झारखंड

गढ़वा में SIR-2026 की तैयारियां तेज, एसडीओ ने राजनीतिक दलों से मांगा सहयोग

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Garhwa SIR
Garhwa SIR 2026

गढ़वा। मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित तरीके से संपन्न कराने के लिए गढ़वा प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में 80-गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कुमार मयंक भूषण की अध्यक्षता में अनुमंडल कार्यालय में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न दलों के अध्यक्ष, सचिव और बीएलए-1 (Booth Level Agent) शामिल हुए।

 

मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ : एसडीओ


बैठक को संबोधित करते हुए एसडीओ कुमार मयंक भूषण ने कहा कि मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो, जबकि मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्तियों के नाम नियमानुसार हटाए जाएं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से विशेष पुनरीक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग करने और मतदाताओं को जागरूक करने की अपील की।

 

एसडीओ ने दलों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने बूथों पर नियुक्त बीएलए-2 को बीएलओ के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने के लिए प्रेरित करें, ताकि सत्यापन कार्य सुचारु रूप से पूरा हो सके।

 

सभी प्रमुख दलों ने लिया हिस्सा


बैठक में आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू), बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा कार्यपालक दंडाधिकारी और अनुमंडल कार्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

 

जानिए SIR-2026 का पूरा कार्यक्रम


बैठक में निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की समय-सीमा भी साझा की गई। इसके तहत 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक घर-घर जाकर सत्यापन होगा। 29 जुलाई को मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा, जबकि 5 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित होगा। 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी तथा 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक उनका निपटारा होगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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पलामू में पुलिस को खुली चुनौती, हैदरनगर थाने से हत्या का आरोपी फरार

पलामू। झारखंड के पलामू जिले में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। हैदरनगर थाना से आठ वर्षीय मासूम की हत्या और एक दंपती पर जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी चितरंजन पासवान शुक्रवार तड़के पुलिस हिरासत से फरार हो गया। आरोपी के फरार होने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और उसे पकड़ने के लिए जिलेभर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।   हत्या और जानलेवा हमले का है आरोपी पुलिस के अनुसार, फरार आरोपी चितरंजन पासवान हैदरनगर थाना क्षेत्र के बिंदु बीघा गांव का निवासी है। उस पर एक आठ वर्षीय बच्चे की बेरहमी से हत्या करने और एक दंपती को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर थाना हाजत में रखा था। हालांकि, शुक्रवार सुबह वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर हिरासत से भाग निकलने में सफल हो गया।   आरोपी की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया। पुलिस उसके संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों और परिचितों के घरों पर लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही आसपास के थाना क्षेत्रों को भी अलर्ट कर दिया गया है, ताकि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।   पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल थाने से हत्या जैसे गंभीर मामले के आरोपी का फरार हो जाना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर सवाल खड़े कर रहा है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिस हिरासत से ही आरोपी भाग सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।   फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार अभियान चला रही है। वहीं, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी किन परिस्थितियों में थाने से फरार हुआ और इस मामले में कहीं पुलिसकर्मियों की लापरवाही या किसी की मिलीभगत तो नहीं थी।

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RIMS land fraud: एसीबी ने प्रदीप महतो को बताया साजिश का मुख्य किरदार

रांची। रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) जमीन घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद कुमार महतो को पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड और मुख्य साजिशकर्ता बताया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी अधिग्रहित जमीन की अवैध खरीद-बिक्री में उसकी अहम भूमिका रही है।   गवाह के बयान से मजबूत हुई जांच एसीबी ने जांच के दौरान सोनमैती देवी का बयान दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि प्रमोद कुमार महतो उन प्रॉपर्टी डीलरों में शामिल था, जिन्होंने उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में अंगूठे का निशान लगाने के लिए बुलाया था। सोनमैती देवी के अनुसार, जमीन का एक हिस्सा उनके नाम पर था। जांच में एसीबी को यह भी पता चला है कि रिम्स के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन की बिक्री की पूरी प्रक्रिया में प्रमोद महतो ने उनकी सक्रिय रूप से मदद की थी।   फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेची गई जमीन जांच एजेंसी के अनुसार, जमीन की बिक्री को वैध दिखाने के लिए फर्जी वंशावली तैयार की गई और वार्ड पार्षद के कथित फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर दस्तावेज बनाए गए। एसीबी का मानना है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया ताकि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचा जा सके।   धोखाधड़ी का पुराना मामला भी आया सामने जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पटना निवासी कामिनी रंजन के नाम 17.35 डिसमिल जमीन की बिक्री के लिए करीब 45.72 लाख रुपये का सेल डीड तैयार किया गया था, लेकिन उन्हें कभी जमीन का कब्जा नहीं मिला। इसके बाद वर्ष 2020 में कामिनी रंजन ने पटना की अदालत में प्रमोद कुमार महतो के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि पैसा लौटाने के लिए दिया गया चेक भी बाउंस हो गया था।   एसीबी ने प्रमोद कुमार महतो को पूछताछ के लिए कई बार समन जारी किया है, लेकिन वह अब तक एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। इससे जांच एजेंसी का संदेह और गहरा गया है। वहीं, इस मामले में पहले ही एक बिल्डर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

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जानिए झारखंड के किन किन उत्पादों को मिला GI टैग ?

रांची। झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। राज्य को एक साथ 11 नए जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही झारखंड में जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इससे पहले सोहराई-खोवर पेंटिंग राज्य का पहला जीआई टैग प्राप्त उत्पाद था। यह उपलब्धि झारखंड के पारंपरिक शिल्प, हस्तकला और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।   झारक्राफ्ट ने राज्य के कई पारंपरिक उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नए जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में झारखंड तसर सिल्क साड़ियां एवं फैब्रिक, आदिवासी आभूषण, बांस की कलाकृतियां, डोकरा क्राफ्ट, कुचाई सिल्क साड़ियां और फैब्रिक, भागैया साड़ियां एवं फैब्रिक, दुमका चादर, बडोनी कठपुतलियां, पांची परहन पांची साड़ियां एवं फैब्रिक, केसरिया कलाकंद, बेनाम शिल्प और जादुपटिया पेंटिंग शामिल हैं।   और कौन कौन से नाम हैं शामिल? झारखंड का तसर सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक, उत्कृष्ट बनावट और पारंपरिक बुनाई के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। वहीं, आदिवासी आभूषण राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और हस्तकला का अनूठा उदाहरण हैं। बांस की कलाकृतियां स्थानीय कारीगरों की रचनात्मकता और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को दर्शाती हैं, जिनकी मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है। इस कामयाबी को आगे बढ़ाते हुए, झारक्राफ्ट राज्य के कई अन्य अनोखे उत्पादों के लिए जीआइ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी रखकर झारखंड के जीआई इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है।मंदार, पैतकर पेंटिंग, निमुचा (करनी) शॉल, देवघर पेड़ा, कुसुमी लाख, लाख की चूड़ियां, साल के बीज, महुआ के फूल, करंज के बीज, रागी, रुगड़ा और धुस्का जैसे उत्पादों के आवेदन फिलहाल जीआई रजिस्ट्री के पास जांच के लिए हैं।बता दे  इन उत्पादों को भी जीआई टैग मिलने से झारखंड के हस्तशिल्प, कृषि और खाद्य उत्पादों को नई पहचान मिलेगी।    क्या होता है जीआई टैग? जीआई टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्टता का प्रमाण होता है। यह एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो उत्पाद के नाम और पहचान की कानूनी सुरक्षा करता है। इससे न केवल उत्पादों की मौलिकता सुरक्षित रहती है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी मांग और मूल्य भी बढ़ता है। साथ ही उन कारीगरों, बुनकरों और पारंपरिक समुदायों को आर्थिक लाभ मिलता है, जिन्होंने पीढ़ियों से इन कलाओं और शिल्प परंपराओं को जीवित रखा है।   कैसे मिलता है जीआई टैग? किसी उत्पाद के लिए GI TAG प्राप्त केने के लिए सबसे पहले तो आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करना होता है। जीआई टैग के लिए कोई भी व्यक्तिगत निर्माता, संगठन इसके लिए भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले Controller General of Patents, Designs and Trade Marks (CGPDTM) में आवेदन कर सकता है। साक्ष्यों के आधार पर CGPDTM उस उत्पाद के उचित मानकों का परीक्षण करती है। जैसे ही यह उत्पाद मानकों पर खरा उतरता है इसे GI टैग दिया जाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0

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