लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश सरकार ने पत्रकारों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ हासिल करना और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार पत्रकारों के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है। इसके माध्यम से आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन, लंबित मामलों का निस्तारण और आवेदन की निगरानी पहले से अधिक सरल और पारदर्शी होगी। सूचना निदेशक विशाल सिंह ने बताया सूचना निदेशक विशाल सिंह ने बताया कि जिन पत्रकारों ने पहले ही आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया है, वे अब beneficiary.nha.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं। यदि आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि या जानकारी में संशोधन की आवश्यकता है, तो संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से संपर्क कर सुधार कराया जा सकता है। इसके बाद कार्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार उन पत्रकारों के लिए भी नई व्यवस्था ला रही है, जिनका अब तक आवेदन नहीं हो सका है या किसी कारण से कार्ड जारी नहीं हुआ है। जल्द शुरू होने वाले विशेष ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पत्रकार अपने जिले के जिला सूचना अधिकारी की सहायता से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल शुरू होने की जानकारी सभी जिलों को उपलब्ध करा दी जाएगी। आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलता है। सरकार का मानना है कि आवेदन प्रक्रिया सरल होने से अधिक से अधिक पात्र पत्रकार इस योजना से जुड़ सकेंगे और जरूरत के समय बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए यह पहल आर्थिक सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल धन की चोरी नहीं हुई, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। इस बीच मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा? राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रावण ने केवल माता सीता का हरण किया था, लेकिन यहां राम मंदिर के दानपात्र से श्रद्धालुओं की आस्था ही लूट ली गई। उन्होंने कहा, "रावण ने माता जानकी का हरण किया था, जिसका परिणाम उसके पूरे परिवार के विनाश के रूप में सामने आया। करोड़ों लोगों द्वारा भगवान राम के मंदिर में श्रद्धा से दिए गए दान में चोरी करने वालों को कानून का दंड भी मिलेगा और ईश्वर का न्याय भी मिलेगा।" 'जांच आगे बढ़ेगी तो और लोग भी पकड़े जाएंगे' धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। उनके अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर और भी बहुत कुछ कह सकते हैं, लेकिन फिलहाल इतना ही कहना चाहते हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को अपने कृत्यों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में राम मंदिर दान गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर दान गबन प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। विपक्ष मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है। चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि उसे इस संबंध में किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नहीं है। योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच जारी, अदालत में तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त रकम और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी (विशेष जांच दल) की प्रारंभिक जांच के आधार पर FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर यह कार्रवाई की गई। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत से पहले एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच में दान राशि के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया था। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। सभी 8 नामजद आरोपी गिरफ्तार सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उनसे पूछताछ की जा रही है और गिरफ्तारी से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। FIR में इन लोगों के नाम शामिल FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी मामले में शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला? पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की भी विस्तार से जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विशेष जांच की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। जांच जारी, अन्य लोगों की भूमिका भी होगी स्पष्ट पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और अन्य सबूतों की पड़ताल कर रही हैं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद जिले को 658 करोड़ रुपये की 81 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और डबल इंजन की सरकार पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ अब सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। 'अब क्लर्क और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को क्लर्कों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार की सबसे बड़ी पहचान पारदर्शिता है। किसानों, महिलाओं और गरीबों को योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है। अब किसी को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।" पीएम किसान सम्मान निधि का किया जिक्र सीएम योगी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,300 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 'नीयत साफ हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं' मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो नीतियां और फैसले स्वतः जनता के हित में परिणाम देने लगते हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से विकास योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर रही हैं और समाज के हर वर्ग को उनका लाभ मिल रहा है।" विकास परियोजनाओं से क्षेत्र को मिलेगी नई गति सीएम योगी ने कहा कि फिरोजाबाद में शुरू की गई नई विकास परियोजनाएं क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देंगी। इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 'एक जिला, एक उत्पाद' से यूपी को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मिलते हैं, तो उन्हें उत्तर प्रदेश के उत्पाद उपहार स्वरूप भेंट करते हैं। यह प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान का प्रमाण है।" विकास और सुशासन के मॉडल को आगे बढ़ा रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुशासन और विकास साथ-साथ चल रहे हैं। डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर जिले को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और जनता तक योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचाना है।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के छह लोकसभा सांसद आधिकारिक तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे गुट ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' की बड़ी सफलता करार दिया है। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत और बढ़ गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और गहरी हो गई है। एकनाथ शिंदे बोले- 'ऑपरेशन टाइगर' हुआ सफल उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी छह बागी सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने के साथ ही 'ऑपरेशन टाइगर' सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विस्तार नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौन-कौन से सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल? शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में शामिल हैं: Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Sanjay Jadhav (परभणी) Sanjay Dina Patil (मुंबई उत्तर-पूर्व) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omprakash Raje Nimbalkar (धाराशिव) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) ये सभी सांसद कुछ दिन पहले आयोजित शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। दीपक केसरकर बोले- NDA और होगा मजबूत शिवसेना नेता Deepak Kesarkar ने सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे NDA की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, "यह कदम महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत बढ़ाएगा और आने वाले चुनावों में महायुति को और मजबूती प्रदान करेगा।" उद्धव ठाकरे ने बुलाई थी आपात बैठक सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से पहले Uddhav Thackeray ने मुंबई में पार्टी नेताओं की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक में संगठनात्मक स्थिति, विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी में संभावित टूट को रोकने पर चर्चा हुई थी। छह सांसदों के जाने से शिवसेना (UBT) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है। 2022 के बाद फिर बड़ा राजनीतिक झटका गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। अब लोकसभा सांसदों के इस दलबदल ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विधान परिषद चुनाव में भी महायुति की बड़ी जीत इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में भी महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। 17 सीटों में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने अपनी राजनीतिक बढ़त साबित की। सीटों का प्रदर्शन: भाजपा: 11 सीटें शिवसेना (शिंदे): 3 सीटें एनसीपी (अजित पवार): 2 सीटें नासिक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार Gokul Gite ने शिवसेना उम्मीदवार Narendra Darade को हराकर महायुति के लिए एकमात्र झटका दिया। किन नेताओं ने दर्ज की जीत? निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों में शामिल हैं: Ravindra Phatak Dushyant Chaturvedi Aniket Tatkare Vikram Kakade Arun Lakhani Prajakt Tanpure वहीं भाजपा के अन्य विजयी उम्मीदवारों में सुहास शीर्षत, अविनाश ब्राह्मणकर, धैर्यशील कदम, राजेंद्र राउत, बसवराज पाटिल, राजीव पोतदार, नंदकिशोर महाजन, प्रवीण पोटे और अमर राजुरकर शामिल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और विधान परिषद चुनाव में महायुति की बड़ी जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। जहां NDA का कुनबा और मजबूत दिखाई दे रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी के अस्तित्व और संगठनात्मक एकजुटता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
लखनऊ, एजेंसियां। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की जांच तेज हो गई है। मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने के लिए पूरी इमारत को सील कर दिया। हादसे में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन हर पहलू की गहन जांच कर रहा है। शुरुआती जांच में एसी के कंप्रेसर फटने और शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एसआईटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी अलग से पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। चार अधिकारी निलंबित, चार आरोपी गिरफ्तार प्राथमिक जांच में लापरवाही सामने आने पर बिजली विभाग, फायर विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने इमारत मालिक, पेट शॉप संचालक, एनीमेशन सेंटर संचालक और एक किरायेदार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। वेयरहाउस से शुरू हुई थी आग सोमवार दोपहर अलीगंज स्थित बहुमंजिला इमारत के प्रथम तल पर बने वेयरहाउस में आग लगने की सूचना मिली थी। देखते ही देखते आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। दूसरी और तीसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर, एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग जोन संचालित थे, जहां कई छात्र फंस गए। 15 छात्रों की मौत, कई घायल दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने घंटों तक रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन तब तक 15 छात्रों की जान जा चुकी थी। कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि जान बचाने के लिए इमारत से कूदने वाले नौ छात्रों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद अब इमारत से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्रशासनिक कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोप में ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) का आदेश जारी किया गया था। दो महीने से भी कम समय के भीतर यह आदेश वापस ले लिया गया, जिसके बाद प्रस्तावित कार्रवाई रोक दी गई। 1980 में हुआ था भवन का आवंटन अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत रामेश्वर सहाय के पुत्र विजय कुमार को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा उन्हें सौंप दिया गया। बाद में वर्ष 2005 में विक्रय विलेख के माध्यम से यह भवन विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। इसके बाद 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह संपत्ति वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दी। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने दोनों खरीदारों के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। लगभग 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाली इस इमारत का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। अवैध निर्माण पर दर्ज हुआ था मुकदमा दस्तावेजों के अनुसार, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की शिकायत सामने आई। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेंद्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अवैध निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महज दो महीने के भीतर, 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया और इमारत के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई रोक दी गई। अब उठ रहे बड़े सवाल अलीगंज अग्निकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था, तो आखिर किन परिस्थितियों में उसे वापस लिया गया? क्या उस समय नियमों की अनदेखी हुई? क्या प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती गई? इन सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियों और प्रशासनिक रिपोर्ट पर निर्भर करेंगे। इस बीच, हादसे में 15 लोगों की मौत ने भवन सुरक्षा, अवैध निर्माण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। घटना के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की गहन जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बुलाई हाईलेवल बैठक, SIT के गठन के निर्देश किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में घायलों का हालचाल जानने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास, 5 कालीदास मार्ग पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार के नेतृत्व में दो सदस्यीय एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए। एसआईटी पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। चार आरोपी गिरफ्तार अग्निकांड मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं— रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज) वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर, सीतापुर रोड, लखनऊ) तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ) सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव, लखनऊ) पुलिस इन सभी से पूछताछ कर आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही के पहलुओं की जांच कर रही है। चार अधिकारियों पर गिरी गाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं— गौरव कुमार, एक्सईएन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम कमलेन्द्र कुमार सिंह, प्रभारी FSSO, फायर विभाग, इंदिरा नगर अनिल कुमार, सहायक अभियंता (AE), लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रमोद पांडे, जूनियर इंजीनियर (JE), लखनऊ विकास प्राधिकरण सरकार का कहना है कि प्रथम दृष्टया लापरवाही के संकेत मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। अलीगढ़ में थे मुख्यमंत्री, तुरंत रद्द किए कार्यक्रम हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ दौरे पर थे और एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने मंच से ही अपने शेष कार्यक्रम रद्द करने की घोषणा की और तत्काल लखनऊ रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे। घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। मृतकों के परिजनों को 5 लाख, घायलों को 50 हजार की सहायता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 50-50 हजार रुपये की वित्तीय मदद देने का भी ऐलान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि यदि निष्पक्ष और ईमानदार जांच हुई, तो राज्य सरकार तक संकट में पड़ सकती है। 'राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा गायब' अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा, कीमती गहने और हीरे-जवाहरात कथित रूप से गायब हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 200 करोड़ रुपये नकद, हीरे और आभूषणों से भरे कई बक्सों के गायब होने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। केजरीवाल ने कहा, "न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, न प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोई कार्रवाई की और न ही सीबीआई ने जांच शुरू की।" एसआईटी कर रही है मामले की जांच राम मंदिर दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल कर रहा है। जांच एजेंसी ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी रोजाना पूछताछ और जांच से जुड़ी रिपोर्ट डिजिटल रूप से सुरक्षित कर रही है और उसकी दैनिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है। आभूषण और कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट पदाधिकारी आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड को लेकर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। कुंभ मेले के दौरान सबसे अधिक दान, जांच के दायरे में कई पहलू जानकारी के मुताबिक, कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा हिस्सा कुंभ मेले के दौरान सामने आया, जब प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां कुछ ही घंटों में भर जा रही थीं। एसआईटी की जांच केवल दान राशि के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है। जांच के दायरे में मंदिर ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 71 एकड़ भूमि बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्ष ने योगी सरकार और मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक केजरीवाल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जांच जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
लखनऊ/गोरखपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस बार समाजवादी पार्टी गोरखपुर में बीजेपी को शून्य पर लाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी। गोरखपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारी लखनऊ में पार्टी की बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जल्द ही गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल जल्द ही सम्मेलन की तारीख की घोषणा करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा, "हमने संकल्प लिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर में बीजेपी को कड़ी चुनौती देंगे। जहां भी हमारी कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा।" कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी अपने प्रत्येक कार्यकर्ता के सम्मान और उनके सुख-दुख में भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के दम पर पार्टी 2027 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था पर योगी सरकार को घेरा अखिलेश यादव ने योगी सरकार के दस साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही है। उन्होंने कहा, "भाजपा ने झूठे वादे करके जनता को गुमराह करने का काम किया है। प्रदेश के लोग बदलाव चाहते हैं और समाजवादी पार्टी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए तैयार है।" ओपी राजभर के बयान पर भी किया पलटवार सपा प्रमुख ने मंत्री ओपी राजभर के हालिया बयान पर भी तंज कसा। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, "दाना और गाना, कब तक चलेगा ये अफसाना।" अखिलेश यादव के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर समेत पूर्वांचल में सपा की आक्रामक चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें गोरखपुर में होने वाले प्रस्तावित कार्यकर्ता सम्मेलन और सपा की आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।
अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस बीच ट्रस्ट से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के अचानक सार्वजनिक रूप से सामने आकर बयान देने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पिछले कई दिनों से चुप्पी साधे टिन्नू के वीडियो बयान और मीडिया इंटरव्यू के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि यह कदम किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर जांच सूत्रों के मुताबिक जांच के दायरे में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, टिन्नू यादव और मंदिर निर्माण से जुड़े गोपाल राव सहित कई लोग हैं। जांच एजेंसियां दान राशि के प्रबंधन, उसकी गणना और निगरानी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। बताया जा रहा है कि एसआईटी कई अधिकारियों और कर्मचारियों से बार-बार पूछताछ कर रही है। सीसीटीवी फुटेज और बैंक प्रक्रिया पर भी सवाल जांच के दौरान एसआईटी को ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे सीसीटीवी फुटेज से कथित छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके अलावा दान राशि की गणना प्रक्रिया में शामिल बैंक कर्मियों की भूमिका और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार बैंक कर्मचारी ट्रस्ट पदाधिकारियों के दबाव में होने के कारण कई मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सके। 200 से अधिक लोगों से होगी पूछताछ एसआईटी अब तक 125 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है और करीब 200 लोगों की सूची तैयार की गई है। टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ हुई है, जिसमें उन्होंने दान राशि के प्रबंधन में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कुछ अन्य लोगों की जिम्मेदारी का उल्लेख किया है। सीएम योगी का अयोध्या दौरा इसी बीच 19 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा प्रस्तावित है। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी की जांच जारी है। वहीं, इस मामले में एफआईआर दर्ज होगी या जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। शहरी परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार, जीसीसी मॉडल पर चलेगी योजना सरकार ने बसों के संचालन के लिए ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल को मंजूरी दी है। इसके तहत निजी कंपनियां बसों की खरीद, संचालन, रखरखाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी संभालेंगी। आगरा से वाराणसी तक 18 शहर होंगे योजना का हिस्सा योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा-जेवर में इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। यात्रियों को मिलेगी एसी, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा सुविधा नई बसों के संचालन से यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। सरकार का लक्ष्य यात्रा को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और समयनिष्ठ बनाना है। निजी कंपनियां करेंगी संचालन, 12 साल का होगा अनुबंध जीसीसी मॉडल के तहत चयनित ऑपरेटरों को बसों के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी दी जाएगी। वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से अनुबंध की अवधि 12 वर्ष तय की गई है। ई-बस खरीद पर सरकार देगी करोड़ों का अनुदान योजना के तहत 12 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर बस पर 35 लाख रुपये प्रति वाहन की दर से अनुदान दिया जाएगा। नगर निगम मुफ्त देंगे डिपो की जमीन बस डिपो और चार्जिंग सुविधाओं के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदूषण घटाने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकारी खजाने पर कम पड़ेगा बोझ, निजी निवेश से होगा विकास इस परियोजना में निजी निवेश को शामिल करने से सरकार पर वित्तीय दबाव कम होगा, जबकि आधुनिक परिवहन सुविधाओं का तेजी से विस्तार संभव हो सकेगा। पहले से चल रहीं 743 ई-बसें, अब होगा बड़ा विस्तार वर्तमान में प्रदेश के 15 नगर निगम क्षेत्रों में 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। नई योजना के लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े शहरी इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।
Uttar Pradesh में पंचायत चुनाव टलने के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बड़ा फैसला लिया है। अब नए चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम प्रधान ही पंचायतों का कामकाज संभालेंगे। प्रदेश की मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो गया। इसके बाद सरकार ने तय किया है कि नई पंचायतों के गठन या अधिकतम 6 महीने तक मौजूदा प्रधान प्रशासक के रूप में काम करेंगे। 27 मई से प्रशासक बनेंगे ग्राम प्रधान मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। 27 मई से ग्राम प्रधान पंचायतों में प्रशासकीय जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हें केवल सामान्य और रोजमर्रा के काम करने की अनुमति होगी। वे कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। अगर किसी जरूरी मामले में बड़ा निर्णय लेना पड़ा तो प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए जिलाधिकारी को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही फैसला लागू होगा। क्यों टले पंचायत चुनाव? सरकार ने हाल ही में पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने हेतु पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है। माना जा रहा है कि आयोग नवंबर तक रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद आरक्षण पर आपत्तियां और उनकी सुनवाई की प्रक्रिया भी होगी। इसी बीच फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव अब अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। वोटर लिस्ट भी नहीं हुई तैयार पंचायत चुनाव में देरी की एक वजह अंतिम मतदाता सूची का तैयार न होना भी है। जानकारी के मुताबिक, फाइनल वोटर लिस्ट 10 जून को जारी की जाएगी। प्रदेश में पंचायत चुनाव के साथ जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत यानी बीडीसी चुनाव भी होने हैं, इसलिए पूरी प्रक्रिया में अभी और समय लग सकता है।
उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पिछले 9 वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रदेश में 17 हजार से अधिक पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) हुए, जिनमें 289 कुख्यात अपराधी मारे गए। आंकड़ों के मुताबिक, योगी सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने कुल 17,043 एनकाउंटर किए। इन कार्रवाइयों में 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 11,834 अपराधी घायल हुए। यानी प्रदेश में औसतन हर दिन करीब 5 पुलिस मुठभेड़ हुईं। पुलिसकर्मियों ने भी दी कुर्बानी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए, जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए। सरकार का दावा है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अपराधियों के मन में भय और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। मेरठ जोन एनकाउंटर में सबसे आगे प्रदेश में सबसे अधिक एनकाउंटर Meerut जोन में दर्ज किए गए। यहां पुलिस ने 4,813 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं। इन कार्रवाइयों में: 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 3,513 अपराधी घायल हुए 97 कुख्यात अपराधी मारे गए मुठभेड़ों के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए। वाराणसी और आगरा जोन भी शीर्ष पर Varanasi जोन में 1,292 एनकाउंटर हुए, जिनमें: 2,426 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई 29 अपराधी मारे गए 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए वहीं Agra जोन एनकाउंटर के मामले में तीसरे स्थान पर रहा। यहां: 2,494 मुठभेड़ हुईं 5,845 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 24 अपराधी मारे गए 968 अपराधी और 62 पुलिसकर्मी घायल हुए कमिश्नरेट में गाजियाबाद सबसे आगे कमिश्नरेट स्तर पर Ghaziabad सबसे आगे रहा, जहां 789 मुठभेड़ों में 18 अपराधियों को मार गिराया गया। इसके अलावा: कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12 अपराधी ढेर हुए लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़ों में 12 अपराधी मारे गए प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधी मारे गए सरकार का दावा: अपराधियों में बढ़ा भय योगी सरकार का कहना है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क और अवैध वसूली के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की गई है। सरकार ने एनकाउंटर के साथ-साथ: गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई संपत्ति कुर्की NSA जैसे सख्त कानूनों का इस्तेमाल भी प्रभावी ढंग से लागू किया है। सरकारी दावे के अनुसार, पुलिस की तेज और कठोर कार्रवाई के कारण कई अपराधियों ने प्रदेश छोड़ दिया या अपराध से दूरी बना ली।
Yogi Adityanath सरकार ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। रविवार को राजभवन में आयोजित समारोह में 8 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। यह मंत्रिमंडल विस्तार 10 मई को तय किया गया था, जिसके बाद से विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज थीं। अब शपथ ग्रहण के साथ ही नए मंत्रियों को विभाग भी सौंप दिए गए हैं। राजनीतिक जानकार इस फेरबदल को आगामी चुनावों की रणनीति और सामाजिक-संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं। समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने विभागों की घोषणा की। भूपेंद्र चौधरी को MSME, मनोज पाण्डेय को खाद्य विभाग मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे चर्चित नाम Bhupendra Chaudhary का रहा। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री बनाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं भाजपा नेता Manoj Kumar Pandey को खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग का प्रभार दिया गया है। स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां सरकार ने स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया है। अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया। सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी मिली। सरकार का कहना है कि इन विभागों में नए चेहरों के आने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और बेहतर समन्वय देखने को मिलेगा। राज्य मंत्रियों को विकास से जुड़े विभाग राज्य मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं: कृष्णा पासवान को पशुधन एवं डेयरी विकास विभाग कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग हंस राज विश्वकर्मा को MSME मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है, जहां वे भूपेंद्र चौधरी के साथ काम करेंगे। चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा विस्तार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा है। भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी इस फेरबदल में दिखाई दे रही है। योगी सरकार के इस कदम को प्रशासनिक मजबूती और चुनावी तैयारी दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
लखनऊ में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई Prateek Yadav की अंतिम यात्रा गुरुवार को लखनऊ में भारी भीड़ और गमगीन माहौल के बीच निकाली गई। पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को बैकुंठधाम श्मशान घाट के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता और कई बड़े राजनीतिक नेता शामिल हुए। शव वाहन पर लगी थी पेट्स के साथ तस्वीर प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान शव वाहन को फूलों से सजाया गया था। वाहन पर उनके पालतू जानवरों के साथ की तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही उनके आवास पर जुटे रहे। कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि Dimple Yadav ने प्रतीक यादव को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya, मंत्री Om Prakash Rajbhar और भाजपा नेता प्रदीप सिंह समेत कई नेताओं ने अपर्णा यादव के आवास पहुंचकर शोक व्यक्त किया। बुधवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी अपर्णा यादव के घर पहुंचे थे और परिवार को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई ये बात जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव का बुधवार सुबह निधन हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जमने यानी पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण कार्डियक अरेस्ट से मौत होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में शरीर और सिर पर कुछ चोटों के निशान भी मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें कुछ चोटें पुरानी बताई जा रही हैं, जबकि कुछ हाल की थीं। आगे की जांच के लिए विसरा और अन्य नमूनों को सुरक्षित रखा गया है। राजनीति से दूर रखते थे खुद को प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की Leeds University से पढ़ाई की थी। यादव परिवार से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी। वे रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे और लग्जरी कारों के शौकीन माने जाते थे। उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी समर्थकों और यादव परिवार में शोक की लहर है।
नौ वर्षों की उपलब्धियों पर बोले मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ‘UP को बदलने के 9वें वर्ष’ कार्यक्रम में राज्य के विकास मॉडल और सुशासन की उपलब्धियों को विस्तार से सामने रखा। लखनऊ में आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब तेजी से विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई है। सात शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल बनी नई ताकत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश की बढ़ती क्षमता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, रोजगार और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। किसानों को निशुल्क पानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगभग 50 लाख हेक्टेयर भूमि तक किसानों को निशुल्क सिंचाई जल उपलब्ध करा रही है। नहरों के विस्तार और ट्यूबवेल नेटवर्क को मजबूत करने से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना है। कानून-व्यवस्था में सुधार का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले नौ वर्षों में किए गए प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
तेज आंधी और बारिश ने मचाई तबाही Uttar Pradesh में बुधवार को आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचा दी। अलग-अलग जिलों में पेड़ गिरने, दीवार ढहने और बिजली गिरने की घटनाओं में 96 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा असर पूर्वांचल और प्रयागराज मंडल के जिलों में देखने को मिला, जहां तेज हवाओं और बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। भदोही और प्रयागराज में सबसे ज्यादा मौतें मृतकों में सबसे अधिक 18 लोगों की जान Bhadohi में गई, जबकि Prayagraj में 17 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा मिर्जापुर में 15, फतेहपुर में 10, उन्नाव और बदायूं में 6-6, प्रतापगढ़ और बरेली में 4-4 लोगों की जान गई। कई अन्य जिलों में भी मौतों की खबर सामने आई है। गांवों में ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों में तेज तूफान के कारण कच्चे मकान और टीन शेड उड़ गए। कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही। सड़कों पर पेड़ गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ और कई मार्गों पर लंबा जाम लग गया। किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने दिए राहत के निर्देश Yogi Adityanath ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और राहत एजेंसियों को मौके पर पहुंचकर प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है। गर्मी और तूफान दोनों से परेशान लोग एक तरफ जहां बारिश और आंधी से कुछ इलाकों में गर्मी से राहत मिली, वहीं बुंदेलखंड और दक्षिणी यूपी के कई जिले भीषण गर्मी से बेहाल रहे। Banda प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा झांसी, हमीरपुर और प्रयागराज में भी तापमान 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। रेलवे सेवाएं भी प्रभावित आंधी का असर रेलवे सेवाओं पर भी पड़ा। फतेहपुर में पेड़ गिरने से ओएचई लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे दिल्ली-हावड़ा रूट करीब डेढ़ घंटे तक बाधित रहा। कानपुर होकर गुजरने वाली करीब 22 ट्रेनें प्रभावित हुईं। वहीं प्रयागराज-जौनपुर रेलखंड पर भी पेड़ गिरने से ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा। मौसम विभाग ने दी चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान फिर धीरे-धीरे बढ़ सकता है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना अभी बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और Akhilesh Yadav के सौतेले भाई Prateek Yadav का बुधवार को निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। परिवार और राजनीतिक गलियारों में उनके निधन की खबर से शोक की लहर फैल गई है। प्रतीक यादव भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी नेता Aparna Yadav के पति थे। सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ समय से चल रहे थे बीमार परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कुछ सप्ताह पहले उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान अखिलेश यादव भी उनसे मिलने पहुंचे थे। तबीयत में हल्का सुधार होने के बाद उन्हें घर वापस लाया गया था। अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ पोस्टमार्टम निधन के बाद प्रतीक यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए King George's Medical University भेजा गया। यहां डॉक्टरों के पैनल ने कड़ी सुरक्षा और वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान परिवार के सदस्य और करीबी लोग भी वहां मौजूद रहे। अखिलेश यादव ने याद किया आखिरी मुलाकात अखिलेश यादव पोस्टमार्टम सेंटर पहुंचे और डॉक्टरों से बातचीत की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने प्रतीक यादव को “बहुत अच्छा इंसान” बताया। उन्होंने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य और कारोबार को लेकर काफी सजग रहते थे। अखिलेश यादव ने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक से मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने उन्हें कारोबार पर ध्यान देने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार में नुकसान और मानसिक दबाव किसी व्यक्ति को अंदर से प्रभावित कर सकता है। राजनीति से दूर, बिजनेस और फिटनेस में सक्रिय थे प्रतीक हालांकि प्रतीक यादव देश के बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। उन्होंने ब्रिटेन की University of Leeds से पढ़ाई की थी और रियल एस्टेट व फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे। लखनऊ में वह ‘The Fitness Planet’ नाम से जिम भी चलाते थे और फिटनेस इंडस्ट्री में काफी सक्रिय थे। इसके अलावा वह ‘Jeev Ashray’ नाम की संस्था से भी जुड़े थे, जो आवारा कुत्तों के इलाज, भोजन और देखभाल का काम करती थी। पत्नी अपर्णा यादव के साथ विवाद भी आया था सामने इस साल की शुरुआत में प्रतीक यादव और अपर्णा यादव के रिश्तों को लेकर भी चर्चा हुई थी। जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट कर वैवाहिक विवाद की बात कही थी और तलाक लेने की बात भी लिखी थी। हालांकि बाद में दोनों के बीच सुलह हो गई थी। प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कहा था कि आपसी बातचीत के बाद विवाद खत्म हो गया है। इसके बाद उन्होंने परिवार के साथ छुट्टियों की तस्वीरें भी साझा की थीं। नेताओं ने जताया शोक प्रतीक यादव के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने भी दुख जताया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद प्रदेश में ईंधन बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि प्रदेशवासी ईंधन की खपत कम करें और अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचें, ताकि देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कई अहम निर्देश जारी किए। सरकार स्तर पर सबसे बड़ा फैसला मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50 फीसदी तक कम करने का लिया गया है। अनावश्यक गाड़ियों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा, दो दिन घर से काम की सलाह सीएम योगी ने कहा कि अब वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि ईंधन और खर्च दोनों की बचत हो सके। औद्योगिक विकास विभाग और आईआईडीसी को निर्देश दिए गए हैं कि बड़े औद्योगिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को वर्क फ्रॉम होम अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। राज्य सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी कर ऐसे संस्थानों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की सिफारिश की जाएगी, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। मंत्री-सांसद सप्ताह में एक दिन करेंगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल मुख्यमंत्री ने मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की है। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है। सरकार चाहती है कि इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, छात्रों और आम लोगों को भी जोड़ा जाए। स्कूल-कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। ऑनलाइन होंगी बैठकें और वर्कशॉप सीएम योगी ने निर्देश दिया कि शिक्षा विभाग की बैठकों, सेमिनार और वर्कशॉप को ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाए। सचिवालय और निदेशालय स्तर की करीब आधी बैठकों को भी वर्चुअल तरीके से करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे समय, ईंधन और संसाधनों की बड़ी बचत होगी। साथ ही दफ्तरों के समय को अलग-अलग शिफ्ट में बांटने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि पीक ऑवर में ट्रैफिक और भीड़ कम हो सके। मेट्रो, बस, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर मुख्यमंत्री ने लोगों से मेट्रो, रोडवेज बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक उपयोग करने की अपील की है। जिन शहरों में मेट्रो सेवा उपलब्ध है, वहां उसके इस्तेमाल को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा कार पूलिंग, साइक्लिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है। भीड़भाड़ वाले रूट्स पर अतिरिक्त बसें चलाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। बिजली बचाने की भी अपील सीएम योगी ने कहा कि सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि बिजली की बचत भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों, सरकारी दफ्तरों और निजी संस्थानों में अनावश्यक बिजली का उपयोग न करें। साथ ही रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का कम से कम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे बदलावों से बड़े स्तर पर संसाधनों की बचत संभव है और इससे आर्थिक मजबूती के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार Assam के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है। बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन ने राज्य में जीत की हैट्रिक लगाई और इसके साथ ही हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए। पीएम मोदी और अमित शाह रहे मौजूद शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी मैदान में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya ने हिमंत बिस्वा सरमा और चार अन्य मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत कई केंद्रीय मंत्री और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। शपथ के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हिमंत बिस्वा सरमा और नई सरकार को बधाई दी। इन नेताओं ने भी ली मंत्री पद की शपथ मुख्यमंत्री के साथ चार नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें शामिल हैं— Ajanta Neog Rameswar Teli Atul Bora Chandan Brahma अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो पहले भी हिमंत सरकार के मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली ने राज्य की राजनीति में वापसी की है। मां कामाख्या के दर्शन कर लिया आशीर्वाद शपथ ग्रहण से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने Kamakhya Temple जाकर पूजा-अर्चना की और राज्य में शांति, विकास और खुशहाली की कामना की। उनके परिवार के सदस्य भी समारोह में मौजूद रहे। उनकी पत्नी रिनिकी भुयान और बेटी सुकन्या सरमा ने इसे परिवार के लिए गर्व और खुशी का पल बताया। योगी आदित्यनाथ और शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे शपथ ग्रहण समारोह में Yogi Adityanath, Suvendu Adhikari और केंद्रीय मंत्री Annapurna Devi समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। असम में NDA की लगातार तीसरी सरकार असम में एनडीए गठबंधन की यह लगातार तीसरी सरकार है। गठबंधन पहली बार 2016 में Sarbananda Sonowal के नेतृत्व में सत्ता में आया था। बाद में हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की राजनीति में मजबूत नेतृत्व स्थापित किया और बीजेपी को लगातार दूसरी बार बड़ी जीत दिलाई। बीजेपी की इस जीत को पूर्वोत्तर में पार्टी की मजबूत पकड़ और हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।