992 में स्थापित एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, एसबीआई म्यूचुअल फंड का प्रबंधन करती है। कंपनी के पास लगभग ₹16.32 लाख करोड़ की परिसंपत्तियां (Assets Under Management - AUM) हैं, जो भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल एयूएम का लगभग 15.5 प्रतिशत है। यही वजह है कि इसे देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में गिना जाता है।  

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