Chaitra Navratri 2026

Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026: नवमी पर मां सिद्धिदात्री को अर्पित करें ये पारंपरिक भोग

नई दिल्ली, एजेंसियां। नवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और आराधना के बाद पर्व का समापन नवमी के दिन होता है। इस दिन कन्या पूजन करने की परंपरा होती है, जिसमें देवी के नौ रूपों के प्रतिनिधि माने जाने वाली कन्याओं का सम्मान और सेवा की जाती है। नवमी के अवसर पर मां सिद्धिदात्री का प्रिय भोग तैयार करना इस दिन का विशेष महत्व रखता है।   मां सिद्धिदात्री का पसंदीदा भोग मां सिद्धिदात्री के भोग में सूजी का हलवा और काला चना सबसे प्रिय माने जाते हैं। अगर आप इस नवमी पर कन्या पूजन का आयोजन कर रहे हैं, तो इन दोनों व्यंजनों को बनाने की विधि और सामग्री का ध्यान रखना जरूरी है।   सूजी का हलवा बनाने की सामग्री: • सूजी – 1 कप  • पानी – 4 कप  • चीनी – 2 कप  • घी – 2 टेबलस्पून  • दूध – 2 कप  • काजू, किशमिश, बादाम – सजाने के लिए  • इलायची पाउडर – 1/4 टीस्पून    विधि: 1. कड़ाही में घी गरम करें और उसमें सूजी डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।  2. भुनी हुई सूजी में धीरे-धीरे पानी डालें और लगातार चलाते रहें।  3. चीनी मिलाकर 2-3 मिनट पकाएं और फिर इलायची पाउडर डालें।  4. ऊपर से काजू, किशमिश और बादाम डालकर हलवा सजाएं।  5. गरमा-गरम हलवा कन्या पूजन में भोग के रूप में परोसें।    काला चना बनाने की सामग्री और विधि   सामग्री: • काला चना – 1 कप (भीगा हुआ)  • नमक – स्वादानुसार  • जीरा पाउडर – 1/4 टीस्पून  • हरा धनिया – सजाने के लिए  विधि: 1. चनों को रात भर पानी में भिगो दें।  2. अगली सुबह चनों को साफ पानी में 20–25 मिनट या प्रेशर कुकर में 2-3 सीटी तक पकाएं।  3. उबले चनों में नमक और जीरा पाउडर मिलाएं।  4. ऊपर से हरा धनिया डालकर सजाएं।  5. इसे बिना प्याज-लहसुन के फ्राई कर कन्या पूजन में भोग के रूप में अर्पित करें।  नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को भोग अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। सूजी का हलवा और काला चना बनाना आसान है और ये पारंपरिक भोग के रूप में बेहद पसंद किए जाते हैं। इस नवमी, इन व्यंजनों के साथ कन्या पूजन कर पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त करें।

Anjali Kumari मार्च 27, 2026 0
Chaitra Navratri 2026
चैत्र नवरात्रि 2026: कब है अष्टमी और नवमी? जानें कन्या पूजन का सही समय

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि का पर्व अपने अंतिम चरण में है। इस दौरान अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व होता है, जब भक्त कन्या पूजन कर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस बार तिथियों को लेकर कुछ असमंजस था, जिसे अब स्पष्ट कर दिया गया है।   अष्टमी कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर दुर्गा अष्टमी 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।   अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ समय   * सुबह: 6:18 बजे से 7:50 बजे तक * वैकल्पिक समय: 10:55 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक   नवमी (राम नवमी) कब है? नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार राम नवमी 27 मार्च 2026 को मनाना अधिक शुभ रहेगा।   नवमी पर कन्या पूजन का समय   * सुबह: 6:18 बजे से 7:50 बजे तक * वैकल्पिक समय: 10:55 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक   कन्या पूजन का महत्व अष्टमी और नवमी पर छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन कराकर, उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।

Anjali Kumari मार्च 25, 2026 0
Idol of Maa Kalaratri worshipped with lamps and flowers during Chaitra Navratri Day 7 ritual
चैत्र नवरात्रि 2026 Day 7: मां कालरात्रि की आराधना से मिटता है भय और नकारात्मकता, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और महत्व

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन देवी शक्ति के उग्र और प्रभावशाली स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा को समर्पित होता है। यह दिन विशेष रूप से भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक सच्चे मन से मां कालरात्रि की आराधना करता है, उसके जीवन से भय और बाधाएं दूर होती हैं और साहस, शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां कालरात्रि का स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व मां कालरात्रि का रूप अत्यंत तेजस्वी और अद्भुत माना जाता है। उनका वर्ण श्याम, केश खुले, गले में विद्युत समान चमकती माला और तीन नेत्र-यह स्वरूप भले ही उग्र दिखाई देता हो, लेकिन भक्तों के लिए वह सुरक्षा और कल्याण का प्रतीक हैं। इसी कारण उन्हें “शुभंकारी” भी कहा जाता है, जो अपने भक्तों को हर संकट से उबारती हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती हैं। पूजा विधि: सरलता और श्रद्धा का विशेष महत्व नवरात्रि के सातवें दिन पूजा विधि को अत्यंत पवित्र और अनुशासित माना गया है: प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें श्रद्धा और सादगी के साथ पूजा करें, दिखावे से बचें भोग और आरती का महत्व मां कालरात्रि को गुड़ और चना का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटा जाता है। अंत में मां की आरती करना अनिवार्य माना गया है, जो पूजा को पूर्णता प्रदान करती है। मंत्र और शुभ रंग इस दिन मां कालरात्रि के बीज मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः” नियमित मंत्र जाप से मन शांत होता है और नकारात्मक विचारों का नाश होता है। शुभ रंग के रूप में नीला रंग धारण करना उत्तम माना गया है, जो आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन का प्रतीक है। पौराणिक कथा: बुराई पर अच्छाई की जीत पौराणिक कथा के अनुसार, जब दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में आतंक फैलाया, तब देवी दुर्गा ने कालरात्रि का रूप धारण किया। रक्तबीज को यह वरदान था कि उसके रक्त की हर बूंद से नया राक्षस उत्पन्न होता था। मां कालरात्रि ने अद्भुत रणनीति से उसका वध किया और उसके रक्त को भूमि पर गिरने से पहले ही अपने मुख में समाहित कर लिया। इस प्रकार बुराई का अंत हुआ और देवताओं को मुक्ति मिली। यह कथा जीवन में साहस, धैर्य और बुद्धिमत्ता की शक्ति को दर्शाती है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Young girls worshipped as Goddess Durga during Kanya Pujan ritual in Chaitra Navratri celebration
चैत्र नवरात्रि 2026: अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का सही समय, विधि और उम्र के अनुसार मिलने वाले फल का पूरा विवरण

चैत्र नवरात्रि सनातन धर्म में शक्ति उपासना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की साधना के बाद अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। कब करें कन्या पूजन? पंचांग के अनुसार, दुर्गाष्टमी (26 मार्च 2026): प्रातः 11:48 बजे तक कन्या पूजन करना शुभ रहेगा। महानवमी (26 मार्च 11:48 बजे से शुरू): यह तिथि 27 मार्च सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। ऐसे में श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार 26 या 27 मार्च को उदया तिथि के अनुसार कन्या पूजन कर सकते हैं। किस उम्र की कन्या का क्या महत्व? नवरात्रि में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी के विभिन्न स्वरूप माना जाता है। प्रत्येक उम्र की कन्या की पूजा अलग-अलग फल प्रदान करती है: 2 वर्ष (कुमारी): दुख-दरिद्रता दूर, सुख-समृद्धि की प्राप्ति 3 वर्ष (त्रिमूर्ति): धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद 4 वर्ष (कल्याणी): परिवार और कुल का कल्याण 5 वर्ष (रोहिणी): स्वास्थ्य और सौभाग्य 6 वर्ष (कालिका): बुद्धि, विद्या और विवेक 7 वर्ष (शाम्भवी): ऐश्वर्य और शक्ति 8 वर्ष (दुर्गा/शांभवी): विवाद और मुकदमों में सफलता 9 वर्ष (चंडिका/दुर्गा): शत्रुओं पर विजय और कार्य सिद्धि 10 वर्ष (सुभद्रा): सभी मनोकामनाओं की पूर्ति कैसे करें कन्या पूजन? कन्या पूजन की विधि सरल लेकिन अत्यंत श्रद्धापूर्ण होती है: अष्टमी या नवमी के दिन स्नान कर मां दुर्गा की पूजा करें। 9 कन्याओं और एक बालक (भैरव स्वरूप) को आमंत्रित करें। कन्याओं के चरण धोकर उनका तिलक करें और मौली बांधें। लाल चुनरी अर्पित करें और आसन पर बैठाएं। उन्हें पूरी, हलवा, चना, खीर आदि भोजन कराएं। अंत में उपहार, वस्त्र या दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक किया गया कन्या पूजन जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की विधि दर्शाता धार्मिक दृश्य
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें कलश स्थापना, जानें पूरी विधि

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पहले घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है, जिसे समृद्धि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सही विधि से घटस्थापना करने पर घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।   घटस्थापना से पहले करें तैयारी घटस्थापना करने से पहले आवश्यक सामग्री जैसे कलश, मिट्टी, जौ, नारियल, आम के पत्ते, लाल वस्त्र, अक्षत, कुमकुम, धूप और दीपक एकत्रित कर लें। इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें। पूजा के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को शुभ माना जाता है।   ऐसे करें कलश स्थापना पूजा स्थल पर एक साफ कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद एक पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं और जल छिड़कें। अब कलश पर कुमकुम से ओम या स्वस्तिक बनाएं और उसमें जल, सिक्का, हल्दी व सुपारी डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और लाल कपड़े में लिपटा नारियल ऊपर स्थापित करें।   पूजन और संकल्प का महत्व कलश को जौ के बीच या मां दुर्गा के पास स्थापित करने के बाद धूप-दीप जलाकर मां शैलपुत्री की पूजा करें और मंत्रों का जाप करें। जो भक्त नौ दिनों का व्रत रखते हैं, वे इसी समय संकल्प लें। धार्मिक मान्यता है कि संकल्प लेने से पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है और नवरात्रि के दौरान विशेष आशीर्वाद मिलता है।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 19, 2026 0
मां दुर्गा के नौ रूप और उनके भोग दर्शाता धार्मिक चित्र
चैत्र नवरात्रि 2026: माता दुर्गा के नौ रूपों को लगाएं ये खास भोग, पूरी होंगी मनोकामनाएं

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर दिन माता के अलग-अलग रूप को विशेष भोग अर्पित करने से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।   पहले से तीसरे दिन तक का भोग नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में दूध, घी या खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी या गुड़ अर्पित किया जाता है, जिससे ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बने पकवान या मेवे का भोग लगाना शुभ होता है।   चौथे से छठे दिन तक का भोग चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित किया जाता है, जो जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केला चढ़ाना शुभ माना जाता है, जिससे संतान सुख की प्राप्ति होती है। छठे दिन मां कात्यायनी को शहद या मीठा पान अर्पित किया जाता है।   सातवें से नौवें दिन तक का भोग सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बने पदार्थ चढ़ाए जाते हैं। आठवें दिन मां महागौरी को हलवा-पूरी, खीर और नारियल का भोग लगाया जाता है। वहीं नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को काला चना, हलवा और नारियल अर्पित कर नवरात्रि पूजा का समापन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से माता के नौ रूपों को भोग अर्पित करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 19, 2026 0
Chaitra Navratri 2026 significance
जानें, इस चैत्र नवरात्र क्या है खास?

रांची। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है, जो देवी शक्ति की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। यह दिन केवल कैलेंडर बदलने का नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत और आत्मचिंतन का अवसर माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों से मनाया जाता है महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और उत्तर भारत में हिंदू नव वर्ष के रूप में इसकी विशेष मान्यता है।   हिंदू नव वर्ष के साथ नई शुरुआत हिंदू नव वर्ष को भारतीय संस्कृति में अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि की रचना का आरंभ हुआ था। पुराणों के अनुसार ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था। इसलिए इस दिन को सृजन का प्रथम दिन माना जाता है। इसी दिन से विक्रम संवत का आरंभ भी होता है, जो भारत की प्राचीन कालगणना प्रणाली है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है और लोग इस दिन नए कार्यों की शुरुआत करते हैं।हिंदू नव वर्ष का आगमन प्रकृति में भी परिवर्तन का संकेत लेकर आता है। इस समय  वसंत ऋतू  अपने चरम पर होती है। पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं, फूल खिलते हैं और वातावरण में हरियाली और ताजगी दिखाई देती है। यह मौसम प्रकृति के पुनर्जन्म का प्रतीक है।   पौराणिक महत्व और धार्मिक मान्यता बता दे हिंदू नव वर्ष के साथ ही चैत्र नवरात्री की शुरुआत होती है। इस बार चैत्र नवरात्रि में माता रानी पालकी पर सवार होकर आ रही है और विदाई हाथी पर होगी। धार्मिक परंपराओं में, पालकी पर मां का आना सामान्य रूप से बहुत ज्यादा शुभ संकेत नहीं माना जाता है, लेकिन इसे पूरी तरह अशुभ भी नहीं कहा जा सकता है। यह एक तरह का संकेत होता है कि आने वाले समय में समाज में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मां का हाथी पर जाना समृद्धि, स्थिरता और खुशी का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इससे अच्छी बारिश होगी, कृषि में लाभ होगा और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।इस साल, चैत्र नवरात्रि 19 मार्च को शुरू होगी और 27 मार्च को समाप्त होगी। इन नौ दिनों के दौरान, भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी दुर्गा की नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें दुर्गा के रूप शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त इन दिनों में व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं।   चैत्र नवरात्रि की खास बात   चैत्र नवरात्रि की खास बात है कि कहते हैं कि यह आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति करने वाली होती है। इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते हैं। श्रद्धालु सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं और आत्मशुद्धि पर ध्यान देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से देवी मां भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और अनुशासन का महत्व भी बताता है। चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी के दिन होता है। इस दिन  भगवान राम के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। नवरात्रि के अंतिम दिन कई घरों में कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजा किया जाता है।   पौराणिक कथा के अनुसार चैत्र नवरात्रि की पौराणिक कथा के अनुसार, जब राक्षस महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया और कोई भी देवता उसे पराजित नहीं कर सका, तब देवताओं ने पार्वती से रक्षा की प्रार्थना की। इसके बाद माता ने अपने अंश से नौ शक्तिशाली रूप प्रकट किए,जिन्हें देवताओं ने अपने शस्त्र देकर शक्तिशाली बनाया। ये क्रम चैत्र के महीने में प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर 9 दिनों तक चला और यही कारण है कि इन नौ दिनों को चैत्र नवरात्रि के तौर पर मनाया जाने लगा। हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये पर्व समाज में एकता, अनुशासन और सकारात्मकता का संदेश देते हैं।

Juli Gupta मार्च 19, 2026 0
Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026: 600 मीटर ऊंचाई पर स्थित मैहर शारदा देवी मंदिर, रहस्यमयी मान्यताएं करती हैं हैरान

नई दिल्ली, एजेंसियां। मैहर शारदा देवी मंदिर चैत्र नवरात्रि 2026 के मौके पर मध्य प्रदेश के मैहर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। त्रिकूट पर्वत पर करीब 600 मीटर की ऊंचाई पर बने इस प्राचीन मंदिर का इतिहास 6वीं शताब्दी से जुड़ा बताया जाता है।   1080 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं दर्शन इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 1080 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि अब रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे भक्त आसानी से माता के दरबार तक पहुंच सकते हैं। हर साल नवरात्र के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।   शक्तिपीठ के रूप में मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि यहां माता सती का हार गिरा था, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘मैहर’ पड़ा, जिसका अर्थ है “मां का हार”।   आल्हा-ऊदल से जुड़ी मान्यताएं मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी मान्यता यह भी है कि वीर योद्धा आल्हा-ऊदल यहां माता के परम भक्त थे। कहा जाता है कि आज भी सबसे पहले मां के दर्शन वही करते हैं और उनके द्वारा चढ़ाए गए ताजे फूल मंदिर में पाए जाते हैं।   इतिहास और आस्था का संगम मान्यता है कि Adi Shankaracharya ने भी यहां पूजा-अर्चना की थी। मंदिर में मां शारदा की प्रतिमा की स्थापना विक्रम संवत 559 में की गई थी। इस स्थान पर अन्य देवी-देवताओं जैसे काल भैरवी, हनुमान, काली, दुर्गा और शेषनाग की भी पूजा की जाती है।   नवरात्र में विशेष आयोजन चैत्र नवरात्र के दौरान यहां भव्य मेला लगता है। सुबह 4 बजे से आरती शुरू होती है और दिनभर श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर माता के दर्शन करते हैं। शाम को भी भजन-कीर्तन और आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। धार्मिक आस्था, इतिहास और रहस्यमयी मान्यताओं से जुड़ा यह मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Goddess Durga idol during Chaitra Navratri
Chaitra Navratri 2026: डोली पर आगमन और हाथी पर प्रस्थान, क्या संकेत दे रही हैं मां दुर्गा? जानिए धार्मिक महत्व और शुभ-अशुभ संकेत

भारत में आस्था और परंपरा के सबसे बड़े पर्वों में से एक चैत्र नवरात्रि की शुरुआत इस वर्ष 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन उत्सव का आरंभ कलश स्थापना के साथ होता है, जहां भक्त पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। देशभर के मंदिरों और घरों में भक्ति का माहौल है, वहीं बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर रौनक भी चरम पर है। मां दुर्गा के आगमन प्रस्थान का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा किस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं और किस वाहन से विदा होती हैं, इसका विशेष महत्व होता है। इसे भविष्य के संकेतों से जोड़कर भी देखा जाता है। इस वर्ष मान्यता के अनुसार देवी का: आगमन – डोली पर   प्रस्थान – हाथी पर   डोली पर आगमन: क्या हैं संकेत? शास्त्रों में डोली (पालकी) पर मां का आगमन पूरी तरह शुभ नहीं माना जाता। इसके संभावित संकेत: सामाजिक या राजनीतिक अस्थिरता   प्राकृतिक या आर्थिक चुनौतियों की आशंका   जनजीवन में उतार-चढ़ाव   हालांकि, यह केवल धार्मिक मान्यता है और इसे आस्था के रूप में ही देखा जाता है। हाथी पर प्रस्थान: शांति या मिश्रित संकेत? मां दुर्गा का हाथी पर प्रस्थान आमतौर पर सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि हाथी समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक है। इसके संकेत: वर्षा और कृषि के लिए अनुकूल समय   आर्थिक सुधार के संकेत   शांति और स्थिरता की संभावना   लेकिन कुछ मान्यताओं में इसे मिश्रित फल देने वाला भी बताया गया है। कलश स्थापना से शुरू होती है भक्ति नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन से भक्त नौ दिनों तक: व्रत रखते हैं   भजन-कीर्तन करते हैं   मां के नौ रूपों की पूजा करते हैं   यह पर्व आत्मशुद्धि, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। रामनवमी: नवरात्रि का समापन नवरात्रि के नौवें दिन राम नवमी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्म का दिन है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लेकर अधर्म का नाश किया था। देशभर में इस अवसर पर भव्य पूजा, झांकियां और राम जन्मोत्सव मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और सकारात्मक सोच का उत्सव है। मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के संकेतों को लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ जोड़ते हैं, जो समाज को आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाते हैं।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Maa Durga palanquin arrival Navratri
चैत्र नवरात्रि 2026: पालकी पर आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर होगी विदाई; जानिए इसके धार्मिक संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व आस्था, शक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों में देवी शक्ति पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती हैं। यही कारण है कि नवरात्रि को श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 को राम नवमी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक Durga के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे और व्रत रखकर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।   घटस्थापना से होगी पूजा की शुरुआत नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ पूजा की शुरुआत होती है। ज्योतिष गणना के अनुसार 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक घटस्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है।   पालकी पर होगा मां दुर्गा का आगमन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि जिस दिन से शुरू होती है, उसी के आधार पर देवी के आगमन की सवारी तय मानी जाती है। इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए माता का आगमन पालकी (डोली) पर माना जा रहा है। मान्यता है कि पालकी पर देवी का आगमन समाज और प्रकृति में उतार-चढ़ाव का संकेत देता है। इसे आर्थिक चुनौतियों, प्राकृतिक आपदाओं या महामारी जैसी स्थितियों के संकेत के रूप में भी देखा जाता है।   हाथी पर होगी माता की विदाई नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा और उस दिन शुक्रवार है। परंपराओं के अनुसार शुक्रवार को देवी का प्रस्थान हाथी पर माना जाता है। हाथी को धार्मिक मान्यता में समृद्धि, स्थिरता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि इससे अच्छी वर्षा, कृषि में लाभ और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिलते हैं।   कैसे तय होती है माता की सवारी मान्यता के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत जिस वार से होती है, उसी के आधार पर देवी के पृथ्वी पर आने और वापस जाने की सवारी तय मानी जाती है। हालांकि देवी का मुख्य वाहन सिंह माना जाता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान उनकी सवारी बदल जाती है और इसे भविष्य के संकेतों से जोड़ा जाता है।

Juli Gupta मार्च 14, 2026 0
Kalash Sthapana timing Navratri
जानिए चैत्र नवरात्री का कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली, एजेंसियां। सनातन धर्म में नवरात्रि का त्योहार बहुत ही पावन और धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिनमें दो गुप्त नवरात्रि होती हैं, जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे लोकप्रिय हैं। चैत्र नवरात्रि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है। इस अवसर पर पहले दिन कलश स्थापना का आयोजन किया जाता है, उसके बाद नौ दिनों तक माता के नौ विभिन्न रूपों की पूजा और व्रत का पालन किया जाता है। नवरात्रि में पूजा और व्रत करने से जीवन में खुशहाली आती है और सभी प्रकार के दुख एवं बाधाएं दूर होती हैं।   कलश स्थापना का महत्व: कलश स्थापना को नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुभ मुहूर्त में की गई कलश स्थापना से पूरे नौ दिनों तक माता की विशेष कृपा बनी रहती है। कलश को धन, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है और इसे स्थापित करके देवी का स्वागत किया जाता है। यह आयोजन घर और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति लाने का एक माध्यम माना जाता है।   शुभ मुहूर्त 2026: वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है और 27 मार्च तक चलेगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक रहेगा। यह 51 मिनट का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है। पंडित और ज्योतिषाचार्य इस समय को सबसे अनुकूल बता रहे हैं, इसलिए भक्तों को इसी अवधि में कलश स्थापना करने की सलाह दी जा रही है।   वैकल्पिक मुहूर्त: यदि किसी कारणवश सुबह के मुख्य मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं हो पाए, तो अभिजीत मुहूर्त के दौरान दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक भी कलश स्थापना की जा सकती है। यह समय भी शुभ माना जाता है और माता की कृपा प्राप्त करने के लिए उपयुक्त है।   पूजा विधि: कलश स्थापना में आमतौर पर कलश में पानी, नारियल, माँ के प्रतीक, फूल और अक्षत (चावल) रखकर पूजा की जाती है। इसे घर के मुख्य स्थान या पूजा स्थल पर स्थापित किया जाता है। इस दिन माता के नौ रूपों का ध्यान रखते हुए नौ दिनों तक पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

Juli Gupta मार्च 14, 2026 0
Chaitra Navratri festival
Chaitra Navratri 2026: पहली बार व्रत रख रहे हैं? जान ले पूजा-विधि और ज़रूरी नियम

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शक्ति उपासना के लिए Chaitra Navratri का पर्व बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलने वाले इन नौ दिनों में भक्त मां शक्ति की साधना, जप-तप और व्रत के जरिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में Chaitra Navratri 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। यदि आप इस बार पहली बार नवरात्रि का व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो पूजा-विधि और नियमों के बारे में पहले से जान लेना बेहद ज़रूरी माना जाता है।   चैत्र नवरात्रि व्रत के मुख्य नियम 1. पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें नवरात्रि व्रत शुरू करने से एक दिन पहले सभी ज़रूरी पूजा सामग्री एकत्र कर ले, ताकि प्रतिपदा के दिन पूजा में किसी प्रकार की बाधा न आए। 2. सुबह जल्दी उठकर ले व्रत का संकल्प प्रतिपदा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और मन को पवित्र करते हुए Durga माता का ध्यान करें। इसके बाद पूरे नौ दिनों तक व्रत रखने का संकल्प ले। 3. कलश स्थापना से शुरू करें पूजा नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा पर विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है। इसे किसी योग्य पुजारी के मार्गदर्शन में करना शुभ माना जाता है। 4. देवी पूजा के लिए अलग आसन रखें माता की साधना हमेशा लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर करनी चाहिए। पूजा के लिए एक ही आसन का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। 5. नौ दिनों तक रखें संयम नवरात्रि व्रत के दौरान साधक को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज आदि से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। 6. अखंड ज्योति का रखें विशेष ध्यान अगर घर में कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाई जाती है, तो घर को बंद करके बाहर नहीं जाना चाहिए। ज्योति को लगातार जलते रहना चाहिए। 7. फलाहार का करें सेवन नवरात्रि व्रत में सामान्य अन्न का सेवन नहीं किया जाता। इसकी जगह फलाहार लिया जाता है। कुट्टू या सिंहाड़े के आटे का उपयोग किया जा सकता है   सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करें   8. कपड़ों के रंग का रखें ध्यान नवरात्रि में काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। शक्ति साधना के लिए लाल और पीले रंग के वस्त्र अधिक शुभ माने जाते हैं। 9. अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन नवरात्रि के अंतिम दो दिनों यानी अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन किया जाता है। इस दौरान 2 से 9 वर्ष तक की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। 10. व्रत का पारण नवमी के दिन पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इसके बाद पूजा में उपयोग की गई सामग्री को किसी पवित्र स्थान पर मिट्टी में दबा देना शुभ माना जाता है। Note: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य परंपराओं पर आधारित है। IDTV Indradhanush इसकी पुष्टि नहीं करता है।

surbhi मार्च 12, 2026 0
Goddess Durga idol decorated during Chaitra Navratri festival with devotees offering prayers
Chaitra Navratri 2026: इन राशियों पर बरसेगी मां दुर्गा की विशेष कृपा, करियर और धन में मिल सकते हैं बड़े अवसर

  19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में Chaitra Navratri को अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में यह नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में भक्त Durga के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार की नवरात्रि को खास माना जा रहा है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण कुछ राशियों के लिए यह समय तरक्की, धन लाभ और नए अवसरों का संकेत दे रहा है।   नवरात्रि में बनेंगे दो खास शुभ योग ज्योतिष के अनुसार इस साल की चैत्र नवरात्रि में दो महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं: Shash Mahapurush Yoga Gajakesari Yoga इन दोनों योगों को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इनके प्रभाव से कई लोगों के जीवन में सफलता, प्रतिष्ठा और आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं।   मेष राशि: बढ़ेगा आत्मविश्वास और मिल सकते हैं नए अवसर मेष राशि के जातकों के लिए यह नवरात्रि काफी सकारात्मक साबित हो सकती है। इस राशि के स्वामी Mars को ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है। माता दुर्गा की कृपा से इस दौरान आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप अपने फैसले अधिक मजबूती से ले पाएंगे। नौकरी बदलने की सोच रहे लोगों को अच्छा अवसर मिल सकता है व्यापारियों के लिए नए संपर्क और नए बाजार खुल सकते हैं रुका हुआ धन मिलने की संभावना है पारिवारिक विवाद भी सुलझ सकते हैं   सिंह राशि: सम्मान और पदोन्नति के बन सकते हैं योग सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस राशि पर Sun का प्रभाव माना जाता है, जो नेतृत्व और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान: कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना हो सकती है वरिष्ठ अधिकारी आप पर भरोसा जता सकते हैं पदोन्नति या नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है परिवार में चल रहे मतभेद धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं   वृश्चिक राशि: दूर होंगी बाधाएं और बढ़ेगी ऊर्जा वृश्चिक राशि के जातकों के लिए भी यह नवरात्रि राहत भरा समय ला सकती है। पिछले कुछ समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। माता दुर्गा की कृपा से: काम में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है स्वास्थ्य में सुधार होने की संभावना है मानसिक और शारीरिक ऊर्जा बढ़ेगी   आस्था और सकारात्मकता का पर्व चैत्र नवरात्रि को नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व माना जाता है। इस दौरान पूजा, व्रत और साधना के साथ-साथ लोग अपने जीवन में नए संकल्प भी लेते हैं। ज्योतिष के अनुसार यदि श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ प्रयास किया जाए, तो यह समय कई लोगों के लिए तरक्की और सफलता के नए रास्ते खोल सकता है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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