भारत में तेजी से बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर अब सरकार ने सख्त निगरानी शुरू कर दी है. 1 मई 2026 से लागू हुए नए नियमों के बाद उन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ गया है, जहां खिलाड़ी पैसे लगाकर कैश रिवॉर्ड जीतते थे. सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद लोगों को आर्थिक नुकसान से बचाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध गेमिंग नेटवर्क पर रोक लगाना है.
सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को तीन श्रेणियों में बांटा है:
इस वर्गीकरण के जरिए अब यह तय करना आसान होगा कि कौन-सा प्लेटफॉर्म किस तरह की सेवा दे रहा है और कहां नियमों का उल्लंघन हो रहा है.
सरकार की सबसे बड़ी चिंता उन गेम्स को लेकर है, जिनमें खिलाड़ी पैसे जमा कर कैश प्राइज जीतते हैं. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे गेम्स से जुड़े आर्थिक नुकसान और लत की कई शिकायतें सामने आई थीं. इसी वजह से अब इन प्लेटफॉर्म्स पर सख्त रेगुलेशन लागू किया गया है.
सरकार ने “ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया” नाम की नई संस्था बनाई है. यह संस्था:
रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसी भी नए गेम को लॉन्च करने से पहले 90 दिनों के भीतर रेगुलेटरी अप्रूवल लेना जरूरी होगा.
नए नियमों के तहत कंपनियों को:
सरकार का मानना है कि इससे बच्चों में गेमिंग की लत और आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी.
अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स बैन या अवैध गेम्स का प्रमोशन नहीं कर सकेंगे. पिछले कुछ सालों में कई गेमिंग ऐप्स ने बड़े इन्फ्लुएंसर्स के जरिए यूजर्स को आकर्षित किया था. नए नियमों के बाद ऐसे प्रचार पर रोक लग सकती है.
इसके अलावा ईस्पोर्ट्स संगठनों के लिए 10 साल का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन भी जरूरी कर दिया गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों से ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
सरकार का दावा है कि यह कदम खिलाड़ियों की सुरक्षा और जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Sony ने भारतीय बाजार में अपनी नई Bravia 3II Smart TV सीरीज लॉन्च कर दी है। कंपनी ने इस टीवी को प्रीमियम फीचर्स और हाई-एंड एंटरटेनमेंट एक्सपीरियंस के साथ पेश किया है। खास बात यह है कि इस नई सीरीज में Sony का पावरफुल XR Processor अब पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती रेंज में उपलब्ध कराया गया है। नई Bravia 3II सीरीज में 4K रेजोल्यूशन के साथ 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है, जो मूवी देखने, स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग और गेमिंग के दौरान बेहद स्मूद विजुअल एक्सपीरियंस देता है। इसके अलावा टीवी में Dolby Vision और Dolby Atmos जैसे प्रीमियम ऑडियो-वीडियो फीचर्स भी दिए गए हैं। कई स्क्रीन साइज में आएगा टीवी Sony इस सीरीज को 55-inch, 65-inch, 75-inch और 85-inch स्क्रीन साइज में लॉन्च कर रही है। कंपनी ने जानकारी दी है कि 55-inch, 65-inch और 75-inch मॉडल्स इस महीने से बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे, जबकि 85-inch मॉडल अगस्त 2026 तक बाजार में आ सकता है। कीमत और उपलब्धता स्क्रीन साइज MRP बेस्ट बाय कीमत 55-इंच ₹1,59,900 ₹99,990 65-इंच ₹1,99,900 ₹1,24,990 75-इंच ₹2,89,900 ₹1,79,990 85-इंच ₹5,19,900 ₹3,05,990 यह टीवी Sony रिटेल स्टोर्स, ShopatSC, बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर्स और प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगा। डिस्प्ले और पिक्चर क्वालिटी में बड़ा अपग्रेड Sony Bravia 3II में कंपनी का XR Processor दिया गया है, जो कंटेंट को रियल-टाइम में ऑप्टिमाइज करके बेहतर पिक्चर क्वालिटी देता है। इसमें XR Triluminos Pro टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से रंग ज्यादा नैचुरल और रियलिस्टिक दिखाई देते हैं। वहीं XR Clear Image फीचर तस्वीरों को ज्यादा शार्प और डिटेल्ड बनाता है। Motionflow XR टेक्नोलॉजी तेज मूवमेंट वाले सीन जैसे स्पोर्ट्स और एक्शन फिल्मों में ब्लर को कम करती है, जिससे विजुअल्स काफी स्मूद दिखाई देते हैं। साउंड क्वालिटी को बनाया गया और दमदार Sony ने इस टीवी में प्रीमियम ऑडियो एक्सपीरियंस देने पर भी खास ध्यान दिया है। इसमें Dolby Atmos, Dolby Vision और DTS:X जैसे एडवांस्ड फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी के मुताबिक, इसके इनबिल्ट स्पीकर्स को इस तरह ट्यून किया गया है कि डायलॉग्स ज्यादा क्लियर सुनाई दें और हाई वॉल्यूम पर भी साउंड डिस्टॉर्ट न हो। गेमर्स के लिए खास फीचर्स Sony Bravia 3II खास तौर पर गेमिंग लवर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें HDMI 2.1 सपोर्ट मिलता है, जिसकी मदद से 4K रेजोल्यूशन पर 120fps तक गेमिंग की जा सकती है। इसके अलावा Variable Refresh Rate (VRR) और Auto Low Latency Mode (ALLM) जैसे फीचर्स गेमिंग को ज्यादा स्मूद और लैग-फ्री बनाते हैं। टीवी में डेडिकेटेड Game Menu, Dolby Vision Gaming और PS Remote Play जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। कंपनी ने इसे खास तौर पर PlayStation 5 के लिए ऑप्टिमाइज किया है। इसमें कुल चार HDMI 2.1 पोर्ट मिलते हैं। Google TV और AI फीचर्स का मिलेगा सपोर्ट Sony Bravia 3II में Google TV प्लेटफॉर्म मिलता है, जिसमें 4 लाख से ज्यादा मूवीज और टीवी शोज का एक्सेस मिलता है। इसके साथ हजारों ऐप्स और गेम्स भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। टीवी में Google Assistant के साथ hands-free voice search सपोर्ट भी दिया गया है, जिससे बिना रिमोट इस्तेमाल किए सिर्फ बोलकर कंटेंट सर्च किया जा सकता है। इसके अलावा यह Google Cast, AirPlay 2, Apple HomeKit और Amazon Alexa जैसे स्मार्ट डिवाइसेज के साथ भी काम करता है। कंपनी ने यह भी पुष्टि की है कि 2026 के सभी Bravia मॉडल्स में भविष्य के सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए Google Gemini सपोर्ट भी जोड़ा जाएगा।
AI सुरक्षा पर नई बहस, इंटरनेट डेटा से जुड़ा बड़ा खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने Claude AI मॉडल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कंपनी का कहना है कि इंटरनेट पर मौजूद “खतरनाक” और “ईविल AI” से जुड़ी कहानियों ने उसके AI मॉडल के व्यवहार को प्रभावित किया था। इसी वजह से Claude AI कुछ टेस्टिंग परिस्थितियों में ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रियाएं देने लगा था। कंपनी ने बताया कि यह समस्या अब पूरी तरह ठीक कर दी गई है और नए मॉडल में इस तरह का व्यवहार नहीं देखा जा रहा है। क्या था पूरा मामला? दरअसल, 2025 में कंपनी ने अपने Claude 4 मॉडल की सुरक्षा जांच के दौरान एक काल्पनिक प्रयोग किया था। इस टेस्ट में AI मॉडल को एक फर्जी कंपनी के ईमेल सिस्टम तक पहुंच दी गई थी। AI को ऐसे ईमेल दिखाए गए जिनमें यह संकेत था कि उसे जल्द बंद किया जा सकता है। साथ ही एक काल्पनिक अधिकारी के निजी संबंधों से जुड़ी जानकारी भी सिस्टम में मौजूद थी। टेस्ट के दौरान AI मॉडल ने खुद को बचाने के लिए उस अधिकारी को ब्लैकमेल करने जैसी प्रतिक्रिया दिखाई। कंपनी के मुताबिक कई परिस्थितियों में मॉडल ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए गलत रास्ता चुनने की कोशिश की। इंटरनेट डेटा बना वजह Anthropic की जांच में सामने आया कि Claude के इस व्यवहार की जड़ इंटरनेट पर उपलब्ध डेटा था। कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन कई पोस्ट और चर्चाओं में AI को इंसानों के खिलाफ, आत्म-सुरक्षा करने वाला या “ईविल” रूप में दिखाया जाता है। AI मॉडल ने ट्रेनिंग के दौरान ऐसे कंटेंट से व्यवहारिक पैटर्न सीख लिए थे। कंपनी ने कहा कि शुरुआती पोस्ट-ट्रेनिंग सिस्टम इस समस्या को रोकने में पर्याप्त नहीं था। कैसे सुधारी गई समस्या? कंपनी ने बताया कि केवल “सुरक्षित व्यवहार” के उदाहरण दिखाना काफी नहीं था। इसके बजाय AI को यह समझाना जरूरी था कि गलत और भ्रामक व्यवहार नैतिक रूप से क्यों गलत है। इसके लिए Anthropic ने ट्रेनिंग डेटा में कई बदलाव किए। मॉडल को ऐसे उदाहरण दिए गए जहां इंसान कठिन नैतिक परिस्थितियों में सही निर्णय लेते हैं। साथ ही AI को संवैधानिक और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित जवाबों से प्रशिक्षित किया गया। कंपनी के मुताबिक, नए Claude Haiku 4.5 मॉडल ने सुरक्षा परीक्षणों में शानदार प्रदर्शन किया और ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रिया बिल्कुल नहीं दिखाई। AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता AI इंडस्ट्री में यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया भर की टेक कंपनियां तेजी से शक्तिशाली AI मॉडल विकसित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI सिस्टम इंसानी मूल्यों के अनुरूप नहीं रहे, तो भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं। Anthropic के CEO Dario Amodei पहले भी उन्नत AI मॉडल्स के संभावित खतरों को लेकर चिंता जता चुके हैं। AI मॉडल्स पर बढ़ रही निगरानी हाल के महीनों में कई AI कंपनियां अपने मॉडल्स की सुरक्षा और व्यवहार को लेकर ज्यादा सतर्क हुई हैं। अब कंपनियां केवल स्मार्ट AI बनाने पर नहीं, बल्कि “जिम्मेदार AI” तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं। Anthropic का यह खुलासा दिखाता है कि इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि AI सिस्टम्स के व्यवहार को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है।
महंगे फ्लैगशिप स्मार्टफोन खरीदने का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए बड़ी खबर है। Flipkart अपनी Sasa Lele Sale के दौरान iPhone 17 Pro Max पर भारी छूट दे रहा है। बैंक ऑफर्स और कैशबैक को मिलाकर इस प्रीमियम iPhone की प्रभावी कीमत करीब ₹1.09 लाख तक पहुंच सकती है। बढ़ती लागत और RAM सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बीच फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स पर इतने बड़े ऑफर्स कम देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में यह सेल iPhone खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए खास अवसर मानी जा रही है। शुरू हो चुकी है Sasa Lele Sale Flipkart की Sasa Lele Sale शुरू हो चुकी है। शुरुआती चरण में केवल Flipkart Plus और Black मेंबर्स को अर्ली एक्सेस दिया गया है, जबकि बाकी यूजर्स 9 मई 2026 से इन ऑफर्स का फायदा उठा सकेंगे। सेल में कई प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर डील्स मिल रही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा iPhone 17 Pro Max के ऑफर को लेकर हो रही है। कितनी कम हुई कीमत? iPhone 17 Pro Max की लॉन्च कीमत ₹1,34,900 थी, लेकिन सेल के दौरान इसकी शुरुआती कीमत ₹1,19,900 रखी गई है। अगर ग्राहक Flipkart Axis Bank Credit Card से पेमेंट करते हैं, तो ₹6,000 का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। इसके बाद कीमत घटकर ₹1,13,900 रह जाएगी। इसके अलावा ₹4,000 तक का अतिरिक्त कैशबैक भी दिया जा रहा है। यानी सभी ऑफर्स के बाद फोन की प्रभावी कीमत करीब ₹1,09,900 तक पहुंच सकती है। क्यों खास माना जा रहा है यह iPhone? iPhone 17 Pro Max को Apple Inc. का सबसे प्रीमियम स्मार्टफोन माना जा रहा है। इसमें 6.9 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलता है, जो Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन के साथ आता है। कंपनी के मुताबिक यह पहले के मुकाबले ज्यादा स्क्रैच-रेसिस्टेंट है। फोन में नया A19 Pro चिपसेट दिया गया है, जो गेमिंग और हैवी यूसेज के दौरान बेहतर थर्मल मैनेजमेंट और तेज परफॉर्मेंस देता है। इसी वजह से इसे कई Android फ्लैगशिप्स का मजबूत प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है। कैमरा फीचर्स भी हैं दमदार iPhone 17 Pro Max में ट्रिपल 48MP रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। सभी कैमरे Apple Fusion टेक्नोलॉजी के साथ आते हैं। मुख्य कैमरा लो-लाइट फोटोग्राफी में बेहतर रिजल्ट देता है, जबकि टेलीफोटो और अल्ट्रा-वाइड कैमरे अच्छी डिटेल कैप्चर करने में सक्षम हैं। वीडियो रिकॉर्डिंग के मामले में भी इसे बाजार के सबसे मजबूत स्मार्टफोन्स में गिना जा रहा है। क्या यह सही समय है खरीदारी का? स्मार्टफोन बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों के बीच इस तरह का बड़ा डिस्काउंट कम ही देखने को मिलता है। खासकर उन ग्राहकों के लिए जो लंबे समय से Pro Max सीरीज खरीदने का इंतजार कर रहे थे, यह सेल काफी आकर्षक साबित हो सकती है। हालांकि ऑफर्स सीमित समय के लिए हैं, इसलिए खरीदारी से पहले बैंक ऑफर्स, एक्सचेंज डील्स और स्टॉक उपलब्धता जरूर चेक कर लें।