1429 – डोफिन की फ्रांस के राजा के रुप में ताजपोशी की गई।
1453 - कैस्टिलियन के पहले युद्व में फ्रांसीसी सेनाओं ने इंग्लैंड को पराजित किया।
1489 - निजाम खान को सिकंदर शाह लोदी द्वितीय के नाम से दिल्ली का सुल्तान घोषित किया गया।
1549 – बेल्जियम के घेंट क्षेत्र से यहूदियों को निष्कासित कर दिया गया।
1712 – यूरोपीय देश इंग्लैंड, पुर्तगाल और फ्रांस ने संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर किये।
1727 - साइमन वैन स्लिंगलैंड को डच पेंशन सलाहकार नियुक्त किया गया।
1740 - प्रोस्पेरो लेमबर्टिनी को चौदहव पोप चुना गया।
1762 - पीटर II की हत्या के बाद कैथरीन द्वितीय रूस की साम्राज्ञी बनी।
1775 - पहले सैन्य अस्पताल को मंजूरी दी गयी।
1850 – हार्वर्ड वेधशाला ने तारे का पहला फोटोग्राफ लिया।
1861 - अमेरिकी कांग्रेस ने पेपर पर अंकित पैसे को अधिकृत किया।
1862 - अमेरिकी सेना ने श्रमिकों के रूप में अश्वेतों को स्वीकार करने के लिए अनुमति दी।
1893 – इंग्लैंड के आर्थर श्रेव्सबरी टेस्ट क्रिकेट में 1000 रन बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने।
1898 - स्पेन, अमेरिका युद्व, स्पेनी सेना ने क्यूबा के सेंटियागो क्षेत्र में अमेरिका के समक्ष आत्मर्समपण किया।
1906 – क्लेमेंट आर्मंड फैलिएरेस फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गए।
1912 – अंंतरराष्ट्रीय एमेच्योर एथलेटिक्स महासंघ (आईएएफ) की स्वीडन में स्थापना की गयी।
1919 – फिनलैंड में संविधान को अंगीकार किया गया।
1929 – सोवियत संघ ने चीन के साथ राजनयिक संबंध समाप्त किए।
1943 - ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) ने जर्मनी के पीनमुंदे रॉकेट बेस पर हमला किया।
1944 – अमेरिका में कैलिफोर्निया के समीप में गोला बारूद से लदे दो जहाजों में विस्फोट होने से 322 लोगों की मौत हो गयी।
1947 - भारतीय यात्री जहाज रामदास मुम्बइ के पास तुफान में फंसकर डूब गया। 625 लोगों की मौत हो गई।
1948 – देश में महिलाओं को भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा समेत किसी भी तरह की नागरिक सेवाओं में पात्र घोषित किया गया।
1950 – पठानकोट में भारत का पहला विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
1968 – इराक़ में अहमद हसन अलबक्र के नेतृत्व में विद्रोह करके बास पार्टी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया।
1972 – पहली बार दो महिलाओं ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई एजेंट के तौर पर चंटिको में ट्रेनिंग शुरू की।
1974 – लंदन टॉवर में हुए बम धमाके से 41 लोग घायल हो गए।
1976 – 21वें माडर्न ओलंपिक खेलों का आयोजन मांट्रियाल में शुरू हुआ।
1980 - जेंको सुजुकी जापान के प्रधानमंत्री बने।
1981 – इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में अल-फतह मुख्यालय को नष्ट किया।
1987 – ईरान और फ्रांस के बीच राजनयिक संबंध टूटे।
1994 – धूमकेतू शुमेकर लेवी-9 का पहला टुकड़ा बृहस्पति से टकराया।
1995 - फोर्ब्स पत्रिका ने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स को दुनिया का सबसे अमीर आदमी घोषित किया।
2002 - रूस की स्वेतलाना फीफाप्रोवा ने पोल वाल्ट स्पर्द्धा में नया यूरोपीय रिकार्ड क़ायम किया।
2003 - उत्तर पूर्व कांगो के दुनिया शहर में जातीय हिंसा में 54 लोग मारे गये।
2006 - कैप कनैवरल (फ़्लोरिडा) के स्पेस सेंटर में अपनी 13 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी कर डिस्कवरी अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर सकुशल उतरा।
2008 - अफ़ग़ानिस्तान में नाटो सेनाओं ने पाकिस्तान में छिपे आतंकियों पर मिसाइलों व हेलीकॉप्टरों से हमला किया।
2013 – चीन के सिचुआन प्रांत में बाढ़ से 58 लोगों की मौत हुई।
2014 – मलेशिया एयरलाइंस के विमान-17 के दुर्घटनाग्रस्त होने से 283 यात्री और चालक दल के 15 सदस्यों की मौत हो गयी।
2019 - पर्यटन मंत्रालय ने 2018-19 के दौरान अतुल्य भारत “फाइंड द इन्क्रेडेबल यू” अभियान विश्व स्तर पर जारी किया था। इस अभियान को पाटा (पैसेफिक-एशिया ट्रैवल एसोसिएशन) स्वर्ण पुरस्कार 2019 का विजेता घोषित किया गया ।
2019 - वित्त मंत्रालय ने सामान्य भविष्य निधि (GPF) की दर में 8% से 7.9% तक 10 आधार अंकों की कटौती कर दी।
2019 - अमेरिका ने वर्ष 2017 में रोहिंगिया मुसलमानों के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई को लेकर म्यांमार के सेना प्रमुख समेत चार अधिकारियों व उनके परिवार पर प्रतिबंध लगा दिया ।
2020 - भारत की सबसे धनी महिला रोशनी नाडर मल्होत्रा ने HCL Technologies की चेयरपर्सन का पदभार संभाला। इसके साथ ही वह एक लिस्टेड भारतीय आईटी कंपनी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बन गई।
2020 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यम से संयुक्त राष्ट्र (United Nation) आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित किया।
2020 - अमेरिका और भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने के लिए एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
2020 - पश्चिमी फ्रांसीसी शहर नांतेस के एक गिरजाघर में आग लग गई। आग लगने से 15वीं शताब्दी में बने इस चर्च के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से पूरी तरह नष्ट हो गए।
2021 - पश्चिमी यूरोप में विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 150 हुई।
2021 - सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद चौथी बार सीरिया के राष्ट्रपति बने (राष्ट्रपति पद की शपथ ली)।
2022 - 52वां बीजीबी-बीएसएफ डीजी स्तर का सम्मेलन ढाका में शुरू हुआ।
2022 - रामपुर में बरेली राजमार्ग पर एक बस और ट्रक की टक्कर में 5 लोगों की मौत व 22 लोग घायल हुए।
2022 - भारत ने ‘200 करोड़’ कोविड-19 टीकाकरण की ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की।
2022 - श्रीलंका में कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने देश में नये सिरे से आपातकाल की घोषणा की।
2023 - भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास "नोमैडिक एलीफेंट- 2023" मंगोलिया के उलानबटार में शुरू हुआ।
2023 - जम्मू-कश्मीर के कटरा में 3.8 की तीव्रता का भूकंप आया।
2023 - भोपाल से नई दिल्ली आ रही वंदे भारत ट्रेन में अचानक भयंकर आग लगी, यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
2023 - भारत की जी-20 की अध्यक्षता से संबद्ध समन्वय समिति की छठी बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई।
2023 - तूफान तालीम ने चीन के गुआनडोंग तट पर लगभग 140 किमी/घंटा की रफ्तार से दस्तक दी।
2024 - छत्तीसगढ़ के गढ़चिरौली में एनकाउंटर के दौरान सुरक्षाबलों ने 12 नक्सली ढेर किए।
2024 - ब्रिटेन के विक्टोरिया और अल्बर्ट म्यूजियम से छत्रपति शिवाजी का बाघनख हथियार मुम्बई लाया गया।
2025 - भारत की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड (SFC) ने ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से दो परमाणु-सक्षम मिसाइलों का सफल रात्रि परीक्षण किया।
1913 : फ्रांस के विख्यात दार्शनिक और लेखक रोजर गैरोडी का मार्सी नगर में जन्म हुआ।
1923 - बेगम आबिदा अहमद - भारत के पाँचवे राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की पत्नी।
1943 - फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों - परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक।
1959 - ज़रीना वहाब हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री।
1971 - रवि किशन - फिल्म और टीवी अभिनेता एवं राजनेता (1969 का भी वर्णन)।
1997 - पूजा सिहाग एक भारतीय फ्रीस्टाइल महिला पहलवान।
1790 - एडम स्मिथ - यह एक प्रसिद्ध स्कॉटिश नीतिवेत्ता, दार्शनिक और राजनैतिक अर्थशास्त्री थे।
1886 - मुग़ल सम्राट के अंतिम शासक की बेगम: ज़ीनत महल।
1928 - अलेक्जेन्डर मडीमैन - उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, गवर्नर जनरल की गृह विभाग की समिति के सदस्य।
1972 - इंदुलाल याज्ञिक - गुजरात के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और 'ऑल इंडिया किसान सभा' के नेता।
1979 - लालमणि मिश्र - भारतीय संगीत जगत के ऐसे मनीषी थे, जो अपनी कला के समान ही अपनी विद्वता के लिए भी जाने जाते थे।
1992 - कानन देवी - भारत की प्रसिद्ध अभिनेत्री, गायिका और फ़िल्म निर्माता। मुकेश शास्त्री हालुवास (भिवानी) द्वारा संकलित पंचांग।
2005 - आई. जी. पटेल - भारतीय रिज़र्व बैंक के चौदहवें गवर्नर।
2012 - वाहेंगबाम निपाम्चा सिंह - मणिपुर के भूतपूर्व नौवें मुख्यमंत्री थे।
2013 - बरुन डे, प्रसिद्ध इतिहासकार (16 जुलाई का भी वर्णन मिलता है , कन्फर्म कर लें)।
2018 - रीता भादुड़ी - हिन्दी सिने जगत की जानीमानी अभिनेत्री थीं।
2019 - रेडियो पर कई टेस्ट मैचों का आंखों देखा हाल सुनाने वाले मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर सुरेश सरैया का दिल का दौरा पड़ने से निधन।
2020 - प्रख्यात गणितज्ञ कांजिवरम श्रीरंगचारी शेषाद्रि यानी सीएस शेषाद्रि का निधन हुआ।
2020 - रजत मुखर्जी - प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे।
2021 - गुजरात के पूर्व मंत्री श्री देवानंदभाई सोलंकी का निधन हुआ।
2023 - वरिष्ठ गणितज्ञ और लेखिका मंगला नारलीकर (80) का पुणे में कैंसर से निधन हुआ।
2023 - ब्राज़ीलियाई फुटबॉलर वांडरलेई यूस्टाक्विओ डी ओलिवेरा (पल्हिन्हा) का 73 की उम्र में निधन हुआ।
2023 - फ्रांसीसी फुटबॉल खिलाड़ी रॉबर्ट बुडज़िंस्की (83) का निधन हुआ।
2024 - हांगकांग की अभिनेत्री और सिनेमा की पहली महिला एक्शन स्टार चेंग पेई पेई (78) का निधन हुआ।
2025 - BSP के पूर्व जिला अध्यक्ष और आगरा मंडल प्रभारी सुनील वर्मा का निधन हुआ।
साहित्यसम्राट लोकशाहीर श्री अण्णाभाऊ साठे स्मृतिदिवस।
श्री नाथभुजंग महाराज पुण्यतिथि परंडा (धाराशिव)।
फ़्लाइंग ऑफ़िसर श्री निर्मलजीत सिंह सेखों जयन्ती (परमवीर चक्र सम्मानित)।
श्री वाहेंगबाम निपाम्चा सिंह पुण्यतिथि।
अंतरराष्ट्रीय अपराधिक न्याय दिवस (International Criminal Justice Day)।
कृपया ध्यान दें
यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।" आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।
कानपुर, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित पनकी रेलवे स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। यह उद्घाटन देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों के एक साथ लोकार्पण कार्यक्रम का हिस्सा होगा। प्रधानमंत्री पंजाब के जालंधर कैंट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। आधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ पनकी स्टेशन करीब ₹24.5 करोड़ की लागत से विकसित पनकी रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। स्टेशन पर नया भवन, बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक टिकटिंग व्यवस्था, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, लिफ्ट, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, डिजिटल सूचना प्रणाली, आकर्षक फसाड और यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिलेगा। कानपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मिलेगा लाभ रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन के आधुनिकीकरण से पनकी और आसपास के औद्योगिक एवं आवासीय क्षेत्रों के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए स्टेशन पर बेहतर आवागमन और सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। अमृत भारत स्टेशन योजना का हिस्सा पनकी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास केंद्र सरकार की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत किया गया है। इस योजना का उद्देश्य देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और उन्हें स्थानीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप विकसित करना है। आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश के विभिन्न राज्यों के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का भी वर्चुअल उद्घाटन करेंगे।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई ने विशेष अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे ने एक छात्र के परिवार से 5 लाख रुपये लेकर परीक्षा से पहले ही उसे लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र दिखाया था। यह जानकारी सीबीआई ने आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखी। दो अन्य डॉक्टरों को भी नेटवर्क से जोड़ने का आरोप सीबीआई का कहना है कि डॉ. शिरुरे ने इस कथित पेपर लीक नेटवर्क में दो अन्य डॉक्टरों की मुलाकात सह-आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से कराई थी। जांच के अनुसार, इन दोनों डॉक्टरों के बच्चों को भी लीक हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला और परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध कराया गया था। अप्रैल में ही दिखाया गया था प्रश्नपत्र जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. शिरुरे ने सह-आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे आदित्य मोटेगांवकर को मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा से पहले, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही केमिस्ट्री का मूल प्रश्नपत्र दिखाया था। सीबीआई का आरोप है कि छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर परीक्षा की तैयारी कराई गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिल सके। जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।