नई दिल्ली, एजेंसियां। एप्पल साइडर विनेगर को आमतौर पर स्वास्थ्य और वजन घटाने के लिए जाना जाता है, लेकिन यह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। इसमें मौजूद एसिटिक एसिड के कारण यह एक बहुउपयोगी घरेलू सामग्री बन जाता है, जिसका इस्तेमाल सफाई, किचन के कामों और कई रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान में किया जा सकता है।
मछली, प्याज या मांस छूने के बाद हाथों से आने वाली बदबू को हटाने में एप्पल साइडर विनेगर मददगार है। साबुन से हाथ धोने के बाद हल्के विनेगर मिले पानी से धोने पर दुर्गंध खत्म हो जाती है और हाथ साफ महसूस होते हैं।
चश्मे पर लगे जिद्दी दाग हटाने के लिए विनेगर को स्प्रे करके मुलायम कपड़े से पोंछा जा सकता है, जिससे लेंस साफ और चमकदार हो जाते हैं। वहीं, नए बर्तनों से स्टिकर हटाने और जले हुए बर्तनों की सफाई में भी यह बेहद उपयोगी माना जाता है।
एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल गमलों में उगने वाले खरपतवार को खत्म करने के लिए किया जा सकता है। पानी के साथ मिलाकर स्प्रे करने से अनचाही घास आसानी से हटाई जा सकती है। इसके अलावा मोमबत्ती के दाग और किचन सतहों की गंदगी साफ करने में भी यह असरदार है।
बच्चों के दूध के कंटेनर और जार को साफ करने के लिए हल्के विनेगर वाले गर्म पानी का उपयोग किया जा सकता है। इससे बैक्टीरिया का खतरा कम होता है और बर्तन अधिक स्वच्छ रहते हैं।
एप्पल साइडर विनेगर और पानी के मिश्रण से कई तरह की घरेलू समस्याएं हल की जा सकती हैं। यह न सिर्फ सफाई में मदद करता है, बल्कि बिना रासायनिक उत्पादों के एक प्राकृतिक विकल्प के रूप में भी उपयोगी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे सावधानी से इस्तेमाल करने पर यह घर के कई कामों को आसान बना सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी समूह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली की द्वारका अदालत ने उन्हें 2 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया है। 92 करोड़ की हेराफेरी और हवाला नेटवर्क का आरोप ईडी के अनुसार, सतीश सेठ पर फर्जी बिलों के जरिए धन शोधन और हवाला चैनलों के माध्यम से लगभग 92 करोड़ रुपये विदेश भेजने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह रकम रिलायंस समूह से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क परियोजनाओं से जुड़े फंड से निकाली गई थी। एजेंसी ने दावा किया है कि इस पूरे मामले में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की भी भूमिका सामने आई है। किन परियोजनाओं से जुड़ा है मामला यह मामला राजस्थान की जयपुर-रिंगस टोल सड़क परियोजना और तमिलनाडु की त्रिची-करूर टोल सड़क परियोजना से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। ईडी के आरोप पत्र के अनुसार, इन परियोजनाओं से जुड़े फंड को कथित तौर पर गलत तरीके से विदेश भेजा गया और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। अदालत के निर्देश और हिरासत कोर्ट ने आदेश दिया है कि हिरासत के दौरान आरोपी को आवश्यक दवाइयां और चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही जेल प्रशासन को नियमों के अनुसार सुविधाएं देने के निर्देश भी दिए गए हैं। ईडी की जांच जारी ईडी ने बताया कि सतीश सेठ रिलायंस अनिल अंबानी समूह (RAAG) की कई कंपनियों के प्रमुख वित्तीय और व्यावसायिक निर्णयों में शामिल रहे हैं। वह 2000 से 2007 तक कंपनी में कार्यकारी निदेशक और बाद में 2024 तक विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित लाभार्थियों की भी जांच कर रही है।
नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी नाइबे लिमिटेड (Nibe Limited) ने बुधवार को अपने अत्याधुनिक लॉन्ग-रेंज 120mm व्हीकल माउंटेड मोर्टार सिस्टम ‘गरुड़ास्त्र’ (Garudastra) का सफल प्रदर्शन किया। यह परीक्षण मध्य प्रदेश के महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल में ‘नो कॉस्ट-नो कमिटमेंट’ (NC-NC) आधार पर आयोजित किया गया। परीक्षण के दौरान ‘गरुड़ास्त्र’ ने अपनी मारक क्षमता, सटीक निशानेबाजी और आधुनिक तकनीकों का प्रभावी प्रदर्शन किया। इस स्वदेशी प्रणाली को भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विकसित किया गया है। विदेशी साझेदारी के साथ विकसित हुआ स्वदेशी सिस्टम नाइबे लिमिटेड ने एक विदेशी मूल उपकरण निर्माता (OEM) के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत इस रक्षा प्रणाली को विकसित किया है। कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की परिचालन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। 120mm लॉन्ग-रेंज मोर्टार से लंबी दूरी तक हमला ‘गरुड़ास्त्र’ एक 120 मिलीमीटर का हेवी-ड्यूटी मोर्टार सिस्टम है, जो लंबी दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है। इसे सैन्य वाहन पर स्थापित किया गया है, जिससे इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया जा सकता है। ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता से जवाबी हमले से बचाव इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषताओं में ‘रैपिड शूट एंड स्कूट’ तकनीक शामिल है। इसके तहत मोर्टार दुश्मन पर तेजी से गोले दागने के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदल सकता है। इससे दुश्मन को जवाबी हमला करने या उसकी लोकेशन को निशाना बनाने का अवसर नहीं मिलता। एक साथ कई गोले गिराने की MRSI तकनीक ‘गरुड़ास्त्र’ की सबसे घातक विशेषता ‘मल्टीपल राउंड्स सिमल्टेनियस इम्पैक्ट’ (MRSI) तकनीक है। इस तकनीक के जरिए अलग-अलग कोणों से दागे गए कई गोले एक ही समय में लक्ष्य पर गिरते हैं। इससे दुश्मन को संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का मौका नहीं मिलता और नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। कम समय में लगातार फायरिंग करने में सक्षम यह सिस्टम हाई-रेट ऑफ फायर क्षमता से लैस है, जिसके कारण कम समय में लगातार कई गोले दागे जा सकते हैं। इससे युद्ध के दौरान दुश्मन पर भारी दबाव बनाया जा सकता है। GPS और लेजर गाइडेंस से सटीक निशाना ‘गरुड़ास्त्र’ के गाइडेड गोला-बारूद जीपीएस और लेजर गाइडेंस तकनीक से लैस हैं। इससे यह प्रणाली अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्य को भेद सकती है और आसपास होने वाले अनावश्यक नुकसान को भी कम करती है। आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर एक और मजबूत कदम विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गरुड़ास्त्र’ जैसे स्वदेशी हथियार प्रणालियां भारतीय सेना की मारक क्षमता और गतिशीलता को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान करेंगी। सफल परीक्षण के बाद इस प्रणाली को भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेतृत्व गुट को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने विधानसभा स्पीकर के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही फिलहाल स्पीकर का निर्णय प्रभावी रहेगा। यह याचिका टीएमसी नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने की मांग की थी। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए टीएमसी के दोनों गुटों ने अलग-अलग नाम भेजे थे। ममता बनर्जी समर्थक गुट ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय का नाम प्रस्तावित किया, जबकि बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु ने ऋतब्रत बनर्जी के नाम को मंजूरी देते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया। जस्टिस कृष्णा राव ने कहा मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा। अदालत ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। तब तक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे। यह खबर अपडेट की जा रही है ........