Crude Oil Price

Petrol and diesel price board displaying stable fuel rates across major Indian cities on 22 May 2026.
Petrol Diesel Price Today 22 May 2026: दिल्ली से पटना तक स्थिर रहे पेट्रोल-डीजल के दाम, कुछ शहरों में मामूली बदलाव

देशभर में 22 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के बावजूद तेल कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे प्रमुख शहरों में फ्यूल रेट स्थिर बने हुए हैं, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के कुछ शहरों में हल्की बढ़ोतरी और गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितता के बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि आज आम लोगों की जेब पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। महानगरों में पेट्रोल के ताजा दाम देश की राजधानी New Delhi में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रही। वहीं Mumbai में पेट्रोल 107.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। Kolkata और Chennai में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोल के प्रमुख रेट शहर आज का रेट (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 98.45 +0.05 नोएडा 98.49 -0.42 पटना 109.89 +0.02 भागलपुर 110.69 +0.20 दरभंगा 110.33 +0.31 गया 110.98 +0.49 मुजफ्फरपुर 109.99 -0.51 रांची 102.13 +0.41 जमशेदपुर 102.26 +0.33 नई दिल्ली 98.64 स्थिर मुंबई 107.55 -0.04 कोलकाता 109.66 -0.04 चेन्नई 104.51 -0.06 बेंगलुरु 107.12 स्थिर डीजल के दाम भी लगभग स्थिर डीजल की कीमतों में भी आज ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। New Delhi और Mumbai में डीजल के दाम स्थिर रहे, जबकि बिहार और झारखंड के कुछ शहरों में हल्का उतार-चढ़ाव देखा गया। पटना, गया और मुजफ्फरपुर में डीजल सस्ता हुआ है, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली है। वहीं रांची और दरभंगा में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। डीजल के प्रमुख रेट शहर आज का रेट (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 91.78 +0.05 नोएडा 92.11 -0.10 पटना 95.58 -0.33 भागलपुर 96.53 +0.06 दरभंगा 96.32 +0.29 गया 96.39 -0.09 मुजफ्फरपुर 96.34 -0.14 रांची 97.04 +0.34 जमशेदपुर 97.13 +0.26 नई दिल्ली 91.58 स्थिर मुंबई 94.08 स्थिर कोलकाता 96.07 स्थिर चेन्नई 96.13 -0.08 गुरुग्राम 91.81 -0.20 भोपाल 95.91 +0.21 तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी करती हैं। राज्यों में लगने वाले वैट और स्थानीय टैक्स की वजह से अलग-अलग शहरों में कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Stock Market
Stock Market: डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96.18 पर पहुंचा,कच्चा तेल भी 2% बढ़कर 110 डॉलर के पार

मुंबई, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच आज सोमवार 18 मई को भारतीय रुपए में रिकॉर्ड गिरावट है। डॉलर के मुकाबले रुपया 20 पैसे कमजोर होकर 96.18 पर पहुंच गया। कच्चा तेल भी 2% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। मिडिल ईस्ट के तनाव का असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। सेंसेक्स 550 अंक (0.78%) गिरकर 74,700 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी 200 अंक (0.78%) नीचे है, ये 23,450 के करीब आ गया है। सरकारी बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली है।

Anjali Kumari मई 18, 2026 0
Indian rupee falls to record low against US dollar amid rising crude oil prices and global tensions.
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले ₹96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया

Indian Rupee सोमवार, 18 मई को भारी दबाव में नजर आया और शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर ₹96.25 प्रति डॉलर तक फिसल गया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सिर्फ करेंसी मार्केट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखने को मिली। कैसे टूटा रुपया? विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक: रुपया सुबह ₹96.19 प्रति डॉलर पर खुला बाजार खुलते ही बिकवाली बढ़ी कुछ ही समय में यह 44 पैसे टूटकर ₹96.25 पर पहुंच गया इससे पहले शुक्रवार को रुपया ₹95.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन सोमवार को वह रिकॉर्ड भी टूट गया। रुपये पर दबाव बढ़ाने वाली 3 बड़ी वजहें 1. कच्चा तेल 111 डॉलर के पार Brent Crude की कीमतें बढ़कर 111.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ जाता है। 2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती United States Dollar लगातार मजबूत बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 99.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। डॉलर मजबूत होने का मतलब है कि उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ना। 3. वैश्विक तनाव और बाजार में डर Middle East में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं, जिससे डॉलर की मांग और बढ़ जाती है। शेयर बाजार में भी भारी गिरावट रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकेतों का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखा। BSE SENSEX शुरुआती कारोबार में 833 अंक से ज्यादा टूटा 74,404.79 के स्तर तक फिसला NIFTY 50 234 अंक गिरकर 23,401.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। क्या कोई राहत भी है? एक राहत की बात यह रही कि हाल के दिनों में लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को कुछ खरीदारी की थी। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने 1,329 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह राहत फिलहाल काफी नहीं दिख रही। आगे क्या? विशेषज्ञों के मुताबिक अगर: कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं अमेरिका-ईरान तनाव गहराता है डॉलर मजबूत बना रहता है तो भारतीय रुपया और दबाव में आ सकता है। इसका असर महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
RBI Governor Sanjay Malhotra warns fuel prices may rise amid ongoing Middle East oil crisis
मध्य पूर्व संकट जारी रहा तो बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, RBI गवर्नर की चेतावनी

वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका RBI गवर्नर ने कहा कि अभी तक सरकार ने खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती रही तो कीमतों का बोझ आम जनता पर डाला जा सकता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट जारी रहने पर कीमतें बढ़ना लगभग तय है। भारत पर तेल संकट का सीधा असर मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश खाद्य तेल और उर्वरक के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहता है। रुपये में गिरावट से बढ़ी चिंता इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। सरकार की नीति और कदम सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव रहने पर स्थिति बदल सकती है। प्रधानमंत्री ने भी ईंधन की खपत कम करने और बचत पर जोर देने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके। वैश्विक हालात और भारत की चुनौती RBI गवर्नर ने स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार अब तक वित्तीय अनुशासन की नीति पर चल रही है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले समय में महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।  

surbhi मई 14, 2026 0
Traders monitor falling stock market as crude oil prices surge amid US-Iran geopolitical tensions
शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, आज SBI-Titan समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर

कमजोर संकेतों के साथ खुल सकता है बाजार BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को दबाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल बाजारों में कमजोरी, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गिफ्ट निफ्टी करीब 102 अंकों की गिरावट के साथ 24,283 के आसपास कारोबार करता दिखा, जिससे घरेलू बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की टेंशन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने दुनियाभर के बाजारों को प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया सैन्य घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कच्चा तेल 100 डॉलर के पार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और लागत दोनों बढ़ सकती हैं। सोने और डॉलर में भी तेजी अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। सोने की कीमतों में तेजी देखी गई है, जबकि डॉलर इंडेक्स भी मजबूत बना हुआ है। ग्लोबल बाजारों का क्या रहा हाल? अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। टेक शेयरों में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव का असर वॉल स्ट्रीट पर देखने को मिला। Dow Jones Industrial Average में 0.63% की गिरावट S&P 500 0.38% नीचे बंद NASDAQ Composite 0.13% टूटा एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। आज आएंगे इन बड़ी कंपनियों के नतीजे शुक्रवार को कई दिग्गज कंपनियां अपने चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी करेंगी। बाजार की नजर खासतौर पर इन कंपनियों पर रहेगी: State Bank of India (SBI) Titan Company Hyundai Motor India Swiggy MCX India Urban Company इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन BSE India कंपनी का चौथी तिमाही का मुनाफा सालाना आधार पर 61% से ज्यादा बढ़ा है, जिसके बाद शेयर चर्चा में रह सकता है। Lenskart मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी में बड़ी ब्लॉक डील हो सकती है। इससे शेयर बाजार में हलचल बढ़ सकती है। Cochin Shipyard कंपनी की सहयोगी इकाई को नया बड़ा ऑर्डर मिला है, जिससे निवेशकों की नजर इस शेयर पर बनी रहेगी। Britannia Industries एफएमसीजी कंपनी ने मजबूत तिमाही नतीजे पेश किए हैं। मुनाफे में 21% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। PNC Infratech कंपनी को लखनऊ विकास प्राधिकरण से बड़ा EPC प्रोजेक्ट मिला है, जिससे शेयर में तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को किन बातों पर रखनी होगी नजर? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार आज का कारोबार काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। निवेशकों को अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी होगी।  

surbhi मई 8, 2026 0
Investors tracking falling Sensex and Nifty amid crude oil surge and global market tensions
तेल संकट से कांपा शेयर बाजार, सेंसेक्स 550 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला

ग्लोबल तनाव का भारतीय बाजार पर बड़ा असर BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते बाजार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 553 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 100 अंकों से ज्यादा फिसल गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,400 और निफ्टी 24,213 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली आज के कारोबार में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HDFC Bank, ICICI Bank और Reliance Industries जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार की गिरावट की बड़ी वजह बन रही है। हालांकि आईटी और फार्मा सेक्टर में कुछ खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई, रुपये और शेयर बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशकों में घबराहट बढ़ी हुई है। बाजार को अब किस बात का इंतजार? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, तो भारतीय बाजार और रुपये को राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और रिटेल निवेशक अभी भी बाजार में सक्रिय हैं, जिसकी वजह से मिडकैप और पावर सेक्टर के कुछ शेयर मजबूती दिखा रहे हैं।  

surbhi मई 8, 2026 0
Brent crude oil prices surge above $120 amid Trump Iran sanctions and Hormuz tensions
ट्रंप की सख्ती से कच्चे तेल में लगी आग, ब्रेंट क्रूड $120 के पार, वैश्विक बाजार में हड़कंप

वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है और ब्रेंट क्रूड ऑयल $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस अचानक बढ़ोतरी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का कड़ा रुख बताया जा रहा है, जिन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और समुद्री नाकाबंदी फिलहाल जारी रहेगी। ईरान पर सख्ती और बढ़ता तनाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों पर परमाणु समझौते को स्वीकार नहीं करता, तब तक Strait of Hormuz पर नौसैनिक दबाव और नाकाबंदी जारी रहेगी। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यह रणनीति सैन्य कार्रवाई की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनता है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है तो आगे सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है दुनिया के लिए अहम? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। जब इस मार्ग में बाधा आती है, तो सप्लाई चेन प्रभावित होती है और तेल की उपलब्धता घट जाती है। परिणामस्वरूप कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है, जिसका असर सीधे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे के बादल इस स्थिति को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी दी है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Jeffrey Sachs ने कहा है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बाजार फिलहाल यह उम्मीद लगाए बैठा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन यदि सप्लाई बाधित रही तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। आम जनता पर सीधा असर तेल कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे परिवहन, खाद्य वस्तुएं और अन्य जरूरी सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो महंगाई एक बार फिर आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है।  

surbhi अप्रैल 30, 2026 0
Oil barrels with rising price chart symbolizing crude surge and India’s resilient economic growth outlook
$130 तक पहुंचे कच्चे तेल के बावजूद मजबूत रहेगी भारत की अर्थव्यवस्था: S&P का भरोसा

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि अगर इस वित्त वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती है, तब भी भारत की आर्थिक रफ्तार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में भी भारत करीब 6.3 प्रतिशत की दर से विकास करता रहेगा, जो वैश्विक स्तर पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत वृद्धि दर मानी जाएगी। भारत की साख पर नहीं पड़ेगा असर S&P Global Ratings ने साफ किया है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत की ‘सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग’ पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी मुख्य वजह भारत का मजबूत वित्तीय प्रबंधन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता बताई गई है। सामान्य हालात में 7.1% ग्रोथ का अनुमान एजेंसी के डायरेक्टर (सॉवरेन रेटिंग्स) YeeFarn Phua के अनुसार, यदि कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, तेल की कीमत 130 डॉलर तक पहुंचने की स्थिति में भी भारत की ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर है। क्या हैं संभावित जोखिम? S&P ने यह भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा एक बड़ा जोखिम बन सकती है। यदि ईंधन और उर्वरक जैसे उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ईरान संकट से बढ़ी तेल की कीमतें पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। एक समय पर कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसकी एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत और गैस का करीब एक-तिहाई हिस्सा संभालता है। हालांकि, फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है, जिसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक संकट में भी मजबूत भारत रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। मजबूत नीतिगत ढांचा और वित्तीय अनुशासन इसे अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में बनाए हुए हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
US Navy deployment in Strait of Hormuz amid rising tensions between America and Iran affecting global oil supply
पाकिस्तान वार्ता फेल: ट्रंप का ईरान पर बड़ा वार, हॉर्मुज में घेराबंदी से तेल संकट गहराया

पाकिस्तान में हुई लंबी शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटता है या नहीं, और दावा किया कि तेहरान की स्थिति इस समय बेहद कमजोर है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी कदम अमेरिकी नौसेना ने Strait of Hormuz में घेराबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाले उन जहाजों को रोका जाएगा, जो ईरान के बंदरगाहों से जुड़े हैं। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है फैसले के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई न्यूक्लियर हथियार पर अमेरिका की दो टूक ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। अमेरिका की प्रमुख मांगें हैं: यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पूरी तरह बंद हो क्षेत्रीय हथियारबंद समूहों को समर्थन रोका जाए सूत्रों के मुताबिक, वार्ता के दौरान ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने के संकेत दिए थे, जिससे गतिरोध और गहरा गया। NATO पर भी ट्रंप का हमला अमेरिकी राष्ट्रपति ने NATO पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा: अमेरिका संगठन पर भारी खर्च करता है लेकिन संकट के समय सहयोग नहीं मिलता NATO की भूमिका की फिर से समीक्षा की जाएगी ईरान की चेतावनी ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज क्षेत्र में कोई सैन्य हस्तक्षेप हुआ, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। स्थिति को संभालने के लिए Pakistan, European Union, Oman और Russia कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच Israel की लेबनान में सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर लंबे समय तक पड़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Bank Nifty stock market chart showing sharp decline amid crude oil price surge above 100 dollars
Bank Nifty में बड़ी गिरावट: कच्चे तेल की कीमत $100 पार, PSU बैंक शेयरों में भारी बिकवाली – आगे क्या संकेत?

मुंबई: हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही, जहां बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में तेज गिरावट देखने को मिली। Bank Nifty इंडेक्स सोमवार को करीब 2.5% तक टूट गया, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के पार जाना रहा। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई (Inflation) के बढ़ने और सख्त मौद्रिक नीति (Tighter Monetary Policy) की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिससे बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ गया। PSU बैंकों में सबसे ज्यादा गिरावट इस गिरावट की अगुवाई पब्लिक सेक्टर बैंकों ने की, जहां कई शेयरों में 4% तक की कमजोरी दर्ज की गई। प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे: Union Bank of India Bank of India Bank of Maharashtra Punjab National Bank इन बैंकों पर दबाव का कारण यह है कि बढ़ती महंगाई से ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जिससे लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी प्रभावित होती है। प्राइवेट बैंकों में भी कमजोरी सिर्फ PSU बैंक ही नहीं, बल्कि प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। State Bank of India करीब 2.5% तक गिरा HDFC Bank में 2.47% तक कमजोरी IndusInd Bank लगभग 1.85% नीचे Axis Bank और Kotak Mahindra Bank भी दबाव में रहे इंडेक्स का प्रदर्शन कैसा रहा? Bank Nifty इंट्राडे में 1,556 अंक टूटकर 54,356 के स्तर तक पहुंच गया Nifty PSU Bank इंडेक्स 2.24% गिरा Nifty Private Bank इंडेक्स 1.37% नीचे रहा यह दिन बैंकिंग सेक्टर के लिए सबसे कमजोर सत्रों में से एक रहा। गिरावट की असली वजह क्या है? कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है क्योंकि भारत आयात पर निर्भर है। इसके प्रमुख प्रभाव: महंगाई बढ़ने का खतरा RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लोन डिमांड और बैंकिंग ग्रोथ पर असर इन्हीं कारणों से निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी। आगे क्या रह सकता है रुख? (एक्सपर्ट व्यू) Religare Broking के रिसर्च हेड अजीत मिश्रा के अनुसार: Bank Nifty पहले करीब 8.5% की तेजी दिखा चुका है अब यह 56,700 (200 DEMA) के स्तर को फिर टेस्ट कर सकता है इसके बाद 57,800 तक की रिकवरी संभव है सपोर्ट लेवल: पहला सपोर्ट: 54,300 अगला मजबूत सपोर्ट: 53,000 निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो? मौजूदा हालात में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: जल्दबाजी में खरीदारी से बचें प्रमुख सपोर्ट लेवल्स पर नजर रखें लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में चुनिंदा शेयरों पर नजर रख सकते हैं कच्चे तेल की कीमत और RBI के रुख पर खास ध्यान दें 

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
RBI Governor announcing GDP growth cut amid global tensions impacting India’s economic outlook
RBI ने घटाया GDP ग्रोथ अनुमान, वैश्विक तनाव का असर

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया है। यह कटौती ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और खासकर होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधा से आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। क्या कहा RBI गवर्नर ने? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार: भारत मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रहा है लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष से ग्रोथ पर असर पड़ सकता है होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से तेल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ा है उन्होंने माना कि इन परिस्थितियों का असर भारत की आर्थिक रफ्तार पर पड़ना तय है। FY27 के लिए नया GDP अनुमान RBI ने अलग-अलग तिमाहियों के लिए ग्रोथ अनुमान में बदलाव किया है: Q1: 6.9% ➝ 6.8% Q2: 7.0% ➝ 6.7% Q3: 7.0% (स्थिर) Q4: 7.2% पूरे FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान करीब 6.9% रखा गया है। क्यों बढ़ा जोखिम? 1. तेल-गैस की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। यहां बाधा आने से: क्रूड ऑयल महंगा हो सकता है भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ता है 2. महंगाई का खतरा फिलहाल कोर महंगाई कंट्रोल में है लेकिन खाद्य कीमतों और मौसम का असर बढ़ सकता है 3. ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता ईरान-अमेरिका तनाव से वित्तीय बाजार प्रभावित निवेशक सुरक्षित विकल्प (Safe Haven) की ओर बढ़े डॉलर मजबूत, अन्य मुद्राओं पर दबाव फिर भी भारत की स्थिति क्यों बेहतर? RBI के मुताबिक: भारत की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में अच्छा मोमेंटम वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता बेहतर

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Iran Israel US war destruction with missiles, damaged buildings and rising global economic losses
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध: 4,000 से ज्यादा मौतें, 54.88 लाख करोड़ का नुकसान - किसे सबसे ज्यादा चोट?

मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने अब एक बड़े वैश्विक संकट का रूप ले लिया है। Iran, Israel और United States के बीच चल रहे संघर्ष ने न सिर्फ हजारों जिंदगियां छीन ली हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गहरी चोट पहुंचाई है। एक महीने से अधिक समय से जारी इस युद्ध के चलते दुनिया की GDP को अब तक लगभग 54.88 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। ईरान सबसे ज्यादा प्रभावित इस युद्ध की सबसे भारी कीमत ईरान चुका रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में 7,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 25,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। लगातार मिसाइल और हवाई हमलों ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर-स्कूल, अस्पताल और ऐतिहासिक इमारतों-को बुरी तरह तबाह कर दिया है। अनुमान है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो ईरान की GDP में 10% से ज्यादा गिरावट आ सकती है, जो उसे कई दशक पीछे धकेल सकती है। अमेरिका पर भी भारी आर्थिक बोझ हालांकि युद्ध का मुख्य मैदान ईरान है, लेकिन United States भी आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अब तक इस युद्ध में अमेरिका को करीब 7.49 लाख करोड़ रुपये (80.4 बिलियन डॉलर) का नुकसान हो चुका है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह नुकसान 210 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार में बाधा इसका मुख्य कारण है। इजरायल में भी भारी तबाही Israel में भी इस युद्ध का गंभीर असर देखने को मिला है। यहां 33,000 से ज्यादा मौतें और हजारों घायल सामने आए हैं। आर्थिक रूप से भी इजरायल को करीब 15 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जबकि लगातार हमलों से देश की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों और वैश्विक असर इस युद्ध की आंच सिर्फ तीन देशों तक सीमित नहीं रही। Qatar, Kuwait, Saudi Arabia और United Arab Emirates जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। तेल उत्पादन में गिरावट, LNG सुविधाओं पर खतरा और पानी की आपूर्ति तक प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। वहीं Lebanon और Iraq जैसे देशों को भी जान-माल और आर्थिक दोनों स्तर पर भारी नुकसान झेलना पड़ा है। लेबनान में 1,400 से ज्यादा मौतें और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। भारत और दुनिया पर असर इस युद्ध का सीधा असर भले भारत पर न दिखे, लेकिन आर्थिक झटका हर आम आदमी तक पहुंच रहा है। कच्चे तेल की कीमत $69 प्रति बैरल से बढ़कर $125 तक पहुंच गई है, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो रहे हैं। शेयर बाजार में गिरावट से भारतीय निवेशकों के करीब 37 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन टूट चुकी है, जिससे 1973 के तेल संकट जैसी स्थिति बन गई है। कई देशों में ऊर्जा आपातकाल, स्कूल बंद और ईंधन निर्यात पर रोक जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। महंगाई का डोमिनो इफेक्ट तेल की कमी का असर अब हर सेक्टर पर दिख रहा है। ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उर्वरकों की कमी से खाद्य पदार्थ महंगे होने की आशंका है, जबकि प्लास्टिक, टेक्सटाइल और केमिकल इंडस्ट्री की लागत में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Rising crude oil prices chart with RBI building symbol showing inflation and repo rate concerns in India
तेल 100 डॉलर पार, महंगाई का खतरा बढ़ा - अब क्या करेगी RBI?

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे महंगाई के फिर से बेकाबू होने की आशंका गहराती जा रही है। ऐसे माहौल में अब सबकी निगाहें Reserve Bank of India की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर टिकी हैं, जो आज से शुरू हो चुकी है और इसके फैसले 8 अप्रैल को सामने आएंगे। क्यों बढ़ी चिंता? पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, खासकर Iran से जुड़े तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है। तेल महंगा → ट्रांसपोर्ट महंगा ट्रांसपोर्ट महंगा → हर चीज महंगी नतीजा → महंगाई में तेजी रुपये पर भी दबाव तेल की कीमतों में तेजी के साथ-साथ रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। हाल ही में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के पार चली गई थी। कमजोर रुपया आयात को और महंगा बनाता है, जिससे महंगाई पर दोहरा असर पड़ता है। क्या बढ़ेगा Repo Rate? MPC बैठक का सबसे अहम मुद्दा होगा Repo Rate, जिसे Reserve Bank of India तय करता है। Repo Rate बढ़ा → लोन महंगा EMI बढ़ेगी → आम आदमी पर बोझ हालांकि, ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI फिलहाल Repo Rate को 5.25% पर स्थिर रख सकता है, क्योंकि: वैश्विक अनिश्चितता बहुत ज्यादा है महंगाई के ताजा आंकड़ों का इंतजार जरूरी है जल्दबाजी में फैसला अर्थव्यवस्था को झटका दे सकता है विशेषज्ञ क्या कहते हैं? अर्थशास्त्रियों के अनुसार: RBI इस बार “वेट एंड वॉच” रणनीति अपना सकता है अपनी पॉलिसी टिप्पणी में काफी सतर्क रहेगा महंगाई और ग्रोथ दोनों के बीच संतुलन बनाना चुनौती होगा इसके अलावा, संभावित सुपर एल नीनो का असर भी खाद्य महंगाई को बढ़ा सकता है। कब से नहीं बदला Repo Rate? RBI ने पिछले साल फरवरी से अब तक Repo Rate में कुल 1.25% की कटौती की है, लेकिन: अगस्त अक्टूबर फरवरी 2026 की बैठकों में इसे स्थिर रखा गया था। अब सवाल यह है कि क्या इस बार भी RBI यथास्थिति बनाए रखेगा या कोई बड़ा फैसला लेगा।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Stock market screen showing sharp Sensex fall and rupee weakening against dollar amid global tension
ग्लोबल तनाव से बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1500+ अंक लुढ़का, रुपया पहली बार 93.80 के पार

ईरान-अमेरिका तनाव का असर, शेयर बाजार में भारी बिकवाली; निवेशक डॉलर की ओर भागे हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही BSE Sensex करीब 1,556 अंक टूटकर 72,977 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी लगभग 480 अंक फिसलकर 22,634 के स्तर पर आ गया। इसी के साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में आ गई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर पहली बार 93.80 के पार पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। निवेशकों में घबराहट, सेफ एसेट की ओर रुख बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, मौजूदा हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि निवेशक जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों में लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी मनी मार्केट फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट 8 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, जो इस “सेफ्टी फ्लाइट” को दर्शाता है। 48 घंटे के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने से हालात और बिगड़ गए हैं। इस अल्टीमेटम में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी गई है, जो फिलहाल अपनी सामान्य क्षमता के बेहद कम स्तर पर चल रहा है। ऐसा नहीं होने पर ईरान के पावर ग्रिड पर कार्रवाई की बात कही गई है। कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव वैश्विक तनाव का असर कच्चे तेल के बाजार पर भी दिखा। Brent Crude करीब 112 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude Oil लगभग 98.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। सप्लाई बाधित होने की आशंका और मांग घटने के डर से कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तनाव के बीच सोना क्यों गिरा? आमतौर पर वैश्विक संकट के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार उलटा रुझान देखने को मिला। सोने की कीमत करीब 2% गिर गई। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक मार्जिन कॉल के दबाव में अपने गोल्ड निवेश बेचकर शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली कमजोर वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखा। जापान का Nikkei 225 4% से ज्यादा गिरा हांगकांग का Hang Seng Index 3% से ज्यादा टूटा दक्षिण कोरिया का KOSPI 6% से अधिक लुढ़का इसके अलावा सिंगापुर और ताइवान के बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार भी दबाव में शुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए थे। Dow Jones Industrial Average करीब 1% गिरा S&P 500 में 1.5% की गिरावट Nasdaq Composite लगभग 2% टूटा

surbhi मार्च 23, 2026 0
Petrol pump display amid crude oil surge above $112 per barrel
Petrol Diesel Price Today: कच्चा तेल $112 के पार, कई राज्यों में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जानें आपके शहर का ताजा रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखने लगा है। सोमवार, 23 मार्च 2026 को देश के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव देखने को मिला। जहां कुछ राज्यों में तेल महंगा हुआ है, वहीं कुछ जगहों पर मामूली राहत भी मिली है। ग्लोबल मार्केट में Brent Crude Oil $112 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि WTI Crude Oil भी $100 के करीब है। मिडिल ईस्ट तनाव और डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी के बाद तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ा है। मेट्रो शहरों में क्या है आज का रेट? देश की तेल कंपनियों ने सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए। प्रमुख महानगरों में कीमतें इस प्रकार हैं: दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67 प्रति लीटर मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03 प्रति लीटर कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02 प्रति लीटर चेन्नई: पेट्रोल ₹100.84 | डीजल ₹92.39 प्रति लीटर इन शहरों में आज कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इन राज्यों में बढ़े दाम कई राज्यों में आज ईंधन महंगा हो गया है: बिहार: पेट्रोल ₹106.95, डीजल ₹93.14 उत्तर प्रदेश: पेट्रोल ₹95.00, डीजल ₹88.72 झारखंड: पेट्रोल ₹99.16, डीजल ₹93.89 गोवा: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹88.71 केरल: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹96.02 तमिलनाडु: पेट्रोल ₹102.34, डीजल ₹93.89 इसके अलावा हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन राज्यों में मिली राहत कुछ राज्यों में तेल की कीमतों में गिरावट भी देखी गई: गुजरात: पेट्रोल ₹95.07, डीजल ₹90.77 कर्नाटक: पेट्रोल ₹102.41, डीजल ₹90.48 मध्य प्रदेश: पेट्रोल ₹106.18, डीजल ₹91.56 महाराष्ट्र: पेट्रोल ₹105.43, डीजल ₹91.94 ओडिशा: पेट्रोल ₹102.23, डीजल ₹93.79 उत्तराखंड: पेट्रोल ₹94.51, डीजल ₹89.44 पश्चिम बंगाल: पेट्रोल ₹105.80, डीजल ₹92.37 क्यों बदलते हैं रोज दाम? पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए VAT शामिल हैं। यही वजह है कि हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं। घर बैठे ऐसे चेक करें रेट आप अपने शहर का ताजा रेट SMS के जरिए भी जान सकते हैं: Indian Oil: RSP <City Code> भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर

surbhi मार्च 23, 2026 0
Fuel pump showing petrol prices as global crude oil rises amid Middle East tensions
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद राहत, सरकार का संकेत-फिलहाल नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मौजूदा हालात में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने की कोई योजना नहीं है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 99.75 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार गई। हालांकि शाम तक कीमतें कुछ नरम पड़ीं और यह लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थीं। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।   महंगाई पर फिलहाल बड़ा असर नहीं लोकसभा में इस मुद्दे पर बोलते हुए वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत की महंगाई दर पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि Reserve Bank of India की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें आधार स्तर से 10 प्रतिशत बढ़ती हैं और उसका पूरा असर घरेलू बाजार में आता है, तो महंगाई दर में केवल लगभग 30 बेसिस पॉइंट यानी करीब 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम अवधि में महंगाई पर असर कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें रुपये की विनिमय दर, वैश्विक मांग-आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति और समग्र आर्थिक परिस्थितियां शामिल हैं।   सरकारी तेल कंपनियों की मजबूत स्थिति सरकारी अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरी कंपनियां-Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited-वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में हैं। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में इन तीनों कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ 192 प्रतिशत बढ़कर 57,810 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 19,768 करोड़ रुपये था। मजबूत वित्तीय स्थिति के कारण ये कंपनियां फिलहाल खुदरा स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और नहीं बढ़ता तथा ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले नहीं होते, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसके बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है।   भारत में पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतें जून 2022 में जब ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर से ऊपर पहुंच गया था, तब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर थी। इसके बाद मार्च 2024 में कीमतों में 2 रुपये की कटौती की गई, जिससे पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। 30 अक्टूबर 2024 को मार्केटिंग कॉस्ट एडजस्टमेंट के कारण केवल 5 पैसे की बढ़ोतरी हुई और वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है।   टैक्स नीति से मिलती है राहत विशेषज्ञों के अनुसार सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए समय-समय पर उत्पाद शुल्क में बदलाव करती रहती है। 8 अप्रैल 2025 को सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिससे सालाना लगभग 34,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। वर्तमान में पेट्रोल पर SAED 13 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर है। इससे पहले नवंबर 2021 और मई 2022 में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर पेट्रोल की कीमत में 13 रुपये और डीजल में 16 रुपये प्रति लीटर की राहत दी थी।   वैश्विक ऊर्जा बाजार पर युद्ध का असर ऊर्जा विशेषज्ञ Jim Burkhard (S&P Global Energy) का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है और Strait of Hormuz के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट बन सकता है। हाल के दिनों में सऊदी अरब और कतर के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों से भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। फिलहाल सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े और देश में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Stock market screen showing airline and paint stocks falling after crude oil prices surge above $115
कच्चे तेल का बड़ा झटका: इंडिगो, स्पाइसजेट और एशियन पेंट्स के शेयर 8% तक गिरे, बाजार में बढ़ी घबराहट

  115 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, क्रूड-संवेदनशील कंपनियों पर दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को झटका दिया है। सोमवार को 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचे तेल के दाम के कारण उन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई जो सीधे तौर पर क्रूड ऑयल या उससे जुड़े कच्चे माल पर निर्भर हैं। सबसे ज्यादा असर एयरलाइन, टायर और पेंट कंपनियों पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में InterGlobe Aviation (इंडिगो), SpiceJet और Asian Paints के शेयरों में 8% तक की गिरावट दर्ज की गई।   एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से विमानन कंपनियों के लिए ईंधन लागत काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से एयरलाइन सेक्टर में तेज बिकवाली देखने को मिली। इंडिगो का शेयर 7% से ज्यादा टूट गया स्पाइसजेट के शेयर में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई एयरलाइन कंपनियों के कुल खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का हिस्सा काफी बड़ा होता है, इसलिए तेल महंगा होते ही निवेशक इन कंपनियों से दूरी बनाने लगते हैं।   टायर और पेंट कंपनियों पर भी असर कच्चे तेल से बनने वाले रसायनों पर निर्भर कंपनियों में भी दबाव देखा गया। JK Tyre का शेयर करीब 6.5% गिरा Apollo Tyres लगभग 4% नीचे आ गया पेंट सेक्टर में भी बिकवाली रही। Asian Paints में 4% से ज्यादा गिरावट Berger Paints, Kansai Nerolac और Akzo Nobel India के शेयर भी 3–4% तक फिसल गए।   शेयर बाजार में भारी गिरावट सुबह करीब 9:25 बजे तक बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex लगभग 2,401 अंक यानी करीब 3.04% गिरकर 76,517 पर पहुंच गया Nifty 50 करीब 727 अंक टूटकर 23,723 के स्तर पर आ गया NSE पर बाजार की स्थिति भी बेहद कमजोर रही। करीब 2,600 से अधिक शेयर गिरावट में रहे, जबकि सिर्फ लगभग 537 शेयर बढ़त में कारोबार कर रहे थे।   मध्य पूर्व तनाव से बढ़ा तेल संकट तेल की कीमतों में यह तेज उछाल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद आया है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ गई।   विशेषज्ञों ने बताया बड़ा आर्थिक झटका Geojit Investments के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार कच्चे तेल में आई यह तेजी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। उनका कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है।   बाजार में बढ़ी घबराहट इस बीच बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX भी 20% से ज्यादा उछल गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो ईंधन और पेट्रोकेमिकल पर निर्भर सेक्टरों के शेयरों में दबाव जारी रह सकता है और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रिम्स हॉस्टल में एमबीबीएस छात्र की मौत, फंदे से लटका शव बरामद

Anjali Kumari मई 16, 2026 0