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Yogi Expands UP Cabinet Ahead of Polls

योगी सरकार का बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार: भूपेंद्र चौधरी और मनोज पाण्डेय समेत 8 नेताओं को मिली नई जिम्मेदारी

surbhi मई 18, 2026 0
Yogi Adityanath with newly inducted ministers during Uttar Pradesh cabinet expansion ceremony at Raj Bhavan.
UP Cabinet Expansion Yogi Government 2026

Yogi Adityanath सरकार ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। रविवार को राजभवन में आयोजित समारोह में 8 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।

यह मंत्रिमंडल विस्तार 10 मई को तय किया गया था, जिसके बाद से विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज थीं। अब शपथ ग्रहण के साथ ही नए मंत्रियों को विभाग भी सौंप दिए गए हैं। राजनीतिक जानकार इस फेरबदल को आगामी चुनावों की रणनीति और सामाजिक-संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं।

समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने विभागों की घोषणा की।

भूपेंद्र चौधरी को MSME, मनोज पाण्डेय को खाद्य विभाग

मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे चर्चित नाम Bhupendra Chaudhary का रहा। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री बनाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं भाजपा नेता Manoj Kumar Pandey को खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग का प्रभार दिया गया है।

स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां

सरकार ने स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया है।

  • अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया।
  • सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी मिली।

सरकार का कहना है कि इन विभागों में नए चेहरों के आने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और बेहतर समन्वय देखने को मिलेगा।

राज्य मंत्रियों को विकास से जुड़े विभाग

राज्य मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं:

  • कृष्णा पासवान को पशुधन एवं डेयरी विकास विभाग
  • कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग
  • सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग
  • हंस राज विश्वकर्मा को MSME मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है, जहां वे भूपेंद्र चौधरी के साथ काम करेंगे।

चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा विस्तार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा है। भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी इस फेरबदल में दिखाई दे रही है।

योगी सरकार के इस कदम को प्रशासनिक मजबूती और चुनावी तैयारी दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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केरल में ‘वंदे मातरम’ विवाद: शपथ ग्रहण समारोह में पूरा गीत गाने पर लेफ्ट और बीजेपी आमने-सामने

Kerala में कांग्रेस नेतृत्व वाली UDF सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर वामपंथी दलों और Bharatiya Janata Party (बीजेपी) के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। वामपंथी दलों ने समारोह में राष्ट्रीय गीत के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताते हुए इसे भारत के बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ बताया है। वहीं बीजेपी ने लेफ्ट पार्टियों पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। CPIM और CPI ने क्यों जताई आपत्ति? Communist Party of India (Marxist) (CPIM) ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया। बाद में Communist Party of India (CPI) ने भी इसका समर्थन किया। CPI नेता Binoy Viswam ने कहा कि इतिहास में ‘वंदे मातरम’ की कुछ पंक्तियां इसलिए हटाई गई थीं क्योंकि वे एक विशेष धार्मिक सोच को बढ़ावा देती थीं। उन्होंने कहा कि Jawaharlal Nehru और Mahatma Gandhi के धर्मनिरपेक्ष भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप केवल सीमित हिस्से को ही स्वीकार किया गया था। CPIM राज्य सचिवालय ने भी कहा कि 1937 में कांग्रेस कार्य समिति ने माना था कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन बहुलवादी समाज के लिए उपयुक्त नहीं है। बाद में संविधान सभा ने 1950 में स्पष्ट किया था कि गीत की केवल पहली आठ पंक्तियों को ही आधिकारिक राष्ट्रीय गीत माना जाएगा। पार्टी का कहना है कि गीत के कुछ हिस्सों में धार्मिक संदर्भ हैं, इसलिए सरकारी कार्यक्रमों में पूरा गीत गाना भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा के खिलाफ माना जा सकता है। केरल सरकार ने क्या कहा? विवाद बढ़ने के बाद केरल सरकार के सूत्रों ने खुद को इससे अलग करते हुए कहा कि शपथ ग्रहण समारोह के आयोजन की जिम्मेदारी लोक भवन के पास थी और सरकार की इसमें सीधी भूमिका नहीं थी। बीजेपी का पलटवार केरल बीजेपी अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar ने वामपंथी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि मार्क्सवाद एक आयातित विचारधारा है जो भारतीय संस्कृति और मूल्यों से मेल नहीं खाती। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी दल जमात-ए-इस्लामी और SDPI जैसी कट्टरपंथी ताकतों को खुश करने के लिए राष्ट्रीय गीत का विरोध कर रहे हैं। राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “राजनीतिक अस्तित्व के लिए भारत का अपमान करना धर्मनिरपेक्षता नहीं है। यह खतरनाक तुष्टीकरण की राजनीति और कट्टरपंथ को बढ़ावा देना है।” बंगाल का उदाहरण भी दिया CPIM ने यह भी सवाल उठाया कि West Bengal में बीजेपी नेता Suvendu Adhikari के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ नहीं गाया गया था, तो फिर केरल में ऐसा क्यों किया गया। वाम दलों का कहना है कि सरकारों को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो देश की बहुलवादी और धर्मनिरपेक्ष परंपराओं को कमजोर कर सकते हैं।  

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Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लाखों छात्रों के भविष्य से ऊपर “तुच्छ राजनीति” को तरजीह दी है। दरअसल, राहुल गांधी ने NEET-UG पेपर लीक विवाद, CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया और तीन-भाषा नीति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan पर छात्रों को “विफल” करने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री Narendra Modi से लाखों छात्रों का भविष्य “बर्बाद” करने के लिए माफी मांगने की मांग की थी। बीजेपी का जवाब- “छात्रों के भविष्य पर राजनीति” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Gaurav Bhatia ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों की चिंता करने के बजाय राजनीतिक अवसरवाद में लगा हुआ है। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर छात्रों के भविष्य के बजाय तुच्छ राजनीति को चुना है।” भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस रचनात्मक सुझाव देने की बजाय केवल राजनीतिक नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दूसरों को जवाबदेही का पाठ पढ़ाने से पहले कांग्रेस को अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और संस्थागत विफलताओं का जवाब देना चाहिए। “मोदी सरकार ने की त्वरित कार्रवाई” भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि मोदी सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में तेजी से कार्रवाई की है और जांच एजेंसियों ने कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में चल रही कार्रवाई यह साबित करती है कि सरकार अपराधियों को संरक्षण नहीं देती। गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कांग्रेस की रणनीति छात्रों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना है।” उन्होंने आगे कहा, “यह कोई लीपापोती नहीं है, न ही चुप्पी। यह निर्णायक और संस्थागत कार्रवाई है।” शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा राजनीतिक दबाव NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बनी हुई है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, जबकि केंद्र सरकार और भाजपा दावा कर रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों में बड़ा बहस का विषय बना रह सकता है।  

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केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना दिए विदेश यात्रा करते हैं, जबकि नियमों के तहत सांसदों को अपनी यात्रा की जानकारी पहले देना अनिवार्य है। ‘तीन हफ्ते पहले सूचना देना जरूरी’ किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी सांसद को विदेश यात्रा से कम से कम तीन सप्ताह पहले लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को इसकी सूचना देनी होती है। उन्होंने कहा, “यह अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सूचना देने का नियम है। सांसद विदेश यात्रा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।” राहुल गांधी की यात्राओं पर उठाए सवाल रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी 2004 से सांसद हैं और अब तक उनकी 54 विदेश यात्राएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि केवल यात्राओं की संख्या ही नहीं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वह विदेश में कितने दिन रहे और उन यात्राओं पर कितना खर्च हुआ। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई सांसद विदेश में किसी संस्था या संगठन की ओर से आतिथ्य स्वीकार करता है, तो वह मामला Foreign Contribution Regulation Act यानी FCRA के दायरे में आता है और इसकी जानकारी गृह मंत्रालय को देना जरूरी होता है। ‘कांग्रेस नियमों का पालन करे’ किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि विदेश यात्रा से पहले लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने इतनी विदेश यात्राएं क्यों कीं, किसने उन्हें आमंत्रित किया और विदेश में उनके खर्च का वहन किसने किया।” ‘कानून सबके लिए समान’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यात्रा करना किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, लेकिन सभी नागरिकों और खासकर सांसदों को देश के कानूनों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में जांच या कार्रवाई होती है, तो इसे किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं माना जाना चाहिए। “कानून सबके लिए बराबर है,” रिजिजू ने कहा।   

surbhi मई 15, 2026 0
Fuel station display showing increased petrol and diesel prices amid political reactions in India

पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही कांग्रेस का हमला, बोली- “महंगाई मैन मोदी, चुनाव खत्म अब वसूली शुरू”

Udhayanidhi Stalin speaking in Tamil Nadu Assembly during controversy over his Sanatan Dharma remarks.

उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान पर फिर विवाद, बीजेपी ने साधा निशाना

TVK leaders JCD Prabhakar and M Ravishankar elected as Tamil Nadu Assembly Speaker and Deputy Speaker.

टीवीके विधायक जेसीडी प्रभाकर बने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष, एम रविशंकर उपाध्यक्ष निर्वाचित

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Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
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भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0

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