1730 - न्यूयॉर्क में शारिथ इज़राइल शहर का पहला आराधनालय बनाया गया।
1740 - ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार के युद्ध: रॉयल नेवी ने कैप फिनिस्टर के बाहर प्रिंससा की रेखा के स्पेनिश जहाज पर कब्जा कर लिया और उसे ब्रिटिश सेवा में लगा दिया।
1766 - पहली आग से बचने वाली पेटी, चरखी और चेन पर विकर की टोकरी का पेटेंट कराया गया।
1801 – रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में हुई हिंसा में 128 यहूदियों की मौत हुई।
1806 - नेपोलियन बोनापार्ट की बेटी स्टीफैनी डे ब्यूहर्नैस ने बेटे के प्रिंस कार्ल लुडविग फ्रेडरिक से शादी की।
1813 - कर्नल जेम्स बॉल फोर्ट मेइग्स में 200 ड्रैगन के साथ आया।
1831 – प्रसिद्व समाज सुधारक राजाराम मोहन राय इंग्लैंड पहुंचे।
1857 - भारत के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान अंग्रेज़ों पर पहली गोली चलाने वाले ब्रिटिश भारत की बैरकपुर रेजीमेंट के सिपाही मंगल पांडेय को फाँसी दी गयी।
1904 – न्यूयॉर्क के मैनहेटन में लॉगएकड़ स्क्वेयर का नाम बदलकर टाइम्स स्क्वेयर रख दिया गया।
1906 – आगस्ट डेटर अल्झाइमर रोग से जान गंवाने वाले पहले मरीज बने।
1912 – नील नदी में जहाजों के आपसी भिड़त के बाद इसमें सवार 200 से अधिक लोगों की डूबकर मौत हुई।
1929 - भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, दिल्ली सेंट्रल असेम्बली में बम फेंकने के ज़ुर्म में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को गिरफ़्तार किया गया।
1946 – संयुक्त राष्ट्र के पूर्ववर्ती संगठन लीग ऑफ नेशंस की आखिरी बैठक हुई।
1947 – चित्र सहित पहली बीमा पॉलिसी ऑलस्टेट इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से जारी की गई।
1950 - भारत और पाकिस्तान के लियाकत-नेहरू संधि पर हस्ताक्षर।
1959 – कंप्यूटर इंजीनियरों ने एक नई प्रोग्रामिंग भाषा 'कोबोल' तैयार करने के लिए बैठक की।
1961 – ब्रिटिश जहाज दारा का फारस की खाड़ी में गिरने से 236 लोगों की मौत हुई।
1964 – नासा ने पहले मानव रहित अंतरिक्ष यान जेमिनी-1 को लांच किया।
1965 – भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा युद्ध शुरु हुआ। इसे कश्मीर के दूसरे युद्ध के नाम से भी जाना जाता है।
1988 – जनरल वेंग शंग कुन चीन के राष्ट्रपति चुने गए।
1999 - चीन द्वारा धान की भूसी से बिजली का उत्पादन प्रारम्भ।
2000 - गुटनिरपेक्ष देशों के विदेश मंत्रियों का 13वां सम्मेलन कोलंबिया के कार्टिजेना शहर में प्रारम्भ।
2001 - भारत-इंग्लैंड राउण्ड टेबल बैठक सरिस्का में सम्पन्न ।
2001 - बांग्लादेश में हिन्दुओं की सम्पत्ति लौटाने के लिए विधेयक पारित।
2002 - अमेरिकी अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक प्रक्षेपित।
2003 - अमेरिकी सेना ने बगदाद में बंकर भेदी बम बरसाए, लेकिन सद्दाम का अता-पता नहीं।
2005 - वेटिकन सिटी में मरहूम पोप को अंतिम विदाई दी गई।
2006 - ल्यूकाशेंको ने तीसरी बार बेलारूस के राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
2008 - आन्ध्र प्रदेश व कर्नाटक की सरकारों ने एक महत्त्वपूर्ण फैसले में अपने यहाँ सिक्खों को अल्पसंख्यक घोषित किया।
2008 - ब्रिटेन की एक अदालत ने वहाँ काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के पक्ष में निर्णय देते हुए नई सरकार द्वारा उनके वीजा नियमों में किये गए बदलाव को ग़ैर क़ानूनी और प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग बताया।
2008 - ईरान ने अपने यूरेनियम प्लांट में 6000 नये सेंट्रीफ़्यूज लगाने का कार्य शुरू किया।
2008 - पाकिस्तान के एक न्यूक्लियर प्लांट में गैस लीक होने से दो लोगों की मृत्यु।
2013 – सूडान के दारफुर में जनजातीय हिंसा में 163 लोगों की मौत हुई और 50 हजार लोग विस्थापित हुए।
2019 - ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ अपील करने का विजय माल्या का अनुरोध खारिज किया।
2019 - अमेरिका ने ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकी संगठन घोषित किया।
2019 - पाकिस्तान से 360 में से 100 भारतीय कैदी रिहा होने के बाद अटारी के रास्ते भारत लौटे।
2020 - भारत सरकार ने 20 करोड़ महिलाओं के जनधन खातों में 500-500 रुपये की पहली किस्त डाली।
2021 - भारत और मालदीव आतंकवाद से निपटने के लिए द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमत हुए।
2021 - कनाडा के ऑनटारियो में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए आपातकाल की तीसरी स्थिति और घर में रहने का आदेश जारी किया।
2022 - डूरंड लाइन को लेकर निमरोज प्रांत में तालिबान व पाकिस्तानी सेना में झड़प हुई ,तालिबान पर पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टर को मार गिराने का दावा किया गया।
2022- रूस-यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध के 44वें दिन आज ब्रिटेन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बेटियों को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया।
2022 - पूर्वी यूक्रेन के क्रामाटोर्स्क शहर में एक रेलवे स्टेशन पर रॉकेट हमले में लगभग 39 लोगों की मौत व कई घायल हुए।
2022 - भारत और केन्या के विदेश कार्यालयों के बीच बातचीत का दूसरा दौर नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
2022 - DRDO ने ओडिशा तट से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया।
2023 - राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन पर सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान में ऐतिहासिक उड़ान भरी।
2023 - PM ने सिकंदराबाद-तिरुपति वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई।
2024 - मैक्सिको के माज़ातलान से लेकर न्यूफ़ाउंडलैंड तक पूर्ण सूर्यग्रहण फैला, जिससे 44 मिलियन लोग अंधेरे में डूब गए।
2024 - त्रि-सेवा सम्मेलन 'परिवर्तन चिंतन' का नई दिल्ली में आयोजन किया गया।
1892 - हेमचंद्र रायचौधरी, इतिहासकार।
1900 - नवलपक्कम पार्थसारथी - भारतीय आनुवंशिकीविद्, अंतर्राष्ट्रीय चावल आयोग के कार्यकारी सचिव और थाईलैंड सरकार के चावल सलाहकार थे।
1924 – भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय शास्त्रीय गायक कुमार गन्धर्व का जन्म हुआ।
1937 - आर. गुंडू राव - 1980 से 1983 तक कर्नाटक राज्य के मुख्यमंत्री थे।
1938 - कोफ़ी अन्नान - संयुक्त राष्ट्र संघ के सातवें भूतपूर्व महासचिव हैं।
1943 - गिरिधर गमांग - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेता और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री ।
1950 - दिनेश कुमार शुक्ल - हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि।
1972 - तनाज़ ईरानी - एक भारतीय अभिनेत्री।
1983 - अल्लु अर्जुन- तेलुगु फ़िल्म अभिनेता।
1988 - नित्या मेनन - एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री और पार्श्व गायिका।
1857 - मंगल पांडेय- भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम के प्रथम नायक थे।
1873 – विश्व के एक बहुत बड़े चित्रकार और अब्स्ट्रैक्ट आर्ट के आविष्कारक पेबलो पिकासो का निधन हुआ।
1894 - भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का निधन।
1953 - वालचंद हीराचंद - भारत के प्रसिद्ध उद्योगपतियों में से एक थे।
1962 – फ़्रांस के प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक लुई मैसीनियन का 79 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
1973 - पाब्लो पिकासो - स्पेन के ख्यातिप्राप्त चित्रकार थे।
2008 - शरन रानी - 'हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत' की विद्वान् और सुप्रसिद्ध सरोद वादिका।
2013 – ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मारग्रेट थेचर का निधन हुआ।
2015 - भारतीय पत्रकार तथा मशहूर लेखक जयकांतन का निधन।
2023 - माइकल लर्नर न्यूयॉर्क शहर के एक अमेरिकी अभिनेता थे, जो अभिनेता केन लर्नर के बड़े भाई थे ,का 81 साल की उम्र में निधन हुआ।
2024 - ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल खिलाड़ी रॉन लॉर्ड (94) का निधन हुआ।
श्री शम्भुमहादेव यात्रा (शिखर शिंगणापुर)।
श्री भाऊ महाराज सालपेकर पुण्य तिथि (नागपुर)।
भगवान श्री सुमतिनाथ जी जन्म - ज्ञान - मोक्ष कल्याणक (जैन , चैत्र शुक्ल एकादशी)।
प्रथम नायक श्री मंगल पाण्डेय शहीदी दिवस।
श्री आर. गुंडू राव जयन्ती।
श्री बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय समृति दिवस।
श्री गिरिधर गमांग जन्म दिवस।
विश्व बंजारा दिवस।
अन्तरराष्ट्रीय रोमानी दिवस।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिका ने ईरान की उन संपत्तियों को रिलीज करने पर सहमति जताई है, जो कतर और अन्य विदेशी बैंकों में 'फ्रीज' (जब्त) की गई थीं। हालांकि, वाशिंगटन ने इस राहत के बदले एक कड़ी शर्त रख दी है, जिसके केंद्र में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान इस समुद्री मार्ग को स्थायी रूप से सुरक्षित नहीं बनाता, तब तक उसकी संपत्तियों पर लगी रोक नहीं हटेगी। अमेरिकी शर्तों का कड़ा रुख और होर्मुज की सुरक्षा रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय मांगों की एक लंबी सूची रखी है। इसमें सबसे प्रमुख शर्त वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और स्थायी रूप से खोलना है। अमेरिका चाहता है कि इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाए। इसके साथ ही, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अपनी सभी कोशिशों को पूरी तरह और सत्यापन योग्य तरीके से बंद करना होगा। वाशिंगटन की शर्तों में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल विकास कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को दी जाने वाली फंडिंग व हथियारों की आपूर्ति पर रोक भी शामिल है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने मांग की है कि ईरान की जेलों में बंद सभी अमेरिकी नागरिकों को तत्काल प्रभाव से रिहा किया जाए। इन शर्तों को पूरा किए बिना अमेरिका जब्त संपत्तियों को पूरी तरह से हस्तांतरित करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव और 'टोल टैक्स' की मांग दूसरी ओर, तेहरान ने भी वार्ता की मेज पर अपना 10 सूत्रीय प्लान रखा है, जो काफी कड़ा माना जा रहा है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि अमेरिका को सबसे पहले उन सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना चाहिए जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। ईरान की सबसे विवादित मांग होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण संप्रभुता और नियंत्रण की है। ईरान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय होर्मुज पर उसके एकाधिकार को स्वीकार करे और वहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से 'टोल टैक्स' वसूलने के उसके अधिकार को मान्यता दे। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि टोल टैक्स की यह मांग अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौपरिवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) के वैश्विक सिद्धांतों के खिलाफ है। इस्लामाबाद वार्ता और वैश्विक तेल बाजार पर असर इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक वैश्विक राजनीति और तेल बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनती है और होर्मुज का संकट गहराता है, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। फिलहाल, अमेरिका की ओर से संपत्ति रिलीज करने की हामी को एक 'सॉफ्ट सिग्नल' के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और लंबी-चौड़ी शर्तों की सूची ने इस पूरी डील को अधर में लटका दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस्लामाबाद की चर्चाओं पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मध्य पूर्व में युद्ध के बादल छंटेंगे या तनाव की एक नई लहर शुरू होगी।
चक्रधरपुर, चाईबासा। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में इन दिनों नकली एनसीईआरटी (NCERT) किताबों का अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर पैर पसार रहा है। मुनाफाखोरों द्वारा स्कूली बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए बाजार में घटिया गुणवत्ता वाली पायरेटेड पुस्तकें बेची जा रही हैं। पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा, चक्रधरपुर और जमशेदपुर जैसे प्रमुख शहरों में प्रशासन की नाक के नीचे यह खेल धड़ल्ले से जारी है, जिससे न केवल अभिभावकों की मेहनत की कमाई लूटी जा रही है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पायरेसी माफिया के निशाने पर स्कूली छात्र बाजार में एनसीईआरटी पुस्तकों की अत्यधिक मांग और समय पर आपूर्ति न होने का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, कक्षा 9 की नई अंग्रेजी पुस्तक 'कावेरी' सहित अन्य मुख्य विषयों की पायरेटेड कॉपियां बाजार में भर गई हैं। बुक सेलर्स बिना किसी डर के इन किताबों को असली बताकर बेच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में मेरठ और सहारनपुर जैसे शहरों से करोड़ों रुपये की नकली किताबें बरामद की जा चुकी हैं, जिनके तार अब झारखंड के ग्रामीण और शहरी इलाकों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। कैसे पहचानें असली और नकली का अंतर? पायरेटेड किताबों के इस गोरखधंधे से बचने के लिए अभिभावकों को कुछ तकनीकी बारीकियों पर ध्यान देना होगा। असली एनसीईआरटी पुस्तक का कागज हल्का पीलापन (Off-white) लिए होता है और उसकी सतह काफी चिकनी होती है, जबकि नकली किताबों में या तो बहुत अधिक सफेद या फिर बेहद खुरदरे रद्दी कागज का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, असली किताब के पन्नों पर भारतीय मुद्रा (नोट) की तरह वॉटरमार्क होता है, जिसे रोशनी में देखा जा सकता है। नकली प्रतियों में अक्सर अक्षर धुंधले होते हैं, चित्र और नक्शे साफ नहीं दिखते और कवर पर लगा होलोग्राम भी गायब रहता है। इन 4 प्रमुख पहचानों के जरिए आप धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकते हैं। सिर्फ सरकारी किताबों की ही पायरेसी क्यों? यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर माफिया केवल एनसीईआरटी को ही निशाना क्यों बनाते हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण सीबीएसई बोर्ड के छात्रों की विशाल संख्या है। आईसीएसई (ICSE) की पुस्तकें काफी महंगी होती हैं, लेकिन उनकी मांग सीमित है और प्राइवेट कंपनियां पायरेसी को लेकर अधिक सतर्क रहती हैं। इसके विपरीत, एनसीईआरटी की पुस्तकें देश के किसी भी हिस्से में आसानी से बेची जा सकती हैं। मुनाफाखोरों को पता है कि सरकारी किताबों की निगरानी में होने वाली ढिलाई का फायदा उठाकर वे मोटा कमीशन कमा सकते हैं। अभिभावकों के लिए 'एक्शन प्लान' और कानूनी प्रावधान एनसीईआरटी का कंटेंट कॉपीराइट पायरेसी एक्ट के तहत पूरी तरह सुरक्षित है। बिना अनुमति किताब छापना या बेचना एक दंडनीय अपराध है, जिसमें जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे किताब खरीदते समय दुकानदार से पक्का बिल जरूर मांगें और पुस्तक पर दुकान की मुहर लगवाएं। यदि कोई दुकानदार बिल देने से मना करता है, तो इसकी शिकायत तुरंत स्थानीय पुलिस, एसडीओ कार्यालय या एनसीईआरटी के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए। नई किताबों पर दिए गए क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करके भी उनकी प्रमाणिकता की जांच की जा सकती है। प्रशासन को भी चाहिए कि सत्र शुरू होते ही ऐसी दुकानों पर औचक छापेमारी करे ताकि शिक्षा के नाम पर चल रही इस लूट पर लगाम लगाई जा सके।
उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक साथ 1,086 न्यायिक अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। इस व्यापक ट्रांसफर को राज्य की अदालतों में लंबित मामलों को कम करने और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। किन-किन जजों का हुआ ट्रांसफर? जारी आदेश के अनुसार: 408 एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज (ADJ) 277 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) 401 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) इन सभी न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। यह हाल के दिनों में दूसरी बार है जब इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफर किए गए हैं। क्यों किया गया इतना बड़ा फेरबदल? सूत्रों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य: जिला अदालतों में कामकाज को सुव्यवस्थित करना लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाना न्यायिक प्रशासन में संतुलन और दक्षता बढ़ाना न्यायपालिका में समय-समय पर इस तरह के ट्रांसफर सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में तबादले यह संकेत देते हैं कि सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। किसके आदेश पर हुआ फैसला? यह पूरा फैसला अरुण भंसाली के निर्देश पर लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी न्यायिक अधिकारी 15 अप्रैल तक अपनी नई पोस्टिंग पर कार्यभार संभाल लें। प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव इस ट्रांसफर के तहत कुछ अहम पदों पर भी बदलाव किए गए हैं। बुलंदशहर के ADJ वरुण मोहित निगम को हाई कोर्ट में रजिस्ट्रार (लिस्टिंग) नियुक्त किया गया है, जो न्यायिक कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े पैमाने के ट्रांसफर से: मामलों के निपटारे में तेजी आएगी न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी अलग-अलग जिलों में कार्यभार संतुलित होगा हालांकि, इतने बड़े बदलाव के बाद शुरुआती दिनों में प्रशासनिक समन्वय की चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।