राजनीति

ZPM Wins First Rajya Sabha Seat

राज्यसभा चुनाव: ZPM उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा जीते, पहली बार उच्च सदन पहुंची पार्टी

Deepshikha जून 19, 2026 0
Mizoram Chief Minister and ZPM leaders celebrate K Lalhmingliana's historic Rajya Sabha victory in Aizawl.
ZPM Wins First Rajya Sabha Seat in Mizoram

 

मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट पर हुए चुनाव में सत्तारूढ़ Zoram People's Movement (जेडपीएम) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पार्टी के उम्मीदवार K. Lalhmingliana (के. लालतलुआंगकिमा) ने चुनाव जीतकर पहली बार पार्टी को संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिलाया है।

26 वोट हासिल कर दर्ज की शानदार जीत

विधानसभा सचिव एवं निर्वाचन अधिकारी Jothansanga Ralte के अनुसार, चुनाव में कुल 36 वोट पड़े। इनमें जेडपीएम उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा को 26 वोट मिले, जबकि विपक्षी Mizo National Front (एमएनएफ) की उम्मीदवार Jothansangi Hmar को 10 वोट प्राप्त हुए।

एमएनएफ उम्मीदवार को उनकी पार्टी के सभी 10 विधायकों का समर्थन मिला, लेकिन विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के कारण जेडपीएम उम्मीदवार की जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी।

पहली बार राज्यसभा में पहुंचेगी जेडपीएम

यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि जेडपीएम के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। पहली बार पार्टी का कोई प्रतिनिधि राज्यसभा पहुंचेगा, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उसकी उपस्थिति और प्रभाव बढ़ने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत से जेडपीएम को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने और पूर्वोत्तर के मुद्दों को संसद में अधिक प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिलेगा।

तीन विधायकों ने नहीं किया मतदान

राज्यसभा चुनाव में तीन विधायकों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। इनमें शामिल हैं—

  • K. Beichhua (भाजपा)
  • K. Hrahmo (भाजपा)
  • C. Ngunlianchunga (कांग्रेस)

कांग्रेस विधायक सी. न्गुनलिआनचुंगा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने पार्टी आलाकमान के निर्देशों के अनुसार मतदान से दूरी बनाई। वहीं, भाजपा के मीडिया संयोजक Johnny Lalthanpuia ने बताया कि पार्टी के दोनों विधायकों ने भी मतदान नहीं किया।

स्वास्थ्य कारणों से वोट नहीं डाल सके एक विधायक

निर्वाचन अधिकारी जोथानसांगा राल्ते ने बताया कि विधायक W. Chhuanawma स्वास्थ्य संबंधी कारणों से मतदान नहीं कर सके।

इस प्रकार 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में से 36 विधायकों ने मतदान किया, जबकि चार सदस्य वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहे।

जेडपीएम के लिए क्यों अहम है यह जीत?

के. लालतलुआंगकिमा की जीत जेडपीएम के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है—

  • पहली बार पार्टी को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिला।
  • राष्ट्रीय राजनीति में जेडपीएम की उपस्थिति मजबूत होगी।
  • पूर्वोत्तर और मिजोरम से जुड़े मुद्दों को संसद में नई आवाज मिलेगी।
  • पार्टी को भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विस्तार का अवसर मिल सकता है।

यह परिणाम मिजोरम की राजनीति में जेडपीएम की बढ़ती ताकत और उसके मजबूत जनाधार का भी संकेत माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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शिवसेना (यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत बोले- ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी’

  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसदों के शामिल नहीं होने से पार्टी में नई टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। बैठक से गायब रहे 6 सांसद शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसद अनुपस्थित रहे। इससे यह संकेत मिला है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा गया है और बागी सांसद अलग रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। अनुपस्थित सांसदों के नाम: Sanjay Jadhav (परभणी) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omraje Nimbalkar (धाराशिव) Sanjay Patil (मुंबई नॉर्थ ईस्ट) ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त करेंगे’ : संजय राउत बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने कहा कि पार्टी का व्हिप जारी होने के बावजूद छह सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, "जो सांसद पार्टी के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें हम गद्दार मानते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।" बागी सांसदों को भेजा जाएगा नोटिस पार्टी सांसद Arvind Sawant ने कहा कि अनुपस्थित सांसदों को आज ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी बैठक में क्यों नहीं आए। ‘बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं’ संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी के साथ धोखा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, "पार्टी के व्हिप का उल्लंघन अनुशासनहीनता है। ये लोग बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं।" बीजेपी और शिंदे पर लगाया खरीद-फरोख्त का आरोप संजय राउत ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party और एकनाथ शिंदे गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का लालच देकर खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा, "जो जाना चाहते हैं, वे इस्तीफा देकर जाएं। वे शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं, इसलिए जनता के साथ धोखेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।" एक और टूट की ओर बढ़ रही शिवसेना (यूबीटी) छह सांसदों की गैरमौजूदगी और पार्टी नेतृत्व के तीखे बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट की संभावना बढ़ गई है। यदि ये सांसद अलग समूह बनाते हैं या शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।  

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