झारखंड

Tata Motors Salary Hike Deal Nears Approval

इंतजार खत्म! टाटा मोटर्स कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने वाली, आज ग्रेड रिवीजन पर लग सकती है मुहर

surbhi मार्च 19, 2026 0
Tata Motors Jamshedpur plant workers as salary hike and grade revision talks near final approval
Tata Motors Salary Hike Grade Revision 2026

जमशेदपुर प्लांट में बड़ी खुशखबरी

झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा मोटर्स प्लांट के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रेड रिवीजन को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को इस समझौते पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। इस फैसले का सीधा लाभ 7321 स्थायी कर्मचारियों को मिलेगा।

समय पर समझौता हुआ तो मिलेगा 20 हजार बोनस

इस समझौते की खास बात यह है कि अगर 31 मार्च 2026 तक इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाता है, तो सभी कर्मचारियों को 20,000 रुपये का एकमुश्त बोनस मिलेगा। इससे पहले वर्ष 2022 में भी समय पर समझौता होने पर कर्मचारियों को यह लाभ दिया गया था।

वेतन वृद्धि 20 से 23 हजार तक पहुंचने की उम्मीद

सूत्रों के मुताबिक, इस बार वेतन वृद्धि का आंकड़ा 20,000 से 23,000 रुपये के बीच जा सकता है। वर्ष 2022 में कुल 17,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार भी बढ़ोतरी को चार चरणों (65%, 15%, 10% और 10%) में लागू किए जाने की संभावना है।

जियो ग्रेड कर्मचारियों के DA पर फोकस

इस बार यूनियन का सबसे बड़ा फोकस जियो ग्रेड कर्मचारियों के वेतन ढांचे को सुधारने पर है। पुराने कर्मचारियों की तुलना में नए कर्मियों का डीए (महंगाई भत्ता) काफी कम है, जो लगभग 500 रुपये के आसपास है। यूनियन इस अंतर को कम करने के लिए बेसिक पे और डीए स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग कर रही है।

बढ़े कर्मचारियों के कारण प्रबंधन पर दबाव

पिछले समझौते के समय जहां कर्मचारियों की संख्या 5600 थी, अब यह बढ़कर 7321 हो गई है। ऐसे में प्रबंधन पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। इसी वजह से प्रबंधन समझौते की अवधि 6 साल करना चाहता है, जबकि यूनियन 4 साल की परंपरा को बनाए रखने पर अड़ी है।

सिर्फ सैलरी नहीं, इन सुविधाओं पर भी चर्चा

इस बार समझौते में सिर्फ वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मांगों पर भी चर्चा हुई है:

  • गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल लिमिट 5 लाख से बढ़ाने की मांग
  • रिटायरमेंट के बाद मेडिकल इंश्योरेंस को और बेहतर करने का प्रस्ताव
  • त्योहारों (रामनवमी, दुर्गा पूजा) पर ड्यूटी करने वाले कर्मियों को 250 रुपये वाहन भत्ता देने की मांग

यूनियन ने दिए सकारात्मक संकेत

टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह के अनुसार, प्रबंधन और यूनियन के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि तय समय सीमा के भीतर एक सम्मानजनक समझौता हो जाएगा।

टाटा मोटर्स के कर्मचारियों के लिए यह समझौता बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज इस पर अंतिम मुहर लगती है या नहीं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Dr. D.K. Singh passes away
रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. डी.के. सिंह का निधन

रांची। रिम्स (Rajendra Institute of Medical Sciences) के पूर्व निदेशक और सीईओ डॉ. डी.के. सिंह के निधन से चिकित्सा जगत और रिम्स परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन की खबर 20 मई 2026 को सामने आई, जिसके बाद पूरे रिम्स परिसर में गमगीन माहौल देखा गया।   रिम्स परिवार ने दी श्रद्धांजलि डॉ. डी.के. सिंह वर्ष 2018 से जून 2020 तक रिम्स के निदेशक रहे। बाद में AIIMS Bathinda के निदेशक पद पर चयन होने के बाद उन्होंने रिम्स से इस्तीफा दे दिया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही रिम्स में शोक सभा आयोजित की गई, जहां चिकित्सकों, कर्मचारियों और अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। शोक सभा में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।   ‘कुशल और अनुशासनप्रिय प्रशासक थे’ रिम्स के वर्तमान निदेशक Dr. Raj Kumar ने डॉ. डी.के. सिंह को याद करते हुए कहा कि वे एक कुशल, निडर और अनुशासनप्रिय प्रशासक थे। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान, विशेषकर निश्चेतना विभाग में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. राज कुमार ने कहा कि उनका व्यक्तित्व बेहद समावेशी था और वे सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे।   कोरोना काल में निभाई अहम भूमिका ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. पी.के. भट्टाचार्य ने बताया कि डॉ. डी.के. सिंह ने रिम्स की अकादमिक संस्कृति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के दौरान ही कोरोना महामारी फैली थी। वर्ष 2020 में रिम्स में पहला कोरोना पॉजिटिव मामला सामने आने के बाद उन्होंने लगातार अस्पताल व्यवस्था को मजबूत करने और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए।

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खूंटी में 22.69 लाख का ट्रेजरी घोटाला,लेखपाल समेत दो पर FIR दर्ज

खूंटी। खूंटी में सरकारी ट्रेजरी से जुड़े कथित गबन मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए एक लेखपाल और शुभम कुमार नामक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि सरकारी खजाने से करीब 22.69 लाख रुपये अवैध रूप से निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए।   त्रिस्तरीय जांच में सामने आई गड़बड़ी मामले का खुलासा जिला प्रशासन द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद हुआ। जांच टीम में मजिस्ट्रेट विपिन चंद्र विश्वास, ट्रेजरी ऑफिसर शिव कुमार सिंह और अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया था। जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी प्रक्रिया के उल्लंघन की पुष्टि हुई।   रिपोर्ट में बताया गया कि सरकारी राशि को नियमों की अनदेखी कर शुभम कुमार के खाते में भेजा गया। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।   उपायुक्त के निर्देश पर दर्ज हुई FIR जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद सौरभ कुमार भुवानिया के निर्देश पर संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।   पुलिस ने तेज की जांच ऋषभ गर्ग ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। बैंक खातों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित गबन में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।   ट्रेजरी सिस्टम पर उठे सवाल इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। सरकारी खजाने की राशि निजी खाते में पहुंचने से ट्रेजरी सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम अब पूरे नेटवर्क और संभावित साजिश की जांच में जुटी हुई है।

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Gumla: सड़क हादसे में बाइक सवार 3 युवकों की मौत तीनों ने नहीं पहना था हेलमेट

गुमला। गुमला में बीती देर रात एक सड़क हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई। घटना चैनपुर थाना क्षेत्र के डढ़गांव की है। यहां बाइक के सड़क किनारे पेड़ से टकराने की वजह से हादसा हुआ।  मृतकों की हुई पहचान मृतकों की पहचान उजड़ा गांव निवासी अक्षय केरकेट्टा (19), आर्यन टोप्पो 18) और संजीत केरकेट्टा (18) के रूप में हुई है। अक्षय ने 2026 में संत अन्ना विद्यालय से इंटर प्रथम श्रेणी में पास किया था, जबकि आर्यन संत पैट्रिक स्कूल में 11वीं का छात्र था। वहीं, संजीत ने 10वीं पास करने के बाद दो साल पहले पढ़ाई छोड़ दी थी। बाइक की रफ्तार थी तेज परिजनों के अनुसार, तीनों युवक बाइक से एक शादी समारोह में गए थे। रात में चैनपुर से अपने घर लौट रहे थे। इसी बीच डढ़गांव के पास उनकी तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक आम के पेड़ से जा टकराई। बाइक के परखच्चे उड़ गये टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों ने हेलमेट भी नहीं पहना था। इधर, दुर्घटना की सूचना मिलते ही चैनपुर थाना के एसआई धर्मपाल संतोष लगून मौके पर पहुंचे। उन्होंने गुरुवार को तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया।

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