Chand Mera Dil

Ayushmann Khurrana in a scene from Pati Patni Aur Woh Do during its first week box office run.
Pati Patni Aur Woh Do Box Office Collection Day 7: पहले हफ्ते में 28 करोड़ के पार पहुंची आयुष्मान खुराना की फिल्म, लेकिन हिट से अब भी दूर

Pati Patni Aur Woh Do ने अपने पहले हफ्ते का बॉक्स ऑफिस सफर 28.15 करोड़ रुपये के नेट कलेक्शन के साथ पूरा कर लिया है। फिल्म में Ayushmann Khurrana मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। हालांकि शुरुआती उम्मीदों के मुकाबले फिल्म की कमाई धीमी रही और अब इसे बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करना पड़ रहा है। फिल्म ने सातवें दिन यानी गुरुवार को 1.90 करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह कमाई बुधवार की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कम रही। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक यह गिरावट स्क्रीन और शो कम होने की वजह से भी देखी गई। बावजूद इसके, गुरुवार का आंकड़ा फिल्म की वास्तविक बॉक्स ऑफिस पकड़ को दर्शाता है। पहले हफ्ते का पूरा बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दिन कमाई शुक्रवार ₹3.75 करोड़ शनिवार ₹5.50 करोड़ रविवार ₹7.75 करोड़ सोमवार ₹3.00 करोड़ मंगलवार ₹3.50 करोड़ बुधवार ₹2.75 करोड़ गुरुवार ₹1.90 करोड़ कुल ₹28.15 करोड़ दूसरे वीकेंड पर टिकी उम्मीदें फिल्म के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती दूसरा वीकेंड साबित होने वाला है। इस दौरान इसे Chand Mera Dil जैसी नई रिलीज से मुकाबला करना पड़ेगा। मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए माना जा रहा है कि फिल्म का लाइफटाइम कलेक्शन लगभग 45 से 50 करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। हालांकि ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर फिल्म 50 करोड़ रुपये तक भी पहुंचती है, तब भी इसे बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं माना जाएगा। इसे केवल एक सम्मानजनक फिनिश कहा जा सकता है। पोस्ट-पैंडेमिक दौर में बदल गया दर्शकों का टेस्ट कोरोना महामारी के बाद छोटे शहरों की कॉमेडी फिल्मों के लिए सिनेमाघरों में दर्शक जुटाना पहले जितना आसान नहीं रहा। 2018 और 2019 के दौर में इसी तरह की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था और उस समय आयुष्मान खुराना लगातार हिट फिल्में दे रहे थे। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर यह फिल्म 2020 से पहले रिलीज होती, तो इसकी ओपनिंग आज के मुकाबले तीन से पांच गुना ज्यादा हो सकती थी। अब दर्शक बड़े स्केल, इवेंट फिल्मों और हाई-विजुअल कंटेंट की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। क्या फिल्म को मिल पाएगा लंबा रन? फिल्म की वर्ड ऑफ माउथ प्रतिक्रिया औसत मानी जा रही है। फैमिली ऑडियंस और छोटे शहरों में फिल्म को कुछ सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन बड़ी मल्टीप्लेक्स ऑडियंस को यह फिल्म पूरी तरह आकर्षित नहीं कर पाई। आने वाले दिनों में फिल्म की किस्मत दूसरे वीकेंड की कमाई तय करेगी।  

surbhi मई 22, 2026 0
Ananya Panday and Lakshya in emotional scenes from Chand Mera Dil psychological romantic drama film.
‘चाँद मेरा दिल’ रिव्यू: रिश्तों, मानसिक तनाव और टूटते सपनों की दर्दनाक लेकिन शानदार कहानी

Chand Mera Dil आज के दौर के रिश्तों की चमक के पीछे छिपे दर्द, असुरक्षा और मानसिक संघर्ष को बेहद गहराई से दिखाती है। निर्देशक Vivek Soni ने इस फिल्म को किसी टिपिकल बॉलीवुड लव स्टोरी की तरह पेश नहीं किया, बल्कि इसे एक इंटेंस साइकोलॉजिकल-रोमांटिक ड्रामा का रूप दिया है। फिल्म डिटेल्स फिल्म: Chand Mera Dil निर्देशक: Vivek Soni मुख्य कलाकार: Ananya Panday, Lakshya जॉनर: साइकोलॉजिकल-रोमांटिक ड्रामा रेटिंग: 4/5 कहानी: प्यार से ज्यादा दर्द की कहानी फिल्म की कहानी आरव और चांदनी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका कॉलेज वाला रोमांस धीरे-धीरे जिंदगी की असल चुनौतियों के बीच टूटने लगता है। आरव एक मध्यमवर्गीय लड़का है, जो करियर में लगातार असफलताओं और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है। दूसरी तरफ चांदनी बचपन के घरेलू हिंसा वाले ट्रॉमा से बाहर नहीं निकल पाई है। जब ये दोनों एक रिश्ते में आते हैं, तो उनका प्यार धीरे-धीरे एक इमोशनल संघर्ष में बदल जाता है, जहाँ दोनों खुद भी टूटते हैं और एक-दूसरे को भी तोड़ने लगते हैं। फिल्म यह दिखाती है कि आज के रिश्तों में सिर्फ प्यार काफी नहीं होता, मानसिक स्थिरता और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। लक्ष्य की शानदार परफॉर्मेंस Lakshya ने आरव के किरदार में बेहतरीन अभिनय किया है। उनका गुस्सा और फ्रस्ट्रेशन बहुत रियल लगता है। कई सीन्स में बिना डायलॉग बोले सिर्फ उनकी आंखें किरदार का दर्द महसूस करा देती हैं। यह अब तक की उनकी सबसे मजबूत परफॉर्मेंस मानी जा सकती है। अनन्या पांडे का सबसे दमदार रोल Ananya Panday ने इस फिल्म से अपनी ग्लैमरस इमेज से बिल्कुल अलग अभिनय किया है। उन्होंने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया है जो अंदर से टूट चुकी है लेकिन बाहर से खुद को संभालने की कोशिश करती रहती है। उनका यह ट्रांसफॉर्मेशन दर्शकों को काफी प्रभावित करता है। कई इमोशनल सीन्स में अनन्या ने साबित किया है कि वे सिर्फ कमर्शियल फिल्मों तक सीमित नहीं हैं। निर्देशन और संगीत फिल्म की ताकत Vivek Soni का निर्देशन काफी संतुलित और प्रभावशाली है। फिल्म कहीं भी ओवरड्रामैटिक नहीं लगती। डायलॉग्स बेहद नेचुरल हैं बैकग्राउंड स्कोर कहानी के दर्द को और गहरा बनाता है क्लाइमेक्स में टाइटल ट्रैक फिल्म को भावनात्मक ऊंचाई पर ले जाता है फिल्म का संगीत कहानी के मूड को मजबूती देता है। फिल्म की कमजोरी क्या है? फिल्म का सबसे बड़ा नेगेटिव पॉइंट इसका बहुत ज्यादा इमोशनली भारी होना है। लगातार तनाव और दुख दर्शकों को मानसिक रूप से थका सकता है सेकेंड हाफ कुछ जगहों पर थोड़ा स्लो महसूस होता है यह फिल्म हर तरह के दर्शकों के लिए नहीं है अगर कोई हल्की-फुल्की एंटरटेनमेंट फिल्म देखना चाहता है, तो यह उसके लिए सही विकल्प नहीं होगी। फाइनल वर्डिक्ट Chand Mera Dil उन फिल्मों में से है जो सिर्फ एंटरटेन नहीं करतीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करती हैं। अगर आप रियलिस्टिक और इमोशनली स्ट्रॉन्ग सिनेमा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। Lakshya और Ananya Panday दोनों ने अपने करियर की सबसे यादगार परफॉर्मेंस दी है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Maulana Fazlur Rehman criticizes Pakistan’s military establishment and Army Chief Asim Munir during Karachi rally
पाकिस्तान में फिर गरमाई सियासत, मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर और सत्ता प्रतिष्ठान पर साधा निशाना

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख Maulana Fazlur Rehman ने कराची में आयोजित एक जनसभा में पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था और सेना पर तीखा हमला बोला। उनके बयान को सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir और सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती माना जा रहा है। “अगर मुझे कुछ हुआ तो जिम्मेदार एस्टैब्लिशमेंट होगी” कराची में समर्थकों को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया कि उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल और पत्र मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पाकिस्तान की “एस्टैब्लिशमेंट” जिम्मेदार होगी। उन्होंने मंच से कहा कि देश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं, बल्कि “सिविल-मिलिट्री हाइब्रिड राज” चल रहा है। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भारत, अफगानिस्तान और चीन के रिश्तों का भी किया जिक्र मौलाना ने पाकिस्तान की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण पाकिस्तान के भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंध खराब हुए हैं, जबकि चीन का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की नीतियां पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रही हैं और इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। इमरान खान की तरह टकराव? पाकिस्तान में इससे पहले Imran Khan और उनकी पार्टी भी सेना पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा चुकी है। अब मौलाना फजलुर रहमान के तेवरों को उसी तरह की नई टकराव की शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में लंबे समय से विपक्षी दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि देश की वास्तविक ताकत सेना के हाथ में है और सरकारें उसी के प्रभाव में काम करती हैं। देशव्यापी आंदोलन का ऐलान मौलाना फजलुर रहमान ने 22 मई से देशव्यापी विरोध आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों को लेकर जनता से सड़क पर उतरने की अपील की। उन्होंने गाजा युद्ध का जिक्र करते हुए मुस्लिम देशों से इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की भी मांग की। मौलाना ने दावा किया कि क्षेत्र में इजरायल का प्रभाव बढ़ रहा है और भविष्य में पाकिस्तान भी खतरे का सामना कर सकता है। पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल मौलाना के इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नया तनाव पैदा हो गया है। विपक्ष और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच टकराव की आशंका फिर बढ़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की सियासत में बड़ा विवाद बन सकता है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Chand Mera Dil
Movie Review: चांद मेरा दिल: अनन्या पांडे-लक्ष्य की इमोशनल कहानी

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड में प्रेम कहानियां हमेशा फेवरेट रही हैं, लेकिन ज्यादातर फिल्मों में प्यार का सफर वहीं खत्म हो जाता है जहां हीरो-हीरोइन एक हो जाते हैं। शादी के बाद क्या होता है, जिम्मेदारियां रिश्ते को कैसे बदल देती हैं और प्यार कब थकने लगता है, इन सवालों से हिंदी सिनेमा अक्सर बचता रहा है। ‘चांद मेरा दिल’ इसी मुश्किल हिस्से को पकड़ने की कोशिश करती है। डायरेक्टर विवेक सोनी की यह फिल्म प्यार को सिर्फ खूबसूरत एहसास की तरह नहीं दिखाती, बल्कि उसके साथ आने वाली उलझनों, गुस्से, टूटन और दोबारा जुड़ने की कोशिशों को भी सामने लाती है। फिल्म कई जगह आपको अपने आसपास के रिश्तों की याद दिलाती है। हालांकि इसकी रफ्तार कुछ हिस्सों में धीमी पड़ती है, लेकिन इमोशनल पकड़ बनी रहती है। कहानी कॉलेज के प्यार से शादी तक और फिर रिश्ते की असली परीक्षाः हैदराबाद के बैकड्रॉप में बनी यह कहानी इंजीनियरिंग स्टूडेंट चांदनी (अनन्या पांडे) और आरव (लक्ष्य) के इर्द-गिर्द घूमती है। आरव पहली नजर में चांदनी पर दिल हार बैठता है। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदलती है और दोनों एक-दूसरे की दुनिया बन जाते हैं। कॉलेज रोमांस, लंबी बाइक राइड्स, देर रात की बातें और भविष्य के सपनों के बीच दोनों शादी का फैसला कर लेते हैं। लेकिन, असली कहानी शादी के बाद शुरू होती है। करियर का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, परिवार का हस्तक्षेप और रिश्ते में बढ़ती गलतफहमियां दोनों को बदलने लगती हैं। एक ऐसा पल आता है जब आरव का गुस्सा रिश्ते में ऐसी दरार पैदा कर देता है, जहां प्यार से ज्यादा आत्मसम्मान बड़ा सवाल बन जाता है। रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। क्या दोनों अपने रिश्ते को दूसरा मौका देंगे या प्यार जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाएगा, यही फिल्म का मूल संघर्ष है। अभिनय अनन्या पांडे ने किया सरप्राइज, लक्ष्य ने दिखाया नया रंगः अगर इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत किसी चीज को कहा जाए, तो वह इसकी एक्टिंग है। अनन्या पांडे ने अपने करियर की अब तक की सबसे संतुलित परफॉर्मेंस दी है। उन्होंने चांदनी के किरदार को सिर्फ एक रोमांटिक लड़की बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि उसकी उलझन, दर्द, असुरक्षा और मजबूती को अच्छे से दिखाया है। कई इमोशनल सीन्स में वह काफी प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं लक्ष्य इस फिल्म का बड़ा सरप्राइज हैं। ‘किल’ जैसी एक्शन फिल्म के बाद यहां उनका बेहद संवेदनशील और टूटा हुआ रूप देखने को मिलता है। गुस्से, पछतावे और प्यार के बीच फंसे एक लड़के की बेचैनी उन्होंने अच्छे ढंग से निभाई है। कई जगह उनकी बॉडी लैंग्वेज और इमोशनल सीन आपको बांधे रखते हैं। दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा बनकर सामने आती है। कम स्क्रीन टाइम में परेश पाहुजा भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। निर्देशन और तकनीक रिश्तों की बारीकियों को समझती फिल्म डायरेक्टर विवेक सोनी ने कहानी को जरूरत से ज्यादा फिल्मी बनाने की बजाय उसे जमीन से जोड़े रखने की कोशिश की है। अच्छी बात यह है कि यहां गुस्से को हीरोइज्म की तरह नहीं दिखाया गया। रिश्तों में छोटी गलतियां किस तरह बड़ी दूरी में बदल जाती हैं, फिल्म इसे संवेदनशील तरीके से दिखाती है। कैमरा वर्क खासकर इमोशनल सीक्वेंस में अच्छा लगता है। कुछ सीन की फ्रेमिंग और लाइटिंग कहानी की बेचैनी को और असरदार बनाती है। एडिटिंग पहले हाफ में अच्छी है, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होने लगती है। फिल्म की कमियां  दूसरे हाफ में ढीली पड़ती रफ्तार फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसकी लंबाई है। 2 घंटे 26 मिनट का रनटाइम कुछ जगह भारी महसूस होता है। सेकेंड हाफ में कुछ सीन जरूरत से ज्यादा खिंचे लगते हैं और कहानी थोड़ी दोहराव वाली महसूस होती है। हालांकि ये बातें फिल्म के इमोशनल असर को पूरी तरह कमजोर नहीं करतीं। संगीत फिल्म का टाइटल ट्रैक असरदारः सचिन-जिगर का संगीत फिल्म की जान है। गाने कहानी पर बोझ नहीं लगते, बल्कि उसे आगे बढ़ाने का काम करते हैं। टाइटल ट्रैक लंबे समय तक याद रहता है। बैकग्राउंड स्कोर कई इमोशनल पलों को और मजबूत बनाता है और रिश्ते की बेचैनी को महसूस कराता है। फिल्म देखें या नहीं? ‘चांद मेरा दिल’ ऐसी प्रेम कहानी है, जो सिर्फ प्यार में पड़ने की नहीं, प्यार को बचाने की जद्दोजहद दिखाती है। फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है और दूसरे हाफ में थोड़ा खिंचती भी है, लेकिन इसकी ईमानदार कहानी, मजबूत एक्टिंग और रिश्तों की सच्चाई इसे देखने लायक बनाती है। अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो प्यार की चमक के साथ उसकी थकान भी दिखाएं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है। रेटिंग: 3/5 स्टार अवधि: 2 घंटे 26 मिनट कास्ट- अनन्या पांडे, लक्ष्य ललवानी डायरेक्टर- विवेक सोनी

Anjali Kumari मई 22, 2026 0
Ananya Panday and Lakshya Lalwani in a romantic scene from Chand Mera Dil amid CBFC censorship controversy.
‘चांद मेरा दिल’ के रोमांटिक सीन्स पर चली सेंसर बोर्ड की कैंची, 96 सेकेंड के किसिंग विजुअल्स हटाए गए

Central Board of Film Certification यानी CBFC एक बार फिर अपने फैसले को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला Chand Mera Dil से जुड़ा है, जिसमें अभिनेता Lakshya Lalwani और अभिनेत्री Ananya Panday के रोमांटिक सीन्स पर बोर्ड ने कैंची चला दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट दिया गया है, लेकिन इसके साथ फिल्म के करीब 96 सेकेंड लंबे किसिंग और लिप-लॉक सीन्स हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। 96 सेकेंड के रोमांटिक सीन हटाए गए मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार CBFC ने फिल्म से: 10 सेकेंड का एक किसिंग सीन हटाने और करीब 1 मिनट 26 सेकेंड के लिप-लॉक विजुअल्स काटने का निर्देश दिया है। कुल मिलाकर फिल्म से लगभग 96 सेकेंड के रोमांटिक विजुअल्स हटाए गए हैं। सोशल मीडिया पर उठे सवाल सेंसर बोर्ड के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जब हिंसा, खून-खराबा और गालियों से भरी फिल्मों को आसानी से पास किया जा रहा है, तब एक रोमांटिक फिल्म के किसिंग सीन्स पर इतनी सख्ती क्यों दिखाई गई। लोगों ने तुलना करते हुए Animal, KGF और अन्य हिंसक फिल्मों का भी जिक्र किया। 22 मई को रिलीज होगी फिल्म Chand Mera Dil 22 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म का रनटाइम लगभग 2 घंटे 15 मिनट 36 सेकेंड बताया गया है। एडवांस बुकिंग 18 मई से शुरू हो चुकी है। ट्रेलर ने बटोरी थी तारीफ फिल्म का ट्रेलर 11 मई को रिलीज हुआ था, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिल्म में Ananya Panday और Lakshya Lalwani की केमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया। ट्रेलर के कुछ डायलॉग्स भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें: “प्यार तो बहुत है, लेकिन इज्जत उससे ज्यादा जरूरी है।” और “लेजेंड्री लव स्टोरीज की एंडिंग ही तो ट्रैजिक होती है।” जैसी लाइनें शामिल हैं। ‘सैयारा’ जैसी फीलिंग की चर्चा ट्रेलर देखने के बाद कई यूजर्स ने फिल्म की तुलना रोमांटिक ड्रामा फिल्मों से की थी। कुछ लोगों का कहना था कि फिल्म में इमोशनल लव स्टोरी के साथ ट्रेजडी और मैच्योर रिलेशनशिप की झलक देखने को मिल रही है। करण जौहर की प्रोडक्शन टीम से जुड़ी फिल्म फिल्म का निर्देशन Vivek Soni ने किया है, जबकि इसे Karan Johar समेत कई निर्माताओं ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में: अनन्या पांडे लक्ष्य लालवानी आस्था सिंह प्रथम राठौड़ एल्विस जोस मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म का अनुमानित बजट करीब 90 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।  

surbhi मई 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0