उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पिछले 9 वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रदेश में 17 हजार से अधिक पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) हुए, जिनमें 289 कुख्यात अपराधी मारे गए। आंकड़ों के मुताबिक, योगी सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने कुल 17,043 एनकाउंटर किए। इन कार्रवाइयों में 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 11,834 अपराधी घायल हुए। यानी प्रदेश में औसतन हर दिन करीब 5 पुलिस मुठभेड़ हुईं। पुलिसकर्मियों ने भी दी कुर्बानी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए, जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए। सरकार का दावा है कि पुलिस की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अपराधियों के मन में भय और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। मेरठ जोन एनकाउंटर में सबसे आगे प्रदेश में सबसे अधिक एनकाउंटर Meerut जोन में दर्ज किए गए। यहां पुलिस ने 4,813 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं। इन कार्रवाइयों में: 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 3,513 अपराधी घायल हुए 97 कुख्यात अपराधी मारे गए मुठभेड़ों के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए। वाराणसी और आगरा जोन भी शीर्ष पर Varanasi जोन में 1,292 एनकाउंटर हुए, जिनमें: 2,426 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई 29 अपराधी मारे गए 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए वहीं Agra जोन एनकाउंटर के मामले में तीसरे स्थान पर रहा। यहां: 2,494 मुठभेड़ हुईं 5,845 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया 24 अपराधी मारे गए 968 अपराधी और 62 पुलिसकर्मी घायल हुए कमिश्नरेट में गाजियाबाद सबसे आगे कमिश्नरेट स्तर पर Ghaziabad सबसे आगे रहा, जहां 789 मुठभेड़ों में 18 अपराधियों को मार गिराया गया। इसके अलावा: कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12 अपराधी ढेर हुए लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़ों में 12 अपराधी मारे गए प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधी मारे गए सरकार का दावा: अपराधियों में बढ़ा भय योगी सरकार का कहना है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क और अवैध वसूली के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की गई है। सरकार ने एनकाउंटर के साथ-साथ: गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई संपत्ति कुर्की NSA जैसे सख्त कानूनों का इस्तेमाल भी प्रभावी ढंग से लागू किया है। सरकारी दावे के अनुसार, पुलिस की तेज और कठोर कार्रवाई के कारण कई अपराधियों ने प्रदेश छोड़ दिया या अपराध से दूरी बना ली।
Yogi Adityanath सरकार ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। रविवार को राजभवन में आयोजित समारोह में 8 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। यह मंत्रिमंडल विस्तार 10 मई को तय किया गया था, जिसके बाद से विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज थीं। अब शपथ ग्रहण के साथ ही नए मंत्रियों को विभाग भी सौंप दिए गए हैं। राजनीतिक जानकार इस फेरबदल को आगामी चुनावों की रणनीति और सामाजिक-संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं। समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने विभागों की घोषणा की। भूपेंद्र चौधरी को MSME, मनोज पाण्डेय को खाद्य विभाग मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे चर्चित नाम Bhupendra Chaudhary का रहा। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री बनाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं भाजपा नेता Manoj Kumar Pandey को खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग का प्रभार दिया गया है। स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां सरकार ने स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया है। अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया। सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी मिली। सरकार का कहना है कि इन विभागों में नए चेहरों के आने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और बेहतर समन्वय देखने को मिलेगा। राज्य मंत्रियों को विकास से जुड़े विभाग राज्य मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं: कृष्णा पासवान को पशुधन एवं डेयरी विकास विभाग कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग हंस राज विश्वकर्मा को MSME मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है, जहां वे भूपेंद्र चौधरी के साथ काम करेंगे। चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा विस्तार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा है। भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी इस फेरबदल में दिखाई दे रही है। योगी सरकार के इस कदम को प्रशासनिक मजबूती और चुनावी तैयारी दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
लखनऊ में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई Prateek Yadav की अंतिम यात्रा गुरुवार को लखनऊ में भारी भीड़ और गमगीन माहौल के बीच निकाली गई। पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को बैकुंठधाम श्मशान घाट के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता और कई बड़े राजनीतिक नेता शामिल हुए। शव वाहन पर लगी थी पेट्स के साथ तस्वीर प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान शव वाहन को फूलों से सजाया गया था। वाहन पर उनके पालतू जानवरों के साथ की तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही उनके आवास पर जुटे रहे। कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि Dimple Yadav ने प्रतीक यादव को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya, मंत्री Om Prakash Rajbhar और भाजपा नेता प्रदीप सिंह समेत कई नेताओं ने अपर्णा यादव के आवास पहुंचकर शोक व्यक्त किया। बुधवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी अपर्णा यादव के घर पहुंचे थे और परिवार को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई ये बात जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव का बुधवार सुबह निधन हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जमने यानी पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण कार्डियक अरेस्ट से मौत होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में शरीर और सिर पर कुछ चोटों के निशान भी मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें कुछ चोटें पुरानी बताई जा रही हैं, जबकि कुछ हाल की थीं। आगे की जांच के लिए विसरा और अन्य नमूनों को सुरक्षित रखा गया है। राजनीति से दूर रखते थे खुद को प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की Leeds University से पढ़ाई की थी। यादव परिवार से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी। वे रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे और लग्जरी कारों के शौकीन माने जाते थे। उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी समर्थकों और यादव परिवार में शोक की लहर है।
नौ वर्षों की उपलब्धियों पर बोले मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ‘UP को बदलने के 9वें वर्ष’ कार्यक्रम में राज्य के विकास मॉडल और सुशासन की उपलब्धियों को विस्तार से सामने रखा। लखनऊ में आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब तेजी से विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई है। सात शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल बनी नई ताकत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश की बढ़ती क्षमता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, रोजगार और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। किसानों को निशुल्क पानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगभग 50 लाख हेक्टेयर भूमि तक किसानों को निशुल्क सिंचाई जल उपलब्ध करा रही है। नहरों के विस्तार और ट्यूबवेल नेटवर्क को मजबूत करने से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना है। कानून-व्यवस्था में सुधार का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले नौ वर्षों में किए गए प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
तेज आंधी और बारिश ने मचाई तबाही Uttar Pradesh में बुधवार को आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचा दी। अलग-अलग जिलों में पेड़ गिरने, दीवार ढहने और बिजली गिरने की घटनाओं में 96 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा असर पूर्वांचल और प्रयागराज मंडल के जिलों में देखने को मिला, जहां तेज हवाओं और बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। भदोही और प्रयागराज में सबसे ज्यादा मौतें मृतकों में सबसे अधिक 18 लोगों की जान Bhadohi में गई, जबकि Prayagraj में 17 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा मिर्जापुर में 15, फतेहपुर में 10, उन्नाव और बदायूं में 6-6, प्रतापगढ़ और बरेली में 4-4 लोगों की जान गई। कई अन्य जिलों में भी मौतों की खबर सामने आई है। गांवों में ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों में तेज तूफान के कारण कच्चे मकान और टीन शेड उड़ गए। कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही। सड़कों पर पेड़ गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ और कई मार्गों पर लंबा जाम लग गया। किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने दिए राहत के निर्देश Yogi Adityanath ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और राहत एजेंसियों को मौके पर पहुंचकर प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है। गर्मी और तूफान दोनों से परेशान लोग एक तरफ जहां बारिश और आंधी से कुछ इलाकों में गर्मी से राहत मिली, वहीं बुंदेलखंड और दक्षिणी यूपी के कई जिले भीषण गर्मी से बेहाल रहे। Banda प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा झांसी, हमीरपुर और प्रयागराज में भी तापमान 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। रेलवे सेवाएं भी प्रभावित आंधी का असर रेलवे सेवाओं पर भी पड़ा। फतेहपुर में पेड़ गिरने से ओएचई लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे दिल्ली-हावड़ा रूट करीब डेढ़ घंटे तक बाधित रहा। कानपुर होकर गुजरने वाली करीब 22 ट्रेनें प्रभावित हुईं। वहीं प्रयागराज-जौनपुर रेलखंड पर भी पेड़ गिरने से ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा। मौसम विभाग ने दी चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान फिर धीरे-धीरे बढ़ सकता है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना अभी बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और Akhilesh Yadav के सौतेले भाई Prateek Yadav का बुधवार को निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। परिवार और राजनीतिक गलियारों में उनके निधन की खबर से शोक की लहर फैल गई है। प्रतीक यादव भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी नेता Aparna Yadav के पति थे। सूत्रों के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ समय से चल रहे थे बीमार परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। कुछ सप्ताह पहले उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान अखिलेश यादव भी उनसे मिलने पहुंचे थे। तबीयत में हल्का सुधार होने के बाद उन्हें घर वापस लाया गया था। अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ पोस्टमार्टम निधन के बाद प्रतीक यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए King George's Medical University भेजा गया। यहां डॉक्टरों के पैनल ने कड़ी सुरक्षा और वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान परिवार के सदस्य और करीबी लोग भी वहां मौजूद रहे। अखिलेश यादव ने याद किया आखिरी मुलाकात अखिलेश यादव पोस्टमार्टम सेंटर पहुंचे और डॉक्टरों से बातचीत की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने प्रतीक यादव को “बहुत अच्छा इंसान” बताया। उन्होंने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य और कारोबार को लेकर काफी सजग रहते थे। अखिलेश यादव ने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक से मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने उन्हें कारोबार पर ध्यान देने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार में नुकसान और मानसिक दबाव किसी व्यक्ति को अंदर से प्रभावित कर सकता है। राजनीति से दूर, बिजनेस और फिटनेस में सक्रिय थे प्रतीक हालांकि प्रतीक यादव देश के बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। उन्होंने ब्रिटेन की University of Leeds से पढ़ाई की थी और रियल एस्टेट व फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे। लखनऊ में वह ‘The Fitness Planet’ नाम से जिम भी चलाते थे और फिटनेस इंडस्ट्री में काफी सक्रिय थे। इसके अलावा वह ‘Jeev Ashray’ नाम की संस्था से भी जुड़े थे, जो आवारा कुत्तों के इलाज, भोजन और देखभाल का काम करती थी। पत्नी अपर्णा यादव के साथ विवाद भी आया था सामने इस साल की शुरुआत में प्रतीक यादव और अपर्णा यादव के रिश्तों को लेकर भी चर्चा हुई थी। जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट कर वैवाहिक विवाद की बात कही थी और तलाक लेने की बात भी लिखी थी। हालांकि बाद में दोनों के बीच सुलह हो गई थी। प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कहा था कि आपसी बातचीत के बाद विवाद खत्म हो गया है। इसके बाद उन्होंने परिवार के साथ छुट्टियों की तस्वीरें भी साझा की थीं। नेताओं ने जताया शोक प्रतीक यादव के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने भी दुख जताया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद प्रदेश में ईंधन बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि प्रदेशवासी ईंधन की खपत कम करें और अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचें, ताकि देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कई अहम निर्देश जारी किए। सरकार स्तर पर सबसे बड़ा फैसला मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50 फीसदी तक कम करने का लिया गया है। अनावश्यक गाड़ियों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा, दो दिन घर से काम की सलाह सीएम योगी ने कहा कि अब वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि ईंधन और खर्च दोनों की बचत हो सके। औद्योगिक विकास विभाग और आईआईडीसी को निर्देश दिए गए हैं कि बड़े औद्योगिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को वर्क फ्रॉम होम अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। राज्य सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी कर ऐसे संस्थानों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की सिफारिश की जाएगी, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। मंत्री-सांसद सप्ताह में एक दिन करेंगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल मुख्यमंत्री ने मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की है। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है। सरकार चाहती है कि इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, छात्रों और आम लोगों को भी जोड़ा जाए। स्कूल-कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। ऑनलाइन होंगी बैठकें और वर्कशॉप सीएम योगी ने निर्देश दिया कि शिक्षा विभाग की बैठकों, सेमिनार और वर्कशॉप को ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाए। सचिवालय और निदेशालय स्तर की करीब आधी बैठकों को भी वर्चुअल तरीके से करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे समय, ईंधन और संसाधनों की बड़ी बचत होगी। साथ ही दफ्तरों के समय को अलग-अलग शिफ्ट में बांटने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि पीक ऑवर में ट्रैफिक और भीड़ कम हो सके। मेट्रो, बस, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर मुख्यमंत्री ने लोगों से मेट्रो, रोडवेज बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक उपयोग करने की अपील की है। जिन शहरों में मेट्रो सेवा उपलब्ध है, वहां उसके इस्तेमाल को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा कार पूलिंग, साइक्लिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है। भीड़भाड़ वाले रूट्स पर अतिरिक्त बसें चलाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। बिजली बचाने की भी अपील सीएम योगी ने कहा कि सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि बिजली की बचत भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों, सरकारी दफ्तरों और निजी संस्थानों में अनावश्यक बिजली का उपयोग न करें। साथ ही रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का कम से कम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे बदलावों से बड़े स्तर पर संसाधनों की बचत संभव है और इससे आर्थिक मजबूती के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार Assam के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है। बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन ने राज्य में जीत की हैट्रिक लगाई और इसके साथ ही हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए। पीएम मोदी और अमित शाह रहे मौजूद शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी मैदान में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya ने हिमंत बिस्वा सरमा और चार अन्य मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत कई केंद्रीय मंत्री और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। शपथ के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हिमंत बिस्वा सरमा और नई सरकार को बधाई दी। इन नेताओं ने भी ली मंत्री पद की शपथ मुख्यमंत्री के साथ चार नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें शामिल हैं— Ajanta Neog Rameswar Teli Atul Bora Chandan Brahma अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो पहले भी हिमंत सरकार के मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली ने राज्य की राजनीति में वापसी की है। मां कामाख्या के दर्शन कर लिया आशीर्वाद शपथ ग्रहण से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने Kamakhya Temple जाकर पूजा-अर्चना की और राज्य में शांति, विकास और खुशहाली की कामना की। उनके परिवार के सदस्य भी समारोह में मौजूद रहे। उनकी पत्नी रिनिकी भुयान और बेटी सुकन्या सरमा ने इसे परिवार के लिए गर्व और खुशी का पल बताया। योगी आदित्यनाथ और शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे शपथ ग्रहण समारोह में Yogi Adityanath, Suvendu Adhikari और केंद्रीय मंत्री Annapurna Devi समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। असम में NDA की लगातार तीसरी सरकार असम में एनडीए गठबंधन की यह लगातार तीसरी सरकार है। गठबंधन पहली बार 2016 में Sarbananda Sonowal के नेतृत्व में सत्ता में आया था। बाद में हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की राजनीति में मजबूत नेतृत्व स्थापित किया और बीजेपी को लगातार दूसरी बार बड़ी जीत दिलाई। बीजेपी की इस जीत को पूर्वोत्तर में पार्टी की मजबूत पकड़ और हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने रविवार को अपने दूसरे कार्यकाल का मंत्रिमंडल विस्तार किया। राजधानी लखनऊ के लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। किन नेताओं को मिली जगह? मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 6 नए नेताओं को शामिल किया गया। इनमें: Manoj Pandey – कैबिनेट मंत्री Bhupendra Singh Chaudhary – कैबिनेट मंत्री Hansraj Vishwakarma – राज्य मंत्री Kailash Rajput – राज्य मंत्री Krishna Paswan – राज्य मंत्री Surendra Diler – राज्य मंत्री को शपथ दिलाई गई। दो राज्य मंत्रियों को मिला स्वतंत्र प्रभार इसके अलावा: Ajit Singh Pal Somendra Tomar को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश 2027 विधानसभा चुनाव से करीब आठ महीने पहले हुए इस विस्तार को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। नए मंत्रियों में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सरकार में पहले 54 मंत्री थे, जो अब बढ़कर 60 हो गए हैं। कौन हैं भूपेंद्र चौधरी? पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Singh Chaudhary पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में गिने जाते हैं। वे पहले भी पंचायती राज मंत्री और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और लंबे समय से Rashtriya Swayamsevak Sangh तथा भाजपा से जुड़े रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार पर नेताओं की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मंत्री Daya Shankar Singh ने कहा कि मंत्रिपरिषद में खाली पदों को भरते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary ने इसे खुशी की बात बताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित फैसलों पर अब अमल हो रहा है। वहीं मंत्री Suresh Kumar Khanna ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और डबल इंजन सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रही है। मंत्री Sanjay Nishad ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
रविवार को फिल्म ने की सबसे ज्यादा कमाई Krishnavataram Part 1: The Heart बॉक्स ऑफिस पर लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है। सिद्धार्थ गुप्ता स्टारर इस भक्ति आधारित फिल्म ने रिलीज के चौथे दिन यानी रविवार को अब तक की सबसे बड़ी कमाई दर्ज की। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने रविवार को करीब 4.19 करोड़ रुपये की नेट कमाई की। इसके साथ ही चार दिनों में फिल्म का कुल भारत नेट कलेक्शन लगभग 8.77 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पहले दिन से लगातार बढ़ती गई कमाई Krishnavataram Part 1: The Heart ने 7 मई को सिनेमाघरों में रिलीज के साथ 50 लाख रुपये की ओपनिंग की थी। इसके बाद फिल्म की कमाई में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली– गुरुवार: 50 लाख रुपये शुक्रवार: 1.38 करोड़ रुपये शनिवार: 2.70 करोड़ रुपये रविवार: 4.19 करोड़ रुपये चार दिनों में फिल्म की ग्रोथ ने ट्रेड एक्सपर्ट्स को भी चौंका दिया है। यूपी में टैक्स-फ्री होने का मिला बड़ा फायदा Yogi Adityanath ने फिल्म को उत्तर प्रदेश में टैक्स-फ्री घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने रविवार को लोक भवन में फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग देखने के बाद यह घोषणा की। राज्य सरकार ने जिलों में विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं ताकि बच्चे और युवा भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ सकें। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि टैक्स-फ्री स्टेटस मिलने के बाद फिल्म की कमाई में और तेजी आ सकती है। भगवान कृष्ण की कहानी पर आधारित है फिल्म Krishnavataram Part 1: The Heart का निर्देशन Hardik Gajjar ने किया है। फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज हुई है। फिल्म में Siddharth Gupta के अलावा संस्कृती, सुष्मिता भट्ट और निवाशिनी कृष्णन अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। वहीं Jackie Shroff और Ashutosh Rana ने भी महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं। यह फिल्म हिंदू धर्मग्रंथ ‘ब्रह्म वैवर्त पुराण’ पर आधारित है और राधा से अलग होने के बाद भगवान कृष्ण के जीवन की घटनाओं को दर्शाती है। कहानी मुख्य रूप से सत्यभामा के दृष्टिकोण से दिखाई गई है। दर्शकों के बीच बढ़ रही लोकप्रियता धार्मिक और सांस्कृतिक विषय पर आधारित होने की वजह से फिल्म को परिवार और युवाओं के बीच अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। वीकेंड पर बढ़ती ऑक्यूपेंसी ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई और मजबूत हो सकती है।
बागपत: Yogi Adityanath सरकार 18 अप्रैल, World Heritage Day के अवसर पर Baghpat से प्रदेश की पहली ‘हेरिटेज ट्रेल’ की शुरुआत करने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य देश-विदेश के पर्यटकों को द्वापर युग और महाभारत काल से जुड़े ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थलों से परिचित कराना है। यह हेरिटेज ट्रेल विशेष रूप से उन स्थानों को जोड़ती है, जिनका संबंध Krishna और Pandavas की कथाओं से माना जाता है। प्रशासन के अनुसार, यह परियोजना बागपत को एक प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। हेरिटेज ट्रेल के प्रमुख स्थल: Barnawa का लाक्षागृह, जिसे महाभारत काल से जोड़ा जाता है Sinauli का पुरातात्विक स्थल, जहां प्राचीन रथ, तलवार और ढाल मिले खंडवारी के प्राचीन अवशेष पुरा महादेव मंदिर और जोहड़ी मंदिर परिसर बरौत का ऐतिहासिक क्षेत्र त्रिलोक तीर्थ धाम और यमुना तट के प्राचीन स्थल महाभारत से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व: मान्यता है कि Krishna ने कौरवों से जिन पांच गांवों की मांग की थी, उनमें से एक गांव वर्तमान बरनावा क्षेत्र में स्थित था इस कारण यह क्षेत्र पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है यहां पर्यटक पांडव कालीन गुफाओं और लाक्षागृह जैसे स्थलों को देख सकेंगे पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा: स्थानीय युवाओं को पर्यटन गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा गांवों में होमस्टे विकसित कर ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा स्थानीय व्यंजन और परंपरागत आतिथ्य को मिलेगा प्रोत्साहन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे पारंपरिक कला और संस्कृति पर फोकस: पॉटरी, पीतरा ड्यूरा, ब्लॉक प्रिंटिंग और इत्र निर्माण जैसी कलाओं की कार्यशालाएं लुप्तप्राय कलाओं को संरक्षण और नया मंच स्थानीय कारीगरों को आर्थिक और सांस्कृतिक बढ़ावा प्रशासन का दृष्टिकोण: जिलाधिकारी अस्मिता लाल के अनुसार, हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से बागपत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाएगा। हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के जरिए लोगों में अपनी विरासत के प्रति जागरूकता और गर्व की भावना को भी मजबूत किया जाएगा।
Yogi Adityanath ने Nandakumar में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज TMC का मतलब “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” बन गया है, जिसने West Bengal की विकास यात्रा को बाधित किया है। “मां-माटी-मानुष का नारा खोखला” योगी ने TMC के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा: “मां-बहन असुरक्षित हैं” “माटी घुसपैठियों के कब्जे में है” “मानुष भयभीत और असहाय है” उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान किया। सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए Swami Vivekananda, Subhas Chandra Bose और Rabindranath Tagore का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि देश को दिशा देने वाली रही है, लेकिन आज “अराजकता और भ्रष्टाचार” से जूझ रही है। “डेमोग्राफी बदलने की कोशिश” योगी ने आरोप लगाया कि: बंगाल में जनसांख्यिकी बदलने की साजिश हो रही है Malda, Murshidabad, Nadia जैसे जिलों में सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है यूपी मॉडल का जिक्र उन्होंने कहा कि 2017 से पहले Uttar Pradesh की स्थिति भी ऐसी ही थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद हालात बदले। दंगे रुके कानून व्यवस्था सुधरी विकास तेज हुआ “बुलडोजर माफिया का इलाज करता है” योगी ने कहा: “यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफिया का इलाज भी करता है” बंगाल में भी सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की जरूरत है ममता सरकार पर निशाना उन्होंने Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि: तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा है रामनवमी जैसे आयोजनों में बाधा डाली जाती है “बंगाल को फिर गौरव दिलाना होगा” योगी ने कहा कि बंगाल, जो कभी “कल्चरल कैपिटल” था, उसे फिर से: विकास सुशासन सांस्कृतिक पहचान की राह पर लाना होगा। उन्होंने जनता से भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की।
रांची। झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्यपाल सचिवालय ने सरकार द्वारा भेजे गए नामों पर आपत्ति जताते हुए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर नए सिरे से प्रस्ताव भेजने को कहा है। प्रस्तावित नामों पर आपत्ति, FIR का मामला सामने आया जांच में सामने आया है कि जिन चार नामों को नियुक्ति के लिए भेजा गया था, उनमें से दो व्यक्तियों के खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज है। अमूल्य नीरज खलखो पर छह और तनुज खत्री पर एक प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई है। नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा का निर्देश इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाते हुए राज्यपाल सचिवालय ने सरकार को पूरी चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और पारदर्शी तरीके से नए नाम भेजने का अनुरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला सचिवालय ने फाइल लौटाते समय सुप्रीम कोर्ट के ‘नमित शर्मा बनाम केंद्र सरकार’ मामले का भी उल्लेख किया है। इस फैसले में कहा गया है कि सूचना आयुक्त का कार्य अर्द्ध-न्यायिक प्रकृति का होता है, इसलिए नियुक्ति में योग्य और समझ रखने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। साथ ही विज्ञान, तकनीक, प्रबंधन, पत्रकारिता और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी इस पद के लिए चुना जा सकता है। कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की भी मांग राज्यपाल सचिवालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 15(6) की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया है, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और अधिक स्पष्ट बनाया जा सके।
उत्तर प्रदेश के Mathura में यमुना नदी में हुए दर्दनाक बोट हादसे ने कई परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं। श्रद्धालुओं से भरी मोटरबोट के पलटने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग अब भी लापता हैं। हादसे के बाद दूसरे दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। हादसे से पहले खुशी, फिर अचानक मातम हादसे में शामिल अधिकतर लोग Ludhiana समेत पंजाब के अलग-अलग इलाकों से तीर्थ यात्रा पर आए थे। परिवार वालों के मुताबिक, गुरुवार शाम को सभी खुशी-खुशी Vrindavan के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए अपनों से बात हो रही थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद अचानक एक फोन आया - “बोट पलट गई है… सबके फोन डूब गए…” “कल तक सब ठीक थे…” - परिजनों की आपबीती पीड़ित परिवारों की बातें दिल को झकझोर देने वाली हैं। एक महिला ने बताया, “सुबह 9 बजे बात हुई थी, सब खुश थे, वीडियो भेज रहे थे… आधे घंटे बाद खबर आई कि नाव पलट गई।” वहीं एक अन्य रिश्तेदार ने रोते हुए कहा, “कल तक बच्चे हंसते-खेलते गए थे, अब पता नहीं कौन कहां है… बस लापता होने की खबर आ रही है।” कैसे हुआ हादसा? अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के वक्त नाव में करीब 37 लोग सवार थे। तेज हवाओं के कारण नाव असंतुलित हो गई और गहरे पानी में एक तैरते पोंटून से टकरा गई, जिससे वह पलट गई। बताया जा रहा है कि हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पीपा पुल हटाया गया था, लेकिन उसके कुछ हिस्से पानी में ही रह गए थे जो इस हादसे की बड़ी वजह बने। राहत-बचाव अभियान जारी घटना के बाद से State Disaster Response Force, फायर ब्रिगेड और सेना की टीमें मौके पर लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। करीब 50 स्थानीय गोताखोर भी सर्च ऑपरेशन में शामिल हैं। अब तक 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन लापता लोगों की तलाश जारी है। सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए वीडियो में देखा गया कि नाव में सवार किसी भी यात्री ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। हादसे से ठीक पहले सभी श्रद्धालु ‘राधे-राधे’ का जाप करते हुए खुश नजर आ रहे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पल में सब कुछ बदल जाएगा। सरकार ने जताया दुख Yogi Adityanath ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है और अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 6 अप्रैल को अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर देशभर में पार्टी की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए एक खास संदेश दिया, जिसे आगामी चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। “सत्ता नहीं, संस्कार की यात्रा है BJP” सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लोकतांत्रिक आदर्शों और सनातनी मूल्यों से प्रेरित है। योगी ने अपने संदेश में कहा कि बीजेपी की यात्रा “सत्ता की नहीं, बल्कि संस्कार की यात्रा” है। यह विस्तार की नहीं, बल्कि विचार की ताकत पर आगे बढ़ने वाली पार्टी है, जो ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प के साथ काम कर रही है। कार्यकर्ताओं की भूमिका को बताया सबसे अहम सीएम योगी ने खास तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता की निष्ठा, निरंतरता और निःस्वार्थ भाव ने ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसी समर्पण और सेवा भाव के साथ आगे भी काम करते रहने का आह्वान किया, ताकि देश की 145 करोड़ जनता की उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके। “Nation First” की भावना पर जोर योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में ‘Nation First’ यानी ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को बीजेपी की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यही सोच पार्टी को एक विशाल संगठन बनाती है, जो सेवा, समर्पण और संस्कार के मूल्यों के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। डिप्टी CM केशव मौर्य ने भी दी बधाई इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पार्टी स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बीजेपी के सफर को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जोड़ा। मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “विकसित भारत” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बीजेपी ही वर्तमान के साथ-साथ देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश स्थापना दिवस के मौके पर दिए गए ये संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की ओर से कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और संगठन को मजबूत करने पर खास जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, बीजेपी के 47वें स्थापना दिवस पर नेताओं ने एकजुटता, विचारधारा और सेवा भाव को आगे बढ़ाने का संदेश दिया, जो आने वाले समय में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने जा रही है। इस बैठक में कुल 27 प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मंजूरी मिल सकती है। इनमें निवेश, प्रशासनिक सुधार, अवसंरचना विकास और कर्मचारियों से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं। कर्मचारियों के निवेश पर सख्ती की तैयारी राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सरकारी कर्मचारियों के निवेश नियमों को सख्त करने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर, स्टॉक या अन्य निवेश में लगाता है तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देना अनिवार्य होगा। इसके लिए सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 में संशोधन किया जा रहा है। कार्मिक विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक यदि कोई कर्मचारी दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति से जुड़ा लेन-देन करता है तो उसे तुरंत इसकी सूचना देनी होगी। पहले एक माह के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति का विवरण देना जरूरी था। हर साल देनी होगी संपत्ति की जानकारी नए प्रस्ताव के तहत सरकारी कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति का विवरण हर वर्ष देना अनिवार्य किया जाएगा। कर्मचारियों को नियुक्ति के समय और उसके बाद प्रत्येक वर्ष अपनी संपत्ति की घोषणा करनी होगी। वर्तमान में यह घोषणा हर पांच वर्ष में करनी होती है। अन्य प्रस्ताव भी कैबिनेट में कैबिनेट बैठक में भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत दान पत्र पर लगने वाले स्टांप शुल्क में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इसके अलावा कई विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी, जिनमें परिवहन, आवास एवं शहरी नियोजन, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, हथकरघा उद्योग, दुग्ध विकास, उच्च शिक्षा, खनन, सिंचाई एवं जल संसाधन, गृह, वित्त, ऊर्जा, समाज कल्याण और खाद्य एवं रसद विभाग शामिल हैं। गंगा पर चार लेन पुल का प्रस्ताव कानपुर में ट्रांस गंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर चार लेन का नया पुल बनाने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में पास हो सकता है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली और टेक्सटाइल एवं गार्मेटिंग पॉलिसी 2022 में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। सीएम अब अगस्ता हेलीकॉप्टर से भरेंगे उड़ान इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हवाई यात्रा के लिए UP सरकार ने अपने विमान बेड़े में अत्याधुनिक अगस्ता वेस्टलैंड AW139 हेलीकॉप्टर को शामिल किया है। मुख्यमंत्री पांच मार्च को कानपुर की यात्रा इसी हेलीकॉप्टर से कर चुके हैं। इटली की कंपनी लियोनार्डो द्वारा निर्मित यह हेलीकॉप्टर वीवीआईपी यात्राओं के लिए दुनिया के बेहतरीन हेलीकॉप्टरों में माना जाता है। इसमें एक बार में 12 से 15 यात्री सफर कर सकते हैं और इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 310 किलोमीटर प्रति घंटा है। आधुनिक तकनीक से लैस हेलीकॉप्टर डबल इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर में क्रैश सेफ्टी सिस्टम, डिजिटल ग्लास कॉकपिट और साउंडप्रूफ केबिन जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। किसी एक इंजन में खराबी आने पर दूसरा इंजन हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उड़ान में बनाए रख सकता है। इसकी कीमत करीब एक अरब रुपये बताई जा रही है। हेलीकॉप्टर को उड़ाने के लिए दो पायलटों की जरूरत होती है। इसके तकनीकी संचालन को समझने के लिए राज्य सरकार ने पिछले वर्ष अपने तीन पायलटों को इटली भेजकर विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।