रांची। झारखंड में शुक्रवार की देर रात 17 जिलों के डीसी बदल दिये गये। झारखंड सरकार ने आधी रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए IAS के 17 अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापन की अधिसूचना जारी कर दी। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभिन्न विभागों में तैनात अधिकारियों को अब जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग की इस अधिसूचना के तहत कई अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों का DC बनाया गया है। इस आदेश में पांच DDC को भी बड़ी जिम्मेदारी देते हुए डीसी के पद पर प्रमोट किया गया है, वहीं पोस्टिंग की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को भी नई तैनाती मिली है। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
सरकार ने रांची के डीडीसी रहे सौरभ कुमार भुवानिया को खूंटी का नया डीसी नियुक्त किया है। वहीं, मंत्रिमंडल सचिवालय में विशेष सचिव रहे राजीव रंजन को पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) का उपायुक्त बनाया गया है। जेपीएससी के सचिव संदीप कुमार अब लातेहार के उपायुक्त होंगे, जबकि लातेहार से हटाकर उत्कर्ष गुप्ता को कोडरमा की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा, पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे संदीप कुमार मीणा को लोहरदगा का नया डीसी बनाया गया है।
तबादला सूची के अनुसार, शशि प्रकाश सिंह को हजारीबाग से हटा कर देवघर का उपायुक्त बनाया गया है, जबकि हेमंत सती अब साहिबगंज से हजारीबाग भेजे गए हैं। अनन्य मित्तल को गढ़वा, मेघा भारद्वाज को पाकुड़ और लोकेश मिश्रा को गोड्डा का उपायुक्त बनाया गया है। पलामू की जिम्मेदारी अब दिलीप प्रताप सिंह शेखावत संभालेंगे। खूंटी के डीडीसी रहे आलोक कुमार को जामताड़ा का नया उपायुक्त बनाया गया है।
नाम जिला
राजीव रंजन जमशेदपुर
सौरभ कुमार भुवानिया खूंटी
आलोक कुमार जामताड़ा
संदीप कुमार लातेहार
अनन्य मित्तल गढ़वा
दिलेश्वर महतो गुमला
मेघा भारद्वाज पाकुड़
लोकेश मिश्रा गोडा
शशि प्रकाश सिंह देवघर
उत्कर्ष गुप्ता कोडरमा
हेमंत सती हजारीबाग
मनीष कुमार चाईबासा
ऋतुराज रामगढ़
रवि आनंद चतरा
दीपक कुमार दुबे साहिबगंज
दिलीप प्रताप सिंह पलामू
संदीप कुमार मीना लोहरदगा
इस फेरबदल में कई जिलों के विकास आयुक्तों (DDC) पर भरोसा जताया गया है। गोड्डा के डीडीसी दीपक कुमार दुबे को साहिबगंज का उपायुक्त नियुक्त किया गया है। वहीं, गुमला के डीडीसी दिलेश्वर महतो को पदोन्नत करते हुए उसी जिले (गुमला) का डीसी बनाया गया है। रामगढ़ की कमान ऋतुराज को सौंपी गई है, जो इससे पहले कोडरमा के डीसी थे। रवि आनंद को जामताड़ा से हटाकर चतरा का नया उपायुक्त बनाया गया है।
नई अधिसूचना के तहत पांच अधिकारियों को फिलहाल किसी जिले की जिम्मेदारी नहीं दी गई है और उन्हें कार्मिक विभाग में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इनमें पूर्वी सिंहभूम के डीसी कर्ण सत्यार्थी, खूंटी की डीसी आर रानिटा, गढ़वा के डीसी दिनेश यादव, पश्चिमी सिंहभूम के डीसी चंदन कुमार और पलामू की डीसी समीरा एस शामिल हैं। इन अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश बाद में जारी किए जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड में मौसम ने करवट ले ली है और राज्य में अब मिला-जुला मौसम देखने को मिल रहा है। 18 अप्रैल को अधिकांश इलाकों में आसमान साफ और मौसम शुष्क रहने का अनुमान है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बदलाव के संकेत भी हैं। मौसम केंद्र, रांची के अनुसार दिन के समय तेज धूप और बढ़ती गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। कुछ जिलों में बारिश और वज्रपात की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक पलामू और गढ़वा जिले के कुछ हिस्सों में मेघ गर्जन, वज्रपात और हल्की बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की भी संभावना है। हालांकि राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बना रहेगा। 19 अप्रैल से लू का अलर्ट आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने के आसार हैं। 19 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जैसे उत्तर-पश्चिमी जिलों में लू चल सकती है। वहीं दक्षिणी जिलों जैसे पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में भी उष्ण लहर का असर देखने को मिलेगा। डाल्टनगंज बना सबसे गर्म इलाका राज्य में सबसे अधिक तापमान डाल्टनगंज में दर्ज किया गया, जहां पारा 42.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राजधानी रांची में अधिकतम तापमान करीब 37.1 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि बोकारो में 38.2 डिग्री और चाईबासा में 37.4 डिग्री तापमान रहा। जमशेदपुर में भी गर्मी और उमस का असर बना हुआ है। गर्मी से राहत के आसार नहीं पिछले 24 घंटों में राज्य में कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई, जिससे तापमान में गिरावट नहीं आई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और तेज हो सकती है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने और जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
रांची। रांची से बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन आज से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। दोनों नेता 18 से 20 अप्रैल तक विभिन्न जिलों में टीएमसी उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे। पुरुलिया से होगी प्रचार की शुरुआत 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची से हेलीकॉप्टर के जरिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के काशीपुर सहित कई क्षेत्रों में पहुंचेंगे। यहां वे तीन अलग-अलग स्थानों पर जनसभाओं को संबोधित करेंगे और स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी बात रखेंगे। कार्यक्रम के बाद उनका शाम तक रांची लौटने का कार्यक्रम है। तीन दिन तक जारी रहेगा प्रचार अभियान पार्टी के केंद्रीय सचिव अभिषेक प्रसाद पिंटू के अनुसार, 19 और 20 अप्रैल को भी हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में टीएमसी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे। इस दौरान कई चुनावी रैलियां और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। झामुमो और टीएमसी के बीच मजबूत रणनीतिक गठबंधन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पहले ही पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी और इस बार कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसी रणनीति के तहत पार्टी के शीर्ष नेता सीधे चुनावी मैदान में उतरकर टीएमसी के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रभाव वाले क्षेत्रों पर फोकस पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन क्षेत्रों में हेमंत और कल्पना सोरेन प्रचार करेंगे, वहां झामुमो का भी प्रभाव देखा जाता है। ऐसे में इसका सीधा लाभ टीएमसी उम्मीदवारों को मिल सकता है। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी एकता और क्षेत्रीय दलों के सहयोग की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
रांची। झारखंड में शुक्रवार की देर रात 17 जिलों के डीसी बदल दिये गये। झारखंड सरकार ने आधी रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए IAS के 17 अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापन की अधिसूचना जारी कर दी। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभिन्न विभागों में तैनात अधिकारियों को अब जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग की इस अधिसूचना के तहत कई अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों का DC बनाया गया है। इस आदेश में पांच DDC को भी बड़ी जिम्मेदारी देते हुए डीसी के पद पर प्रमोट किया गया है, वहीं पोस्टिंग की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को भी नई तैनाती मिली है। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। प्रमुख जिलों में नए चेहरों की तैनातीः सरकार ने रांची के डीडीसी रहे सौरभ कुमार भुवानिया को खूंटी का नया डीसी नियुक्त किया है। वहीं, मंत्रिमंडल सचिवालय में विशेष सचिव रहे राजीव रंजन को पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) का उपायुक्त बनाया गया है। जेपीएससी के सचिव संदीप कुमार अब लातेहार के उपायुक्त होंगे, जबकि लातेहार से हटाकर उत्कर्ष गुप्ता को कोडरमा की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा, पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे संदीप कुमार मीणा को लोहरदगा का नया डीसी बनाया गया है। इनको मिली जिलों की कमानः तबादला सूची के अनुसार, शशि प्रकाश सिंह को हजारीबाग से हटा कर देवघर का उपायुक्त बनाया गया है, जबकि हेमंत सती अब साहिबगंज से हजारीबाग भेजे गए हैं। अनन्य मित्तल को गढ़वा, मेघा भारद्वाज को पाकुड़ और लोकेश मिश्रा को गोड्डा का उपायुक्त बनाया गया है। पलामू की जिम्मेदारी अब दिलीप प्रताप सिंह शेखावत संभालेंगे। खूंटी के डीडीसी रहे आलोक कुमार को जामताड़ा का नया उपायुक्त बनाया गया है। ये है नये डीसी की पूरी लिस्टः नाम जिला राजीव रंजन जमशेदपुर सौरभ कुमार भुवानिया खूंटी आलोक कुमार जामताड़ा संदीप कुमार लातेहार अनन्य मित्तल गढ़वा दिलेश्वर महतो गुमला मेघा भारद्वाज पाकुड़ लोकेश मिश्रा गोडा शशि प्रकाश सिंह देवघर उत्कर्ष गुप्ता कोडरमा हेमंत सती हजारीबाग मनीष कुमार चाईबासा ऋतुराज रामगढ़ रवि आनंद चतरा दीपक कुमार दुबे साहिबगंज दिलीप प्रताप सिंह पलामू संदीप कुमार मीना लोहरदगा डीडीसी से डीसी पद पर प्रमोशनः इस फेरबदल में कई जिलों के विकास आयुक्तों (DDC) पर भरोसा जताया गया है। गोड्डा के डीडीसी दीपक कुमार दुबे को साहिबगंज का उपायुक्त नियुक्त किया गया है। वहीं, गुमला के डीडीसी दिलेश्वर महतो को पदोन्नत करते हुए उसी जिले (गुमला) का डीसी बनाया गया है। रामगढ़ की कमान ऋतुराज को सौंपी गई है, जो इससे पहले कोडरमा के डीसी थे। रवि आनंद को जामताड़ा से हटाकर चतरा का नया उपायुक्त बनाया गया है। कार्मिक विभाग में वापस बुलाए गए कई अफसरः नई अधिसूचना के तहत पांच अधिकारियों को फिलहाल किसी जिले की जिम्मेदारी नहीं दी गई है और उन्हें कार्मिक विभाग में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इनमें पूर्वी सिंहभूम के डीसी कर्ण सत्यार्थी, खूंटी की डीसी आर रानिटा, गढ़वा के डीसी दिनेश यादव, पश्चिमी सिंहभूम के डीसी चंदन कुमार और पलामू की डीसी समीरा एस शामिल हैं। इन अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश बाद में जारी किए जाएंगे।