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Sensex, Nifty See Biggest Weekly Crash in 4 Years

चार साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट: शेयर बाजार धड़ाम, रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर

surbhi मार्च 14, 2026 0
Indian stock market graph showing sharp fall in Sensex and Nifty amid global geopolitical tensions.
Sensex Nifty Weekly Crash

 

पश्चिम एशिया में तनाव का असर, बाजार में भारी बिकवाली

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह जोरदार गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने बाजार के माहौल को और नकारात्मक बना दिया। नतीजतन, घरेलू शेयर बाजार ने लगभग चार वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखी।

 

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

सप्ताह के दौरान BSE सेंसेक्स में 5.51 प्रतिशत यानी 4,354.98 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 भी 1,299.35 अंक यानी 5.31 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 के स्तर पर आ गया।
पूरे सप्ताह में केवल मंगलवार को बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी सभी कारोबारी सत्रों में सूचकांक दबाव में रहे।

 

स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव

स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे। BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में इस सप्ताह करीब 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई।
इस दौरान Aqylon Nexus, Silver Touch Technologies, SEPC, InfoBeans Technologies, Amber Enterprises India, PG Electroplast, Yasho Industries, Sapphire Foods India, Capacite Infraprojects, Sunteck Realty, Rain Industries, Dynamatic Technologies और Precision Wires India जैसे कई शेयरों में 22 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।

हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी भी रही। Confidence Petroleum, Chemplast Sanmar, Jindal Poly Films, Happiest Minds Technologies, Apollo Pipes, Liberty Shoes और TTK Prestige जैसे शेयरों में 15 से 22 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया।

 

लार्जकैप और मिडकैप कंपनियों पर भी असर

BSE लार्जकैप इंडेक्स में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट रही। इस दौरान Polycab India, IDBI Bank, Larsen & Toubro, TVS Motor Company, UltraTech Cement, Mahindra & Mahindra, Eicher Motors, IndusInd Bank, Maruti Suzuki India, Varun Beverages और Tata Motors के शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आई।

वहीं BSE मिडकैप इंडेक्स भी 4.5 प्रतिशत कमजोर रहा। इस दौरान KEI Industries, Bharat Forge, Ashok Leyland, Schaeffler India, Colgate Palmolive India, Ramco Cements, IDFC First Bank, Godrej Industries और APL Apollo Tubes के शेयरों में 10–15 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई।

दूसरी ओर Premier Energies, LT Technology Services, Aurobindo Pharma, Ipca Laboratories, Suzlon Energy और Dixon Technologies जैसे कुछ शेयरों में तेजी भी दर्ज की गई।

 

सेक्टरल इंडेक्स में व्यापक गिरावट

लगभग सभी सेक्टरल इंडेक्स इस सप्ताह लाल निशान में बंद हुए।
सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली।

  • निफ्टी ऑटो: 10.6% गिरावट
  • निफ्टी PSU बैंक: 7.2% गिरावट
  • निफ्टी डिफेंस: 7% गिरावट
  • निफ्टी प्राइवेट बैंक: 7% गिरावट
  • निफ्टी मेटल: 6% गिरावट

 

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार चौथे सप्ताह भी बिकवाली करते रहे। इस दौरान उन्होंने करीब 35,052 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और उन्होंने लगभग 37,739 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

 

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। रुपया लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर हुआ और शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
सप्ताह के अंत में रुपया 92.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो एक सप्ताह पहले 91.74 के स्तर पर था।

 

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहना जरूरी माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Stock Market: हरे निशान पर बंद हुआ  शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को भारी उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार का अंत बढ़त के साथ हुआ। शुरुआती कमजोरी और बिकवाली के दबाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी लौटने से बाजार हरे निशान पर बंद होने में सफल रहा। बीएसई का BSE Sensex 117.54 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,318.39 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का Nifty 50 41 अंक यानी 0.17 प्रतिशत चढ़कर 23,659 पर बंद हुआ।   दिनभर बाजार में रहा दबाव कारोबार की शुरुआत कमजोर रही थी। सेंसेक्स 394 अंकों की गिरावट के साथ 74,806.49 पर खुला, जबकि निफ्टी 160 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,457.25 पर पहुंच गया था। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने शुरुआती कारोबार में निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। विशेषज्ञों के मुताबिक महंगाई को लेकर बढ़ती आशंकाएं और विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी घरेलू बाजार पर देखने को मिला।   रिलायंस और हिंडाल्को में जोरदार तेजी दिन के कारोबार में कई दिग्गज शेयरों ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। Reliance Industries के शेयर करीब 3 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुए, जबकि Hindalco Industries में लगभग 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। धातु और ऊर्जा सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।   रुपये में कमजोरी जारी शेयर बाजार में सुधार के बावजूद भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रहा। रुपया डॉलर के मुकाबले 13 पैसे कमजोर होकर 96.83 (अस्थायी) पर बंद हुआ। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी।

Anjali Kumari मई 20, 2026 0
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नाश्ता हुआ महंगा! ब्रेड-पाव की कीमतों में ₹5 की बढ़ोतरी, जानें क्या है इसकी वजह

महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को अब रोजमर्रा के नाश्ते पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब Mumbai और आसपास के इलाकों में ब्रेड और पाव की कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं। कई बड़ी कंपनियों ने 16 मई 2026 से नई दरें लागू कर दी हैं, जिससे लाखों कामकाजी लोगों, छात्रों और मजदूरों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। नई कीमतों के तहत अलग-अलग प्रकार की ब्रेड पर ₹2 से ₹5 तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर खासतौर पर वड़ा-पाव, सैंडविच और ब्रेड आधारित नाश्ते पर दिखाई देगा, जो मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा माने जाते हैं। आखिर क्यों बढ़ गए ब्रेड और पाव के दाम? बेकरी उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हुई ब्रेड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी के कारण आयात लागत काफी बढ़ गई है। इससे पैकेजिंग खर्च में बड़ा इजाफा हुआ है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ी हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर अब खाद्य उत्पादों पर भी दिखने लगा है। ट्रकों के भाड़े में बढ़ोतरी होने से कच्चे माल को बेकरियों तक पहुंचाना और तैयार ब्रेड को दुकानों तक सप्लाई करना महंगा हो गया है। प्रिजर्वेटिव्स और दूध की कीमतें बढ़ीं ब्रेड को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इसके अलावा दूध कंपनियों द्वारा हाल में किए गए रेट बढ़ोतरी के फैसले ने भी बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ा दी है। मुंबई में ब्रेड-पाव का नया रेट कार्ड ब्रेड की वैरायटी पुरानी कीमत नई कीमत 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड ₹35 ₹40 ब्राउन ब्रेड ₹45 ₹50 होल व्हीट ब्रेड ₹55 ₹60 मल्टिग्रेन ब्रेड ₹60 ₹65 स्मॉल ब्राउन लोफ ₹28 ₹30 व्हाइट लोफ ₹20 ₹22 आम लोगों पर क्या होगा असर? ब्रेड और पाव की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों के रसोई बजट पर पड़ेगा। मुंबई जैसे शहरों में लाखों लोग सुबह के नाश्ते और फास्ट फूड के लिए ब्रेड और पाव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में वड़ा-पाव, सैंडविच और पाव-भाजी जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन और आयात लागत में कमी नहीं आई, तो आने वाले समय में अन्य बेकरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।  

surbhi मई 19, 2026 0
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Silver Import Rules
चांदी के आयात नियम सख्त, बढ़ सकती हैं कीमतें; एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने चांदी के आयात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियों और अर्ध-निर्मित चांदी उत्पादों को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया है। इस फैसले के बाद बाजार में चांदी की सप्लाई प्रभावित होने और कीमतों में तेज उछाल आने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चांदी और महंगी हो सकती है।   क्या है सरकार का नया फैसला? सरकार ने 16 मई 2026 से चांदी की सिल्लियों और अन्य सेमी-फिनिश्ड सिल्वर उत्पादों के आयात पर सख्ती लागू कर दी है। पहले इनका आयात आसानी से हो जाता था, लेकिन अब केवल चुनिंदा एजेंसियों को ही आयात की अनुमति होगी। इनमें RBI से जुड़े बैंक, DGFT-अनुमोदित संस्थाएं और बुलियन एक्सचेंज से संबद्ध एजेंसियां शामिल हैं।   क्यों उठाया गया यह कदम? सरकार का उद्देश्य बढ़ते आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव को कम करना है। मिडिल ईस्ट तनाव, डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी के कारण भारत का आयात खर्च तेजी से बढ़ा है। व्यापार मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चांदी आयात पर करीब 12 अरब डॉलर खर्च किए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था।   अप्रैल में आयात में भारी उछाल अप्रैल 2026 में चांदी आयात में 157 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। भारत मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और चीन से चांदी आयात करता है।   क्या महंगी होगी चांदी? कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई सीमित होने से घरेलू बाजार में प्रीमियम बढ़ सकता है, जिससे ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल भारत में 1 किलो चांदी की कीमत लगभग ₹2.80 लाख तक पहुंच चुकी है। मई 2026 में अब तक चांदी की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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