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चैत्र नवरात्रि 2026: कब है अष्टमी और नवमी? जानें कन्या पूजन का सही समय

Anjali Kumari मार्च 25, 2026 0
Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि का पर्व अपने अंतिम चरण में है। इस दौरान अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व होता है, जब भक्त कन्या पूजन कर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस बार तिथियों को लेकर कुछ असमंजस था, जिसे अब स्पष्ट कर दिया गया है।

 

अष्टमी कब है?


वैदिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर दुर्गा अष्टमी 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।

 

अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ समय

 

* सुबह: 6:18 बजे से 7:50 बजे तक
* वैकल्पिक समय: 10:55 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक

 

नवमी (राम नवमी) कब है?


नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार राम नवमी 27 मार्च 2026 को मनाना अधिक शुभ रहेगा।

 

नवमी पर कन्या पूजन का समय

 

* सुबह: 6:18 बजे से 7:50 बजे तक
* वैकल्पिक समय: 10:55 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक

 

कन्या पूजन का महत्व


अष्टमी और नवमी पर छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें भोजन कराकर, उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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मोहिनी एकादशी 2026: 27 अप्रैल को रखा जाएगा व्रत, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि

हिंदू धर्म में Mohini Ekadashi का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान Vishnu को समर्पित होता है और इसे श्रद्धा व नियमों के साथ करने से पापों से मुक्ति और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने अमृत कलश को असुरों से बचाने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था। इसी घटना के कारण इस एकादशी को ‘मोहिनी एकादशी’ कहा जाता है। तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष मोहिनी एकादशी की तिथियां इस प्रकार हैं: एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल 2026, शाम 06:06 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026, शाम 06:15 बजे व्रत (मुख्य दिन): 27 अप्रैल 2026 पारण (व्रत तोड़ने का समय): 28 अप्रैल 2026, सुबह 05:43 से 08:21 बजे के बीच पूजा विधि मोहिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, अधिमानतः पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, पंचामृत और धूप-दीप अर्पित करें। तुलसी दल भगवान को अत्यंत प्रिय है, इसलिए भोग में इसे अवश्य शामिल करें, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी पत्ते न तोड़ें-पहले से तोड़े हुए पत्तों का ही उपयोग करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें, व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करें। इस दिन रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को मोह-माया के बंधनों से मुक्त करता है और जीवन के पापों का नाश करता है। कहा जाता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करने वाले भक्त को मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।    

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भारतीय समाज में किन्नर समुदाय को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इनके आशीर्वाद में अद्भुत शक्ति होती है, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। तीज-त्योहार, विवाह और मांगलिक अवसरों पर किन्नरों का आशीर्वाद शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सही समय और उचित वस्तु का दान करने से जीवन की कई समस्याओं का समाधान संभव है। किस दिन करें किन्नरों को दान? ज्योतिष के अनुसार किन्नर समुदाय का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। इसलिए बुधवार का दिन किन्नरों को दान देने के लिए सबसे शुभ माना गया है। इस दिन किए गए उपाय जल्दी फल देते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं। किन चीजों का करें दान? अगर कुंडली में बुध दोष हो या आर्थिक/मानसिक समस्याएं बनी रहती हों, तो बुधवार के दिन किन्नरों को ये चीजें दान करना लाभकारी माना जाता है: हरे रंग के कपड़े हरी चूड़ियां हरे फल (जैसे अमरूद, हरी सब्जियां) धन या अन्न कारोबार में सफलता के लिए उपाय यदि मेहनत के बावजूद व्यापार में तरक्की नहीं हो रही है, तो बुधवार के दिन किन्नर को ढोलक दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे उनका आशीर्वाद मिलता है और व्यापार में तेजी आती है। आर्थिक समस्याओं से राहत के लिए अगर पैसा टिक नहीं रहा या लगातार आर्थिक परेशानी बनी रहती है, तो: एक पूजा की सुपारी पर सिक्का रखकर किन्नर को दान करें यह उपाय धन की स्थिरता और वृद्धि के लिए लाभकारी माना जाता है। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए दांपत्य जीवन में तनाव या बाधाएं आ रही हों, तो शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए: इत्र सफेद मिठाई सुंदर वस्त्र किन्नरों को दान करें। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता और सुख-शांति बढ़ने की मान्यता है। मान्यता और सावधानी ध्यान रखें कि ये सभी उपाय धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित हैं। इन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ करना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।  

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भारतीय पौराणिक कथाओं में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो केवल कहानी नहीं बल्कि जीवन की गहरी सीख भी देते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण प्रसंग है भगवान शिव के दिव्य धनुष ‘पिनाक’ का, जिसे उठाना तो दूर, छूना भी असंभव माना जाता था। लेकिन जब भगवान राम ने इसे तोड़ा, तो न केवल इतिहास बदल गया बल्कि पूरी रामायण की कथा एक नए मोड़ पर पहुंच गई। क्या था पिनाक धनुष? भगवान शिव का पिनाक धनुष कोई साधारण अस्त्र नहीं था। मान्यता है कि इसे देव शिल्पकार विश्वकर्मा ने बनाया था और इसमें स्वयं भगवान शिव की दिव्य शक्ति समाहित थी। इसकी टंकार से आकाश तक गूंज उठता था और इसकी शक्ति इतनी प्रचंड थी कि सृष्टि को भी प्रभावित कर सकती थी। राजा जनक के पास कैसे पहुंचा? पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह दिव्य धनुष देवताओं द्वारा राजा जनक के पूर्वजों को सौंपा गया था। तब से यह मिथिला राजवंश की अमूल्य धरोहर बन गया। सीता और पिनाक का अद्भुत संबंध कहा जाता है कि बचपन में माता सीता ने खेल-खेल में इस भारी धनुष को उठा लिया था। इस अद्भुत घटना के बाद राजा जनक ने संकल्प लिया कि सीता का विवाह उसी पुरुष से होगा, जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा सके। स्वयंवर और धनुष भंग का ऐतिहासिक क्षण सीता स्वयंवर में अनेक राजा-महाराजा आए, लेकिन कोई भी पिनाक को हिला तक नहीं सका। जब भगवान राम आगे बढ़े, तो उन्होंने सहज भाव से धनुष को उठाया और जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया-धनुष दो टुकड़ों में टूट गया। इस घटना को “धनुष भंग” कहा जाता है और यही पल राम-सीता विवाह का कारण बना। पिनाक का आध्यात्मिक संदेश पिनाक केवल एक शक्तिशाली अस्त्र नहीं, बल्कि गहरा प्रतीक भी है- यह अहंकार के अंत का प्रतीक है यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति विनम्रता में होती है ईश्वर तक पहुंचने के लिए अहंकार त्यागना आवश्यक है क्या शिव के पास और भी अस्त्र थे? कुछ ग्रंथों में शिव के एक अन्य धनुष “अजगव” का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन पिनाक को ही उनका सबसे प्रमुख और शक्तिशाली अस्त्र माना गया है। इसके अलावा त्रिशूल और पाशुपतास्त्र भी शिव की पहचान हैं। आज के समय में पिनाक का महत्व आज भी यह कथा लोगों को प्रेरित करती है- चाहे अपनी सीमाओं को तोड़ने की बात हो या अहंकार को नियंत्रित करने की, पिनाक की कहानी हर युग में प्रासंगिक है।  

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