झारखंड

हटिया-पुणे व हटिया एसएमवीटी ट्रेन में जल्द जुडे़गी पैंट्री कार

abhishek singh जून 23, 2026 0
Pantry Car Hatia - Pune and Hatia - SMVT
Pantry Car Hatia - Pune and Hatia - SMVT Trains

रांची। रांची और हटिया से चलने वाली लंबी दूरी की कई ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा नहीं होने से यात्रियों को सफर के दौरान भोजन संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को मजबूरन स्टेशनों पर बाहरी वेंडरों से खाना खरीदना पड़ता है।


लगातार हो रही थी पैंट्री कार की मांग


ऐसे में विभिन्न पैसेंजर एसोसिएशन और यात्री संगठन लगातार इन ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच कोलकाता में हुई जेडआरयूसीसी की बैठक में सदस्य अरुण जोशी की ओर से उठाए गए मुद्दे पर दक्षिण पूर्व रेलवे ने संज्ञान लिया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन संख्या 22846 हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस तथा 18637 हटिया-एसएमवीटी साप्ताहिक एक्सप्रेस में फिलहाल ट्रेन साइड वेंडिंग के माध्यम से खानपान की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन ट्रेनों में पैंट्री कार लगाने के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।


रातभर की यात्रा वाली ट्रेनों में भी पैंट्री सुविधा मांग

 

400 से 600 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली तपस्विनी एक्सप्रेस, हटिया-पटना और रांची-बनारस जैसी ट्रेनों में पैंट्री कार की मांग लगातार उठ रही है। यात्रियों का कहना है कि रातभर की यात्रा के दौरान गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता। आईआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवा मदद करती है, लेकिन हर स्टेशन पर यह उपलब्ध नहीं होता।


लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में हो पैंट्री की सुविधा: पैसेंजर एसोसिएशन


झारखंड पैसेंजर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव प्रेम कटारूका ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर मांग की है कि रात में लंबी दूरी तय करने वाली सभी ट्रेनों में पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों को समय पर, साफ-सुथरा और उचित दर पर भोजन नहीं मिल पाता, इसलिए पैंट्री कार अनिवार्य होने से यात्रा अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित हो जाएगी। कई ट्रेनें ऐसी भी जो 400 किमी या इससे अधिक दूरी तय करती है और दोपहर में खुलती हैं। ऐसे में रात का खाना जरूरी हो जाता है।


1000 किमी. से अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों में भी पैंट्री नही


यात्रियों का कहना है कि हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस, हटिया-एसएमवीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस और पुर्णिया- आनंद विहार एक्सप्रेस जैसी 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली ट्रेनों में भी पैंट्री कार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। लंबी दूरी की यात्रा के बावजूद यात्रियों को भोजन के लिए साइड वेंडरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि इतनी लंबी दूरी की ट्रेनों में पैंट्री कार अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, ताकि सफर के दौरान स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके। रांची- नई दिल्ली गरीब रथ में भी पैंट्री कार नहीं है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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खरसावां में मुहर्रम जुलूस को लेकर प्रशासन अलर्ट, 27 जून को निकलेगा जुलूस

सरायकेला-खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां में मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में खरसावां थाना परिसर में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रधान माझी ने की। बैठक में विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और शांति समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया।   बैठक में निर्णय लिया गया कि 26 जून को मुहर्रम पर्व मनाया जाएगा, जबकि 27 जून को पारंपरिक जुलूस निकाला जाएगा। प्रशासन ने जुलूस मार्ग पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।   सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम प्रशासन ने मुहर्रम जुलूस के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। थाना प्रभारी राहुल सिंह ने बताया कि जुलूस मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। बीडीओ प्रधान माझी और अंचल अधिकारी (सीओ) कप्तान माझी ने स्पष्ट किया कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रशासन की विशेष नजर रहेगी ताकि किसी तरह की भ्रामक सूचना से माहौल खराब न हो।   शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक बिजली रहेगी बाधित प्रशासन ने जानकारी दी कि जुलूस के दौरान सुरक्षा कारणों से 27 जून को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद रहेगी। वहीं, स्थानीय अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।   यह रहेगा जुलूस का मार्ग बैठक के बाद अधिकारियों और शांति समिति के सदस्यों ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण भी किया। मुहर्रम जुलूस बेहरासाही स्थित इमामवाड़े से शुरू होकर तांतीसाही, भट्टी चौक, चांदनी चौक, बाजारसाही, राजवाड़ी और कुम्हारसाही होते हुए टुनियाबाड़ी स्थित करबला में समाप्त होगा। प्रशासन ने सभी नागरिकों से आपसी भाईचारे और सहयोग के साथ पर्व मनाने की अपील की है।

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झारखंड में बदला मौसम का मिजाज, कहीं बारिश तो कहीं लू का अलर्ट; अब तक 60% कम हुई वर्षा

Jharkhand Weather Update: झारखंड में मौसम का मिजाज इन दिनों पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। एक ओर कई जिलों में रुक-रुक कर हो रही बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, तो दूसरी ओर पलामू, गढ़वा और चतरा जैसे जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के अधिकांश हिस्सों में 28 जून तक मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। बारिश से तापमान में आई गिरावट मॉनसून की सक्रियता के कारण राजधानी रांची और मेदिनीनगर के अधिकतम तापमान में 4.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि चाईबासा का तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस कम हुआ है। इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। हालांकि, पलामू, गढ़वा और चतरा जिलों में 23, 24 और 25 जून को लू चलने की संभावना जताई गई है। वज्रपात से तीन लोगों की मौत सोमवार को राज्य के अलग-अलग जिलों में वज्रपात की घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई। हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ क्षेत्र के नावाडीह टोला में बकरियां चराने गए 68 वर्षीय गोवर्धन महतो की वज्रपात से मौत हो गई। गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र के विकताम गांव में 53 वर्षीय ममता कुंवर की जान चली गई। सिमडेगा जिले के केरसई थाना क्षेत्र के भंडारटोली गांव में वज्रपात की चपेट में आने से 15 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे घायल हो गए। कई जिलों में हुई हल्की से मध्यम बारिश सोमवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की और मध्यम बारिश दर्ज की गई। चाईबासा (जगन्नाथपुर) – 14 मिमी सिमडेगा – 10 मिमी खूंटी – 4 मिमी देवघर – 2 मिमी सरायकेला – 2 मिमी बहरागोड़ा – 2.5 मिमी लोहरदगा – 1 मिमी रांची में भी छिटपुट बारिश दर्ज की गई। प्रमुख शहरों का अधिकतम तापमान रांची – 28.4°C जमशेदपुर – 31.8°C मेदिनीनगर – 37.1°C बोकारो – 36.1°C चाईबासा – 30.8°C झारखंड में अब तक 60 प्रतिशत कम बारिश मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 1 जून से 22 जून 2026 के बीच राज्य में सामान्य रूप से 112.1 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 44.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम है। राजधानी रांची में सामान्य से थोड़ा अधिक वर्षापात हुआ है। यहां 115.6 मिमी के मुकाबले 118.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं राज्य के 23 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। सबसे खराब स्थिति गढ़वा जिले की रही, जहां सामान्य से 99 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों में मॉनसून के और सक्रिय होने से राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है।  

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Irregularities in NEET Re-Exam
NEET री-एग्जाम में गड़बड़ी व सॉल्वर गैंग का झारखंड कनेक्शन

रांची। री-नीट परीक्षा गड़बड़ी में बड़ा खुलासा हुआ है। बिहार के लखीसराय में री-नीट परीक्षा के दौरान पकड़े गए सॉल्वर गैंग की जांच में झारखंड कनेक्शन सामने आया है। इसमें झारखंड की दो लड़कियां शामिल हैं। गिरिडीह की पूनम कुमारी और पलामू की चंचल कुमारी का नाम इस नेटवर्क से जुड़ा मिला है। खास बात यह है कि पूनम कुमारी वर्ष 2021 में जैक इंटर साइंस परीक्षा की झारखंड टॉपर रह चुकी हैं। उन्होंने रांची के एक इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई की थी। वहीं, चंचल कुमारी ने इंटर साइंस परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। पूनम और चंचल के परिवार को उनकी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी। जब उन्हें इस संबंध में बताया गया, तो वे हैरान रह गये। उन्होंने कहा कि घटना के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी, आज पुलिस से सूचना मिली है। बीएचयू में पूनम और ओडिशा में चंचला कर रही पढ़ाई गिरफ्तार नौ फर्जी परीक्षार्थियों में झारखंड की दो छात्राएं भी शामिल हैं। जिसमें गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र के बरमसिया गांव की पूनम कुमारी और पलामू जिले के हरिहरगंज नगर पंचायत के सियरभूका की चंचला कुमारी शामिल हैं। पूनम बीएचयू में बीएससी नर्सिंग की छात्रा है, जबकि चंचला ओडिशा के बलांगीर गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज में बैचलर इन आयुर्वेदिक मेडिसिन के अंतिम वर्ष में पढ़ रही है। पुलिस ने दी घरवारों को सूचना पूनम के माता-पिता के अनुसार उसकी गिरफ्तारी की जानकारी उन्हें नहीं थी। आखिरी बातचीत 20 जून की शाम हुई थी। चंचला के भाई शंभू कुशवाहा ने बताया कि उन्हें लखीसराय थाना से फोन कर सूचना दी गई कि उनकी बहन को दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते पकड़ा गया है। शंभू के अनुसार, वह किसी के बहकावे में आकर ऐसा कदम उठा बैठी। झारखंड टॉपर रही है पूनम गिरिडीह की रहने वाली पूनम साल 2021 में साइंस स्ट्रीम में स्टेट टॉपर बनी थी। वह बनारस में रहकर पढ़ाई कर रही थी। उसने अपनी पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड से राजधनवार के प्रखर विद्यालय से पूरी की थी। नीट निकाल चुकी है चंचला वहीं चंचल कुमारी पलामू में हरिहरगंज के सियरभूका गांव की रहने वाली है। उसके पिता सत्येंद्र प्रसाद खेती करते हैं। भाई शंभू कुशवाहा और सतीश कुमार आयुर्वेद के चिकित्सक हैं। चंचल को 2018 में नीट में सफलता मिली थी। पर देरी होने के कारण उसका एडमिशन मेडिकल कॉलेज में नहीं हो पाया था। इसके बाद उसने गर्वमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, उड़ीसा में एडमिशन लिया।

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