Babulal Marandi

Jail Incident
जेल में गर्भवती हुई महिला कैदी, मचा हड़कंप, बाबूलाल ने की जांच की मांग

रांची। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) के अधीक्षक पर महिला बंदी का मानसिक और शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस सनसनीखेज आरोप ने राज्य के सियासी और प्रशासनिक महकमे में भूचाल ला दिया है। होटवार जेल एक बार फिर शर्मनाक और गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। सबूतों का हवाला दिया नेता प्रतिपक्ष ने बाबूलाल ने पत्र में लिखा है कि उनके पास इसके पर्याप्त सबूत हैं। महिला बंदी गर्भवती हो गई है। यह संस्थागत अपराध है। इस तरह की घटना राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के पूरी तरह से ध्वस्त होने का प्रमाण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इस गंभीर मामले में कार्रवाई करने की बजाय प्रशासनिक अधिकारी पूरे प्रकरण को दबाने में जुटे हैं। जेल आईजी पर दोषी को बचाने का आरोप चिट्‌ठी में उन्होंने जेल आईजी पर फाइलों को गायब करने और दोषी अधिकारी को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। बाबूलाल का कहना है कि महिला बंदी को बीमारी और इलाज के बहाने जेल से बाहर गुप्त स्थानों और अस्पतालों में ले जाया जा रहा है, ताकि हर प्रकार के जैविक और फॉरेंसिक साक्ष्य को समय रहते नष्ट किया जा सके। इसके बाद रविवार को जेल प्रशासन ने महिला की गर्भावस्था की जांच कराई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई।  यह है पूरा मामला ब्राउन शुगर तस्करी मामले में सुखदेव नगर पुलिस ने 7 नवंबर 2025 को महिला को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे होटवार जेल भेजा गया। जेल प्रशासन के अनुसार 28 अप्रैल को उसने पेट दर्द की शिकायत की तो जेल प्रशासन ने उसका इलाज कराया। बताया जा रहा है कि 12 मई को उसने वार्ड में रह रही महिला बंदियों को बताया कि उसके साथ गलत हुआ है। यह बात जेल में तेजी से फैली। जेलर लवकुश कुमार तक भी बात पहुंची, तो उन्होंने जेल अधीक्षक को इसकी सूचना दी। फिर महिला डॉक्टर अपराजिता के नेतृत्व में टीम बनाकर उसकी जांच कराई गई। इसके बाद जेल अधीक्षक के चंद्रशेखर ने 13 मई को जेल आईजी सुदर्शन मंडल को इसकी जानकारी दी। उन्होंने जेल अधीक्षक से पूछताछ की। जांच रिपोर्ट का डॉक्टर से एनालिसिस कराया। लेकिन, उसके गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई। जेल अधीक्षक ने कहा-महिला ने वीआईपी व्यवस्था मांगी थी जेल अधीक्षक के चंद्रशेखर ने महिला बंदी के आरोप को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि उससे कभी मुलाकात तक नहीं हुई। वह जेल में वीआईपी सुविधा मांग रही थी। वह ड्रग्स एडिक्टेड है। उसने कहा था कि ड्रग्स और मोबाइल की सुविधा उपलब्ध कराएं, वरना उन्हें फंसा देगी। पूरे मामले में जिस स्तर से भी जांच कराने की जरूरत हो, कराई जा सकती है। इस मामले को जिस व्यक्ति ने वायरल किया है, अगर वह साबित नहीं कर पाया तो उसके खिलाफ मानहानि का केस करूंगा।

Anjali Kumari मई 18, 2026 0
Babulal Marandi
JET परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सरकार को घेरा , JPSC अध्यक्ष हटाने की मांग

रांची। झारखंड में 26 अप्रैल को आयोजित JET परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। भाजपा नेता और विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।   JPSC अध्यक्ष पर उठाए सवाल, हटाने की मांग मरांडी ने Jharkhand Public Service Commission (JPSC) के अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग का नेतृत्व पूरी तरह विफल हो चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि “अयोग्य और नकारा” अध्यक्ष को तत्काल पद से हटाया जाए। उनके अनुसार, बार-बार हो रही गड़बड़ियों के लिए शीर्ष स्तर की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।   परीक्षा में सामने आईं गंभीर खामियां JET परीक्षा के दौरान कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। रांची के एक केंद्र पर उड़िया विषय का प्रश्नपत्र इतनी खराब प्रिंटिंग में था कि उसे पढ़ना मुश्किल हो गया। वहीं Bokaro के एक परीक्षा केंद्र पर शिक्षा विषय का प्रश्नपत्र पहुंचा ही नहीं। इसके अलावा अंग्रेजी विषय में एक ही प्रश्न दो बार पूछे जाने और कुछ सवालों में विकल्प नहीं दिए जाने जैसी त्रुटियां भी सामने आईं।   दो विषयों की परीक्षा रद्द इन अनियमितताओं के चलते JPSC ने उड़िया और शिक्षा विषय की परीक्षा को रद्द कर दिया है। आयोग ने कहा है कि इन परीक्षाओं की नई तिथि की जानकारी बाद में दी जाएगी। यह परीक्षा राज्य के छह जिलों में 430 केंद्रों पर आयोजित की गई थी।   ‘भ्रष्टाचार का अड्डा बना JPSC’ मरांडी ने आरोप लगाया कि आयोग में परीक्षा संचालन से लेकर आउटसोर्सिंग और ठेकों तक में गड़बड़ियां हैं। उन्होंने इसे “भ्रष्टाचार का अड्डा” बताते हुए कहा कि इसमें कमीशनखोरी और अनियमितताओं का बोलबाला है।

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
Man applying sunscreen and skincare routine to remove tan and protect skin from UV rays
पुरुषों के लिए गाइड: सिर्फ 7 दिनों में टैन कैसे हटाएं – आसान और असरदार तरीका

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में पुरुषों की त्वचा लगातार धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहती है। ऑफिस जाने का रोज़ाना सफर हो, वीकेंड पर बाइक राइड हो या आउटडोर स्पोर्ट्स–इन सबके कारण चेहरे पर जिद्दी टैन, असमान स्किन टोन और डलनेस साफ दिखाई देने लगती है। अच्छी बात यह है कि टैन हटाने के लिए आपको बहुत जटिल या लंबी स्किनकेयर रूटीन की जरूरत नहीं है। सही प्रोडक्ट्स और साइंटिफिक अप्रोच के साथ आप सिर्फ एक हफ्ते में अपनी स्किन को बेहतर बना सकते हैं। आखिर टैन होता क्यों है? जब आपकी त्वचा सूरज की UV किरणों के संपर्क में आती है, तो शरीर खुद को बचाने के लिए मेलानिन नामक पिगमेंट बनाता है। यही मेलानिन त्वचा को डार्क बनाता है। पुरुषों की त्वचा महिलाओं की तुलना में लगभग 20% मोटी होती है और इसमें ऑयल प्रोडक्शन भी ज्यादा होता है। यही कारण है कि टैन त्वचा पर जमा होकर ज्यादा गहरा और पैची दिखाई देता है। 7 दिनों का असरदार डिटैन रूटीन Step 1: दिन की शुरुआत करें डिटैन फेसवॉश से कई पुरुष आज भी चेहरे पर साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल करते हैं, जो स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक अच्छा डिटैन फेसवॉश त्वचा की ऊपरी परत से डेड स्किन और गंदगी हटाता है। यह स्किन को साफ करने के साथ-साथ आगे इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। Step 2: हफ्ते में 2 बार डिटैन फेस मास्क लगाएं सिर्फ फेसवॉश से गहरा टैन नहीं हटता। इसके लिए डिटैन फेस मास्क जरूरी है। यह मास्क खास एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और क्ले से बना होता है, जो त्वचा के अंदर जमा मेलानिन को तोड़ने में मदद करता है। हफ्ते में 2 बार 10–15 मिनट लगाने से स्किन धीरे-धीरे साफ और ब्राइट दिखने लगती है। Step 3: मॉइश्चराइजर से स्किन को हाइड्रेट रखें बहुत से लोग मानते हैं कि टैन हटाने के लिए स्किन को ड्राय रखना चाहिए, लेकिन यह गलत है। ड्राय स्किन और भी ज्यादा डल और डार्क दिखती है। इसलिए हर बार फेसवॉश या मास्क के बाद एक हल्का, ऑयल-फ्री मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। इससे त्वचा सॉफ्ट, हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहती है। Step 4: सनस्क्रीन है सबसे जरूरी अगर आप सनस्क्रीन नहीं लगाते, तो आपका सारा डिटैन प्रयास बेकार हो सकता है। SPF 50 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोज सुबह लगाना जरूरी है। यह आपकी त्वचा को UV किरणों से बचाता है और नए टैन को बनने से रोकता है। यह रूटीन क्यों सबसे असरदार है? यह डिटैन रूटीन तीन स्तरों पर काम करता है: Removal (हटाना): डेड और डार्क स्किन को साफ करता है Correction (सुधार): गहरे पिगमेंट को कम करता है Prevention (बचाव): नए टैन को बनने से रोकता है

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Babulal Marandi Statement
“जहां हाथ डालो, वहीं घोटाला” – मरांडी के निशाने पर हेमंत सरकार

रांची। झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटालों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी  ने राज्य की हेमंत सोरेन  सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ गया है कि “जहां हाथ डालिए, वहीं नया घोटाला सामने आ जाता है।”मरांडी ने कहा कि खनन क्षेत्र में पत्थर, कोयला, बालू और लौह अयस्क की खुली लूट तो दिख रही है, लेकिन इसके अलावा भी सरकारी धन की बड़े पैमाने पर बंदरबांट हो रही है। उनके अनुसार यह स्थिति राज्य को “अंदर से खोखला” कर रही है और आम जनता इससे परेशान है।   रांची में करोड़ों की अवैध निकासी का मामला राजधानी रांची में हाल ही में पशुपालन विभाग के दो कर्मचारियों द्वारा लगभग 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। मरांडी ने दावा किया कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि बोकारो और हजारीबाग जैसे अन्य जिलों में भी इसी तरह की वित्तीय अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घोटाले पिछले कई वर्षों से जारी हैं और अब धीरे-धीरे उजागर हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।   उच्च अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल मरांडी ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही गड़बड़ियां बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं हैं। उन्होंने इसे “संगठित भ्रष्टाचार” करार देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।   सरकार से जांच और कार्रवाई की मांग भाजपा नेता ने राज्य सरकार से सभी विभागों का व्यापक ऑडिट कराने, कोषागार से हुई निकासी की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

Anjali Kumari अप्रैल 15, 2026 0
Jharkhand Treasury Scam
Jharkhand Treasury Scam: बाबूलाल मरांडी ने CBI जांच की मांग की

रांची।  झारखंड में सरकारी खजाने (ट्रेजरी) से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस प्रकरण की तुलना बहुचर्चित 'चारा घोटाले' से करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई (CBI) या किसी न्यायिक एजेंसी से कराने की पुरजोर मांग की है। राज्य के पुलिस विभाग सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों में हुई इस वित्तीय हेराफेरी के कारण प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है।   चारा घोटाले की तर्ज पर सरकारी खजाने में सेंध नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि ऊर्जा, पेयजल और पर्यटन जैसे विभागों के खजानों से भी अवैध रूप से करोड़ों रुपये निकाले गए हैं। मरांडी का आरोप है कि सरकारी संरक्षण के बिना इतनी बड़ी राशि की हेराफेरी संभव नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि दोषियों को सजा दिलाने और सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, जो केवल केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से ही संभव है।   सीआईडी जांच का विरोध और सीबीआई-ईडी की मांग भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी (CID) जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रेजरी में निकासी के जिम्मेदार अधिकारी (DDO) अक्सर एएसपी या डीएसपी स्तर के होते हैं, और सीआईडी में जांच करने वाले अधिकारी भी इसी रैंक के होते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मी ही अपने विभाग के दूसरे पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष जांच कैसे करेंगे? भाजपा ने मांग की है कि इस घोटाले के तार कई राज्यों से जुड़े होने के कारण इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई को शामिल किया जाना चाहिए। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि घोटाले का पैसा अन्य राज्यों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया है, जिसकी गहराई से जांच आवश्यक है।   वेतन संकट: 2.80 लाख से अधिक परिवारों की टूटी कमर ट्रेजरी घोटाले का सबसे भयावह असर राज्य के सरकारी कर्मचारियों पर पड़ा है। प्रदेश के इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है कि महीने की 11 तारीख बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य के पेरोल पर मौजूद 2,35,930 नियमित अधिकारी व कर्मचारी और लगभग 45,000 संविदाकर्मी वर्तमान में भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। प्रतुल शाहदेव ने वित्तीय प्रबंधन की विफलता पर चिंता जताते हुए कहा कि कर्मचारियों के घरों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। वेतन न मिलने से लोगों की बैंकों की ईएमआई (EMI) बाउंस हो रही है और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार की स्थिति यह है कि कर्ज लेने के बावजूद वह अपने कर्मचारियों को समय पर भुगतान करने में असमर्थ सिद्ध हो रही है।   मास्टरमाइंड की ऐयाशी और प्रशासनिक ढिलाई इस पूरे घोटाले में 'शंभू' नामक मास्टरमाइंड की भूमिका चर्चा का केंद्र बनी हुई है। खबरों के अनुसार, घोटाले की राशि का उपयोग विलासिता के लिए किया गया और आरोपी हेलीकॉप्टर से दीघा (पश्चिम बंगाल) जाकर पार्टी कर रहा था। भाजपा ने आरोप लगाया है कि जब सरकारी खजाने की लूट हो रही थी, तब प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। विपक्षी दलों का मानना है कि यदि इस मामले में तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो यह देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक बनकर उभरेगा। फिलहाल, राज्य में इस मुद्दे पर जनआक्रोश और राजनीतिक तनाव चरम पर है।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
Jharkhand Assembly debate on DJ ban during festivals with leaders addressing media
‘डीजे हर हाल में बजेगा’-झारखंड विधानसभा में गूंजा बयान, त्योहारों को लेकर सियासत तेज

झारखंड में रामनवमी, सरहूल और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों पर डीजे बजाने को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा के बाहर दिए गए एक बयान ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। “डीजे हर हाल में बजेगा” - मंत्री का बड़ा बयान राज्य के स्वास्थ्य एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड में त्योहारों के दौरान डीजे बजेगा और हर साल बजेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कभी डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं कही, बल्कि इसके संभावित दुष्परिणामों को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई थी। मंत्री ने यह भी बताया कि जुलूसों के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जनों को साथ रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के आदेश बनाम राजनीतिक बयानबाजी सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रही है, जबकि विपक्ष इसे आम लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल बता रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफिजुल हसन ने भी साफ किया कि सरकार किसी भी त्योहार के खिलाफ नहीं है और केवल नियमों का पालन करवा रही है। विपक्ष का विरोध, जुलूस निकालने की चेतावनी विधायक निर्मल महतो, मनीष प्रसाद और रौशन लाल चौधरी समेत कई नेताओं ने जुलूस पर किसी भी तरह की रोक का विरोध किया है। उनका कहना है कि: रामनवमी और अन्य त्योहारों के जुलूस हर हाल में निकलेंगे सरकार को अनुमति देनी ही होगी यदि अनुमति नहीं मिली, तो भी जुलूस निकाला जाएगा   “धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश”-सरकार का पलटवार मंत्री दीपिका सिंह पांडेय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा अफवाह और धार्मिक उन्माद फैलाकर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को नियमों पर आपत्ति है, तो वह संबंधित संस्थाओं से अनुमति ले सकता है। बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर जुलूस निकालना सभी का अधिकार है और किसी भी डर या दबाव में इसे रोका नहीं जाना चाहिए। “सरकार लोगों को कर रही परेशान”-नीरा यादव विधायक नीरा यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर त्योहार मनाएंगे और डीजे भी बजाएंगे। मुद्दा बना राजनीतिक टकराव का कारण यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक या कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सत्ता पक्ष कोर्ट के आदेश और सुरक्षा व्यवस्था की बात कर रहा है विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ रहा है

surbhi मार्च 18, 2026 0
Jharkhand Legislative Assembly
पेट्रोल और गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर झारखंड विधानसभा में पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामा

रांची। पेट्रोलियम पदार्थों और एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर शुक्रवार को Jharkhand Legislative Assembly में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान दोनों पक्षों के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।   विपक्षी विधायकों ने कहा इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार विपक्षी विधायकों ने कहा कि मौजूदा स्थिति के लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीतियों के कारण पेट्रोल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विधायक Pradeep Yadav का भाजपा पर तीखा हमला वहीं भाजपा विधायकों ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा विरोध किया। प्रतिपक्ष के नेता Babulal Marandi ने आरोप लगाया कि Indian National Congress देश में जानबूझकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है। इस दौरान विधायक Pradeep Yadav ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। वहीं विधायक Saryu Roy ने कहा कि राज्य में स्थिति नियंत्रण में है और सरकार इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। दूसरी ओर Aam Aadmi Party की विधायक Shilpi Neha Tirkey ने बाबूलाल मरांडी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार है और पेट्रोलियम पदार्थों के साथ-साथ यूरिया की कीमतें भी बढ़ रही हैं। ऐसे में विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाना उचित नहीं है। हंगामे के दौरान सदन में लगातार बहस चलती रही और सभी दलों के नेताओं ने पेट्रोल और गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।

Anjali Kumari मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0