देश के करीब 50.14 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स की निगाहें लंबे समय से 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। ऐसे में इस आयोग से जुड़ी हर बैठक और गतिविधि करीब 1.19 करोड़ लोगों की आय और सुविधाओं को प्रभावित कर सकती है। इसी कड़ी में शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
इस बैठक में Shiv Gopal Mishra, जो NC-JCM (स्टाफ साइड) के महासचिव और All India Railwaymen's Federation (AIRF) के जनरल सेक्रेटरी हैं, शामिल होंगे। वहीं कर्मचारियों और पेंशनर्स का पक्ष Dr Manjit Singh Patel रखेंगे, जो All India NPS Employees Federation के राष्ट्रीय अध्यक्ष और Confederation of Central Government Employees and Workers के चेयरमैन भी हैं।
बैठक में कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार किया जाएगा। इनमें खास तौर पर यूनियन टेरिटरी (UT) और केंद्रीय स्वायत्त निकायों (Central Autonomous Bodies – CAB) के कर्मचारियों से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं, जहां केंद्र सरकार की योजनाएं और प्रावधान सीधे लागू होते हैं।
बताया गया है कि इन क्षेत्रों में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS), Central Government Health Scheme (CGHS) और एक वर्ष की पैरेंट केयर लीव जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार देश के कई केंद्र शासित प्रदेशों-जैसे Chandigarh और Ladakh-में केंद्र सरकार के नियम, वेतन और पेंशन संरचना लागू होते हैं। इसके अलावा Delhi और Jammu and Kashmir में भी केंद्रीय सेवा नियम लागू किए जा चुके हैं, जबकि Puducherry में अलग कैडर मैनेजमेंट होने के बावजूद वेतन केंद्रीय वेतन आयोग के आधार पर दिया जाता है।
हालांकि इन क्षेत्रों में केंद्र सरकार के फैसलों को लागू होने में कई बार तीन से छह महीने तक की देरी हो जाती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह स्थिति दोहरे व्यवहार जैसी है और इसे खत्म किया जाना चाहिए।
कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार के सभी आदेश और लाभ UT और CAB कर्मचारियों पर भी तुरंत लागू किए जाएं। उनका कहना है कि 2021 का पेंशन आदेश और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसे कई फैसले अब तक कुछ स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाए हैं।
इसलिए प्रस्ताव है कि इन सभी मुद्दों को 8वें वेतन आयोग को भेजे जाने वाले कॉमन मेमोरेंडम में शामिल किया जाए, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को समान लाभ मिल सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार आज अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करने जा रही है। गुरुवार सुबह चेन्नई में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 23 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्यपाल ने सभी नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। यह शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे चेन्नई के लोक भवन में आयोजित होगा। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नए मंत्रियों के शामिल होने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस की सरकार में वापसी इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत कांग्रेस की सरकार में एंट्री मानी जा रही है। लंबे समय बाद तमिलनाडु में किसी क्षेत्रीय दल के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को प्रतिनिधित्व मिला है। कांग्रेस के दो विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। ये विधायक बनेंगे मंत्री नई कैबिनेट में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। मंत्री पद की शपथ लेने वालों में थूथुकुडी से श्रीनाथ, अविनाशी से कमाली एस, कुमारपालयम से सी विजयलक्ष्मी और कांचीपुरम से आरवी रंजीतकुमार शामिल हैं। इसके अलावा कुंभकोणम से विनोद, तिरुवदानई से राजीव, कडलूर से बी राजकुमार, अरक्कोनम से वी गांधीराज और ओट्टापिडारम से मथन राजा पी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। सूची में राजपालयम से जगदेश्वरी के, किल्लियूर से कांग्रेस विधायक राजेश कुमार एस, ईरोड ईस्ट से एम विजय बालाजी, रासीपुरम से लोगेश तमिलसेल्वन डी और सेलम साउथ से विजय तमिलन पार्थिबन ए के नाम भी शामिल हैं। इसके साथ ही श्रीरंगम से रमेश, मेलूर से कांग्रेस विधायक पी विश्वनाथन, वेलाचेरी से कुमार आर, श्रीपेरंबदूर से थेन्नारासु के और कोयंबटूर नॉर्थ से वी संपत कुमार भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। अंतिम सूची में अरंथांगी से मोहम्मद फरवास जे, तांबरम से डी सरथकुमार, डॉ. राधाकृष्णन नगर से एन मैरी विल्सन और किनाथुकादावु से विग्नेश के को भी शामिल किया गया है। सरकार को मिलेगी नई ऊर्जा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए विजय सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति इस कैबिनेट विस्तार में साफ दिखाई दे रही है।
996 – सोलह वर्षीय ओटो तृतीय रोम का सम्राट बना। 1216 – फ्रांस के प्रिंस लुइस ने इंग्लैंड में प्रवेश किया। 1502 – पुर्तगाल के जोआओ दा नोवा ने दक्षिण अटलांटिक महासागर में सेंट हेलेना द्वीप की खोज की। 1674 – जनरल जॉन सोबिस्की पोलैंड के राजा चुने गये। 1725 - द ऑर्डर ऑफ अलेक्जेंडर नेव्स्की की स्थापना एम्पार्स कैथरीन आई द्वारा रूस में की गई। 1758 - मैरी कैम्पबेल को फ्रांसीसी और भारतीय युद्ध के दौरान पेनसिल्वेनिया में अपने घर से लेनाप द्वारा अपहरण किया गया। 1790 – प्रशासनिक सहूलियत के लिए पेरिस को 48 क्षेत्रों में विभाजित किया गया। 1819 – अमेरिका के न्यूयाॅर्क शहर की सड़कों पर पहली बार साइकिल देखी गई इसे स्फिवट वॉकर कहा जाता था। 1832 – अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ने पहली बार नेशनल कन्वेंशन का आयोजन किया। 1840 – न्यूजीलैंड काे ब्रिटेन का उपनिवेश घोषित किया गया। 1851 – दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया में गुलामी प्रथा समाप्त हुई। 1871 – यूरोप में माउंट रिगी पर पहली रैक रेल सेवा शुरू हुई। 1881 – अमेरिकी रेड क्रॉस संस्था की स्थापना की गई। 1881 – यूएस नेशन लॉन टेनिस एसोसिएशन की स्थापना हुई। 1904 – पेरिस में फुटबाॅल की सर्वोच्च संस्था अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फीफा) की स्थापना हुई। 1908 – पहली हॉरर फिल्म शिकागो में मनाया गया। 1918 – अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने महिलाओं को मतदान की अनुमति दी। 1929 – भारत की पहली एयर कार्गो सेवा तत्कालीन कलकत्ता (अब कोलकाता) और बागडोगरा के बीच शुरू। 1935 – पाकिस्तान का क्वेटा शहर भूकंप में बुरी तरह तबाह हुआ और 30 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई। 1965 – मिस्र में पाकिस्तानी बोइंग विमान 720ई के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से 121 लोगों की मौत हुई। 1970 – USSR ने न्यूक्लियर टेस्ट किया। 1981 - पियरे मोरो फ़्रांस के प्रधानमंत्री नियुक्त। 1983 – दक्षिण अफ्रीका की प्रशासनिक राजधानी प्रीटीरिया में हुए कार बम धमाके में 16 लोगों की मौत हुई। 1994 – सुष्मिता सेन 43वें मिस यूनिवर्स के पुरस्कार से नवाजी गईं। 1994 - दक्षिणी यमन द्वारा उत्तरी यमन से अलग होने की घोषणा। 1996 - प्रसिद्ध शीतल पेय कम्पनी पेप्सी ने विश्व में पहली बार अंतरिक्ष में विज्ञापन फ़िल्म बनाने की घोषणा की। 1998 – माइक्रोसॉफ्ट और सेगा ने होम वीडियो सिस्टम के लिए करार की घोषणा की। 1998 - 32 वर्षों तक लगातार इंडोनेशिया पर शासन करने वाले राष्ट्रपति सुहार्तों का त्यागपत्र। 2002 - बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति एच.एम. इरशाद को 6 महीने कारावास की सज़ा। 2003 - विश्व के 190 से भी अधिक देशों ने तम्बाकू के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय संधि को जिनेवा में मंजूरी दी। 2008 - भारतीय स्टेट बैंक ने कृषि क़र्ज पर रोक लगाने सम्बन्धी अपने सर्कुलर को तत्काल प्रभाव से वापस किया। 2008 - रिजर्ब बैंक ने सेंचुरियन बैंक ऑफ़ पंजाब के एचडीएफसी बैंक में विलय प्रस्वाव को मंज़ूरी दी। 2008 - संयुक्त राष्ट्र संघ की योजना के तहत 15 देशों की वायुसेनाओं के 90 अधिकारियों का एक साझा टेबल अभ्यास हैदराबाद में प्रारम्भ। 2008 - मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के पुत्र दातुक मोखजानी महातिर ने सत्तारुढ़ दल यूएमएनओ से इस्तीफ़ा दिया। 2010 - उड़ीसा तट पर बंगाल की खाड़ी में भारतीय सेना के जंगी जहाज़ रणवीर से भारतीय नौसेना ने सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के उर्ध्वाधर प्रक्षेपण संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 2010 - दार्जिलिंग में 'अखिल भारतीय गोरखा लीग' के अध्यक्ष मदन तमांग [56] की हत्या कर दी गई। 2012 – इटली में आए भूकंप में 27 लोगों की मौत हो गई। 2019 - जोधपुर - सालवा कल्लां गांव में खुदाई के दौरान निकले मुगलकालीन चांदी के सिक्के । जिनको लेने के लिए लोग उमड़े। 2019 - जोको विडोडो दूसरी बार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति चुने गए। 2019 - नेपाल के कामी रीता शेरपा ने 24वीं बार एवरेस्ट फतह किया , एक हफ्ते में दूसरी बार तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड। 2020 - भारत - चक्रवात एम्फन में प्रभावित क्षेत्रों के लिए पुनर्स्थापना कार्य के लिए 1,000 करोड़ रुपये का कोष बनाया गया। 2020 - अंडमान से दुर्लभ पाम के पेड़ को विलुप्त होने से बचाने के लिए केरल में रोपित किया गया। 2021 - भारतीय नौसेना के पहले विध्वंसक जहाज़ आईएनएस राजपूत को 41 गौरवशाली वर्षों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में कार्यमुक्त कर दिया गया। 2022 - मेघालय की राजधानी शिलंग में पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय-नेहू का 27वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। 2022 - श्रीलंका सरकार ने देश में लागू आपातकाल हटाया। 2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई लेबर पार्टी की जीत और प्रधानमंत्री चुने जाने पर महामहिम एंथनी अल्बानीज को बधाई दी। 2023 - आकाशवाणी समाचार छत्तीसगढ़ में गोंडी बोली में साप्ताहिक समाचार बुलेटिन शुरू हुआ। 2023 - धार स्थित पीएम मित्र पार्क के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। 2023 - पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह (ईसीएसडब्ल्यूजी)की तीसरी बैठक मुंबई में ‘जी20 मेगा समुद्र तट स्वच्छता कार्यक्रम’ के साथ शुरू हुई। 2023 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य सभा के 76वें सत्र को संबोधित किया। 21 मई को जन्मे व्यक्ति 1688 – ब्रितानी कवि अलेक्जेंडर पोप का जन्म। 1857 - सर सुंदर लाल - प्रसिद्ध विधिवेत्ता और सार्वजनिक कार्यकर्ता थे। 1927 - उस्ताद साबरी खान - एक भारतीय सारंगी वादक थे, जिन्होंने इस भारतीय वाद्य को संपूर्ण विश्व में लोकप्रिय बनाया। 1930 - मैल्कम फ्रेजर - ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री। 1931 - शरद जोशी - भारत के प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाकार। 1940 - नरेश भारतीय (नरेश अरोड़ा) ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के हिंदी लेखक। 1960 – भारतीय अभिनेता मोहनलाल विश्वनाथ नायर का जन्म हुआ। 1971 – मशहूर निर्देशक, संवाद लेखक आदित्य चोपड़ा का जन्म। 1983 - कावेरी झा - एक भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री। 21 मई को हुए निधन 1960 - गामा पहलवान, शायद ही कोई ऐसा भारतीय खेल-प्रेमी हो, जिसने 'रुस्तम-ए-ज़मां' पहलवान का नाम न सुना हो। 1979 - जानकी देवी बजाज - गाँधीवादी जीवन शैली की कट्टर समर्थक थीं। 1991 – तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में आत्मघामी बम हमले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या हुई। 2008 - नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी विलिस ई लैंक का निधन। 2011 - माला सेन एक भारतीय-ब्रिटिश लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता थी। 2021 - सुन्दरलाल बहुगुणा भारत के एक महान पर्यावरण - चिन्तक एवं चिपको आन्दोलन के प्रमुख नेता थे। 2021 - पूर्व केन्द्रीय मंत्री बाबागौड़ा पाटिल (76) का निधन हुआ। 2021 - मुक्केबाजी के पहले द्रोणाचार्य , 21 साल तक भारतीय टीम के कोच रहे ओ.पी. भारद्वाज (82) का निधन हुआ। 2021 - काशी के प्रकांड विद्वान महामहोपाध्याय पंडित रेवा प्रसाद द्विवेदी(90) का निधन हुआ। 2022 - कोलकाता के मूल निवासी मशहूर फिल्म निर्माता मोहम्मद रियाज (74) का मुंबई के लीलावती अस्पताल में निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी गायक एड आमेस (95) का निधन हुआ। 2023 - उत्तरी आयरलैंडी अभिनेता रे स्टीवेंसन (58) का निधन हुआ। 21 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री क्षुल्लक जिनेन्द्रवर्णी जी समाधि (जैन , बैशाख शुक्ल त्रयोदशी)। श्री नृसिंह जयन्ती ( नृसिंहावतार , पंचांगभेद से )। श्री राजीव गांधी स्मृति / बलिदान दिवस (आतंकवाद विरोध दिवस)। संवाद और विकास हेतु सांस्कृतिक विविधता विश्व दिवस। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
कोलकाता, एजेंसियां। महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल के करीमपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 से जुड़े मुद्दे पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। यह विवाद उनके एक फेसबुक पोस्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार के हालिया दिशा-निर्देशों और पशु व्यापार से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए थे। भाजपा नेताओं ने इसे भड़काऊ और सांप्रदायिक माहौल खराब करने वाला बयान बताया है। भाजपा नेता ने दर्ज कराई शिकायत स्थानीय भाजपा नेता गोलोक बिस्वास ने करीमपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों की भावनाएं भड़काने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की। महुआ मोइत्रा ने 16 मई को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि गौहत्या से जुड़े नए दिशा-निर्देश एक विशेष वर्ग को खुश करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और गोमांस निर्यात पर मिलने वाली सब्सिडी का मुद्दा भी उठाया। भाजपा ने आरोपों को बताया भ्रामक करीमपुर से भाजपा विधायक Samarendra Nath Ghosh ने महुआ मोइत्रा के आरोपों को गलत और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी निर्देशों में कहीं भी पशु बाजार बंद करने की बात नहीं कही गई है। उनके अनुसार यह कदम भारत-बांग्लादेश सीमा पर गायों की तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। भाजपा नेताओं ने यह भी मांग की है कि यह जांच होनी चाहिए कि क्या सांसद तस्करी से जुड़े तत्वों को समर्थन दे रही हैं। पहले से जारी है आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक विवाद इससे पहले भी गर्माया हुआ था। भाजपा नेता गोलक बिश्वास ने सोशल मीडिया पर महुआ मोइत्रा के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसके बाद सांसद ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अब दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से सीमा क्षेत्र करीमपुर का राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।