रामगढ़। रामगढ़ शहर के गढ़बांध में बड़ा हादसा हो गया। यहां दामोदर नदी में नहाने के दौरान तीन किशोर गहरे पानी में डूब गए। जानकारी के मुताबिक, तीनों किशोर 14 से 15 वर्ष की उम्र के थे और घर से फुटबॉल खेलने की बात कहकर निकले थे। खेल के बजाय वे गढ़बांध पहुंच गए और नदी में नहाने उतर गए, जहां अचानक वे गहरे पानी की चपेट में आ गए। नदी में डूबने के दौरान बंगाली टोला निवासी आयुष कुमार तिवारी स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा। गंभीर हालत में उसे रांची रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घर पहुंचकर आयुष ने अपने दोस्तों के डूबने की सूचना परिजनों को दी, जिसके बाद परिवार के लोग और स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे। 1 की मौत, दूसरे की तलाश जारी इस दर्दनाक हादसे में नए बस स्टैंड के पास रहने वाले वैभव कुमार की मौत हो गई है। वहीं किसान नगर निवासी प्रिंस सोनकर अब भी लापता बताया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पतरातू से गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और दामोदर नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। लोगों में नाराजगी स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़बांध से शहर में जलापूर्ति की जाती है, जिसके कारण यहां बांध का निर्माण किया गया है। बांध बनने के बाद नदी का यह हिस्सा काफी गहरा हो गया है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है। घटनास्थल से किशोरों के कपड़े भी बरामद किए गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
रामगढ़। रामगढ़ के सिरका बुध बाजार क्षेत्र में कथित देह व्यापार के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के विरोध के बाद हुई कार्रवाई जानकारी के अनुसार गुरुवार देर शाम स्थानीय ग्रामीणों को क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके बाद ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कुछ लोगों को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस सभी को थाना ले गई और पूछताछ शुरू की। मामले में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर नवीन प्रकाश पांडेय के स्वलिखित बयान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। मोबाइल जांच में मिले कथित साक्ष्य पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की गई, जिसमें कथित तौर पर देह व्यापार से जुड़े कुछ साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित कड़ियों की भी पड़ताल कर रही है। परिजनों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल इधर गिरफ्तार रवि कुमार और विनोद कुमार के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का दावा है कि दोनों मजदूरी का काम करते हैं और ट्रैक्टर से ईंट गिराने के लिए इलाके में गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भीड़ के दबाव में बिना पर्याप्त जांच के दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल इलाके में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।
रामगढ़। रामगढ़ जिले में अपराध नियंत्रण, महिलाओं की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से रामगढ़ पुलिस ने ‘प्रहरी’ अभियान की शुरुआत की है। गुरुवार को पुलिस अधीक्षक Mukesh Lunayat ने इस विशेष अभियान की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच सुरक्षा और विश्वास का माहौल मजबूत करना भी है। तीन हिस्सों में चलेगा अभियान ‘प्रहरी’ अभियान को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। इसमें पैदल गश्ती, अड्डेबाजी के खिलाफ कार्रवाई और एंटी क्राइम चेकिंग शामिल है। पुलिस के अनुसार पूरे जिले में यह अभियान तय योजना के तहत लगातार चलाया जाएगा। हफ्ते में दो दिन होगी पैदल गश्ती अभियान के तहत जिले के सभी थाना और ओपी क्षेत्रों में पुलिसकर्मी सप्ताह में कम से कम दो दिन पैदल गश्ती करेंगे। पुलिस ने ऐसे 76 संवेदनशील रूट चिन्हित किए हैं, जहां अक्सर छेड़छाड़, अवैध पार्किंग, ट्रैफिक जाम और अड्डेबाजी की शिकायतें मिलती रही हैं। इनमें बाजार, स्कूल-कॉलेज के आसपास और भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार गश्ती की निगरानी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और पुलिस निरीक्षक स्वयं करेंगे। नशे के कारोबार और अड्डेबाजों पर सख्ती रामगढ़ पुलिस ने जिले में 114 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां नशे के सेवन और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें मिलती रही हैं। इन इलाकों को पांच क्लस्टर में बांटकर अलग-अलग टीमों को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है। थाना पुलिस, पीसीआर, गश्ती दल और पैंथर मोबाइल टीम संयुक्त रूप से छापेमारी करेगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अड्डेबाजी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और जरूरत पड़ने पर उनका नाम गुंडा पंजी में दर्ज किया जाएगा। दिन में तीन बार होगी एंटी क्राइम चेकिंग जिले में 69 स्थानों पर एंटी क्राइम चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। बाइकर्स, रैश ड्राइविंग और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। पुलिस ने लोगों से भी सहयोग की अपील की है और सुरक्षा संबंधी सूचना साझा करने के लिए व्हाट्सएप नंबर जारी किया है।
रामगढ़। झारखंड हाई कोर्ट ने रामगढ़ जिले के छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर और भैरवी नदी तट पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन को मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और मास्टर प्लान कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया। 254 दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू सुनवाई के दौरान रामगढ़ उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर से हटाए गए 254 दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन पहले उन्हें अस्थायी रूप से मंदिर के पास बसाएगा, जिसके बाद स्थायी दुकानों का निर्माण कर पुनर्वास किया जाएगा। कोर्ट ने प्रशासन को अगली सुनवाई तक विस्तृत योजना प्रस्तुत करने को कहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर कोर्ट की चिंता खंडपीठ ने भैरवी नदी के डेंजर जोन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि खतरनाक क्षेत्रों में दो स्तर की बैरिकेडिंग लगाई जाए। तत्काल लो-लेवल बैरिकेडिंग और बरसात के दौरान हाई-लेवल बैरिकेडिंग सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी। मंदिर परिसर में बढ़ेंगी सुविधाएं प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि मंदिर परिसर में पेयजल, बैठने की व्यवस्था, सफाई और प्रकाश व्यवस्था बेहतर की जाएगी। साथ ही अतिक्रमण हटाकर विकास कार्य तेज किए जाएंगे। अदालत ने पूर्व आदेशों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। 15 मई को अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 मई तय की है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में उपायुक्त व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें और डीपीआर तथा मास्टर प्लान अदालत के समक्ष पेश करें।
रामगढ़। रामगढ़ के चर्चित रजरप्पा ज्वेलरी लूटकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्य आरोपी सुभानी अंसारी उर्फ ललका की पत्नी और दामाद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर लूटे गए सोना-चांदी के आभूषण भी बरामद किए हैं। इस मामले में अब तक कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दिनदहाड़े हुई थी करोड़ों की लूट गौरतलब है कि 21 अप्रैल 2026 को Shiv Shankar Jewellers में हथियारबंद अपराधियों ने दिनदहाड़े धावा बोलकर करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए थे। घटना रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर-रजरप्पा मोड़ पर हुई थी। लूट के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। घटना के बाद Mukesh Kumar Lunayat के निर्देश पर SIT का गठन किया गया था। पुलिस ने 48 घंटे के भीतर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 180 आभूषण, एक पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस, तीन बाइक और एक चारपहिया वाहन बरामद किया था। गुप्त सूचना पर हुई गिरफ्तारी पुलिस को 10 मई को गुप्त सूचना मिली थी कि मुख्य आरोपी के घर में लूट का सामान छिपाकर रखा गया है। इसके बाद छापेमारी कर बरकट्ठी निवासी नाजमा खातून और उसके दामाद शहनवाज हुसैन को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके घर से करीब 49 ग्राम सोना और 1.35 किलोग्राम चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। फरार मास्टरमाइंड की तलाश तेज रामगढ़ एसपी ने बताया कि मामले की जांच और छापेमारी लगातार जारी है। इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड का मास्टरमाइंड माने जा रहे कुख्यात अंतरराज्यीय अपराधी Vibhash Paswan की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर बाकी लूटे गए आभूषण भी बरामद कर लिए जाएंगे।
रामगढ़। रामगढ़ में साइबर अपराध थाना पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी बैंक खातों के माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। पुलिस को इस मामले का सुराग गृह मंत्रालय के ‘प्रतिबिंब’ प्लेटफॉर्म से मिला, जहां एक संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी साझा की गई थी। जांच में क्या आया सामने? जांच में पता चला कि यह खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में ‘श्री गणेश इंटरप्राइजेज’ के नाम पर MSME योजना के तहत खोला गया था। हालांकि, इसका उपयोग अवैध साइबर लेनदेन के लिए किया जा रहा था। इस एक खाते से देशभर में कुल 274 शिकायतें जुड़ी पाई गईं, जिनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल होते थे खाते पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सरगना रितेश अग्रवाल उर्फ मुन्ना और सोनू कुमार झा लोगों को पैसे का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। बदले में खाताधारकों को मोटी रकम दी जाती थी और फिर उनसे OTP तथा बैंकिंग एक्सेस ले लिया जाता था। इन खातों को बाद में व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अन्य साइबर अपराधियों को सौंप दिया जाता था, जिससे ये “म्यूल अकाउंट” बन जाते थे। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और डिजिटल चैट जैसे अहम सबूत बरामद किए गए हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP या खाता एक्सेस किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें, अन्यथा वे अनजाने में साइबर अपराध का हिस्सा बन सकते हैं।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल बरामद किया गया है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस मामले की गहराई से जांच में जुट गई है।पुलिस को 26 अप्रैल की रात करीब 8 बजे गुप्त सूचना मिली थी कि सोलिया गांव का निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार लेकर घूम रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। टीम ने तत्परता दिखाते हुए सोलिया गांव में छापा मारकर आरोपी को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर उसके घर से तुर्की निर्मित जिगाना कंपनी का 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने खुलासा किया कि यह हथियार उसे एक आपराधिक गिरोह के सदस्य ने फायरिंग की घटना के बाद छिपाकर रखने के लिए दिया था। इस खुलासे के बाद पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। पतरातू थाना में दर्ज़ हुआ केस इस मामले में पतरातू थाना कांड संख्या 101/2026 के तहत आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और पहले भी उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।छापेमारी दल में पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, थाना प्रभारी शिवलाल कुमार गुप्ता सहित कई पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रामगढ़। रामगढ़ के प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में गुरुवार से अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू हुई। यह कदम झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर उठाया गया है। प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की निगरानी में भारी पुलिस बल और सात जेसीबी मशीनों के साथ अभियान चलाया। चिन्हित 254 दुकानदारों में से अधिकांश ने कार्रवाई से पहले ही अपनी दुकानें खाली करनी शुरू कर दीं। सुबह से बदला मंदिर परिसर का दृश्य सुबह होते ही मंदिर परिसर का नजारा पूरी तरह बदल गया। जहां पहले दुकानें सजी रहती थीं, वहां अब लोग अपना सामान समेटते नजर आए। कई दुकानदार रातभर अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाते रहे। हालांकि, इस दौरान उनके चेहरों पर भविष्य को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट दुकानदारों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि वे दशकों से यहां व्यवसाय कर रहे थे और यही उनकी रोजी-रोटी का मुख्य साधन था। कुछ दुकानदारों ने बताया कि उनका पूरा परिवार इसी आय पर निर्भर था। अचानक दुकानें हटने से वे आर्थिक संकट में आ गए हैं। कई लोगों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। आस्था और रोजगार दोनों पर असर मंदिर से जुड़े पुजारियों और दुकानदारों ने कहा कि वे सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सेवा और धार्मिक गतिविधियों से भी जुड़े थे। अतिक्रमण हटने से न केवल रोजगार खत्म हुआ, बल्कि उनकी धार्मिक सेवा भी प्रभावित हुई है। प्रशासन का पक्ष एसडीएम अनुराग कुमार तिवारी ने बताया कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत की जा रही है। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर को साफ, सुंदर और व्यवस्थित बनाना है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके। प्रशासन ने यह भी कहा कि अभियान शांतिपूर्ण ढंग से चलाया जा रहा है और अधिकतर लोगों ने सहयोग किया है। आगे की चुनौती इस कार्रवाई से जहां मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण का रास्ता साफ हुआ है, वहीं सैकड़ों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इन प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाता है।
रामगढ़। रामगढ़ थाना क्षेत्र स्थित झारखंड इस्पात प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। श्रम मंत्री संजय यादव ने प्लांट प्रबंधन पर मजदूरों की सुरक्षा में लापरवाही और शोषण का आरोप लगाते हुए कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना की गहन जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई होगी। फर्नेस ब्लास्ट को बताया गंभीर हादसा मंत्री मंगलवार को हेसला बस्ती पहुंचे, जहां उन्होंने मृत मजदूरों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि फर्नेस फटने की घटना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कमेटी गठित की है। श्रम विभाग समेत अन्य एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हैं। घायल मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप रांची के देव कमल अस्पताल में भर्ती घायल मजदूरों से मुलाकात के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन के दबाव में भट्टी को जरूरत से अधिक गर्म किया गया, जिससे विस्फोट जैसी स्थिति बनी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भट्टी के पास बनी सीढ़ियां इतनी संकरी थीं कि आपात स्थिति में वहां से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। मृतकों के परिजनों को मुआवजा घटना के बाद प्लांट प्रबंधन, जिला प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुए समझौते के तहत तीन मृत मजदूरों के परिजनों को 21-21 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई। मंत्री ने स्वयं परिजनों को चेक सौंपे और बच्चों की पढ़ाई व परिवार के भरण-पोषण में हर संभव मदद का भरोसा दिया। साथ ही घायलों के बेहतर इलाज का आश्वासन भी दिया गया।
रामगढ़। रामगढ़ के इस्पात फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में मृत दो मजदूरों के परिजनों को 21-21 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान किया जायेगा। बता दें कि सोमवार को हुए इस ब्लास्ट में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 7 घायल हो गये थे। घायलों में दो की हालत नाजुक बताई जा रही है। रामगढ़ के रांची रोड स्थित होप अस्पताल और रांची के देवकमल अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है। ग्रामीण कर रहे विरोध-प्रदर्शन घटना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने सोमवार सुबह करीब छह बजे से फैक्ट्री गेट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों ने मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। देर रात हुआ समझौता करीब 16 घंटे तक चले इस आंदोलन का अंत रात लगभग 10 बजे त्रिपक्षीय वार्ता के बाद हुआ। वार्ता में प्रशासन, फैक्ट्री प्रबंधन और ग्रामीणों के प्रतिनिधियों के बीच कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी। समझौते के तहत मृतक मजदूरों के आश्रितों को 21-21 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय लिया गया। साथ ही घायलों के समुचित और बेहतर इलाज की पूरी जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन ने अपने ऊपर ली है। इसके अलावा यह भी तय हुआ कि इस हादसे में यदि कोई मजदूर स्थायी रूप से दिव्यांग होता है तो उसके एक आश्रित को फैक्ट्री में नौकरी दी जाएगी। प्रबंधन ने दिया लिखित आश्वासन इस संबंध में प्रबंधन की ओर से लिखित आश्वासन भी दिया गया है। समझौते के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और फैक्ट्री गेट से हट गए, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।
रामगढ़। रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड स्थित हेसला पंचायत में पीटीपीएस की अधिग्रहित जमीन पर बने आवास खाली कराने की तैयारी को लेकर सोमवार को तनावपूर्ण स्थिति बन गई। प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में कॉलोनी वासी सड़कों पर उतर आए और घर खाली करने से साफ इनकार कर दिया। लोगों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपना आशियाना नहीं छोड़ेंगे। इस विरोध के कारण इलाके में माहौल गरमा गया है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कार्रवाई की सूचना मिलते ही विरोध शुरू जानकारी के अनुसार, पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (PTPS) के बंद होने के बाद इसकी अधिग्रहित जमीन सरकार ने झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (JIADA) को सौंप दी थी। बाद में इस जमीन को औद्योगिक विकास के लिए निजी कंपनियों को आवंटित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया के तहत अब उस जमीन पर बने आवासीय परिसर को खाली कराने की तैयारी चल रही है। जैसे ही स्थानीय लोगों को यह सूचना मिली कि प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो सकती है, वे विरोध में सड़कों पर उतर आए। बड़ी संख्या में लोग पटेल चौक पर जमा हो गए और नारेबाजी करते हुए प्रशासन के फैसले का विरोध करने लगे। कोर्ट के आदेश को लेकर भ्रम, लोग डटे कॉलोनी वासियों का दावा है कि इस मामले में न्यायालय ने फिलहाल रोक लगा दी है, इसलिए उन्हें हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि उन्हें इस तरह का कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इसी बात को लेकर लोगों और प्रशासन के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन सतर्क, इलाके में बढ़ी हलचल क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक मौके पर प्रशासनिक टीम नहीं पहुंची थी, लेकिन किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयारी की जा रही है। लोगों का गुस्सा और अनिश्चितता को देखते हुए आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है। फिलहाल, पतरातू में जमीन और आवास को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है।
रामगढ़। रामगढ़ थाना क्षेत्र के अरगड्डा मोड़ के समीप हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्लांट प्राइवेट लिमिटेड में सोमवार तड़के 4 बजे भीषण ब्लास्ट हुआ। फर्नेस में हुए ब्लास्ट से हड़कंप मच गया। हादसे में 9 मजदूर बुरी तरह झुलसकर घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गयाl जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। यहां प्राथमिक उपचार कर सभी गंभीर रूप से घायल लोगों को रांची के देवकमल अस्पताल रेफर कर दिया गया है l अचानक हुआ तेज धमाका जानकारी के अनुसार प्लांट के फर्नेस में काम के दौरान अचानक तेज धमाका हुआl इसकी चपेट में आकर मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों की पहचान अखिला राय, बृजलाल बेदिया, राजबालन यादव, महेश महतो,अशोक बेदिया, पंडित जी (राजू झा), छोटू साव, सुरेश बेदिया और इशया के रूप में हुई है। 7 मजदूर गंभीर घटना के बाद सभी घायलों को रांची रोड स्थित द हॉप हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। चिकित्सकों ने बताया कि इनमें से 7 मजदूरों की हालत अत्यंत गंभीर है और वे 80-90 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी सात घायलों को बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित देवकमल अस्पताल रेफर कर दिया गया है। इलाके में फैली दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना के बाद प्लांट में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कामकाज कुछ देर के लिए ठप हो गया।
रामगढ़। रामगढ़ जिले के गोला थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों ने कहर बरपाया है। यहां बंदा और मुरपा गांव में हाथियों ने हमला कर तीन लोगों को मार डाला। इससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश है। मुरपा में वृद्ध को कुचला जानकारी के अनुसार, सबसे पहले मुरपा गांव में महुआ चुनने जा रहे वृद्ध श्याम देव साव पर हाथियों ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हाथियों का झुंड बंदा गांव के बांग्ला भट्ठा क्षेत्र में पहुंचा, जहां शौच के लिए जा रहे दो मजदूरों युगल भुईया और धीरज भुईया पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में दोनों की घटनास्थल पर ही जान चली गई। वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची मौके पर घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। मृतकों की पहचान कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका आरोप है कि इस क्षेत्र में हाथियों का खतरा लगातार बना हुआ है, लेकिन वन विभाग समय रहते कोई चेतावनी जारी नहीं करता। साथ ही, हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने में भी विभाग विफल साबित हो रहा है। मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा इस संबंध में गोला वन क्षेत्र पदाधिकारी नीलेश पोद्दार ने बताया कि विभाग को पहले हाथियों के दूसरे जिले में होने की जानकारी थी, लेकिन अचानक उनका रुख इस इलाके की ओर हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा। गांव में दहशत फिलहाल गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों को जल्द से जल्द सुरक्षित क्षेत्र में खदेड़ा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद रहकर स्थिति को संभालने और लोगों को शांत कराने का प्रयास कर रही है।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातु प्रखंड में पानी की गंभीर किल्लत ने स्थानीय लोगों का सब्र काट दिया। कोतो पंचायत और न्यू मार्केट के सैकड़ों ग्रामीण बाल्टी, डेगची और अन्य बर्तन लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचे और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि इलाके में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। ग्रामीण अपने बर्तन लेकर पहुंचे प्रदर्शन में ग्रामीण अपने हाथों में खाली बाल्टी और बर्तन लेकर पहुंचे थे। उनका कहना था कि जब घरों में पानी नहीं है, तो ये बर्तन उनकी परेशानी का प्रतीक बन गए हैं। वरिष्ठ कांग्रेसी और समाजसेवी जयप्रकाश सिंह, ननकी सिंह और मुखिया निधि सिंह ने टोकीसुद जलमीनार के संवेदक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और उनकी ब्लैकलिस्टिंग की मांग की। समाजसेवी राहुल कुमार ने कहा समाजसेवी राहुल कुमार ने कहा, “पानी कोई खैरात नहीं है, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।” उन्होंने प्रशासन पर जल संकट को गंभीरता से लेने और तुरंत कार्रवाई करने की अपील की। ग्रामीणों ने प्रखंड विकास अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता को रामगढ़ उपायुक्त के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्थायी समाधान की मांग की गई है ताकि इलाके में पानी की समस्या का अंत हो सके। आंदोलन में सैकड़ों लोग शामिल हुए इस आंदोलन में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनमें महिला और पुरुष दोनों की अच्छी संख्या थी। स्थानीय वार्ड सदस्य और प्रतिनिधियों के साथ आम लोग भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए। प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि पानी की कमी पूरे इलाके में गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई करेगा और जल संकट से राहत दिलाएगा। वहीं, अगर समाधान समय पर नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन के लिए चेतावनी भी प्रस्तुत कर दी है कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रामगढ़। रामगढ में 3 अप्रैल की सुबह जंगली हाथियों के हमले से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। बंदा, मुरपा और धोरधोरिया में हुई अलग-अलग घटनाओं के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। मृतक के परिजन को वन विभाग के द्वारा अलग-अलग 25000-25000 रुपये मुआवजा दिया गया उसके बाद ही शव को उठाया। कैसे हुआ हमला? जानकारी के अनुसार, बंदा क्षेत्र में ईंट भट्ठा पर काम कर रहे तालाटांड पतरातू निवासी 25 वर्षीय धीरज भुइयां और कुजू निवासी 25 वर्षीय युगल भुइयां पर अचानक हाथियों के झुंड ने हमला कर दिया. दोनों को कुचलकर मौके पर ही मार डाला गया. वहीं, महुआ चुन रहे 70 वर्षीय श्याम देव साहू को भी अपनी चपेट में लेकर कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई. जानकारी के अनुसा, धीरज भुइयां अपने पीछे पत्नी सहित दो पुत्र एवं एक पुत्री को छोड़ गये. घायल की अस्पताल में इलाज जारी इसके साथ ही धोरधोरिया सुतरी गांव में महुआ चुन रही एक महिला अदरी देवी 74 वर्ष, पति स्व पहलू बेदिया को भी हाथी ने पटक कर घायल कर दिया. घायल महिला का प्राथमिक इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला में चल रहा है.
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। 3 युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया। तीनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद परिजनों ने थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सुनसान जगह पर वारदातः जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की शाम बारलोंग इलाके के एक सुनसान स्थान पर इस वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़िता के साथ तीन युवकों ने जबरदस्ती की। घटना के बाद युवती ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपी गिरफ्तारः मामला सामने आते ही रजरप्पा थाना पुलिस हरकत में आ गई। थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई और चितरपुर इलाके में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कौन हैं आरोपीः पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अयान अनवर (निवासी रहमत नगर, लाइनपार, चितरपुर), मो. तौफिक (निवासी ईदगाह मोहल्ला, चितरपुर) और मो. असफाक (निवासी एलबी रोड, चितरपुर) के रूप में हुई है।
रामगढ़। रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में अपराधियों ने एक बार फिर बेखौफ अंदाज में फायरिंग कर दहशत फैला दी। पतरातू रेलवे फाटक के पास बन रहे ओवरब्रिज के निर्माण स्थल पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड को गोली मार दी गई। घायल गार्ड की पहचान जयनगर निवासी प्रदीप राजवंशी के रूप में हुई है, जिन्हें गंभीर हालत में रांची के रिम्स में भर्ती कराया गया है। अचानक पहुंच कर की फायरिंग जानकारी के अनुसार, प्रदीप राजवंशी रोज की तरह साइट पर ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान कुछ हथियारबंद अपराधी वहां पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। एक गोली गार्ड के पेट में लगी, जिससे वह वहीं गिर गया। फायरिंग की आवाज सुनते ही मजदूरों और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और काम तत्काल बंद हो गया। घायल गार्ड का रिम्स में इलाज जारी घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल गार्ड को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें रांची के रिम्स रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज रिम्स में चल रहा है। राहुल दुबे गैंग ने ली जिम्मेदारी पतरातू के एसडीपीओ गौरव गोस्वामी ने बताया कि घटनास्थल से एक पर्चा मिला है, जिसमें राहुल दुबे गैंग का नाम सामने आया है। हालांकि पुलिस इस दावे की पुष्टि करने में जुटी है और हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। पुलिस ने कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी शुरू कर दी है और इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है। इलाके में दहशत इधर गोली बारी की घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अपराधियों को गिरफ्तार कर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
चैती नवरात्र पर गूंजा भक्ति का माहौल झारखंड के रामगढ़ जिले के गिद्दी क्षेत्र में चैती नवरात्र के पहले दिन से नौ दिवसीय महायज्ञ की भव्य शुरुआत हो गई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धा और उत्साह के साथ यह धार्मिक आयोजन शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रैलीगढ़ा से निकली भव्य कलश यात्रा महायज्ञ की शुरुआत से पहले रैलीगढ़ा स्थित शिव मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा का उद्घाटन थाना प्रभारी राणा भानु प्रताप सिंह और महायज्ञ समिति के अध्यक्ष अवधेश कुमार उपाध्याय ने किया। कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश लेकर गाजे-बाजे और जयकारों के साथ शामिल हुईं। पूरे क्षेत्र में भक्ति गीतों और धार्मिक नारों से माहौल भक्तिमय हो गया। दामोदर तट पर वैदिक अनुष्ठान कलश यात्रा दामोदर नदी के तट पर पहुंची, जहां यज्ञाचार्य जीवन पांडेय के नेतृत्व में यजमान सुदामा शर्मा और प्रमिला देवी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कराई गई। इस दौरान वरुण पूजन सहित कई धार्मिक अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए। इसके बाद श्रद्धालु पवित्र जल लेकर यज्ञ मंडप की ओर लौटे। यज्ञ मंडप में शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान यज्ञ मंडप पहुंचने के बाद मंडप प्रवेश समेत कई धार्मिक विधियां पूरी की गईं। पूरे क्षेत्र में मंत्रोच्चार और भक्ति की ध्वनि गूंजती रही। यज्ञाचार्य ने बताया कि शुक्रवार से श्रद्धालु यज्ञ मंडप की परिक्रमा करेंगे, जो पूरे नौ दिनों तक जारी रहेगी। 27 मार्च को पूर्णाहुति, 28 को भंडारा महायज्ञ समिति के अनुसार, इस धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति 27 मार्च को हवन के साथ की जाएगी। इसके अगले दिन 28 मार्च को भव्य भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। युवाओं की अहम भूमिका इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। कई युवा सदस्य पूरी निष्ठा के साथ व्यवस्था संभाल रहे हैं, जिससे महायज्ञ का आयोजन सुव्यवस्थित तरीके से चल रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।