बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब 17 वर्षीय एक किशोरी अपने प्रेमी की रिहाई की मांग को लेकर करीब 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस, प्रशासन और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद किशोरी को सुरक्षित नीचे उतारा गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किशोरी का प्रेमी किसी मामले में न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में है। प्रेमी की गिरफ्तारी से नाराज किशोरी ने विरोध जताने के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ने जैसा खतरनाक कदम उठा लिया। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पुलिस अधिकारियों ने पहले किशोरी से बातचीत की और उसे समझाने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से लगातार बातचीत जारी रही। काफी देर तक चले प्रयास के बाद किशोरी सुरक्षित नीचे उतर आई। इसके बाद राहत की सांस ली गई।
मोबाइल टावर पर किशोरी के चढ़ने की खबर फैलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी समस्या का समाधान कानून के दायरे में रहकर करें। इस तरह जान जोखिम में डालकर विरोध करना न केवल खतरनाक है बल्कि इससे बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने झारखंड सहित देश के कई राज्यों के लिए भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों में मौसम तेजी से बदल सकता है। कई क्षेत्रों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। किन राज्यों में अलर्ट? मौसम विभाग के अनुसार झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, असम सहित कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी की संभावना है। कुछ इलाकों में बिजली गिरने का भी अनुमान जताया गया है। झारखंड में कैसा रहेगा मौसम? झारखंड के कई जिलों में गरज के साथ बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। किसानों और यात्रियों के लिए सलाह IMD ने किसानों से फसल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है। वहीं यात्रियों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। तेज हवा और बारिश के कारण सड़क तथा रेल यातायात भी प्रभावित हो सकता है। प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी राज्य और जिला प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है।
रांची। रांची और हटिया से चलने वाली लंबी दूरी की कई ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा नहीं होने से यात्रियों को सफर के दौरान भोजन संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को मजबूरन स्टेशनों पर बाहरी वेंडरों से खाना खरीदना पड़ता है। लगातार हो रही थी पैंट्री कार की मांग ऐसे में विभिन्न पैसेंजर एसोसिएशन और यात्री संगठन लगातार इन ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच कोलकाता में हुई जेडआरयूसीसी की बैठक में सदस्य अरुण जोशी की ओर से उठाए गए मुद्दे पर दक्षिण पूर्व रेलवे ने संज्ञान लिया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन संख्या 22846 हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस तथा 18637 हटिया-एसएमवीटी साप्ताहिक एक्सप्रेस में फिलहाल ट्रेन साइड वेंडिंग के माध्यम से खानपान की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन ट्रेनों में पैंट्री कार लगाने के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। रातभर की यात्रा वाली ट्रेनों में भी पैंट्री सुविधा मांग 400 से 600 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली तपस्विनी एक्सप्रेस, हटिया-पटना और रांची-बनारस जैसी ट्रेनों में पैंट्री कार की मांग लगातार उठ रही है। यात्रियों का कहना है कि रातभर की यात्रा के दौरान गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता। आईआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवा मदद करती है, लेकिन हर स्टेशन पर यह उपलब्ध नहीं होता। लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में हो पैंट्री की सुविधा: पैसेंजर एसोसिएशन झारखंड पैसेंजर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव प्रेम कटारूका ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर मांग की है कि रात में लंबी दूरी तय करने वाली सभी ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों को समय पर, साफ-सुथरा और उचित दर पर भोजन नहीं मिल पाता, इसलिए पैंट्री कार अनिवार्य होने से यात्रा अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित हो जाएगी। कई ट्रेनें ऐसी भी जो 400 किमी या इससे अधिक दूरी तय करती है और दोपहर में खुलती हैं। ऐसे में रात का खाना जरूरी हो जाता है। 1000 किमी. से अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों में भी पैंट्री नही यात्रियों का कहना है कि हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस, हटिया-एसएमवीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस और पुर्णिया- आनंद विहार एक्सप्रेस जैसी 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों में भी पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। लंबी दूरी की यात्रा के बावजूद यात्रियों को भोजन के लिए साइड वेंडरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी की ट्रेनों में पैंट्री कार अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, ताकि सफर के दौरान स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके। रांची- नई दिल्ली गरीब रथ में भी पैंट्री कार नहीं है।
रांची। झामुमो के केंद्रीय सचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राहुल गांधी और हेमंत सोरेन सिर्फ उन 50 विधायकों के नेता हैं, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में झामुमो प्रत्याशी और कांग्रेस प्रत्याशी को वोट दिया। जिन 28 विधायकों ने परिमल नाथवानी को वोट दिया है, उनके नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह हैं। झामुमो का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक दलों के बीच घमसान मचा हुआ है। 6 विधायकों ने गद्दारी की सुप्रियो भट्टाचार्य यहीं नहीं रूके। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि छह विधायकों ने गद्दारी की है। उनके बारे में क्या बात की जा सकती है। बता दें कि इंडी गंठबंधन में शामिल दलों में कुल 56 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में इंडिया गंठबंधन के दोनों प्रत्याशियों के पास पर्याप्त वोट रहने के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें सिर्फ 20 वोट मिले। छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को वोट दिया। जिस कारण उनकी जीत हुई। गठबंधन में तनाव कम करने की कोशिश क्रॉस वोटिंग करने वाले छह विधायकों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई होगी या नहीं, इसके जवाब को सुप्रियो भट्टाचार्य ने टाल दिया। बताते चलें कि दो दिन पहले कांग्रेसी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था कि गंठबंधन को बचाने के लिए वह विष पीने को तैयार हैं। झामुमो के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि गंठबंधन के बीच फैली खटास को मिटाने की कोशिशें शुरु हो गयी है।