रांची। रांची रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों से अगले पांच वर्षों में 25 अतिरिक्त ट्रेनों का परिचालन बढ़ेगा, इसके लिए अभी से ही तैयारियां शुरू हो गई हैं। वर्तमान में रांची रेल मंडल अंतर्गत लगभग 100 ट्रेनों का परिचालन होता है।
आगामी दिनों यदि ट्रेनों के परिचालन का दबाव बढ़ेगा भी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। रांची के आसपास पिस्का स्टेशन, बालश्रृंग स्टेशन, लोदमा स्टेशन और लोहरदगा स्टेशन को डेवलप किया जा रहा है, ताकि वर्तमान और भविष्य में ट्रेनों के परिचालन को स्मूथ बनाया जा सके।
रांची रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म की संख्या बढ़ाई जा रही है। ट्रैक संबंधी कार्य पूरे कर लिए गए हैं और प्लेटफार्म को डेवलप करना बाकी है।
रांची के डीआरएम करूणानिधि सिंह ने बताया कि हमने रांची को बेहद करीब से देखा है और पिछले 25 वर्षों में रांची शहर का जितना फैलाव हुआ है, उसी सापेक्ष में ट्रेनों की संख्या और यात्रियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
इस लिहाज से हमें अगले पांच से दस वर्षों के अनुसार ही प्लान तैयार कर सरजमीं पर उतारना होगा, इस दिशा में रेल प्रशासन अपना काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत@1947 की तर्ज पर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। हमने रांची स्टेशन पर पीक आवर यानी त्योहारी मौसम और परीक्षा के दिनों में जब यात्रियों की संख्या 70 से 80 हजार तक पहुंच जाती है, उस अनुरूप संसाधन विकसित किए हैं।
इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को एक छत के नीचे समाहित करने का प्लान न सिर्फ तैयार किया है, बल्कि इसे सरजमीं पर उतारा भी है। स्टेशन के उत्तरी व दक्षिणी हिस्से को डेवलप किया जा रहा है, विशेषकर पार्किंग स्थल और आरओबी का निर्माण किया जा रहा है।
उत्तरी हिस्से में करीब 14 हजार स्क्वायर मीटर लंबा चौड़ा होल्डिंग एरिया डेवलप किया जाएगा, जिसे छह माह के अंदर पूरा करने का लक्ष्य है। स्मार्ट सिटी से जोड़ने के लिए रेल ओवरब्रिज तैयार किया जाएगा जिसे एक से डेढ़ वर्ष में तैयार कर लिया जाएगा।
डीआरएम ने बताया कि अमृत भारत के तहत रांची रेल मंडल अंतर्गत 15 स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है। अब तक 4 स्टेशनों को विकसित किया जा चुका है, जबकि दो स्टेशनों पर विकास कार्य इसी माह पूरे कर लिए जाएंगे और वर्ष के अंत तक पांच और स्टेशनों को विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जहां दिव्यांगों व आमजनों से संबंधित सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। रेल प्रशासन ने आपरेशन और सुरक्षा के क्षेत्र में काफी कार्य किया है। रेल मंडल में 6 बैरक क्रियाशील हैं। वहीं, आपरेशन और सुरक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग किया जा रहा है। लाइनमैन व गैंगमैन की ट्रैकिंग के लिए जीपीएस की मदद ली जा रही है। वहीं, बेडरोल वर्क में भी बड़ी एजेंसी से कार्य लिया जा रहा है और एक माह के अंदर सर्विस क्वालिटी का अंतर दिखेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना को लेकर बड़ा अपडेट है। राज्य की लाखों महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है कि योजना की 21वीं किस्त जल्द ही उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने बीते दिनों बैठक में इस योजना की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि भुगतान में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए और तय समय के भीतर लाभुकों के खातों में राशि पहुंचाई जाए। 2500 रुपये आयेंगे खाते मे मंईयां सम्मान योजना झारखंड सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह 2500 रुपये सीधे बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजे जाते हैं। 21वीं किस्त को लेकर क्या है नया अपडेट? सरकार की समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कई जगहों पर तकनीकी कारणों या सत्यापन प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी लंबित मामलों को तुरंत निपटाया जाए और 21वीं किस्त की राशि तय तिथि से लाभुकों के खातों में खटाखट पहुंचनी शुरू हो जाए। सूत्रों के अनुसार, जिन महिलाओं का बैंक खाता आधार से लिंक है और जिनका दस्तावेज सत्यापन पूरा हो चुका है, उन्हें सबसे पहले राशि भेजी जाएगी। वहीं जिन लाभुकों का सत्यापन अधूरा है, उनके मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है। मार्च महीने की किस्त कई जिलों में हो चुकी है जारी इस योजना की खास बात यह है कि सरकार हर महीने की एक तय 15 तारीख को राशि ट्रांसफर करती है। इससे महिलाओं को नियमित आर्थिक सहारा मिलता है और वे अपने दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई या स्वास्थ्य जैसी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पाती हैं। हाल ही में मार्च महीने की किस्त भी कई जिलों में जारी की गई थी, जिसमें लाखों महिलाओं के खातों में एक साथ पैसे भेजे गए थे।
झारखंड में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ली है। राजधानी Ranchi समेत कई जिलों में हुई बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने लोगों को गर्मी से राहत जरूर दी है, लेकिन इसके साथ ही कई जगहों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने आज के लिए राज्य के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और वज्रपात की आशंका जताते हुए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। बारिश से तापमान में गिरावट, मिली राहत राज्य के अलग-अलग जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। खूंटी: 34.5 मिमी बोकारो: 32.4 मिमी रांची: 2.0 मिमी कांके: 12.2 मिमी इस बारिश से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली है। बदले मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें जहां एक ओर बारिश ने राहत दी, वहीं तेज आंधी और ओलावृष्टि ने कई इलाकों में नुकसान भी पहुंचाया। बेड़ो क्षेत्र में फसलों को आंशिक नुकसान सड़क पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित ओरमांझी के कुकुई गांव में पेड़ की डाल गिरने से दो छात्राएं घायल यह घटनाएं बताती हैं कि अचानक मौसम परिवर्तन के साथ सावधानी बरतना जरूरी है। बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा असर तेज आंधी और बारिश के दौरान कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। नामकुम-सिकिदरी हाई वोल्टेज लाइन ट्रिप हटिया-कांके अंडरग्राउंड केबल पंक्चर इससे कई क्षेत्रों में अस्थायी बिजली कटौती देखने को मिली। इन जिलों में तेज आंधी और वज्रपात का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, चतरा, हजारीबाग, कोडरमा, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, रामगढ़ और रांची में 50–60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी 40–50 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी और गरज के साथ बारिश हो सकती है।
रांची। झारखंड सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए अनुग्रह राशि में चार गुना बढ़ोतरी का फैसला किया है। हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। पहले 1 लाख, अब 4 लाख रुपए का मुआवजा सरकार के नए फैसले के अनुसार, अब सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रितों को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे पहले यह राशि केवल 1 लाख रुपए थी। इस फैसले का उद्देश्य पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल देना और कठिन परिस्थितियों में सहारा प्रदान करना है। सत्यापन के बाद मिलेगी राशि अनुग्रह राशि के वितरण की प्रक्रिया को भी सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अब संबंधित जिले के उपायुक्त (DC) द्वारा दुर्घटना की जांच और सत्यापन के बाद ही राशि जारी की जाएगी। इससे फर्जी दावों और दोहरे भुगतान पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। आपदा प्रबंधन योजनाओं पर भी जोर बैठक में ‘युवा आपदा मित्र योजना’ को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। Dumka, Godda, Pakur और Sahibganj जिलों में चल रही इस योजना के तहत स्वयंसेवकों का डेटाबेस तैयार कर उन्हें इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से जोड़ने का निर्णय लिया गया। गोताखोरों की संख्या बढ़ाने की पहल राज्य में डूबने से होने वाली मौतों को देखते हुए गोताखोरों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस जवानों, गृहरक्षकों और महिलाओं को भी इस कार्य में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।