झारखंड

रांची सिविल कोर्ट और DC ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला मैसूर से गिरफ्तार

Anjali Kumari मार्च 31, 2026 0
Ranchi Civil Court bomb threat
Ranchi Civil Court bomb threat

रांची। देश के विभिन्न राज्यों के सरकारी संस्थानों और झारखंड की राजधानी रांची के सिविल कोर्ट, DC ऑफिस व पासपोर्ट कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले सिरफिरे को दिल्ली पुलिस ने धर दबोचा है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान श्रीनिवास लुकस (41 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसे कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार कियया है। 


डिजिटल ट्रैकिंग से चढ़ा पुलिस के हत्थे


दिल्ली पुलिस की साइबर और तकनीकी टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। श्रीनिवास लुकस पिछले कई महीनों से ई-मेल के जरिए फर्जी धमकियां भेजकर सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम कर रहा था। पुलिस ने उसके पास से एक लैपटॉप भी बरामद किया है, जिसका उपयोग वह धमकियां भेजने के लिए करता था।

 

1100 से अधिक दी थीं फर्जी धमकिया


पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि उसने अब तक 1100 से अधिक धमकी भरे ई-मेल और कॉल किए हैं। उसके निशाने पर मुख्य रूप से रांची सिविल कोर्ट और DC ऑफिस, धनबाद और झारखंड के अन्य शहरों के सरकारी कार्यालय, साथ ही विभिन्न राज्यों के पासपोर्ट कार्यालय और महत्वपूर्ण संस्थान थे।


मानसिक स्थिति संदिग्ध, जांच में जुटी रांची पुलिस


शुरुआती जांच में पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही है। दिल्ली पुलिस आरोपी की मेडिकल जांच और विशेषज्ञों से परामर्श लेने की योजना बना रही है। 


दिल्ली जायेगी रांची पुलिस


इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस की एक विशेष टीम दिल्ली जाने की तैयारी में है। रांची में दर्ज विभिन्न मामलों के आधार पर पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी, ताकि इन धमकियों के पीछे की असल मंशा का पता लगाया जा सके।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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पाकुड़ पुलिस द्वारा गिरफ्तार जोसिम शेख और जब्त ब्राउन शुगर
पाकुड़ में ब्राउन शुगर के साथ युवक गिरफ्तार, 21 पुड़िया ड्रग्स के साथ बाइक और मोबाइल जब्त

पाकुड़। झारखंड के पाकुड़ जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मालपहाड़ी ओपी क्षेत्र में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक युवक को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 21 पुड़िया मादक पदार्थ, एक बाइक और मोबाइल फोन बरामद किया गया है।   पुलिस के मुताबिक पुलिस के मुताबिक, 1 अप्रैल को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति मादक पदार्थ लेकर पाकुड़ की ओर आने वाला है। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया और एनडीपीएस एक्ट के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद दंडाधिकारी की मौजूदगी में एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया गया।   तलाशी के दौरान छापेमारी टीम ने मालपहाड़ी ओपी क्षेत्र के पीपलजोड़ी मोड़ के पास घेराबंदी कर संदिग्ध युवक को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान जोसिम शेख के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उसके पास से 21 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद की गई, जिसका कुल वजन करीब 6.46 ग्राम बताया गया है। पुलिस के अनुसार, जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत 50 से 60 हजार रुपये के बीच आंकी गई है।इसके अलावा पुलिस ने आरोपी के पास से एक सैमसंग स्मार्टफोन और एक होंडा मोटरसाइकिल भी जब्त की है। बरामद सामान को विधिवत जब्त करते हुए आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मालपहाड़ी ओपी थाना में केस संख्या 68/2026 के तहत धारा 21(b) और 22(a) में प्राथमिकी दर्ज की गई है।   पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसे न्यायालय में पेश किए जाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और इस धंधे में शामिल लोगों पर आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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हजारीबाग में अंधविश्वास का खौफनाक खेल, 13 साल की बच्ची की हत्या में मां निकली मास्टरमाइंड

हजारीबाग। हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुम्भा गांव में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह वारदात 24 मार्च 2026 की रात मंगला जुलूस के दौरान हुई थी। अगले दिन सुबह बच्ची का शव गांव के मिडिल स्कूल के पीछे मैदान में बांस की झाड़ी के पास बरामद किया गया। शुरूआती तौर पर मामला दुष्कर्म और हत्या का माना गया था, लेकिन एसआईटी की जांच में यह अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और मानव बलि से जुड़ा जघन्य अपराध निकला।   पुलिस के मुताबिक, मृत बच्ची की मां रेशमी देवी पिछले करीब एक वर्ष से अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक परेशानी को लेकर गांव की शांति देवी उर्फ “भगतिनी” के पास जाती थी। बताया गया कि भगतिनी ने उसे भरोसा दिलाया था कि बेटे की बीमारी और पारिवारिक संकट दूर करने के लिए किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी। जांच में सामने आया कि इस अंधविश्वास के जाल में फंसकर मां ने अपनी ही छोटी बेटी को इस कृत्य के लिए चुन लिया।   मंगला जुलूस की रात रची गई थी पूरी साजिश 24 मार्च की शाम मंगला जुलूस के दौरान रेशमी देवी अपने बच्चों के साथ घर से निकली। रात में वह अपनी छोटी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। वहां कथित रूप से पूजा-पाठ और तांत्रिक क्रिया की तैयारी की गई। बाद में गांव के भीम राम को भी बुलाया गया। पुलिस के अनुसार, बच्ची को पहले तंत्र-मंत्र के नाम पर बैठाया गया, फिर उसे गांव की बांसवाड़ी में ले जाया गया, जहां उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद पत्थर से बच्ची के सिर पर वार किया गया, ताकि खून निकाला जा सके और कथित तांत्रिक अनुष्ठान पूरा किया जा सके। इस पूरी घटना ने न सिर्फ पुलिस बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।   एसआईटी जांच में खुला राज मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया। तकनीकी साक्ष्य, पूछताछ और सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने मां रेशमी देवी, भगतिनी शांति देवी और भीम राम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि यह अंधविश्वास के नाम पर की गई बेहद अमानवीय और निर्मम हत्या है। फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

Anjali Kumari अप्रैल 2, 2026 0
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विष्णुगढ़ हत्याकांड का खुलासा: अंधविश्वास के नाम पर मासूम की बलि, मां समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

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एदलहातु में बनेगा रांची का  बैडमिंटन कोर्ट का पहला इंडोर स्टेडियम

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झारखंड बजट और वित्तीय खर्च का ग्राफिकल प्रतिनिधित्व
झारखंड में बजट खर्च पर उठ रहे सवाल, 80% के अलावा सरकार नहीं कर पाई पूरी राशि का उपयोग

रांची। वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने के साथ ही झारखंड सरकार के खर्च और राजस्व संग्रह को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार अपने कुल बजट का केवल 80 फीसदी ही खर्च कर पाई, जबकि लगभग 29 हजार करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन सरकारी खजाने से करीब 3,616 करोड़ रुपये निकाले गए, जबकि पूरे मार्च महीने में लगभग 19 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए।   खर्च में कमी, केंद्र पर जिम्मेदारी वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि योजना मद की लगभग 80 प्रतिशत राशि खर्च की गई है। उनका दावा है कि यदि केंद्र सरकार से समय पर सहयोग मिलता, तो सरकार बजट के अनुरूप और बेहतर खर्च कर सकती थी। उन्होंने बताया कि राज्य को करीब 13,000 करोड़ रुपये अनुदान और टैक्स हिस्सेदारी के रूप में नहीं मिले, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ा।   बीजेपी ने सरकार को घेरा बजट के अनुरूप खर्च नहीं होने पर विपक्षी दल भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार भारी-भरकम बजट बनाकर जनता को भ्रमित करती है, लेकिन जमीन पर खर्च और विकास कार्यों में गंभीर कमी दिखती है। उनका आरोप है कि केंद्र से मिली राशि भी राज्य सरकार पूरी तरह खर्च नहीं कर पा रही है।   कुछ विभागों ने किया बेहतर प्रदर्शन हालांकि, राजस्व वसूली के मामले में कुछ विभागों ने अच्छा प्रदर्शन किया। खान विभाग ने रिकॉर्ड 18,508 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जिसमें 7,454.30 करोड़ रुपये सेस और 11,054.27 करोड़ रुपये रॉयल्टी से प्राप्त हुए। उत्पाद विभाग ने शराब से 4,020 करोड़ रुपये कमाए, जो लक्ष्य से 135 करोड़ अधिक है। वहीं, परिवहन विभाग ने 2,196.66 करोड़ रुपये की वसूली की।   बड़ा बजट, अधूरा खर्च राज्य सरकार ने 2025-26 के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इसमें महिला एवं बाल विकास और मैया सम्मान योजना पर सबसे अधिक आवंटन किया गया था, लेकिन खर्च में कमी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 1, 2026 0
स्कूल किताबों का महंगा सेट और एनसीईआरटी किताबों की तुलना

प्राइवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर महंगाई, 260 रुपये का सेट बिक रहा 3442 में

रांची सड़क हादसा और पुलिस जांच का प्रतीकात्मक दृश्य

रांची में महिला कांस्टेबल रंजीता एक्का की सड़क हादसे में मौत, पति की भी पहले हुई थी दुखद घटना

Ranchi Municipal Corporation

पहली बार रांची नगर निगम ने 100 करोड़ का टैक्स किया कलेक्शन

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0

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