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Gill Reacts After GT’s Big Loss

GT vs MI: मिडिल ओवर्स में महंगी पड़ी गेंदबाजी, 99 रन की हार के बाद बोले कप्तान Shubman Gill

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Shubman Gill reacts after Gujarat Titans lose heavily to Mumbai Indians in IPL match
GT vs MI IPL Match Gill Reaction

आईपीएल मुकाबले में Mumbai Indians ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए Gujarat Titans को 99 रनों से करारी शिकस्त दी। मैच के बाद गुजरात के कप्तान Shubman Gill ने हार की बड़ी वजह टीम की कमजोर गेंदबाजी, खासकर मिडिल ओवर्स में लुटे रन को बताया।

तिलक वर्मा का तूफानी शतक, मुंबई ने खड़ा किया बड़ा स्कोर

मुंबई इंडियंस की ओर से Tilak Varma ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 45 गेंदों में नाबाद 101 रन ठोक दिए। उनकी पारी में आठ चौके और सात छक्के शामिल रहे।
उन्होंने Hardik Pandya (15 रन) के साथ पांचवें विकेट के लिए 81 रन और Naman Dhir (45 रन) के साथ चौथे विकेट के लिए 52 रन की अहम साझेदारी निभाई।
इस दमदार प्रदर्शन के दम पर मुंबई ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 199 रन बनाए।

100 रन पर ढही गुजरात की बल्लेबाजी

लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी और नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। पूरी टीम 15.5 ओवर में सिर्फ 100 रन पर सिमट गई।
मुंबई के गेंदबाजों में Ashwani Kumar ने 4 विकेट, Allah Ghazanfar ने 2 विकेट और Mitchell Santner ने भी 2 विकेट लेकर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया।

हार के बाद क्या बोले शुभमन गिल

मैच के बाद Shubman Gill ने साफ कहा कि उनकी टीम ने मिडिल ओवर्स में जरूरत से ज्यादा रन दे दिए, जो मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
उन्होंने माना कि इस पिच पर 160-170 रन का स्कोर पर्याप्त हो सकता था, लेकिन खराब लेंथ और अस्थिर गेंदबाजी के कारण विपक्ष बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल रहा।

गिल ने आगे कहा कि टीम को अपनी गेंदबाजी रणनीति में सुधार करना होगा, खासकर सही लेंथ पर लगातार गेंद डालने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बल्लेबाजी में भी सुधार की गुंजाइश थी, खासकर ओस के बावजूद टीम लक्ष्य का पीछा करने में नाकाम रही।

कप्तान ने इसे “झटका” बताया, लेकिन भरोसा जताया कि आने वाले मुकाबलों में टीम वापसी करेगी, भले ही मैच विरोधी टीमों के घरेलू मैदान पर क्यों न हों।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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आईपीएल 2026 में Gujarat Titans की बल्लेबाज़ी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। Mumbai Indians के खिलाफ 99 रनों की करारी हार के बाद टीम का मिडिल ऑर्डर निशाने पर आया, लेकिन टीम के बैटिंग कोच Matthew Hayden ने साफ किया कि असली समस्या उससे कहीं ऊपर–टॉप ऑर्डर में है। पावरप्ले में हार गई बाज़ी गुजरात की पारी की शुरुआत ही खराब रही। Shubman Gill, Sai Sudharsan और Jos Buttler सिर्फ 4.4 ओवर में पवेलियन लौट गए। इस शुरुआती झटके ने पूरी टीम पर दबाव बना दिया, जिसका असर मिडिल ऑर्डर पर साफ दिखा। मैथ्यू हेडन ने कहा, “पावरप्ले में आप मैच जीत नहीं सकते, लेकिन हार जरूर सकते हैं–और हम वहीं हार गए।” मिडिल ऑर्डर पर बढ़ा दबाव मिडिल ऑर्डर में Rahul Tewatia, Shahrukh Khan, Glenn Phillips और Washington Sundar ने मिलकर सिर्फ 57 रन बनाए। फिलिप्स और तेवतिया ने मिलकर 19 गेंदों में सिर्फ 14 रन बनाए शाहरुख खान इस सीजन में 25 गेंदों पर 35 रन ही बना सके हैं तेवतिया के नाम 42 गेंदों पर 49 रन हैं हेडन के मुताबिक, इन खिलाड़ियों की भूमिका “फिनिशर” की है, न कि लंबे समय तक बल्लेबाज़ी करने की। उन्होंने कहा, “हमें इन खिलाड़ियों को ज्यादा गेंदें खेलने ही नहीं देनी चाहिए। यही उनकी भूमिका नहीं है।” 2025 जैसा नहीं रहा प्रदर्शन पिछले सीजन में टीम की सफलता काफी हद तक टॉप ऑर्डर पर निर्भर थी: साई सुदर्शन: 759 रन शुभमन गिल: 717 रन जोस बटलर: 538 रन इसी वजह से मिडिल ऑर्डर को ज्यादा जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़ी। लेकिन इस सीजन में टॉप ऑर्डर की फॉर्म गिरने से मिडिल ऑर्डर “एक्सपोज़” हो गया है। एक्सपर्ट्स की राय: क्या बदलाव जरूरी? पूर्व खिलाड़ी Faf du Plessis ने मिडिल ऑर्डर पर सवाल उठाते हुए कहा कि टीम में ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं दिखता जो मुश्किल हालात में शतक जैसी पारी खेल सके। वहीं Abhinav Mukund ने टीम के बेंच स्ट्रेंथ की ओर इशारा किया। उन्होंने Kumar Kushagra और Nishant Sindhu जैसे युवा खिलाड़ियों को मौका देने की बात कही, जो मिडिल ऑर्डर की समस्या का समाधान बन सकते हैं।  

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इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में रविवार के मुकाबलों के बाद पर्पल और ऑरेंज कैप की रेस और भी रोमांचक हो गई है। खासतौर पर Prince Yadav ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पर्पल कैप की टॉप-3 लिस्ट में जगह बना ली है। पर्पल कैप: प्रिंस यादव का जलवा पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेले गए मुकाबले में Punjab Kings ने 54 रन से जीत दर्ज की, जिसमें प्रिंस यादव ने 2 विकेट लेकर मैच में अहम भूमिका निभाई। इस सीजन में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतरीन रहा है–उन्होंने खेले गए सभी 6 मैचों में कम से कम एक विकेट जरूर लिया है। अब उनके नाम कुल 11 विकेट हो चुके हैं, जो Prasidh Krishna के बराबर हैं, लेकिन बेहतर इकॉनमी रेट के कारण वे उनसे आगे हैं। पर्पल कैप की रेस में फिलहाल Anshul Kamboj 13 विकेट के साथ पहले स्थान पर बने हुए हैं। वहीं Ravi Bishnoi 10 विकेट लेकर पांचवें स्थान पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा Bhuvneshwar Kumar और Jofra Archer भी इस रेस में मजबूती से बने हुए हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स के Kartik Tyagi ने 3/22 के शानदार प्रदर्शन के साथ अपनी स्थिति मजबूत की है। ऑरेंज कैप: टॉप-3 में कोई बदलाव नहीं रनों की रेस यानी ऑरेंज कैप में टॉप-3 बल्लेबाजों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। Heinrich Klaasen, Shubman Gill और Virat Kohli क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर बने हुए हैं। हालांकि, राजस्थान रॉयल्स के Vaibhav Sooryavanshi ने 46 रन की पारी खेलकर चौथे स्थान पर कब्जा कर लिया है। उभरते सितारे: कोनोली और आर्य का धमाका पंजाब किंग्स के Cooper Connolly ने 46 गेंदों में 87 रन बनाकर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और अब वे 223 रन के साथ छठे स्थान पर हैं। उनके साथ शानदार तालमेल दिखाने वाले Priyansh Arya ने 37 गेंदों में 93 रन ठोककर 200 रन का आंकड़ा पार कर लिया है और इस सीजन के उभरते सितारों में शामिल हो गए हैं। वहीं Yashasvi Jaiswal भी 223 रन के साथ बराबरी पर बने हुए हैं। क्या कहती है मौजूदा रेस? IPL 2026 अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां हर मैच के साथ लीडरबोर्ड बदल रहा है। गेंदबाजों में जहां प्रिंस यादव तेजी से उभरते नजर आ रहे हैं, वहीं बल्लेबाजों की रेस में भी युवा खिलाड़ियों का दबदबा बढ़ता दिख रहा है।    

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surbhi अप्रैल 16, 2026 0

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