जामताड़ा। जामताड़ा जिले के सदर प्रखंड स्थित दुलाडीह आंगनबाड़ी केंद्र से सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं हो रही, जिसके कारण आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को या तो कोयले के चूल्हे पर खाना पकाना पड़ रहा है या फिर अपने घर से भोजन बनाकर केंद्र तक लाना पड़ रहा है। इस स्थिति ने न केवल सेविकाओं की परेशानी बढ़ाई है, बल्कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, केंद्र को विभाग की ओर से केवल चावल उपलब्ध कराया जाता है, जबकि दाल, सूजी, तेल, हल्दी, नमक और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री सेविका को खुद बाजार से खरीदनी पड़ती है। इसके बाद इन खर्चों का बिल कार्यालय में जमा किया जाता है। सेविका का कहना है कि केंद्र में गैस चूल्हा तो है, लेकिन गैस सिलेंडर की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही। पहले गैस की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर थी, लेकिन अब सिलेंडर महंगा होने और समय पर उपलब्ध न होने के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।
इस मामले पर सीपीआईएम नेता सुरजीत सिन्हा ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन और गैस की व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन अगर सेविकाओं को खुद बाजार से सामान खरीदना पड़ रहा है, तो यह प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा। यह मामला बच्चों के पोषण कार्यक्रम की जमीनी हकीकत को उजागर करता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
धनबाद। धनबाद के सुदामडीह थाना क्षेत्र स्थित भौंरा ईजे जीएम ऑफिस गेट पर सोमवार को अचानक हुई फायरिंग और हमले की घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। नकाबपोश अपराधियों ने ऑफिस के बाहर पहुंचकर चार राउंड हवाई फायरिंग की और यूनियन नेता पर हमला कर फरार हो गए। बैठक के बाद घात लगाकर हमला जानकारी के अनुसार यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन के सचिव Ghaffar Ansari अपने समर्थकों के साथ ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जीएम कार्यालय पहुंचे थे। अधिकारियों के साथ बैठक के बाद जैसे ही वे बाहर निकले, पहले से घात लगाए हमलावरों ने अचानक लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमला इतना अचानक था कि मौके पर मौजूद लोग संभल नहीं सके। फायरिंग से मची भगदड़, बाइक में तोड़फोड़ हमले के दौरान अपराधियों ने चार राउंड फायरिंग भी की, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान हमलावरों ने मौके पर खड़ी एक बाइक को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ देर के लिए पूरा इलाका रणक्षेत्र जैसा नजर आ रहा था। पुलिस पहुंची, आरोपी फरार घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक सभी हमलावर फरार हो चुके थे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। तनावपूर्ण माहौल, जांच जारी घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की पहचान करने में जुटी है। शुरुआती जांच में इस हमले के पीछे आपसी रंजिश या यूनियन से जुड़ा विवाद होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है।
गिरिडीह। झारखंड की राजनीति में उभरते सितारे और डुमरी के चर्चित विधायक जयराम महतो एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गए हैं। गिरिडीह जिले में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक महतो का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने वहां वीडियो बना रहे एक युवक का मोबाइल छीनकर सड़क पर दे मारा। घटना उस वक्त की है जब विधायक पुष्पा कुमारी को न्याय दिलाने के लिए आयोजित एक कैंडल मार्च में शामिल होने पहुंचे थे। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। न्याय की मांग के बीच शुरू हुआ विवाद और आरोप-प्रत्यारोप रविवार की शाम पुष्पा कुमारी को इंसाफ दिलाने के लिए एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया था। इस मार्च में पीड़ित पुष्पा कुमारी की मां रेखा देवी भी शामिल थीं। मार्च के दौरान ही रेखा देवी ने विधायक की पार्टी जेएलकेएम (JLKM) की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रेखा कुमारी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी बेटी की तलाश में मदद करने के बदले पार्टी नेत्री ने उनसे 10,000 रुपये की राशि ली थी। महिला का कहना था कि यह रकम उन्होंने एक स्वयं सहायता समूह से कर्ज लेकर जुटाई थी। जब यह मुद्दा मार्च के दौरान विधायक के सामने उठा, तो वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया। बीच सड़क पर विधायक का 'हाई वोल्टेज ड्रामा' जैसे ही भ्रष्टाचार और पैसे लेने के आरोपों ने तूल पकड़ा, विधायक जयराम महतो आपा खो बैठे। वे वहां मौजूद महिलाओं और ग्रामीणों के साथ बहस करने लगे। इसी गहमागहमी के बीच उनकी नजर पास में खड़े एक युवक पर पड़ी जो अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना को रिकॉर्ड कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आक्रोशित विधायक ने आव देखा न ताव, सीधे युवक के हाथ से फोन छीन लिया और उसे पूरी ताकत से सड़क पर पटक दिया। इस अचानक हुए हमले से वहां मौजूद लोग अवाक रह गए। बताया जा रहा है कि पटकने के कारण युवक का मोबाइल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। पार्टी की साख और जनप्रतिनिधि के आचरण पर उठे सवाल विधायक जयराम महतो अक्सर खुद को युवाओं का हितैषी और आम जनता का सिपाही बताते रहे हैं, लेकिन इस ताजी घटना ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। हंगामे की स्थिति को देखते हुए विधायक और उनके समर्थक तुरंत वहां से अपनी गाड़ियों में सवार होकर रवाना हो गए। हालांकि, उनके जाने के बाद भी स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि एक जन प्रतिनिधि को सार्वजनिक रूप से इस तरह का हिंसक और अशोभनीय व्यवहार शोभा नहीं देता। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, जांच की मांग घटना के कुछ ही घंटों बाद मोबाइल तोड़ने और बहसबाजी के कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गए हैं। इस मामले में अब तक पुलिस के पास किसी लिखित शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्षी दल और आम नागरिक जयराम महतो के इस रवैये की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों और उसके बाद विधायक की इस प्रतिक्रिया ने जेएलकेएम के अंदरूनी अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। फिलहाल क्षेत्र में यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है कि आखिर न्याय दिलाने निकले विधायक खुद विवाद की वजह कैसे बन गए।
चाईबासा/खूंटी। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम और खूंटी जिलों से हत्या की दो रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाएं सामने आई हैं। चाईबासा के जगन्नाथपुर में एक युवक ने लगातार मिल रहे तानों और बलि देने की धमकी से परेशान होकर अपनी ही एक दूर की महिला रिश्तेदार को मौत के घाट उतार दिया। वहीं, खूंटी में आपसी विवाद और जादू-टोने के शक में एक महिला की हत्या कर दी गई। पुलिस ने दोनों ही मामलों में तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और शवों को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कुल्हाड़ी से हमला कर खेत में दफनाई लाश पश्चिम सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना अंतर्गत चिरुपासया गांव में 30 वर्षीय गंगा गगराई ने अपनी 50 वर्षीय दूर की रिश्तेदार फुलतुडिया गगराई की नृशंस हत्या कर दी। जगन्नाथपुर के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) राफेल मुर्मू ने रविवार को इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने बृहस्पतिवार रात को इस वारदात को अंजाम दिया था। हत्या करने के बाद आरोपी ने साक्ष्य छिपाने की नीयत से शव को एक सुनसान खेत में दफना दिया था। पुलिस ने ग्रामीणों से मिली सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर जब गंगा गगराई को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। एसडीपीओ ने जानकारी दी कि आरोपी मानसिक रूप से काफी परेशान था। पूछताछ में गंगा ने बताया कि मृतका उसे अक्सर ताने मारती रहती थी। इतना ही नहीं, वह आरोपी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से स्थानीय आदिवासी देवी-देवताओं को उसकी बलि चढ़ाने की धमकी भी देती थी। इसी विवाद के चलते आरोपी ने हत्या की साजिश रची और बृहस्पतिवार की रात एक अंधेरे कोने में कुल्हाड़ी लेकर छिप गया। जैसे ही महिला वहां से गुजरी, गंगा ने उसके सिर और पेट पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। खूंटी में आपसी रंजिश और अंधविश्वास ने ली जान हत्या की दूसरी वारदात खूंटी जिले के मारंगहादा थाना क्षेत्र में घटित हुई। यहां के कटुड नीचे टोली गांव में मंगलवार को करंज के फूल (औषधीय पौधा) तोड़ने को लेकर चाचा और भतीजों के बीच हिंसक झड़प हो गई। एसडीपीओ वरुण राजक ने बताया कि 55 वर्षीय गुइयान पाहन का अपने भतीजों हांगरा पाहन (25) और कुंवर पाहन (20) के साथ विवाद हुआ था। रात के समय दोनों आरोपी भतीजे अपने चाचा के घर में घुस गए और हमला कर दिया। इस दौरान जब चाचा की पत्नी सोनी पाहन (45) ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन पर भी घातक हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल सोनी पाहन को बेहतर उपचार के लिए रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेजा गया था, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी अपनी चाची पर 'डायन' होने या जादू-टोना करने का संदेह करते थे। उनका मानना था कि उनकी मां की बार-बार होने वाली बीमारी के पीछे सोनी पाहन का ही हाथ है। पुलिस ने इस मामले में दोनों सगे भाइयों (भतीजों) को शनिवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। ग्रामीण इलाकों में बढ़ते अपराध और पुलिस की कार्रवाई इन दोनों घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते हिंसक व्यवहार और अंधविश्वास की जड़ों को एक बार फिर उजागर किया है। चाईबासा में जहां तानों और बलि के डर ने एक युवक को कातिल बना दिया, वहीं खूंटी में मामूली विवाद के साथ अंधविश्वास ने एक परिवार को उजाड़ दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। पुलिस अब इन मामलों में कोर्ट में ठोस चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी विवाद को कानून हाथ में लेने के बजाय पुलिस के संज्ञान में लाएं।