स्वास्थ्य

India Accounts for 10% of Maternal Deaths

Lancet Report: हर 10 में से एक मातृ मृत्यु भारत में, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

surbhi मार्च 30, 2026 0
Pregnant woman receiving medical care in hospital highlighting maternal mortality concerns in India report
Maternal Mortality in India Lancet Report

Lancet Maternal Death Report: दुनियाभर में गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण होने वाली मातृ मृत्यु को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। द लैंसेट में प्रकाशित ताज़ा स्टडी के मुताबिक, दुनिया की हर 10 में से एक मां की मौत भारत में होती है, जो एक गंभीर संकेत है।

क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट के अनुसार:

  • 2023 में दुनिया भर में करीब 2.4 लाख महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी वजहों से हुई।
  • इनमें से लगभग 24,700 मौतें भारत में दर्ज की गईं
  • यानी वैश्विक स्तर पर करीब 10% मातृ मृत्यु भारत से जुड़ी है

हालांकि, आंकड़ों का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है।

  • 1990 में भारत में मातृ मृत्यु: लगभग 1.19 लाख
  • 2015 में घटकर: 36,900
  • 2023 में और घटकर: 24,700

इसी तरह,

  • मातृ मृत्यु दर (MMR) 1990 में 508 से घटकर
  • 2023 में 116 प्रति 1 लाख जीवित जन्म हो गई है

सुधार के बावजूद क्यों बनी हुई है चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार अभी अधूरा है और देश में असमानता बड़ी समस्या है।

  • केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं
  • जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण हैं

मातृ मृत्यु के मुख्य कारण

स्टडी के मुताबिक, ज्यादातर मौतें ऐसी वजहों से होती हैं जिन्हें रोका जा सकता है:

  • प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव
  • हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एक्लेम्प्सिया जैसी स्थिति)
  • संक्रमण (Infections)
  • पहले से मौजूद बीमारियां

इसके अलावा:

  • समय पर इलाज न मिलना
  • स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में अंतर
  • ग्रामीण-शहरी असमानता

भी बड़ी वजहें हैं।

कोविड-19 का भी पड़ा असर

एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे हालात और बिगड़े। यही वजह है कि 2015 के बाद सुधार की रफ्तार धीमी पड़ गई

वैश्विक स्थिति भी चिंताजनक

  • 2023 में वैश्विक मातृ मृत्यु दर: 190 प्रति 1 लाख जीवित जन्म
  • जबकि संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य (SDGs): 70 प्रति 1 लाख

यानी दुनिया अभी भी लक्ष्य से काफी दूर है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

स्वास्थ्य

View more
Healthy liver concept with nutritious foods, avoiding junk food, sugary drinks, painkillers, and unhealthy lifestyle habits.
सिर्फ शराब ही नहीं, ये 5 आदतें भी चुपचाप खराब कर सकती हैं आपका लिवर; पेनकिलर से लेकर जंक फूड तक रहें सतर्क

लिवर को नुकसान केवल अल्कोहल से नहीं होता। जरूरत से ज्यादा पेनकिलर, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी, बिना सलाह के सप्लीमेंट्स और वायरल संक्रमण भी लिवर की सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं। Liver Health Tips: जब भी लिवर को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों की बात होती है, तो सबसे पहले शराब का नाम आता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ सामान्य आदतें और खाद्य पदार्थ भी धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई लोग अनजाने में ऐसी चीजों का नियमित सेवन करते हैं, जिससे समय के साथ फैटी लिवर, लिवर इंफ्लेमेशन और अन्य गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। 1. जरूरत से ज्यादा पेनकिलर का सेवन हल्के दर्द में बार-बार दर्द निवारक दवाएं लेना लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। दवाओं का सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें। 2. ज्यादा चीनी और फ्रुक्टोज वाले फूड्स कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस, मिठाइयां और प्रोसेस्ड स्नैक्स में मौजूद अतिरिक्त शुगर लिवर में फैट जमा होने का कारण बन सकती है, जिससे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का जोखिम बढ़ सकता है। 3. प्रोसेस्ड और जंक फूड बर्गर, पिज्जा, चिप्स और डीप-फ्राइड फूड्स में ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट अधिक होता है। इनका नियमित सेवन लिवर में सूजन और फैट बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। 4. बिना सलाह के सप्लीमेंट्स लेना फिटनेस, बॉडीबिल्डिंग या वजन घटाने के नाम पर कई लोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के सप्लीमेंट्स या स्टेरॉयड लेने लगते हैं। कुछ उत्पादों में मौजूद तत्व लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। 5. हेपेटाइटिस जैसी वायरल बीमारियों को नजरअंदाज करना हेपेटाइटिस B और C जैसे संक्रमण समय पर इलाज न मिलने पर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन, सुरक्षित स्वास्थ्य आदतें और समय पर जांच जरूरी है। लिवर को स्वस्थ रखने के आसान उपाय संतुलित और पौष्टिक आहार लें। जंक फूड और शुगर का सेवन सीमित रखें। नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं या सप्लीमेंट्स न लें। नियमित हेल्थ चेकअप कराएं। ध्यान दें: यह जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यदि आपको लगातार थकान, पीलिया, पेट में सूजन या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।  

anmol जुलाई 17, 2026 0
Middle-aged adult following a healthy lifestyle with nutritious food and exercise for healthy ageing after 40.

40 के बाद शरीर में दिखने लगते हैं ये बदलाव, हर लक्षण बीमारी नहीं होता; जानें सामान्य संकेत, हेल्दी डाइट और बचाव के आसान तरीके

Golden turmeric soup and turmeric milk with black pepper, healthy monsoon recipes for metabolism and wellness.

सुबह खाली पेट नहीं, इस समय खाएं हल्दी की ये रेसिपी, मेटाबॉलिज्म सपोर्ट करने और मानसून में त्वचा व सेहत को फायदा पहुंचाने में मिल सकती है मदद

Antibiotics

Antibiotics का ज्यादा इस्तेमाल पड़ सकता है भारी! शरीर पर बढ़ रहा खतरा, डॉक्टरों ने दी सावधानी की सलाह

Person using a laptop with tired eyes, highlighting digital eye strain symptoms and screen fatigue prevention.
Asthenopia Symptoms: क्या आपकी आंखें भी जरूरत से ज्यादा काम कर रही हैं? जानिए आई स्ट्रेन के लक्षण, कारण और बचाव के आसान तरीके

Asthenopia (Eye Strain) Symptoms: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन लगातार स्क्रीन देखने की आदत आंखों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग एस्थेनोपिया (Asthenopia) यानी आई स्ट्रेन (Eye Strain) की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि उन्हें इसका पता भी नहीं होता। मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पंचशील पार्क की सीनियर आई सर्जन (कैटरेक्ट, LASIK एवं कॉर्निया) और एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. सोनिका गुप्ता के अनुसार, एस्थेनोपिया आंखों के अत्यधिक उपयोग के कारण होने वाली एक सामान्य समस्या है। हालांकि यह आमतौर पर आंखों की रोशनी को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाती, लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह दैनिक जीवन, काम करने की क्षमता और आंखों के आराम को प्रभावित कर सकती है। क्या है एस्थेनोपिया? एस्थेनोपिया या आई स्ट्रेन वह स्थिति है, जब लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, किताब या अन्य नजदीकी वस्तुओं पर लगातार ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं। यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में अधिक देखी जाती है जो कई घंटों तक स्क्रीन के सामने काम करते हैं या लगातार पढ़ाई करते हैं। एस्थेनोपिया के सामान्य लक्षण यदि आपकी आंखों पर लगातार अधिक दबाव पड़ रहा है, तो निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं: धुंधला दिखाई देना आंखों में थकान या भारीपन आंखों में जलन या चुभन ड्राई आई (आंखों का सूखना) आंखों में खुजली सिरदर्द फोकस करने में कठिनाई तेज रोशनी से परेशानी (Light Sensitivity) लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद असहज महसूस होना किन कारणों से होती है आई स्ट्रेन? विशेषज्ञों के अनुसार, एस्थेनोपिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं: लंबे समय तक बिना ब्रेक लिए स्क्रीन देखना मोबाइल या कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय कम पलक झपकना लगातार पढ़ाई या टाइपिंग करना कम या अधिक तेज रोशनी में काम करना स्क्रीन पर पड़ने वाली चमक (Glare) स्क्रीन से उचित दूरी न रखना आंखों का नंबर बदल जाना या बिना जांच के पुराना चश्मा इस्तेमाल करना बिना इलाज के दृष्टि संबंधी समस्याएं किन लोगों को अधिक खतरा? आई स्ट्रेन किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन जोखिम सबसे अधिक इन लोगों में देखा जाता है: ऑफिस में कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने वाले ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र गेमर्स मोबाइल का अधिक उपयोग करने वाले लंबे समय तक वाहन चलाने वाले बच्चे और बुजुर्ग, जिनका स्क्रीन टाइम बढ़ गया है क्या एस्थेनोपिया से आंखों की रोशनी चली जाती है? विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में एस्थेनोपिया से आंखों की रोशनी स्थायी रूप से नहीं जाती। हालांकि लगातार आई स्ट्रेन रहने पर आंखों की थकान, असुविधा और कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बढ़ जाएं, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। बचाव के आसान उपाय आंखों को स्वस्थ रखने के लिए विशेषज्ञ निम्नलिखित सुझाव देते हैं: 20-20-20 नियम अपनाएं हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
difference between kidney stones and gallbladder stones

Kidney Stone या Gallbladder Stone? पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, ऐसे पहचानें पथरी कहां है

Person repeatedly checking a smartphone, highlighting signs of mobile addiction and excessive screen time affecting daily life.

Mobile Addiction: हर कुछ मिनट में फोन चेक करते हैं? ये 5 संकेत बताते हैं कि कहीं आप मोबाइल की लत का शिकार तो नहीं

Ranchi Sadar Hospital

10 करोड़ पहुंची लागत, फिर भी शुरू नहीं हो सका सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट

Person checking blood sugar with a glucometer while healthy food and daily lifestyle habits are highlighted.
Diabetes Care: सिर्फ मीठा ही नहीं, आपकी ये रोजमर्रा की आदतें भी बढ़ा सकती हैं ब्लड शुगर, जानें कैसे करें बचाव

डायबिटीज (मधुमेह) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। अक्सर लोग मानते हैं कि केवल मीठा खाने से ही ब्लड शुगर बढ़ता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसी दैनिक आदतें भी हैं जो शुगर लेवल को असंतुलित कर सकती हैं और बीमारी को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकती हैं। डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद जरूरी है। सिर्फ चीनी नहीं, फास्ट फूड भी बढ़ा सकता है परेशानी डायबिटीज में केवल मिठाइयों से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं होता। कई फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी ब्लड शुगर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इनमें शामिल हैं: बर्गर और पिज्जा फ्रेंच फ्राइज पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड इन खाद्य पदार्थों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अस्वास्थ्यकर वसा और अतिरिक्त शर्करा अधिक हो सकती है। इनके नियमित सेवन से वजन बढ़ने, इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होने और ब्लड शुगर नियंत्रण में कठिनाई आ सकती है। लंबे समय तक बैठे रहना भी हो सकता है नुकसानदायक शारीरिक निष्क्रियता डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक मानी जाती है। जब शरीर सक्रिय रहता है, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का बेहतर उपयोग करती हैं और इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) में सुधार होता है। वहीं लंबे समय तक बैठे रहने से ब्लड शुगर नियंत्रित रखना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञ आमतौर पर रोज कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने की सलाह देते हैं। अनियमित दिनचर्या बढ़ा सकती है जोखिम समय पर भोजन न करना, देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या अपनाना भी ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इन आदतों से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (Body Clock) प्रभावित होती है, जिससे ग्लूकोज नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। तनाव को नजरअंदाज न करें लगातार तनाव रहने पर शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। तनाव कम करने के लिए: पर्याप्त नींद लें। योग और ध्यान करें। नियमित व्यायाम करें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। डायबिटीज में अपनाएं ये अच्छी आदतें संतुलित और पौष्टिक भोजन करें। नियमित समय पर खाना खाएं। रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और जांच समय पर कराएं। ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग करें। ध्यान रखें डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल मीठे से दूरी बनाना काफी नहीं है। स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है। यदि ब्लड शुगर बार-बार बढ़ रहा हो या कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Person experiencing painful mouth ulcers while applying a soothing home remedy for relief and oral care.

Mouth Ulcers: मुंह के छालों से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, जल्द मिल सकती है राहत

RIMS

रिम्स में मरीजों को मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, ऑनलाइन भर्ती से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक होंगे बड़े बदलाव

Person performing strength training exercises to build chest and back muscles, highlighting their potential link to better heart health.

मजबूत छाती और पीठ की मांसपेशियां हार्ट अटैक का खतरा 31% तक घटा सकती हैं? नए अध्ययन में सामने आए अहम संकेत

0 Comments

Top week

India vs England Series
स्पोर्ट्स

इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?