आपका सिम नंबर, जिसे ICCID (Integrated Circuit Card Identification) कहा जाता है, एक यूनिक पहचान संख्या होती है। यह आमतौर पर 19 या 20 अंकों का होता है और हर सिम कार्ड या eSIM के लिए अलग होता है।
यह नंबर मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर को आपके सिम को पहचानने और नेटवर्क से जोड़ने में मदद करता है। सिम पोर्ट करने, नेटवर्क समस्या सुलझाने या नए फोन में eSIM एक्टिवेट करने के दौरान इसकी जरूरत पड़ती है।
अगर आप अपने स्मार्टफोन में सिम नंबर देखना चाहते हैं, तो यह सबसे आसान तरीका है:
ध्यान दें कि अलग-अलग ब्रांड के फोन में ये ऑप्शन थोड़ा अलग नाम से हो सकते हैं, लेकिन प्रक्रिया लगभग समान रहती है।
अगर सेटिंग्स में सिम नंबर नहीं दिख रहा है, तो आप मैनुअल तरीका अपना सकते हैं:
यह तरीका लगभग हर फोन में काम करता है, चाहे वह एंड्रॉइड हो या iPhone।
कुछ स्मार्टफोन्स में आप डायल पैड से एक खास कोड डालकर भी सिम से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। कई बार ICCID नंबर IMEI के साथ दिखाई देता है।
ICCID नंबर जानना कई स्थितियों में जरूरी हो सकता है–
इसलिए बेहतर है कि आप अपने फोन में इसे एक बार जरूर चेक कर लें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय स्मार्टफोन निर्माता कंपनी लावा ने अपने नए बजट 5G स्मार्टफोन Lava Bold N2 5G की पहली सेल शुरू कर दी है। यह स्मार्टफोन 9 जून से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न पर बिक्री के लिए उपलब्ध हो गया है। पिछले महीने लॉन्च हुए इस फोन को खासतौर पर उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो कम कीमत में दमदार बैटरी, बेहतर परफॉर्मेंस और 5G कनेक्टिविटी चाहते हैं। कंपनी ने इस स्मार्टफोन को एक ही स्टोरेज वेरिएंट में पेश किया है। इसकी मूल कीमत ₹12,999 रखी गई है, लेकिन पहली सेल के दौरान ग्राहकों को ₹1,000 की विशेष छूट मिल रही है। इस ऑफर के बाद फोन की प्रभावी कीमत ₹11,999 हो जाती है। स्मार्टफोन दो आकर्षक रंगों—रीगल गोल्ड और बिलियनेयर ब्लू में उपलब्ध है। कंपनी ग्राहकों को फ्री होम सर्विस की सुविधा भी दे रही है। 8GB तक रैम और दमदार प्रोसेसर Lava Bold N2 5G में 4GB फिजिकल रैम के साथ 4GB वर्चुअल रैम का सपोर्ट दिया गया है, जिससे कुल 8GB रैम का अनुभव मिलता है। फोन में UNISOC T8200 प्रोसेसर लगाया गया है, जो रोजमर्रा के कार्यों और मल्टीटास्किंग को बेहतर बनाता है। 6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की बड़ी बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। इसके साथ 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है। स्मार्टफोन में 6.75 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले और 120Hz रिफ्रेश रेट दिया गया है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग का अनुभव स्मूद बनता है। स्टॉक एंड्रॉयड और IP64 सुरक्षा Lava Bold N2 5G एंड्रॉयड 16 आधारित स्टॉक एंड्रॉयड पर चलता है, जिसमें अनचाहे ऐप्स और विज्ञापन नहीं मिलते। वहीं IP64 रेटिंग फोन को धूल और पानी की हल्की छींटों से सुरक्षा प्रदान करती है। बजट सेगमेंट में यह स्मार्टफोन फीचर्स और कीमत के लिहाज से ग्राहकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर सामने आया है।
अगर आपको लगता है कि सभी विंडो एसी एक जैसे दिखते हैं और आपके घर की खूबसूरती को कम कर देते हैं, तो अब बाजार में एक ऐसा विकल्प मौजूद है जो इस सोच को बदल सकता है। अपने अनोखे डिजाइन और प्रीमियम लुक के लिए चर्चित Windmill के विंडो एसी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये एसी सिर्फ ठंडी हवा ही नहीं देते, बल्कि घर के इंटीरियर को भी आकर्षक बनाने का काम करते हैं। विंडो AC की पारंपरिक सोच को बदला सालों से बाजार में मिलने वाले अधिकांश विंडो एसी एक जैसे बॉक्सी डिजाइन, बड़े वेंट्स और साधारण लुक के साथ आते रहे हैं। लेकिन Windmill AC ने इस पारंपरिक डिजाइन को बदलने की कोशिश की है। कंपनी ने अपने एसी को मॉडर्न होम इंटीरियर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। इसके घुमावदार किनारे, साफ-सुथरा फ्रंट पैनल और मिनिमलिस्ट लुक इसे सामान्य विंडो एसी से अलग बनाते हैं। आसान इंस्टॉलेशन और प्रीमियम फिनिश Windmill AC की एक बड़ी खासियत इसका इंस्टॉलेशन डिजाइन भी है। जहां सामान्य विंडो एसी लगाने के बाद खिड़की के आसपास खाली जगह और गैप दिखाई देते हैं, वहीं Windmill AC इन गैप्स को बेहतर तरीके से कवर करता है। इससे इंस्टॉलेशन के बाद पूरा सेटअप अधिक साफ और प्रीमियम दिखाई देता है। सिर्फ लुक्स नहीं, परफॉर्मेंस भी दमदार Windmill AC केवल डिजाइन के दम पर चर्चा में नहीं है। कंपनी का दावा है कि इसके एसी पारंपरिक विंडो एसी की तुलना में कम शोर करते हैं और बेहतर कूलिंग अनुभव प्रदान करते हैं। इसके अलावा इनमें कई स्मार्ट फीचर्स भी दिए गए हैं: स्मार्टफोन से कंट्रोल करने की सुविधा रिमोट ऑपरेशन आसान सेटिंग मैनेजमेंट वॉशेबल एयर फिल्टर कम शोर वाला संचालन यूजर अपने मोबाइल फोन के जरिए कहीं से भी एसी को ऑन या ऑफ कर सकते हैं और तापमान नियंत्रित कर सकते हैं। किन लोगों के लिए है बेहतर विकल्प? रिपोर्ट्स के मुताबिक Windmill AC छोटे और मध्यम आकार के कमरों के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। यह खासतौर पर: अपार्टमेंट स्टूडियो फ्लैट होम ऑफिस छोटे बेडरूम जैसी जगहों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। खरीदने से पहले जान लें ये बातें हालांकि Windmill एक भारतीय ब्रांड नहीं है, लेकिन इसके कुछ मॉडल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत में उपलब्ध हैं। खरीदारी से पहले ग्राहकों को निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए: सर्विस नेटवर्क की उपलब्धता स्पेयर पार्ट्स सपोर्ट इंस्टॉलेशन सहायता बिजली खपत और ऊर्जा रेटिंग स्टाइल और टेक्नोलॉजी का नया मेल आज के दौर में लोग केवल बेहतर कूलिंग ही नहीं, बल्कि ऐसे उपकरण भी चाहते हैं जो घर की सजावट के साथ मेल खाएं। Windmill AC इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यदि आप ऐसा विंडो एसी चाहते हैं जो परफॉर्मेंस के साथ-साथ आपके कमरे की खूबसूरती भी बढ़ाए, तो यह एक दिलचस्प विकल्प साबित हो सकता है।
अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी टी-मोबाइल (T-Mobile) ने भारत में अपना पहला ऑफिस खोल दिया है। कंपनी ने हैदराबाद में एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) शुरू किया है। हालांकि, इसका उद्देश्य भारतीय टेलिकॉम बाजार में प्रवेश करना या जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों को चुनौती देना नहीं है। दरअसल, कंपनी इस सेंटर के जरिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और परिचालन लागत को कम करने पर फोकस कर रही है। भारत क्यों आई T-Mobile? रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लागत नियंत्रण की रणनीति के चलते टी-मोबाइल ने पिछले कुछ समय में अमेरिका में कर्मचारियों की संख्या कम की है। कंपनी ने कई रिटेल स्टोर भी बंद किए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म व मोबाइल ऐप पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है। ऐसे में कम लागत और मजबूत तकनीकी प्रतिभा की उपलब्धता के कारण भारत कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी टी-मोबाइल के पास करीब 14 करोड़ ग्राहक हैं, जिससे वह अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बनती है। कंपनी केवल मोबाइल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सैटेलाइट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी काम कर रही है। इसके लिए उसने एलन मस्क की कंपनी Starlink के साथ साझेदारी की है। भारत में क्या होगा काम? हैदराबाद स्थित नया टेक्नोलॉजी सेंटर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करेगा, जिनमें शामिल हैं— सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग साइबर सुरक्षा DevOps प्रोडक्ट डेवलपमेंट डेटा एनालिटिक्स रिपोर्ट्स के अनुसार, टी-मोबाइल का लक्ष्य वर्ष 2027 तक भारत में लगभग 1,000 कर्मचारियों की टीम तैयार करना है। क्या कहा कंपनी ने? टी-मोबाइल अमेरिका के आईटी ऑपरेशन्स के वाइस प्रेसिडेंट चंद्रा गुप्ता के अनुसार, हैदराबाद स्थित ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटर कंपनी की इंजीनियरिंग और डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा और ग्राहकों के लिए बेहतर समाधान विकसित करने में मदद करेगा। क्या Jio और Airtel को होगी परेशानी? फिलहाल इसका जवाब नहीं है। टी-मोबाइल भारत में मोबाइल सेवाएं शुरू नहीं कर रही है। कंपनी का भारतीय कार्यालय केवल अमेरिकी ग्राहकों के लिए तकनीकी और बैकएंड सपोर्ट का काम करेगा। इसलिए रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के लिए इससे किसी प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धा की संभावना नहीं दिखाई देती। हालांकि, भारत के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे आईटी और टेक सेक्टर में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।