स्मार्टफोन बाजार में अपनी आक्रामक रणनीति के लिए जानी जाने वाली Realme अब एक और इनोवेटिव डिवाइस के साथ तैयार है। कंपनी जल्द ही भारत में Realme 16 5G लॉन्च करने जा रही है, जिसे देश का पहला ‘सेल्फी मिरर फोन’ कहा जा रहा है।
यह डिवाइस खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है, जो सोशल मीडिया के लिए बेहतर सेल्फी और स्टाइलिश लुक को प्राथमिकता देते हैं।
Realme 16 5G की सबसे बड़ी खासियत इसका यूनिक सेल्फी मिरर फीचर है। फोन के बैक पैनल पर एक छोटा गोल मिरर दिया गया है, जो रियर कैमरे से सेल्फी लेते समय व्यूफाइंडर का काम करेगा।
इस फीचर के जरिए यूजर्स हाई-क्वालिटी रियर कैमरे से भी परफेक्ट सेल्फी क्लिक कर सकेंगे।
फोन का डिजाइन प्रीमियम और मॉडर्न रखा गया है। इसमें स्क्वायर कैमरा मॉड्यूल की जगह हॉरिजॉन्टल कैमरा बार मिलता है, जो Google Pixel और iPhone Air जैसी स्टाइलिंग से प्रेरित है।
कंपनी इसे “Elegant Air Design” बता रही है, जो हल्का और आरामदायक ग्रिप देने वाला होगा।
परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek Dimensity 6400 Turbo चिपसेट दिया गया है। हालांकि यह पिछले मॉडल Realme 15 के चिपसेट से थोड़ा कम पावरफुल माना जा रहा है, लेकिन रियल-लाइफ परफॉर्मेंस लॉन्च के बाद ही साफ होगी।
बैटरी के मामले में यह फोन काफी दमदार है:
Realme 16 5G को मजबूती के लिहाज से भी मजबूत बनाया गया है। इसमें IP66, IP68, IP69 और IP69K रेटिंग्स दी गई हैं, जो इसे पानी और धूल से सुरक्षित बनाती हैं।
इसके अलावा, बेहतर कूलिंग के लिए 6050mm² वॉपर चेंबर मिलने की भी संभावना है।
यह स्मार्टफोन खासकर युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। अगर आप स्टाइलिश डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ और बेहतरीन सेल्फी अनुभव चाहते हैं, तो यह फोन आपके लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Acer ने भारतीय बाजार में अपना नया एआई लैपटॉप Acer Aspire 5 AI लॉन्च कर दिया है। यह लैपटॉप Intel Core Ultra प्रोसेसर और Copilot+ फीचर्स के साथ पेश किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह डिवाइस काम, कंटेंट स्ट्रीमिंग और हल्की गेमिंग के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। पतले और हल्के डिजाइन के साथ आने वाला यह लैपटॉप 32GB तक रैम और 1TB SSD स्टोरेज जैसे दमदार फीचर्स से लैस है। इतनी है कीमत और उपलब्धता Acer Aspire 5 AI की शुरुआती कीमत 79,999 रुपये रखी गई है। यह सिल्वर कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। ग्राहक इसे एसर स्टोर, Amazon India, Croma, Reliance Digital और Vijay Sales जैसे प्लेटफॉर्म्स से खरीद सकेंगे। डिस्प्ले और डिजाइन की खासियत लैपटॉप में 14 इंच का WUXGA IPS डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रिजॉल्यूशन 1920×1200 पिक्सल है। 16:10 आस्पेक्ट रेशियो की वजह से स्क्रीन पर ज्यादा कंटेंट देखा जा सकता है। कंपनी ने इसमें Acer ComfyView टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है, जो स्क्रीन ग्लेयर कम करने और आंखों पर दबाव घटाने में मदद करती है। डिजाइन की बात करें तो इसका वजन करीब 1.2 किलोग्राम है और इसमें 180 डिग्री हिंज दिया गया है, जिससे स्क्रीन को फ्लैट मोड में आसानी से खोला जा सकता है। दमदार प्रोसेसर और बैटरी Acer Aspire 5 AI में Intel Core Ultra 5 और Intel Core Ultra 7 H-सीरीज प्रोसेसर का विकल्प मिलता है। यह Windows 11 Home पर चलता है और Copilot+ पीसी के तौर पर पेश किया गया है। इसमें 32GB तक LPDDR5 रैम और 1TB PCIe Gen 4 NVMe SSD स्टोरेज दी गई है। लैपटॉप में 53.8Wh बैटरी, 65W USB Type-C फास्ट चार्जिंग, Wi-Fi 6 और Bluetooth 5.1 सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा USB Type-C, HDMI, SD कार्ड रीडर और बैकलिट कीबोर्ड में खास Copilot बटन भी दिया गया है।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चित डेवलपर कॉन्फ्रेंस में से एक Apple WWDC 2026 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। Apple ने इस साल होने वाले अपने वार्षिक इवेंट की तारीखों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है, जिसके बाद टेक इंडस्ट्री में उत्साह तेज हो गया है। यह इवेंट 8 जून से 12 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य कीनोट 8 जून को Apple Park में होगा, जो भारतीय समयानुसार रात 10:30 बजे लाइव प्रसारित किया जाएगा। AI पर रहेगा Apple का सबसे बड़ा फोकस इस बार WWDC 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple अपने वर्चुअल असिस्टेंट Siri को पूरी तरह नए AI अवतार में पेश कर सकता है, जिसे कई लोग “AI Siri 2.0” के रूप में देख रहे हैं। नया Siri पहले से ज्यादा स्मार्ट, इंटरैक्टिव और कॉन्टेक्स्ट-अवेयर होगा। यह यूजर्स की स्क्रीन पर मौजूद जानकारी को समझकर अलग-अलग ऐप्स के बीच टास्क पूरा करने में सक्षम हो सकता है। iOS 27 और नए सॉफ्टवेयर अपडेट्स की झलक Apple इस इवेंट में अपने प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम का अगला वर्जन iOS 27 पेश कर सकता है। इसमें AI बेस्ड कई नए फीचर्स जोड़े जाने की उम्मीद है, खासकर कैमरा और पर्सनल असिस्टेंस से जुड़े अनुभवों में। इसके साथ ही macOS 27 में डिजाइन और यूजर इंटरफेस में बदलाव की संभावना है। Safari ब्राउज़र में टैब मैनेजमेंट और ऑटो ऑर्गनाइजेशन जैसे फीचर्स भी शामिल किए जा सकते हैं। Camera और AI फीचर्स में बड़ा अपग्रेड लीक्स के मुताबिक, Apple अपने Camera ऐप को AI-संचालित फीचर्स से लैस कर सकता है। इसमें ऑब्जेक्ट रिकग्निशन, लाइव ट्रांसलेशन और रियल-टाइम इंटरैक्शन जैसे फीचर्स शामिल हो सकते हैं, जो यूजर एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल सकते हैं। Apple Watch और Vision Pro पर भी नजर इस इवेंट में watchOS 27 और visionOS 3 को लेकर भी अहम घोषणाएं संभव हैं। Apple Watch में नए वॉच फेस और बेहतर डिवाइस इंटीग्रेशन देखने को मिल सकता है, जबकि Vision Pro के लिए सॉफ्टवेयर अपग्रेड्स पर खास फोकस रहेगा। Apple Park में होगा ग्लोबल टेक शो पूरा इवेंट कैलिफोर्निया स्थित Apple Park में आयोजित किया जाएगा। हालांकि दुनियाभर के डेवलपर्स और यूजर्स इसे Apple की वेबसाइट, YouTube चैनल और डेवलपर ऐप के जरिए लाइव देख सकेंगे।
Unique Identification Authority of India यानी UIDAI ने Aadhaar यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। अब पुराने mAadhaar ऐप को जल्द बंद किया जाएगा और उसकी जगह नया Aadhaar ऐप इस्तेमाल करना होगा। नए ऐप में पहले से ज्यादा सिक्योरिटी, बेहतर प्राइवेसी कंट्रोल और कई स्मार्ट फीचर्स दिए गए हैं। हालांकि, पुराने mAadhaar ऐप का डेटा नए ऐप में ऑटोमैटिक ट्रांसफर नहीं होगा। यानी यूजर्स को नया ऐप डाउनलोड करने के बाद अपना Aadhaar प्रोफाइल दोबारा सेटअप करना पड़ेगा। ऐसे में अगर आप अभी mAadhaar ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि नए ऐप में कैसे शिफ्ट करना है। नए Aadhaar ऐप में कैसे करें शिफ्ट? सबसे पहले नया Aadhaar ऐप Google Play या Apple App Store से डाउनलोड करें। ऐप इंस्टॉल होने के बाद वही मोबाइल नंबर दर्ज करें जो आपके Aadhaar से लिंक है। इसके बाद OTP वेरिफिकेशन पूरा करना होगा। कुछ मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए फेस ऑथेंटिकेशन भी मांगा जा सकता है। लॉगिन के बाद आपको सिक्योरिटी PIN सेट करना होगा या फिर फिंगरप्रिंट और फेस अनलॉक भी एक्टिवेट कर सकते हैं। अब आपको अपना Aadhaar प्रोफाइल दोबारा जोड़ना होगा। इसके लिए Aadhaar नंबर डालकर फिर से OTP वेरिफिकेशन करना पड़ेगा। अगर एक ही मोबाइल नंबर से परिवार के कई Aadhaar जुड़े हैं, तो उन्हें भी इसी ऐप में आसानी से जोड़ा जा सकता है। जब आपको यकीन हो जाए कि नया ऐप सही तरीके से काम कर रहा है और सभी डिटेल्स दिखाई दे रही हैं, तब आप पुराने mAadhaar ऐप को फोन से डिलीट कर सकते हैं। नए Aadhaar ऐप की 5 बड़ी खासियतें QR कोड के जरिए Aadhaar शेयर और वेरिफाई करने की सुविधा पहले से बेहतर प्राइवेसी कंट्रोल Aadhaar से जुड़े कई काम सीधे ऐप में करने का ऑप्शन फेस ऑथेंटिकेशन सपोर्ट बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक फीचर नया ऐप यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित और आसान डिजिटल पहचान अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है। खास बात यह है कि अब Aadhaar की फोटोकॉपी साथ रखने की जरूरत भी काफी हद तक कम हो सकती है।